भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा/से 'सांविधिक आरक्षित आवश्यकताओं' (Statutory Reserve Requirements) का उद्देश्य है/हैं?
- केंद्रीय बैंक को बैंकों द्वारा सृजित किए जा सकने वाले अग्रिमों की मात्रा को नियंत्रित करने में सक्षम बनाना
- बैंकों में लोगों की जमा राशि को सुरक्षित और तरल बनाना
- वाणिज्यिक बैंकों को अत्यधिक लाभ कमाने से रोकना
- बैंकों को अपनी दिन-प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त तिजोरी नकदी रखने के लिए बाध्य करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: सांविधिक आरक्षित आवश्यकताएं (CRR और SLR) RBI द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रमुख मात्रात्मक उपकरण हैं जो वाणिज्यिक बैंकों द्वारा बनाए जा सकने वाले ऋण-सृजन क्षमता और अग्रिमों को नियंत्रित करते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति नियंत्रित होती है।
❌ कथन 2 – गलत: हालांकि आरक्षित निधि तरलता प्रबंधन में सहायता करती है, जमा राशि की सुरक्षा DICGC (जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम) और बेसल मानदंडों (पूंजी पर्याप्तता आवश्यकताओं) द्वारा सुनिश्चित की जाती है, न कि सांविधिक आरक्षित निधि के प्राथमिक उद्देश्य के रूप में।
❌ कथन 3 – गलत: सांविधिक आरक्षित निधि मौद्रिक नीति के उपकरण हैं जो तरलता और ऋण को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं, न कि बैंक मुनाफे को नियंत्रित या रोकने के लिए।
❌ कथन 4 – गलत: CRR को RBI के पास रखा जाता है और SLR को तरल परिसंपत्तियों जैसे सरकारी प्रतिभूतियों में रखा जाता है; बैंक दैनिक परिचालन आवश्यकताओं के लिए अलग से तिजोरी नकदी रखते हैं, जो सांविधिक आवश्यकताओं से अलग है।
Question 13 of 17 मौद्रिक नीति
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यदि किसी अर्थव्यवस्था में ब्याज दर घटाई जाती है, तो यह
बैंक दर में वृद्धि सामान्यतः यह संकेत देती है कि: