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मुद्रा, बैंकिंग एवं वित्तीय प्रणाली Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: मुद्रा, बैंकिंग एवं वित्तीय प्रणाली
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मुद्रा की पूर्ति समान रहने पर जब मुद्रा की मांग में वृद्धि होती है, तो होगा:
Detailed Explanation:
जब मुद्रा की पूर्ति स्थिर रहती है और मुद्रा की मांग बढ़ती है, तो अर्थव्यवस्था में उपलब्ध धन के लिए अधिक प्रतिस्पर्धा होती है।
तरलता पसंद सिद्धांत के अनुसार, बैंक और ऋणदाता मुद्रा बाजार को संतुलित करने के लिए ब्याज दर बढ़ाते हैं—उच्च दर मुद्रा की मांग को कम करती है और अधिक जमा आकर्षित करती है, जिससे आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बहाल होता है।
भारत में बैंकों द्वारा प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) में निम्नलिखित को ऋण देना शामिल है:
Detailed Explanation:
प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के तहत बैंकों को समायोजित शुद्ध बैंक ऋण (ANBC) का 40% निर्धारित क्षेत्रों को आवंटित करना अनिवार्य है, जिसमें कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ, सूक्ष्म और लघु उद्यम, कमजोर वर्ग (निम्न आय समूह, शिक्षा के लिए छात्र, आवास), निर्यात ऋण, नवीकरणीय ऊर्जा और सामाजिक बुनियादी ढाँचा शामिल हैं।
तीनों विकल्प – कृषि, सूक्ष्म और लघु उद्यम, और कमजोर वर्ग – स्पष्ट रूप से RBI के PSL दिशानिर्देशों में शामिल हैं, इसलिए विकल्प 4 सही उत्तर है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बैंकों के बैंक के रूप में कार्य करता है। इसका तात्पर्य निम्नलिखित में से किससे होगा?
- अन्य बैंक अपनी जमाराशियाँ RBI के पास रखते हैं।
- RBI आवश्यकता के समय वाणिज्यिक बैंकों को धनराशि उधार देता है।
- RBI वाणिज्यिक बैंकों को मौद्रिक मामलों पर सलाह देता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: वाणिज्यिक बैंक अपनी जमाराशियाँ RBI के पास नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) आवश्यकताओं के रूप में रखते हैं, जिससे RBI बैंकिंग प्रणाली के भंडार का संरक्षक बनता है।
✅ कथन 2 – सही: RBI अंतिम उपाय के ऋणदाता के रूप में कार्य करता है, वित्तीय संकट के दौरान रेपो परिचालन और सीमांत स्थायी सुविधा जैसे तंत्रों के माध्यम से वाणिज्यिक बैंकों को आपातकालीन तरलता प्रदान करता है।
✅ कथन 3 – सही: RBI वाणिज्यिक बैंकों पर पर्यवेक्षी और नियामक कार्य करता है, उन्हें मौद्रिक नीति कार्यान्वयन, ऋण प्रबंधन और विवेकपूर्ण मानदंडों पर सलाह देकर बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता बनाए रखता है।
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निम्नलिखित में से कौन से उपाय अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि का परिणाम देंगे?
- केंद्रीय बैंक द्वारा जनता से सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद
- जनता द्वारा वाणिज्यिक बैंकों में मुद्रा की जमा
- सरकार द्वारा केंद्रीय बैंक से उधार लेना
- केंद्रीय बैंक द्वारा जनता को सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: जब केंद्रीय बैंक जनता से सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदता है, तो वह नव निर्मित मुद्रा से भुगतान करता है, सीधे तरलता का इंजेक्शन लगाता है और मुद्रा आपूर्ति बढ़ाता है।
❌ कथन 2 – गलत: जब जनता वाणिज्यिक बैंकों में मुद्रा जमा करती है, तो कोई नई मुद्रा नहीं बनती; यह केवल हाथ में नकदी से बैंक जमा में स्थानांतरित होती है, कुल मुद्रा आपूर्ति अपरिवर्तित रहती है।
✅ कथन 3 – सही: जब सरकार केंद्रीय बैंक से उधार लेती है, तो केंद्रीय बैंक नई मुद्रा बनाता है (घाटे का मुद्रीकरण), सीधे अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति का विस्तार करता है।
❌ कथन 4 – गलत: जब केंद्रीय बैंक जनता को सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचता है, तो वह प्रतिभूतियों के बदले प्रचलन से मुद्रा को अवशोषित करता है, जिससे मुद्रा आपूर्ति कम हो जाती है।
लीड बैंक योजना का मूल उद्देश्य यह है कि:
Detailed Explanation:
लीड बैंक योजना की शुरुआत भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा दिसंबर 1969 में ग्रामीण क्षेत्रों में समन्वित बैंकिंग और ऋण सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए की गई थी।
इस योजना के तहत, प्रत्येक जिले को एक लीड बैंक सौंपा जाता है जो गहन बैंकिंग विकास को बढ़ावा देने, ऋण प्रवाह का समन्वय करने और कम बैंकिंग वाले क्षेत्रों में शाखा विस्तार सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाता है।
मुख्य उद्देश्य जिला-स्तरीय केंद्रित विकास है, न कि बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा या केवल कार्यालय खोलना।