UPSC CSE Prelims
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
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निम्नलिखित में से किस देश की अपनी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — जापान
जापान QZSS (क्वासी-ज़ेनिथ सैटेलाइट सिस्टम) संचालित करता है, जो एक क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है जिसे एशिया-ओशिनिया क्षेत्र, विशेष रूप से जापान में GPS कवरेज और सटीकता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। दिए गए विकल्पों में से केवल जापान की अपनी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विश्वव्यापी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणालियाँ
- वैश्विक नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS): चार परिचालन प्रणालियाँ - GPS (अमेरिका), GLONASS (रूस), Galileo (यूरोपीय संघ), और BeiDou (चीन) - विश्वव्यापी कवरेज प्रदान करती हैं।
- क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम: NavIC/IRNSS (भारत) भारतीय उपमहाद्वीप और आसपास के 1,500 किमी तक के क्षेत्र को कवर करता है; QZSS (जापान) एशिया-ओशिनिया क्षेत्र में GPS संकेतों को बढ़ाता है।
- GPS (अमेरिका): 24+ उपग्रहों के साथ पहला परिचालन GNSS, 1978 में लॉन्च किया गया, 1995 से पूर्ण रूप से परिचालन।
- GLONASS (रूस): सोवियत युग के दौरान विकसित, 24+ उपग्रहों के साथ 2011 से पूर्ण रूप से परिचालन।
- Galileo (EU): उच्च-सटीक स्थिति निर्धारण प्रदान करने वाली यूरोपीय प्रणाली, 2016 में परिचालन हुई।
- BeiDou (चीन): 35 उपग्रहों के साथ 2020 में वैश्विक कवरेज पूर्ण किया, क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करता है।
- NavIC (भारत): 7 उपग्रहों के साथ भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली, 2018 से परिचालन, 20 मीटर से बेहतर स्थिति सटीकता प्रदान करती है।
- QZSS (जापान): क्वासी-ज़ेनिथ कक्षाओं में उपग्रहों के साथ क्वासी-ज़ेनिथ सैटेलाइट सिस्टम, जापान और पड़ोसी क्षेत्रों में उन्नत स्थिति निर्धारण प्रदान करता है।
'एरियल मेटाजेनोमिक्स' निम्नलिखित में से किस स्थिति को सर्वोत्तम रूप से संदर्भित करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — एक आवास में हवा से DNA नमूनों को एक साथ एकत्र करना
एरियल मेटाजेनोमिक्स एक अत्याधुनिक तकनीक है जिसमें विशेष फिल्टर या वैक्यूम सिस्टम का उपयोग करके सीधे हवा से पर्यावरणीय DNA (e-DNA) एकत्र किया जाता है। जीव लगातार श्वास, त्वचा कोशिकाओं, फर, पराग, बीजाणुओं और अन्य जैविक कणों के माध्यम से अपने आसपास के वातावरण में आनुवंशिक सामग्री छोड़ते हैं, जिसे हवा के नमूनों से एकत्र किया जा सकता है। यह विधि शोधकर्ताओं को भौतिक घुसपैठ के बिना एक विशिष्ट आवास में एक साथ कई प्रजातियों—जिनमें जानवर, पौधे, कवक और सूक्ष्मजीव शामिल हैं—की पहचान और निगरानी करने की अनुमति देती है, जो इसे जैव विविधता मूल्यांकन के लिए एक शक्तिशाली गैर-आक्रामक उपकरण बनाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मेटाजेनोमिक्स और पर्यावरणीय DNA
- मेटाजेनोमिक्स: प्रयोगशाला संस्कृतियों में व्यक्तिगत जीवों को अलग किए बिना पर्यावरणीय नमूनों (मिट्टी, पानी, हवा) से सीधे प्राप्त आनुवंशिक सामग्री का अध्ययन।
- पर्यावरणीय DNA (e-DNA): जीवों द्वारा त्वचा कोशिकाओं, बलगम, मल, युग्मकों और अन्य जैविक सामग्रियों के माध्यम से अपने पर्यावरण में छोड़ी गई आनुवंशिक सामग्री।
- एरियल मेटाजेनोमिक्स: विशेष रूप से किसी आवास में जैव विविधता का आकलन करने के लिए वायु निस्पंदन प्रणालियों का उपयोग करके वायुजनित कणों से DNA एकत्र करने पर केंद्रित है।
- अनुप्रयोग: गैर-आक्रामक जैव विविधता निगरानी, दुर्लभ या मायावी प्रजातियों का पता लगाना, रोग वाहकों को ट्रैक करना, और पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य का अध्ययन करना।
- लाभ: कई टैक्सा का एक साथ पता लगाना, दृश्य अवलोकन या भौतिक कैप्चर की आवश्यकता नहीं, बड़े पैमाने के सर्वेक्षणों के लिए समय और लागत कुशल।
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
अंतरिक्ष में वस्तुएँ: विवरण
- सेफीड्स: अंतरिक्ष में धूल और गैस के विशाल बादल
- नीहारिकाएँ: तारे जो आवधिक रूप से चमकते और मंद होते हैं
- पल्सर: न्यूट्रॉन तारे जो तब बनते हैं जब विशाल तारों का ईंधन समाप्त हो जाता है और वे संकुचित हो जाते हैं
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल एक
यह प्रश्न खगोलीय पिंडों और उनकी सही परिभाषाओं के ज्ञान की परीक्षा करता है। दिए गए तीन युग्मों में से केवल तीसरा युग्म (पल्सर) सही सुमेलित है, जबकि पहले दो युग्मों के विवरण उलट दिए गए हैं।
❌ युग्म 1 – गलत: सेफीड्स धूल और गैस के विशाल बादल नहीं हैं; वे वास्तव में स्पंदनशील तारे हैं जो आवधिक रूप से चमकते और मंद होते हैं, जो उन्हें खगोल विज्ञान में महत्वपूर्ण दूरी मापक बनाता है।
❌ युग्म 2 – गलत: नीहारिकाएँ वे तारे नहीं हैं जो आवधिक रूप से चमकते और मंद होते हैं; वे अंतरिक्ष में धूल और गैस के विशाल बादल हैं जहाँ तारे जन्म लेते हैं या मृत तारों के अवशेष होते हैं।
✅ युग्म 3 – सही: पल्सर वास्तव में तेजी से घूमने वाले न्यूट्रॉन तारे हैं जो तब बनते हैं जब विशाल तारों का परमाणु ईंधन समाप्त हो जाता है और वे सुपरनोवा विस्फोटों में संकुचित हो जाते हैं, नियमित विकिरण स्पंद उत्सर्जित करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: खगोलीय पिंड
| खगोलीय पिंड | सही विवरण | प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|---|
| सेफीड्स | स्पंदनशील परिवर्ती तारे जो आवधिक रूप से चमकते और मंद होते हैं | आवर्त-चमक संबंध उन्हें ब्रह्मांडीय दूरी मापने के लिए 'मानक मोमबत्तियाँ' बनाता है; डेल्टा सेफी के नाम पर |
| नीहारिकाएँ | अंतरिक्ष में धूल और गैस के विशाल बादल | उत्सर्जन, परावर्तन, या अंधकार नीहारिकाएँ हो सकती हैं; तारा निर्माण स्थल (तारकीय नर्सरी) या मरते तारों के अवशेष |
| पल्सर | तेजी से घूमने वाले न्यूट्रॉन तारे | विद्युत चुम्बकीय विकिरण के नियमित स्पंद उत्सर्जित करते हैं; सुपरनोवा विस्फोटों से बनते हैं; अत्यधिक घने (एक चम्मच का वजन अरबों टन) |
| क्वासर | अत्यंत चमकीले सक्रिय गैलेक्टिक नाभिक | अति विशाल ब्लैक होल द्वारा संचालित; ब्रह्मांड में सबसे दूर और चमकीली वस्तुओं में से |
| सुपरनोवा | विशाल तारों की विस्फोटक मृत्यु | संक्षिप्त रूप से पूरी आकाशगंगाओं को पार कर सकते हैं; भारी तत्व बनाते और फैलाते हैं; न्यूट्रॉन तारे या ब्लैक होल छोड़ते हैं |
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'माइक्रोसैटेलाइट DNA' का उपयोग निम्नलिखित में से किस मामले में किया जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — विभिन्न जीव-जंतु प्रजातियों के बीच विकासवादी संबंधों का अध्ययन करना
माइक्रोसैटेलाइट DNA, जिसे शॉर्ट टेंडम रिपीट्स (STRs) के रूप में भी जाना जाता है, अत्यधिक बहुरूपी DNA अनुक्रम हैं जो व्यक्तियों और जनसंख्याओं के बीच महत्वपूर्ण भिन्नता दर्शाते हैं। ये भिन्नताएं इन्हें विभिन्न जीव-जंतु प्रजातियों के बीच विकासवादी संबंधों, जनसंख्या आनुवंशिकी और फाइलोजेनेटिक अध्ययनों के लिए उत्कृष्ट आनुवंशिक मार्कर बनाती हैं। उच्च उत्परिवर्तन दर और दोहराए गए अनुक्रमों की संख्या में परिवर्तनशीलता शोधकर्ताओं को आनुवंशिक वंशावली का पता लगाने और विकासवादी विचलन पैटर्न को समझने में सक्षम बनाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: माइक्रोसैटेलाइट DNA (शॉर्ट टेंडम रिपीट्स)
- परिभाषा: माइक्रोसैटेलाइट छोटे दोहराए जाने वाले DNA अनुक्रम (सामान्यतः 1-6 बेस पेयर) हैं जो संपूर्ण जीनोम में टेंडम सरणियों में दोहराए जाते हैं।
- बहुरूपता: व्यक्तियों के बीच दोहराव की संख्या में अत्यधिक परिवर्तनशील, जो उन्हें पहचान और विविधता अध्ययन के लिए उपयोगी आनुवंशिक मार्कर बनाता है।
- विकासवादी जीवविज्ञान में अनुप्रयोग: आनुवंशिक विविधता, जनसंख्या संरचना, जीन प्रवाह और प्रजातियों के बीच फाइलोजेनेटिक संबंधों का अध्ययन करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- अन्य अनुप्रयोग: DNA फिंगरप्रिंटिंग, पितृत्व परीक्षण, फोरेंसिक विश्लेषण, संरक्षण आनुवंशिकी और प्रजनन कार्यक्रम।
- लाभ: सह-प्रभावी वंशानुक्रम, उच्च उत्परिवर्तन दर, जीनोम में प्रचुरता और PCR का उपयोग करके प्रवर्धन में आसानी।
- संबंधित नहीं: स्टेम सेल रूपांतरण, क्लोनल प्रवर्धन तकनीकों या प्रत्यक्ष दवा प्रभावकारिता परीक्षण से (इनमें विभिन्न आणविक तकनीकें शामिल हैं)।
'वोलबाकिया विधि' कभी-कभी निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में चर्चा में आती है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — मच्छरों द्वारा फैलाई जाने वाली वायरल बीमारियों को नियंत्रित करना
वोलबाकिया विधि एक जैविक हस्तक्षेप है जो मच्छर जनित वायरल रोगों, विशेष रूप से डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और पीत ज्वर को नियंत्रित करने के लिए वोलबाकिया बैक्टीरिया का उपयोग करती है। जब वोलबाकिया को एडीज एजिप्टी मच्छरों में प्रवेश कराया जाता है (जो स्वाभाविक रूप से इसे नहीं रखते), तो यह मच्छर की इन वायरस को मनुष्यों में संचारित करने की क्षमता को कम कर देता है। इसके अतिरिक्त, वोलबाकिया मातृ संचरण के माध्यम से मच्छर आबादी में फैलता है, जिससे यह एक आत्मनिर्भर और पर्यावरण-अनुकूल रोग नियंत्रण दृष्टिकोण बन जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वेक्टर नियंत्रण के लिए वोलबाकिया विधि
- वोलबाकिया क्या है: एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला जीवाणु जो लगभग 60% कीट प्रजातियों में पाया जाता है, लेकिन एडीज एजिप्टी या एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों में नहीं।
- तंत्र: जब एडीज मच्छरों में प्रवेश कराया जाता है, तो वोलबाकिया वायरस प्रतिकृति में हस्तक्षेप करता है, डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और पीत ज्वर वायरस के लिए वेक्टर क्षमता को कम करता है।
- आत्मनिर्भर: वोलबाकिया मातृ रूप से विरासत में मिलता है; संक्रमित मादाएं अपनी संतानों को बैक्टीरिया पारित करती हैं, जिससे मच्छर आबादी में इसकी निरंतरता सुनिश्चित होती है।
- साइटोप्लाज्मिक असंगति: असंक्रमित मादाओं द्वारा वोलबाकिया-संक्रमित नरों के साथ संभोग से उत्पादित अंडे नहीं फूटते, जिससे वोलबाकिया-वाहक मच्छरों को प्रजनन लाभ मिलता है।
- कार्यान्वयन: ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, ब्राजील, कोलंबिया और भारत (पुणे और दिल्ली में पायलट परियोजनाएं) जैसे देशों में विश्व मच्छर कार्यक्रम द्वारा सफलतापूर्वक तैनात किया गया।
- लाभ: मनुष्यों और पर्यावरण के लिए सुरक्षित, लंबी अवधि में लागत प्रभावी, आनुवंशिक संशोधन शामिल नहीं, और एक साथ कई बीमारियों को लक्षित करता है।
निम्नलिखित क्रियाओं पर विचार कीजिए:
- कार दुर्घटना/टक्कर का पता लगाना जिसके परिणामस्वरूप एयरबैग लगभग तात्क्षणिक रूप से तैनात हो जाते हैं
- लैपटॉप के जमीन की ओर आकस्मिक मुक्त गिरावट का पता लगाना जिसके परिणामस्वरूप हार्ड ड्राइव तुरंत बंद हो जाती है
- स्मार्टफोन के झुकाव का पता लगाना जिसके परिणामस्वरूप पोर्ट्रेट और लैंडस्केप मोड के बीच डिस्प्ले घूमता है
उपर्युक्त में से कितनी क्रियाओं में एक्सेलेरोमीटर के कार्य की आवश्यकता होती है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सभी तीन
एक्सेलेरोमीटर एक सेंसर है जो त्वरण बलों को मापता है, जिसमें वेग में परिवर्तन, अचानक गतिविधियाँ और अभिविन्यास (झुकाव) में परिवर्तन शामिल हैं। प्रश्न में वर्णित सभी तीन क्रियाओं के लिए त्वरण परिवर्तन या अभिविन्यास परिवर्तन का पता लगाने की आवश्यकता होती है, जिससे एक्सेलेरोमीटर उनके कार्य के लिए आवश्यक हो जाता है।
✅ क्रिया 1 – कार दुर्घटना का पता लगाना: एक्सेलेरोमीटर टक्कर के दौरान तेजी से मंदन का पता लगाते हैं, जो क्रैश डिटेक्शन सिस्टम के माध्यम से तत्काल एयरबैग तैनाती को ट्रिगर करता है।
✅ क्रिया 2 – लैपटॉप मुक्त गिरावट का पता लगाना: एक्सेलेरोमीटर मुक्त गिरावट के विशिष्ट त्वरण पैटर्न (शून्य के निकट प्रतिरोध) को महसूस करते हैं, प्रभाव पर क्षति को रोकने के लिए तुरंत हार्ड ड्राइव हेड्स को पार्क कर देते हैं।
✅ क्रिया 3 – स्मार्टफोन झुकाव का पता लगाना: एक्सेलेरोमीटर गुरुत्वाकर्षण के सापेक्ष डिवाइस के अभिविन्यास की निरंतर निगरानी करते हैं, जो पोर्ट्रेट और लैंडस्केप मोड के बीच स्वचालित डिस्प्ले रोटेशन को सक्षम बनाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: एक्सेलेरोमीटर अनुप्रयोग
- परिभाषा: एक्सेलेरोमीटर एक इलेक्ट्रो-मैकेनिकल उपकरण है जो त्वरण बलों को मापता है, दोनों स्थिर (गुरुत्वाकर्षण) और गतिशील (गति, कंपन, झटका)।
- कार्य सिद्धांत: यह त्वरण के अधीन होने पर स्प्रिंग्स पर एक प्रूफ मास के विस्थापन को मापकर वेग, झुकाव, घूर्णन और कंपन में परिवर्तन का पता लगाता है।
- प्रकार: MEMS (माइक्रो-इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम) एक्सेलेरोमीटर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं क्योंकि इनका आकार छोटा और ऊर्जा खपत कम होती है।
- ऑटोमोटिव सुरक्षा: एयरबैग तैनाती प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण (ESC), एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), और रोलओवर डिटेक्शन में उपयोग किया जाता है।
- उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन (स्क्रीन रोटेशन, कदम गिनना, जेस्चर पहचान), लैपटॉप (हार्ड ड्राइव सुरक्षा), गेमिंग कंट्रोलर (मोशन सेंसिंग), और फिटनेस ट्रैकर।
- औद्योगिक अनुप्रयोग: मशीनरी में कंपन निगरानी, भवनों और पुलों की संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी, और भूकंपीय गतिविधि का पता लगाना।
- विमानन और नेविगेशन: जड़त्वीय नेविगेशन सिस्टम, उड़ान स्थिरीकरण, और ड्रोन अभिविन्यास नियंत्रण।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कुछ मशरूम में औषधीय गुण होते हैं।
- कुछ मशरूम में मनोसक्रिय गुण होते हैं।
- कुछ मशरूम में कीटनाशक गुण होते हैं।
- कुछ मशरूम में जैव-दीप्तिमान गुण होते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — सभी चार
मशरूम के गुणों के बारे में सभी चार कथन वैज्ञानिक रूप से सटीक हैं। मशरूम जैविक गुणों की उल्लेखनीय विविधता प्रदर्शित करते हैं जो औषधीय, मनोरंजक, कृषि और पारिस्थितिक संदर्भों में प्रलेखित और उपयोग किए गए हैं।
✅ कथन 1 – सही: औषधीय मशरूम जैसे रेशी (Ganoderma lucidum), टर्की टेल (Trametes versicolor), और लायन्स मेन (Hericium erinaceus) में जैव-सक्रिय यौगिक होते हैं जिनमें प्रतिरक्षा-मॉड्यूलेटिंग, सूजन-रोधी और न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण होते हैं।
✅ कथन 2 – सही: साइलोसाइबिन युक्त मनोसक्रिय मशरूम (जैसे Psilocybe cubensis) मतिभ्रमी प्रभाव उत्पन्न करते हैं और अवसाद और PTSD के उपचार में चिकित्सीय अनुप्रयोगों के लिए शोधित किए जा रहे हैं।
✅ कथन 3 – सही: कीटनाशक मशरूम जैसे Metarhizium anisopliae और Beauveria bassiana कीड़ों के लिए विषैले यौगिक उत्पन्न करते हैं और कृषि में जैविक कीट नियंत्रण एजेंट के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
✅ कथन 4 – सही: जैव-दीप्तिमान मशरूम जैसे Mycena chlorophos और Panellus stipticus ल्यूसिफेरिन और ल्यूसिफेरेज से जुड़ी एंजाइमेटिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से प्रकाश उत्पन्न करते हैं, जो अंधेरे वन वातावरण में प्राकृतिक चमक पैदा करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मशरूम के गुण
| गुण | उदाहरण | प्रमुख अनुप्रयोग/यौगिक |
|---|---|---|
| औषधीय | रेशी, टर्की टेल, लायन्स मेन, कॉर्डिसेप्स, चागा | पॉलीसैकेराइड्स (बीटा-ग्लूकन्स), ट्राइटरपीन; प्रतिरक्षा समर्थन, संज्ञानात्मक वृद्धि, कैंसर-रोधी शोध |
| मनोसक्रिय | Psilocybe cubensis, Psilocybe semilanceata | साइलोसाइबिन और साइलोसिन; मतिभ्रमी प्रभाव, मानसिक स्वास्थ्य विकारों के लिए चिकित्सीय शोध |
| कीटनाशक | Metarhizium anisopliae, Beauveria bassiana | एंटोमोपैथोजेनिक कवक; जैविक कीट नियंत्रण, कीट-विषैले यौगिक उत्पन्न करता है |
| जैव-दीप्तिमान | Mycena chlorophos, Panellus stipticus, Omphalotus olearius | ल्यूसिफेरिन-ल्यूसिफेरेज प्रणाली; हरी रोशनी उत्पन्न करता है, बीजाणु प्रसार में पारिस्थितिक भूमिका |
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बैलिस्टिक मिसाइलें अपनी पूरी उड़ान के दौरान सबसोनिक गति पर जेट-संचालित होती हैं, जबकि क्रूज मिसाइलें केवल उड़ान के प्रारंभिक चरण में रॉकेट-संचालित होती हैं।
- अग्नि-V एक मध्यम दूरी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जबकि ब्रह्मोस एक ठोस-ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — न तो 1 और न ही 2
दोनों कथन बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों की मौलिक विशेषताओं के साथ-साथ अग्नि-V और ब्रह्मोस मिसाइलों के विशिष्ट प्रकारों का गलत वर्णन करते हैं। आइए प्रत्येक कथन का मूल्यांकन करें:
❌ कथन 1 – गलत: कथन प्रणोदन विशेषताओं को गलत तरीके से अदल-बदल करता है। बैलिस्टिक मिसाइलें रॉकेट-संचालित होती हैं और सुपरसोनिक या हाइपरसोनिक गति से ऊंचे, चापाकार बैलिस्टिक पथ का अनुसरण करती हैं, जबकि क्रूज मिसाइलें जेट-संचालित होती हैं, वायुगतिकीय उत्थापन का उपयोग करते हुए कम ऊंचाई पर उड़ती हैं, और सबसोनिक, सुपरसोनिक, या हाइपरसोनिक हो सकती हैं।
❌ कथन 2 – गलत: कथन दोनों मिसाइलों का गलत वर्णन करता है। अग्नि-V एक ठोस-ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है जिसकी सीमा 5,000 किमी से अधिक है, जो महाद्वीपों में लक्ष्यों पर वार करने में सक्षम है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (बैलिस्टिक मिसाइल नहीं) है जिसे भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है, जिसकी सीमा लगभग 450-600 किमी है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बैलिस्टिक बनाम क्रूज मिसाइलें
| विशेषता | बैलिस्टिक मिसाइलें | क्रूज मिसाइलें |
|---|---|---|
| प्रणोदन | रॉकेट-संचालित (प्रारंभिक बूस्ट चरण) | जेट-संचालित (वायु-श्वसन इंजन) पूरी उड़ान के दौरान |
| प्रक्षेपवक्र | ऊंचा, चापाकार बैलिस्टिक पथ; वायुमंडल से बाहर निकलता है और पुनः प्रवेश करता है | कम-ऊंचाई, वायुगतिकीय उत्थापन का उपयोग करते हुए भूभाग की आकृति का अनुसरण करता है |
| गति | सुपरसोनिक से हाइपरसोनिक | सबसोनिक, सुपरसोनिक, या हाइपरसोनिक |
| मार्गदर्शन | केवल बूस्ट चरण के दौरान निर्देशित; मुक्त-पतन अवरोहण | पूरी उड़ान के दौरान निरंतर निर्देशित |
| सीमा श्रेणियां | लघु (< 1,000 किमी), मध्यम (1,000-3,000 किमी), मध्यवर्ती (3,000-5,500 किमी), अंतरमहाद्वीपीय (> 5,500 किमी) | सामरिक (< 300 किमी), मध्यम (300-1,000 किमी), लंबी दूरी (> 1,000 किमी) |
| भारतीय उदाहरण | अग्नि श्रृंखला (I, II, III, IV, V), पृथ्वी श्रृंखला | ब्रह्मोस, निर्भय |
- अग्नि-V: भारत की सबसे लंबी दूरी की ICBM जिसकी मारक सीमा 5,000 किमी से अधिक है, तीन-चरणीय ठोस-ईंधन वाली मिसाइल, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम, भारत की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाती है।
- ब्रह्मोस: विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (मैक 2.8-3), भारत (DRDO) और रूस (NPO Mashinostroyeniya) के बीच संयुक्त उद्यम, भूमि, समुद्र, वायु और पनडुब्बी से प्रक्षेपित प्रकारों में उपलब्ध।
- पता लगाने में कठिनाई: क्रूज मिसाइलें कम उड़ती हैं और रडार द्वारा पता लगाना कठिन होता है, जबकि बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण के बाद अनुमानित प्रक्षेपवक्र होते हैं लेकिन उच्च गति के कारण रोकना कठिन होता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कार्बन फाइबर का उपयोग ऑटोमोबाइल और विमानों में प्रयुक्त घटकों के निर्माण में किया जाता है।
- कार्बन फाइबर का एक बार उपयोग करने के बाद पुनर्चक्रण नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
कार्बन फाइबर का व्यापक रूप से ऑटोमोबाइल और विमानों के घटकों के निर्माण में उपयोग किया जाता है क्योंकि इनमें असाधारण शक्ति-से-वजन अनुपात, उच्च कठोरता और हल्के गुण होते हैं। कथन 1 सही है क्योंकि ये सामग्री एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव उद्योगों में वजन कम करने और ईंधन दक्षता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
✅ कथन 1 – सही: कार्बन फाइबर वास्तव में अपने बेहतर यांत्रिक गुणों और हल्के स्वभाव के कारण ऑटोमोबाइल और विमान घटकों के निर्माण में उपयोग किए जाते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: कार्बन फाइबर का पुनर्चक्रण विभिन्न विधियों जैसे यांत्रिक पुनर्चक्रण (छोटे टुकड़ों में तोड़ना), रासायनिक पुनर्चक्रण (फाइबर निकालने के लिए राल को घोलना), और थर्मल पुनर्चक्रण (फाइबर पुनर्प्राप्त करने के लिए पायरोलिसिस) के माध्यम से किया जा सकता है, हालांकि प्रौद्योगिकी अभी विकसित हो रही है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: कार्बन फाइबर
- संरचना: कार्बन परमाणुओं की लंबी श्रृंखलाओं से युक्त कार्बनिक बहुलकों से बने होते हैं जो क्रिस्टलीय संरेखण में बंधे होते हैं
- मुख्य गुण: उच्च तन्य शक्ति, कम वजन (स्टील से 5 गुना हल्का), उच्च कठोरता, उच्च तापमान सहनशीलता, कम थर्मल विस्तार, और रासायनिक प्रतिरोध
- निर्माण प्रक्रिया: पॉलीएक्रिलोनिट्राइल (PAN), पिच, या रेयान जैसी पूर्ववर्ती सामग्रियों के उच्च तापमान (1000-3000°C) पर कार्बनीकरण के माध्यम से उत्पादित
- अनुप्रयोग: एयरोस्पेस (विमान फ्यूजलेज, पंख), ऑटोमोटिव (रेसिंग कारें, लक्जरी वाहन), खेल उपकरण (साइकिल, टेनिस रैकेट), पवन टरबाइन ब्लेड, और चिकित्सा उपकरण
- पुनर्चक्रण विधियाँ: यांत्रिक (काटना/पीसना), थर्मल/पायरोलिसिस (450-700°C पर राल को जलाना), रासायनिक (विलायकों का उपयोग करके सॉल्वोलिसिस), और इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रियाएं
- चुनौतियाँ: उच्च उत्पादन लागत, भंगुरता (कम प्रभाव प्रतिरोध), धातुओं की तुलना में पुनर्चक्रण में कठिनाई, और विशेष निर्माण आवश्यकताएं
- पर्यावरणीय विचार: जबकि पहले पुनर्चक्रण क्षमता सीमित थी, आधुनिक पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियाँ कार्बन फाइबर कंपोजिट को अधिक टिकाऊ बना रही हैं और पुनर्प्राप्त फाइबर मूल गुणों का 90-95% बनाए रखते हैं
समाचारों में कभी-कभी उल्लिखित "गुच्छी" के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह एक कवक है।
2. यह कुछ हिमालयी वन क्षेत्रों में उगता है।
3. इसकी व्यावसायिक खेती पूर्वोत्तर भारत की हिमालयी तलहटी में की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2
गुच्छी (Morchella esculenta) एक दुर्लभ और महंगी जंगली मशरूम कवक है जो हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है। यह बर्फ पिघलने के बाद शीतोष्ण वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगती है लेकिन व्यावसायिक रूप से इसकी खेती नहीं की जा सकती, इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।
✅ कथन 1 – सही: गुच्छी एक कवक (Morchella esculenta) है जो Morchellaceae परिवार से संबंधित है, जो अपनी विशिष्ट मधुकोश जैसी आकृति और बहुमूल्य पाक मूल्य के लिए जाना जाता है।
✅ कथन 2 – सही: यह हिमालय के शीतोष्ण कोणधारी वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगता है, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फ पिघलने के बाद वसंत ऋतु में।
❌ कथन 3 – गलत: गुच्छी मशरूम को पेड़ों के साथ इसके जटिल माइकोराइजल संबंधों के कारण व्यावसायिक रूप से उगाया नहीं जा सकता; ये जंगली संग्रहित होते हैं, और ये मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालय में उगते हैं, न कि पूर्वोत्तर की तलहटी में।
📝 संक्षिप्त नोट्स: गुच्छी (मोरचेला मशरूम)
- वैज्ञानिक नाम: Morchella esculenta, Morchellaceae परिवार से संबंधित
- रूप-रंग: विशिष्ट मधुकोश या स्पंज जैसी टोपी संरचना, हल्के भूरे से गहरे भूरे रंग की
- आवास: पश्चिमी हिमालय (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) के शीतोष्ण कोणधारी वनों में 2,500-3,500 मीटर की ऊंचाई पर
- मौसम: वसंत ऋतु (मार्च-मई) में बर्फ पिघलने के बाद नम, छायादार वन तल में उगता है
- आर्थिक मूल्य: विश्व स्तर पर सबसे महंगे मशरूमों में से एक, ₹10,000-30,000 प्रति किलो तक मिलता है; प्रमुख निर्यात वस्तु
- खेती की स्थिति: पेड़ों की जड़ों के साथ जटिल सहजीवी संबंध के कारण व्यावसायिक रूप से खेती नहीं की जा सकती; केवल स्थानीय समुदायों द्वारा जंगली संग्रह
- पोषण मूल्य: प्रोटीन, विटामिन (विशेष रूप से विटामिन डी), खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध
- संरक्षण चिंता: अत्यधिक संग्रह से जंगली आबादी को खतरा; सतत संग्रह प्रथाओं की आवश्यकता
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बायोफिल्म मानव ऊतकों के भीतर चिकित्सा प्रत्यारोपणों पर बन सकती हैं।
- बायोफिल्म खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण सतहों पर बन सकती हैं।
- बायोफिल्म एंटीबायोटिक प्रतिरोध प्रदर्शित कर सकती हैं।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
बायोफिल्म के बारे में तीनों कथन सही हैं। बायोफिल्म स्व-उत्पादित सुरक्षात्मक मैट्रिक्स में संलग्न जटिल सूक्ष्मजीव समुदाय हैं जो चिकित्सा प्रत्यारोपण, खाद्य प्रसंस्करण उपकरण और जैविक ऊतकों सहित विभिन्न सतहों पर बन सकते हैं, तथा महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक प्रतिरोध प्रदर्शित करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: बायोफिल्म आसानी से कैथेटर, हृदय वाल्व और कृत्रिम जोड़ों जैसे चिकित्सा प्रत्यारोपणों पर मानव ऊतकों के भीतर बनती हैं, जिससे दीर्घकालिक संक्रमण होते हैं जिनका उपचार करना कठिन होता है।
✅ कथन 2 – सही: बायोफिल्म सामान्यतः खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण सतहों पर बनती हैं, खाद्य उत्पादों को दूषित करती हैं और खराब होने में योगदान देती हैं, जबकि मानक सफाई विधियों के प्रति प्रतिरोधी होती हैं।
✅ कथन 3 – सही: बायोफिल्म के भीतर जीवाणु प्लैंकटोनिक (मुक्त-तैरते) जीवाणुओं की तुलना में 10-1000 गुना अधिक एंटीबायोटिक प्रतिरोध प्रदर्शित करते हैं, जो सुरक्षात्मक मैट्रिक्स बाधा, परिवर्तित चयापचय अवस्थाओं और क्षैतिज जीन स्थानांतरण तंत्रों के कारण होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बायोफिल्म
- परिभाषा: बायोफिल्म स्व-उत्पादित बाह्यकोशिकीय बहुलक पदार्थ (EPS) मैट्रिक्स में संलग्न सूक्ष्मजीवों के संरचित समुदाय हैं, जो सतहों का पालन करते हैं।
- चिकित्सीय निहितार्थ: मनुष्यों में सभी सूक्ष्मजीव संक्रमणों के 65-80% के लिए जिम्मेदार; इंड्वेलिंग चिकित्सा उपकरणों, दांतों (डेंटल प्लाक) और दीर्घकालिक घावों पर बनते हैं।
- प्रतिरोध तंत्र: EPS मैट्रिक्स रोगाणुरोधी के लिए एक बाधा के रूप में कार्य करता है; बायोफिल्म में धीमी वृद्धि दर एंटीबायोटिक प्रभावकारिता को कम करती है; पर्सिस्टर कोशिकाएं उपचार से बच जाती हैं; जीन स्थानांतरण प्रतिरोध के प्रसार को बढ़ावा देता है।
- औद्योगिक प्रभाव: जल पाइप, जहाज की पतवार (बायोफाउलिंग), हीट एक्सचेंजर और खाद्य प्रसंस्करण उपकरण को दूषित करते हैं; आर्थिक नुकसान और दक्षता में कमी का कारण बनते हैं।
- खाद्य सुरक्षा: खाद्य उद्योग में बायोफिल्म लिस्टीरिया, साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे रोगजनकों को आश्रय देती हैं; मानक स्वच्छता प्रक्रियाओं के प्रति प्रतिरोधी हैं।
- नियंत्रण रणनीतियां: यांत्रिक हटाने, EPS के एंजाइमेटिक व्यवधान, क्वोरम सेंसिंग अवरोधक और संयोजन रोगाणुरोधी चिकित्सा शामिल हैं।
यदि एक बड़ा सौर तूफान (सौर-ज्वाला) पृथ्वी तक पहुँचता है, तो पृथ्वी पर निम्नलिखित में से कौन से संभावित प्रभाव हो सकते हैं?
- GPS और नेविगेशन सिस्टम विफल हो सकते हैं।
- भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में सुनामी आ सकती है।
- पावर ग्रिड क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
- पृथ्वी के अधिकांश भाग में तीव्र ध्रुवीय ज्योति (औरोरा) हो सकती है।
- ग्रह के अधिकांश भाग में वन अग्नि हो सकती है।
- उपग्रहों की कक्षाएँ विक्षुब्ध हो सकती हैं।
- ध्रुवीय क्षेत्रों के ऊपर उड़ने वाले विमानों का शॉर्टवेव रेडियो संचार बाधित हो सकता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1, 3, 4, 6 और 7
सौर तूफान (सौर ज्वालाएँ और कोरोनल मास इजेक्शन) आवेशित कण और विद्युत चुम्बकीय विकिरण छोड़ते हैं जो पृथ्वी के चुंबकमंडल और आयनमंडल के साथ अंतःक्रिया करते हैं, जिससे विभिन्न तकनीकी और वायुमंडलीय व्यवधान उत्पन्न होते हैं। सही प्रभावों में उपग्रह-आधारित नेविगेशन में व्यवधान, पावर ग्रिड क्षति, बढ़े हुए ध्रुवीय ज्योति प्रदर्शन, उपग्रह कक्षा परिवर्तन और रेडियो संचार में हस्तक्षेप शामिल हैं।
✅ कथन 1 – सही: सौर तूफान आयनमंडल को विक्षुब्ध करते हैं, जिससे GPS सिग्नल में देरी और नेविगेशन सिस्टम की विफलता होती है।
❌ कथन 2 – गलत: सुनामी पानी के नीचे भूकंपीय या ज्वालामुखीय गतिविधि से उत्पन्न होती है, न कि सौर तूफानों से जो विद्युत चुम्बकीय और कण वातावरण को प्रभावित करते हैं।
✅ कथन 3 – सही: सौर तूफानों से भू-चुंबकीय प्रेरित धाराएँ (GICs) ट्रांसफार्मरों को ओवरलोड कर सकती हैं और पावर ग्रिड को क्षतिग्रस्त कर सकती हैं, जिससे ब्लैकआउट होता है।
✅ कथन 4 – सही: बढ़ी हुई सौर पवन चुंबकमंडल में कणों को ऊर्जावान बनाती है, जिससे सामान्य से कम अक्षांशों पर दृश्यमान तीव्र ध्रुवीय ज्योति उत्पन्न होती है।
❌ कथन 5 – गलत: सौर तूफान सीधे व्यापक वन अग्नि का कारण नहीं बनते; वे विद्युत चुम्बकीय प्रणालियों को प्रभावित करते हैं, न कि इतने बड़े पैमाने पर प्रज्वलन स्रोतों को।
✅ कथन 6 – सही: सौर तूफानों के दौरान तापन से बढ़ी हुई वायुमंडलीय घर्षण उपग्रह कक्षाओं को बदल सकती है, विशेष रूप से निम्न पृथ्वी कक्षा में।
✅ कथन 7 – सही: आयनमंडलीय व्यवधान शॉर्टवेव (HF) रेडियो संचार को बाधित करते हैं, विशेष रूप से ध्रुवीय मार्गों को प्रभावित करते हैं जहाँ आयनमंडलीय प्रभाव सबसे मजबूत होते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सौर तूफान और पृथ्वी पर प्रभाव
- सौर तूफान के घटक: सौर ज्वालाएँ (विद्युत चुम्बकीय विकिरण) और कोरोनल मास इजेक्शन (CME - आवेशित कण) जो 1-3 दिनों में पृथ्वी तक पहुँचते हैं।
- चुंबकमंडल अंतःक्रिया: आवेशित कण पृथ्वी के चुंबकमंडल को संकुचित करते हैं, भू-चुंबकीय तूफान उत्पन्न करते हैं।
- आयनमंडलीय व्यवधान: सौर विकिरण आयनमंडल घनत्व को बदलता है, जो रेडियो तरंग संचरण और उपग्रह संचार को प्रभावित करता है।
- भू-चुंबकीय प्रेरित धाराएँ (GICs): चुंबकीय क्षेत्र के उतार-चढ़ाव से विद्युत लाइनों और पाइपलाइनों जैसे लंबे चालकों में धाराएँ उत्पन्न होती हैं।
- ध्रुवीय ज्योति निर्माण: आवेशित कण वायुमंडलीय गैसों (ऑक्सीजन, नाइट्रोजन) से टकराते हैं, जो आमतौर पर 60-70° अक्षांश पर प्रकाश प्रदर्शन उत्पन्न करते हैं, लेकिन बड़े तूफानों के दौरान कम अक्षांशों तक विस्तारित होते हैं।
- अंतरिक्ष मौसम निगरानी: NOAA के स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर जैसे संगठन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए चेतावनी जारी करने हेतु सौर गतिविधि की निगरानी करते हैं।
- ऐतिहासिक घटनाएँ: कैरिंगटन घटना (1859) ने व्यापक टेलीग्राफ विफलताएँ उत्पन्न कीं; क्यूबेक ब्लैकआउट (1989) ने 60 लाख लोगों को 9 घंटे के लिए प्रभावित किया।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन मीडिया में अक्सर चर्चित "फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम" के पीछे के विचार को सर्वोत्तम रूप से प्रतिबिंबित करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — एक मिसाइल को पृथ्वी के चारों ओर एक स्थिर कक्षा में रखा जाता है और पृथ्वी पर एक लक्ष्य के ऊपर कक्षा से बाहर आती है।
फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम (FOBS) एक परमाणु हथियार वितरण प्रणाली है जो पारंपरिक उच्च-चाप बैलिस्टिक पथ के बजाय एक निम्न पृथ्वी कक्षा प्रक्षेपवक्र में एक वारहेड लॉन्च करती है। मुख्य विशेषता यह है कि मिसाइल अपने लक्ष्य पर प्रहार करने के लिए कक्षा से बाहर आने से पहले केवल एक कक्षा का अंश पूरा करती है, जिससे पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए डिज़ाइन की गई पूर्व चेतावनी प्रणालियों द्वारा इसका पता लगाना कठिन हो जाता है। यह कक्षीय दृष्टिकोण हथियार को अप्रत्याशित दिशाओं से आने की अनुमति देता है और चेतावनी समय को महत्वपूर्ण रूप से कम करता है।
❌ विकल्प 1 – गलत: FOBS क्षुद्रग्रह रक्षा के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है बल्कि कक्षीय प्रक्षेपवक्र के माध्यम से पृथ्वी-आधारित लक्ष्यों तक हथियार पहुंचाने के लिए है।
❌ विकल्प 2 – गलत: यह ग्रहीय अवतरण युद्धाभ्यासों का वर्णन करता है, FOBS का नहीं जो विशेष रूप से पृथ्वी की परिक्रमा करने वाली हथियार वितरण प्रणालियों के बारे में है।
✅ विकल्प 3 – सही: FOBS को एक मिसाइल के रूप में सटीक रूप से वर्णित करता है जो कक्षा में रखी जाती है और एक स्थलीय लक्ष्य के ऊपर कक्षा से बाहर आती है।
❌ विकल्प 4 – गलत: यह एक धूमकेतु मिलन मिशन का वर्णन करता है, FOBS हथियार प्रणालियों से असंबंधित है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम (FOBS)
- अवधारणा: शीत युद्ध युग के दौरान विकसित एक हथियार वितरण प्रणाली, मुख्य रूप से 1960 के दशक में सोवियत संघ द्वारा
- प्रक्षेपवक्र: उच्च बैलिस्टिक चाप के बजाय एक निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) पथ का उपयोग करता है, कक्षा से बाहर आने से पहले केवल एक कक्षा का अंश पूरा करता है
- रणनीतिक लाभ: अप्रत्याशित दिशाओं (दक्षिणी ध्रुव के ऊपर सहित) से लक्ष्यों तक पहुंच सकता है, पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपवक्रों की ओर उन्मुख रडार प्रणालियों को बायपास करता है
- पता लगाने की चुनौती: उच्च-चाप बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन की गई पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ हमले के अनुक्रम में देर तक निम्न-कक्षा FOBS की पहचान करने में विफल हो सकती हैं
- कम चेतावनी समय: कक्षीय पथ और कम ऊंचाई का अर्थ है अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) की तुलना में पता लगाने और प्रभाव के बीच कम समय
- आधुनिक संदर्भ: हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि कुछ राष्ट्रों द्वारा FOBS प्रौद्योगिकी में नए सिरे से रुचि है, जो इसे समकालीन रणनीतिक चर्चाओं के लिए प्रासंगिक बनाता है
- संधि स्थिति: बाह्य अंतरिक्ष संधि (1967) कक्षा में सामूहिक विनाश के हथियार रखने पर प्रतिबंध लगाती है, हालांकि FOBS एक धूसर क्षेत्र में है क्योंकि यह पूर्ण कक्षा पूरी नहीं करता है
निम्नलिखित में से कौन सा कथन मानव शरीर में B कोशिकाओं और T कोशिकाओं की भूमिका का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — वे शरीर को रोगजनकों द्वारा होने वाली बीमारियों से बचाते हैं।
B कोशिकाएँ और T कोशिकाएँ दोनों लिम्फोसाइट हैं और अनुकूली प्रतिरक्षा प्रणाली के प्रमुख घटक हैं जो विशेष रूप से शरीर को वायरस, बैक्टीरिया, कवक और परजीवी जैसे रोगजनकों से बचाते हैं। B कोशिकाएँ एंटीबॉडी का उत्पादन करती हैं जो रोगजनकों पर विशिष्ट एंटीजन को पहचानती और निष्क्रिय करती हैं, जबकि T कोशिकाएँ या तो संक्रमित कोशिकाओं को सीधे मारती हैं (साइटोटॉक्सिक T कोशिकाएँ) या प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का समन्वय करने में मदद करती हैं (सहायक T कोशिकाएँ)।
❌ विकल्प 1 – गलत: हालांकि प्रतिरक्षा कोशिकाएँ एलर्जेन के प्रति प्रतिक्रिया कर सकती हैं, B और T कोशिकाओं की प्राथमिक भूमिका एलर्जेन सुरक्षा नहीं बल्कि रोगजनक रक्षा है।
❌ विकल्प 2 – गलत: दर्द और सूजन को कम करना B और T कोशिकाओं का प्राथमिक कार्य नहीं है; वे प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में शामिल होते हैं।
❌ विकल्प 3 – गलत: B और T कोशिकाएँ प्रतिरक्षासक्रिय हैं, प्रतिरक्षादमनकारी नहीं; वे प्रतिरक्षा कार्य को दबाने के बजाय बढ़ाते हैं।
✅ विकल्प 4 – सही: यह रोगजनक रोगों के विरुद्ध अनुकूली प्रतिरक्षा में B और T कोशिकाओं की प्राथमिक भूमिका का सटीक वर्णन करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: B कोशिकाएँ और T कोशिकाएँ
| विशेषता | B कोशिकाएँ (B लिम्फोसाइट) | T कोशिकाएँ (T लिम्फोसाइट) |
|---|---|---|
| परिपक्वता स्थल | अस्थि मज्जा | थाइमस ग्रंथि |
| प्राथमिक कार्य | एंटीबॉडी का उत्पादन (ह्यूमरल प्रतिरक्षा) | कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा |
| प्रकार | प्लाज़्मा कोशिकाएँ, स्मृति B कोशिकाएँ | सहायक T कोशिकाएँ (CD4+), साइटोटॉक्सिक T कोशिकाएँ (CD8+), नियामक T कोशिकाएँ, स्मृति T कोशिकाएँ |
| तंत्र | एंटीजन को पहचानना और विशिष्ट एंटीबॉडी स्रावित करना | संक्रमित कोशिकाओं को सीधे मारना या प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करना |
| प्रतिक्रिया प्रकार | ह्यूमरल/एंटीबॉडी-मध्यस्थ प्रतिरक्षा | कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा |
| स्मृति | स्मृति B कोशिकाएँ दीर्घकालिक प्रतिरक्षा प्रदान करती हैं | स्मृति T कोशिकाएँ पुनः संपर्क पर तेज़ प्रतिक्रिया सक्षम करती हैं |
वेब 3.0 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- वेब 3.0 प्रौद्योगिकी लोगों को अपने स्वयं के डेटा को नियंत्रित करने में सक्षम बनाती है।
- वेब 3.0 की दुनिया में, ब्लॉकचेन आधारित सोशल नेटवर्क हो सकते हैं।
- वेब 3.0 किसी निगम के बजाय उपयोगकर्ताओं द्वारा सामूहिक रूप से संचालित होता है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
वेब 3.0 विकेंद्रीकरण, ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी और उपयोगकर्ता स्वामित्व पर निर्मित इंटरनेट की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। तीनों कथन वेब 3.0 प्रौद्योगिकी की प्रमुख विशेषताओं का सही वर्णन करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: वेब 3.0 विकेंद्रीकरण के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को अपने स्वयं के डेटा को नियंत्रित करने में सक्षम बनाता है, जिससे व्यक्तिगत जानकारी को संग्रहीत और प्रबंधित करने के लिए केंद्रीकृत प्लेटफार्मों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
✅ कथन 2 – सही: ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी वेब 3.0 के लिए मौलिक है और विकेंद्रीकृत सोशल नेटवर्क के निर्माण को सक्षम बनाती है जहां उपयोगकर्ता अपनी सामग्री और इंटरैक्शन के मालिक होते हैं।
✅ कथन 3 – सही: वेब 3.0 एक विकेंद्रीकृत मॉडल पर संचालित होता है जहां उपयोगकर्ता सामूहिक रूप से नेटवर्क को बनाए रखते हैं और नियंत्रित करते हैं, न कि किसी एकल कॉर्पोरेट इकाई द्वारा।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वेब 3.0
- परिभाषा: विकेंद्रीकरण, ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी और सिमेंटिक वेब क्षमताओं पर केंद्रित इंटरनेट सेवाओं की तीसरी पीढ़ी
- मुख्य प्रौद्योगिकियां: ब्लॉकचेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और विकेंद्रीकृत प्रोटोकॉल
- प्रमुख विशेषताएं: उपयोगकर्ता डेटा स्वामित्व, अनुमति-रहित पहुंच, विश्वास-रहित इंटरैक्शन और टोकनीकरण
- वेब 2.0 से अंतर: वेब 2.0 केंद्रीकृत है (निगमों द्वारा नियंत्रित), जबकि वेब 3.0 विकेंद्रीकृत है (उपयोगकर्ता-नियंत्रित)
- अनुप्रयोग: विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi), NFTs, विकेंद्रीकृत स्वायत्त संगठन (DAOs), और ब्लॉकचेन-आधारित सोशल नेटवर्क
- लाभ: बढ़ी हुई गोपनीयता, डेटा सुरक्षा, सेंसरशिप प्रतिरोध और प्रत्यक्ष पीयर-टू-पीयर इंटरैक्शन
- चुनौतियां: स्केलेबिलिटी मुद्दे, उच्च ऊर्जा खपत, नियामक अनिश्चितता और उपयोगकर्ता स्वीकृति बाधाएं