UPSC CSE Prelims
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
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आम तौर पर CL-20, HMX औरLLM-105 के नाम से जाने जाने वाले रासायनिक पदार्थों की सामान्य विशेषता क्या है, जिनके बारे में कभी-कभी मीडिया में बात की जाती है?
Detailed Explanation:
CL-20, HMX और LLM-105 उन्नत उच्च-ऊर्जा विस्फोटक (High-Energy Explosives) हैं जिनका उपयोग सैन्य हथियारों में किया जाता है।
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CL-20 दुनिया के सबसे शक्तिशाली पारंपरिक विस्फोटकों में से एक है।
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HMX का उपयोग मिसाइलों, वारहेड और अन्य सैन्य गोला-बारूद में किया जाता है।
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LLM-105 उच्च प्रदर्शन और बेहतर तापीय स्थिरता वाला आधुनिक विस्फोटक है।
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अतः तीनों सैन्य हथियारों में उपयोग होने वाले विस्फोटक हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| HFC रेफ्रिजरेंट के विकल्प | ये रेफ्रिजरेंट नहीं हैं। |
| सैन्य हथियारों में विस्फोटक | सही उत्तर। ✅ |
| क्रूज़ मिसाइलों के ईंधन | ये ईंधन नहीं, बल्कि विस्फोटक हैं। |
| रॉकेट प्रणोदन के ईंधन | रॉकेट ईंधन और विस्फोटक अलग-अलग होते हैं। |
इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के संदर्भ में, निम्नलिखित तत्वों पर विचार करें:
I. कोबाल्ट
II. ग्रेफाइट
III. लिथियम
IV. निकेल
उपरोक्त में से कितने आमतौर पर बैटरी कैथोड बनाते हैं?
Detailed Explanation:
अधिकांश लिथियम-आयन EV बैटरियों में कैथोड मुख्य रूप से लिथियम, कोबाल्ट और निकेल से बना होता है।
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I. कोबाल्ट ✅ सही – NMC और LCO बैटरियों में उपयोग होता है।
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II. ग्रेफाइट ❌ गलत – ग्रेफाइट सामान्यतः एनोड में उपयोग होता है।
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III. लिथियम ✅ सही – सभी लिथियम-आयन बैटरियों के कैथोड का प्रमुख घटक।
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IV. निकेल ✅ सही – NMC और NCA बैटरियों में उपयोग होता है।
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अतः केवल तीन तत्व (कोबाल्ट, लिथियम और निकेल) कैथोड का हिस्सा होते हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
तत्व-वार विश्लेषण
| तत्व | कैथोड में उपयोग? | कारण |
|---|---|---|
| कोबाल्ट | ✅ हाँ | LCO और NMC बैटरियों में उपयोग। |
| ग्रेफाइट | ❌ नहीं | मुख्यतः एनोड में उपयोग। |
| लिथियम | ✅ हाँ | कैथोड का मूल घटक। |
| निकेल | ✅ हाँ | ऊर्जा घनत्व बढ़ाने में मदद करता है। |
EV बैटरी के भाग
| भाग | सामान्य सामग्री |
|---|---|
| कैथोड | लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, मैंगनीज़, आयरन फॉस्फेट |
| एनोड | ग्रेफाइट |
| इलेक्ट्रोलाइट | लिथियम लवण घोल |
| सेपरेटर | पॉलिमर झिल्ली |
सामान्य कैथोड रसायन
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LCO – Lithium Cobalt Oxide
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NMC – Nickel Manganese Cobalt
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NCA – Nickel Cobalt Aluminum
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LFP – Lithium Iron Phosphate
महत्वपूर्ण तथ्य
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कैथोड बैटरी की क्षमता और लागत को काफी हद तक निर्धारित करता है।
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ग्रेफाइट आज भी सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला एनोड पदार्थ है।
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EV उद्योग के कारण लिथियम, निकेल और कोबाल्ट की मांग तेजी से बढ़ रही है।
एक उभरती हुई तकनीक, डायरेक्ट एयर कैप्चर के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
मैं. इसका उपयोग कार्बन पृथक्करण के एक तरीके के रूप में किया जा सकता है। द्वितीय. यह प्लास्टिक उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण के लिए एक मूल्यवान दृष्टिकोण हो सकता है। तृतीय. विमानन में, यह सिंथेटिक कम कार्बन ईंधन बनाने के लिए हाइड्रोजन के साथ संयोजन के लिए कार्बन का एक स्रोत हो सकता है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (I, II और III)
Direct Air Capture (DAC) एक उभरती हुई तकनीक है जो वायुमंडल से सीधे कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को हटाती है। इस CO₂ को या तो स्थायी रूप से संग्रहीत किया जा सकता है या विभिन्न औद्योगिक कार्यों में उपयोग किया जा सकता है। इसलिए यह जलवायु परिवर्तन से निपटने की एक महत्वपूर्ण तकनीक मानी जाती है।
✅ कथन I सही है: DAC द्वारा वायुमंडल से CO₂ को पकड़कर भूमिगत संग्रहित किया जा सकता है, जिससे कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) संभव होता है।
✅ कथन II सही है: प्राप्त CO₂ का उपयोग प्लास्टिक, रसायन, पेय पदार्थ और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में किया जा सकता है।
✅ कथन III सही है: विमानन क्षेत्र में DAC से प्राप्त CO₂ को ग्रीन हाइड्रोजन के साथ मिलाकर कम-कार्बन सिंथेटिक ईंधन (E-fuels) बनाया जा सकता है।
संक्षिप्त नोट्स: Direct Air Capture (DAC)
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DAC वायुमंडल से सीधे CO₂ को हटाता है।
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इसे Negative Emission Technology (NET) माना जाता है।
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पकड़ी गई CO₂ को भूमिगत संग्रहित या औद्योगिक उपयोग में लाया जा सकता है।
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यह कार्बन पृथक्करण और जलवायु परिवर्तन नियंत्रण में सहायक है।
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DAC से प्राप्त CO₂ का उपयोग प्लास्टिक, रसायन और सिंथेटिक ईंधन बनाने में किया जा सकता है।
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सिंथेटिक विमानन ईंधन CO₂ और ग्रीन हाइड्रोजन से बनाया जाता है।
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इसकी प्रमुख चुनौतियाँ उच्च ऊर्जा आवश्यकता और अधिक लागत हैं।
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हाल ही में, "पंप-स्टोरेज हाइड्रोपावर" शब्द वास्तव में और उचित रूप से निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में चर्चा की गई है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण (Long Duration Energy Storage) – Option C
पम्प्ड-स्टोरेज हाइड्रोपावर (PSH) को अक्सर "वॉटर बैटरी" कहा जाता है। इसमें अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में पम्प किया जाता है। जब बिजली की मांग बढ़ती है, तो यही पानी नीचे छोड़कर बिजली उत्पन्न की जाती है।
सौर और पवन ऊर्जा जैसी अनियमित (intermittent) ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के साथ PSH का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
❌ सीढ़ीदार खेतों की सिंचाई: PSH का उद्देश्य ऊर्जा भंडारण है, सिंचाई नहीं।
❌ अनाज फसलों की लिफ्ट सिंचाई: इसमें पम्प का उपयोग होता है, लेकिन PSH का मुख्य उद्देश्य बिजली संग्रहण और ग्रिड संतुलन है।
✅ दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण: यह बिजली को लंबे समय तक संग्रहित करने की सबसे विकसित और व्यापक तकनीकों में से एक है।
❌ वर्षा जल संचयन प्रणाली: वर्षा जल संचयन का उद्देश्य जल संरक्षण है, ऊर्जा भंडारण नहीं।
संक्षिप्त नोट्स: पम्प्ड-स्टोरेज हाइड्रोपावर (PSH)
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PSH दुनिया की सबसे बड़ी ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण तकनीक है।
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इसमें अलग-अलग ऊँचाई पर दो जलाशय होते हैं।
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कम मांग के समय अतिरिक्त बिजली से पानी को ऊपर पम्प किया जाता है।
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अधिक मांग के समय पानी को नीचे छोड़कर टर्बाइन से बिजली बनाई जाती है।
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इसकी दक्षता लगभग 70–80% होती है।
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यह सौर और पवन ऊर्जा के एकीकरण में मदद करती है।
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यह दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण और ग्रिड स्थिरता प्रदान करती है।
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भारत नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए PSH परियोजनाओं पर जोर दे रहा है।
निम्नलिखित में से किसमें हाइड्रोजेल का उपयोग किया जाता है?
- मरीज़ों में नियंत्रित दवा वितरण
- मोबाइल एयर कंडीशनिंग सिस्टम
- औद्योगिक स्नेहक तैयार करना
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ केवल 1 (Option A)
हाइड्रोजेल ऐसे बहुलक (polymer) पदार्थ होते हैं जो बहुत अधिक मात्रा में पानी को सोखकर अपने भीतर बनाए रख सकते हैं। उनकी जैव-संगतता (biocompatibility) और नियंत्रित रूप से पदार्थ छोड़ने की क्षमता उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में बहुत उपयोगी बनाती है।
✅ कथन I सही है: हाइड्रोजेल का उपयोग नियंत्रित दवा वितरण (Controlled Drug Delivery) में किया जाता है क्योंकि ये दवा को धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से छोड़ सकते हैं।
❌ कथन II गलत है: मोबाइल एयर-कंडीशनिंग सिस्टम में रेफ्रिजरेंट, कंप्रेसर और हीट एक्सचेंजर उपयोग होते हैं। हाइड्रोजेल इनका सामान्य हिस्सा नहीं हैं।
❌ कथन III गलत है: औद्योगिक लुब्रिकेंट सामान्यतः तेल या सिंथेटिक पदार्थों पर आधारित होते हैं। हाइड्रोजेल में आवश्यक स्नेहन (lubrication) गुण नहीं होते।
संक्षिप्त नोट्स: हाइड्रोजेल (Hydrogels)
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हाइड्रोजेल पानी सोखने वाले पॉलीमर नेटवर्क होते हैं।
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इनमें 90–99% तक पानी संग्रहित रह सकता है।
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इनका प्रमुख उपयोग Controlled Drug Delivery में होता है।
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कॉन्टैक्ट लेंस, घाव की ड्रेसिंग और टिश्यू इंजीनियरिंग में उपयोग किए जाते हैं।
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अधिकांश हाइड्रोजेल जैव-संगत (Biocompatible) और सुरक्षित होते हैं।
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ये pH, तापमान और नमी के अनुसार प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
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बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और पुनर्जनन चिकित्सा में इनका महत्वपूर्ण उपयोग है।
निम्नलिखित में से कौन सा हाइड्रोजन द्वारा संचालित ईंधन सेल इलेक्ट्रिक वाहनों से निकास पाइप उत्सर्जन है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ जलवाष्प (Water Vapour) – Option D
हाइड्रोजन से चलने वाले Fuel Cell Electric Vehicles (FCEVs) में फ्यूल सेल के अंदर हाइड्रोजन और वायु की ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से बिजली बनती है।
इस प्रक्रिया में पानी (H₂O) और ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसलिए वाहन के एग्जॉस्ट पाइप से केवल जलवाष्प निकलती है, जिससे यह एक स्वच्छ ऊर्जा तकनीक मानी जाती है।
❌ Hydrogen Peroxide: फ्यूल सेल की सामान्य प्रक्रिया में नहीं बनता।
❌ Hydronium (H₃O⁺): यह जलीय घोल में पाया जाता है, वाहन से उत्सर्जित नहीं होता।
❌ Oxygen: ऑक्सीजन प्रतिक्रिया में उपयोग होती है, बाहर नहीं निकलती।
✅ Water Vapour: हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहन का मुख्य और एकमात्र एग्जॉस्ट उत्सर्जन।
संक्षिप्त नोट्स: फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEV)
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FCEV में हाइड्रोजन (H₂) ईंधन के रूप में उपयोग होती है।
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बिजली विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया से बनती है, दहन से नहीं।
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मुख्य अभिक्रिया: हाइड्रोजन + ऑक्सीजन → बिजली + पानी + ऊष्मा।
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एग्जॉस्ट से केवल जलवाष्प (H₂O) निकलती है।
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इसे Zero Tailpipe Emission Technology माना जाता है।
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हाइड्रोजन को उच्च-दाब टैंकों में संग्रहित किया जाता है।
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Toyota Mirai और Hyundai Nexo इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
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इनमें तेज़ रिफ्यूलिंग और लंबी ड्राइविंग रेंज का लाभ मिलता है।
निम्नलिखित गतिविधियों पर विचार करें:
- हवाई अड्डों या विमान में यात्रियों पर नशीले पदार्थों की पहचान
- वर्षा की निगरानी
- जानवरों के प्रवास पर नज़र रखना
उपरोक्त में से कितनी गतिविधियों में रडार का उपयोग किया जा सकता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ केवल दो (Option B)
रडार रेडियो तरंगों को भेजकर और उनके परावर्तन को पकड़कर वस्तुओं का पता लगाता है। इसका उपयोग मौसम की निगरानी और पशुओं के प्रवास को ट्रैक करने में होता है, लेकिन नशीले पदार्थों की पहचान के लिए सामान्यतः नहीं किया जाता।
❌ कथन I गलत है: हवाई अड्डों पर नशीले पदार्थों की पहचान आमतौर पर एक्स-रे स्कैनर, ट्रेस डिटेक्टर, स्निफर डॉग और रासायनिक परीक्षणों से की जाती है, रडार से नहीं।
✅ कथन II सही है: मौसम रडार का उपयोग वर्षा, बर्फबारी, तूफान आदि की निगरानी के लिए किया जाता है।
✅ कथन III सही है: पक्षियों, चमगादड़ों और अन्य जानवरों के प्रवास को ट्रैक करने के लिए रडार का उपयोग किया जाता है।
संक्षिप्त नोट्स: रडार (Radar)
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RADAR का पूरा नाम Radio Detection And Ranging है।
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यह रेडियो तरंगों का उपयोग करके वस्तुओं की स्थिति और गति का पता लगाता है।
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मौसम रडार वर्षा, आंधी और चक्रवात की निगरानी करते हैं।
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डॉप्लर रडार वस्तुओं की गति माप सकता है।
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रडार का उपयोग विमानन, रक्षा, नौवहन और मौसम विज्ञान में होता है।
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यह पक्षियों और जानवरों के प्रवास का अध्ययन करने में उपयोगी है।
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रडार रात, कोहरे और बादलों में भी प्रभावी रूप से काम करता है।
निम्नलिखित विमानों पर विचार करें:
- राफेल
- मिग-29
- तेजस एमके-1
उपरोक्त में से कितने को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान माना जाता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4 (कोई नहीं)
पाँचवीं पीढ़ी (Fifth Generation) के लड़ाकू विमानों की प्रमुख विशेषताएँ स्टेल्थ तकनीक, सेंसर फ्यूज़न, सुपरक्रूज़ क्षमता, उन्नत एवियोनिक्स और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली हैं। दिए गए तीनों विमान इस श्रेणी में नहीं आते।
❌ Rafale – गलत: Dassault Rafale एक 4.5वीं पीढ़ी का बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है।
❌ MiG-29 – गलत: Mikoyan MiG-29 एक चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है।
❌ Tejas MK-1 – गलत: HAL Tejas Mk1 को सामान्यतः चौथी पीढ़ी का हल्का लड़ाकू विमान माना जाता है।
अतः तीनों में से कोई भी पाँचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान नहीं है।
संक्षिप्त नोट्स: Fighter Aircraft Generations
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4th Generation: उच्च गतिशीलता, Fly-by-Wire, उन्नत रडार (जैसे MiG-29)।
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4.5 Generation: AESA रडार, आधुनिक एवियोनिक्स, सीमित स्टेल्थ क्षमता (जैसे Rafale)।
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5th Generation: पूर्ण स्टेल्थ, सेंसर फ्यूज़न, सुपरक्रूज़ क्षमता।
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पाँचवीं पीढ़ी के उदाहरण: F-22 Raptor, F-35 Lightning II, Sukhoi Su-57।
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भारत वर्तमान में Rafale, Su-30MKI, MiG-29 और Tejas संचालित करता है।
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भारत Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) विकसित कर रहा है।
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स्टेल्थ तकनीक रडार पर पहचान कम करती है।
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सेंसर फ्यूज़न विभिन्न सेंसरों की जानकारी को एकीकृत करता है।
निम्नलिखित में से कौन सा मानव शरीर में संश्लेषित होता है जो रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है और रक्त प्रवाह को बढ़ाता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 (Nitric Oxide)
Nitric Oxide (NO) मानव शरीर में बनने वाला एक महत्वपूर्ण संकेतक अणु (signaling molecule) है। यह रक्त वाहिकाओं की चिकनी मांसपेशियों को शिथिल करता है, जिससे रक्त वाहिकाएँ फैलती हैं और रक्त प्रवाह बढ़ता है।
✅ Nitric Oxide – सही: यह रक्त वाहिकाओं का प्रसार (vasodilation) करता है और रक्त प्रवाह बढ़ाता है।
❌ Nitrous Oxide (N₂O) – गलत: इसे "Laughing Gas" कहा जाता है और यह मुख्यतः एनेस्थीसिया में उपयोग होती है।
❌ Nitrogen Dioxide (NO₂) – गलत: यह एक हानिकारक वायु प्रदूषक है।
❌ Nitrogen Pentoxide (N₂O₅) – गलत: यह एक रासायनिक यौगिक है जिसका रक्त वाहिकाओं के प्रसार से कोई संबंध नहीं है।
संक्षिप्त नोट्स: Nitric Oxide (NO)
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इसके जैविक महत्व की खोज पर 1998 का नोबेल पुरस्कार दिया गया।
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यह L-arginine से Nitric Oxide Synthase (NOS) एंजाइम द्वारा बनता है।
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रक्त वाहिकाओं को फैलाकर रक्तचाप कम करता है।
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हृदय एवं रक्तवाहिका स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
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तंत्रिका तंत्र और प्रतिरक्षा प्रणाली में भी भूमिका निभाता है।
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Nitroglycerin जैसी दवाएँ NO छोड़कर कार्य करती हैं।
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इसकी कमी उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों से जुड़ी हो सकती है।
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यह एक अल्पकालिक गैसीय संदेशवाहक (gaseous messenger) है।
रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (RTGs) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- आरटीजी लघु विखंडन रिएक्टर हैं।
- आरटीजी का उपयोग अंतरिक्ष यान के ऑनबोर्ड सिस्टम को शक्ति देने के लिए किया जाता है।
- आरटीजी प्लूटोनियम-238 का उपयोग कर सकते हैं, जो हथियारों के विकास का एक उप-उत्पाद है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2 (केवल कथन 2 और 3)
Radioisotope Thermoelectric Generator (RTG) रेडियोधर्मी पदार्थों के प्राकृतिक क्षय (decay) से उत्पन्न ऊष्मा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। इसका उपयोग मुख्यतः अंतरिक्ष अभियानों में किया जाता है।
❌ कथन I गलत है: RTG छोटे फिशन रिएक्टर नहीं होते। इनमें नाभिकीय विखंडन (fission) नहीं होता, बल्कि रेडियोधर्मी क्षय से ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
✅ कथन II सही है: RTG का उपयोग अंतरिक्ष यानों, उपग्रहों और रोवरों के ऑनबोर्ड सिस्टम को ऊर्जा देने के लिए किया जाता है।
✅ कथन III सही है: RTG में सामान्यतः Plutonium-238 का उपयोग होता है, जिसे विशेष रूप से अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए भी बनाया जाता है।
संक्षिप्त नोट्स: Radioisotope Thermoelectric Generator (RTG)
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रेडियोधर्मी क्षय से उत्पन्न ऊष्मा को सीधे विद्युत में बदलता है।
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इसमें नाभिकीय विखंडन (Fission) नहीं होता।
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प्रमुख ईंधन: Plutonium-238।
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Pu-238 का अर्ध-आयु काल लगभग 87.7 वर्ष है।
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सूर्य से दूर अंतरिक्ष अभियानों के लिए अत्यंत उपयोगी।
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Voyager 1, Voyager 2 और Curiosity Rover में इसका उपयोग हुआ है।
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कई दशकों तक विश्वसनीय ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
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गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है।
निम्नलिखित में से कौन सा शब्द/वाक्यांश सबसे उपयुक्त रूप से "3डी आभासी दुनिया के एक इंटरऑपरेबल नेटवर्क को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है जिसे लाखों उपयोगकर्ताओं द्वारा एक साथ एक्सेस किया जा सकता है, जो आभासी वस्तुओं पर संपत्ति के अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं"?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (Metaverse)
Metaverse एक ऐसा डिजिटल नेटवर्क है जिसमें कई 3D आभासी (Virtual) दुनिया आपस में जुड़ी होती हैं। इसमें लाखों उपयोगकर्ता एक साथ प्रवेश कर सकते हैं, बातचीत कर सकते हैं और डिजिटल संपत्तियों पर स्वामित्व रख सकते हैं।
❌ Big Data Analytics – गलत: यह बड़े डेटा के विश्लेषण से संबंधित है, न कि वर्चुअल दुनिया से।
❌ Cryptography – गलत: यह डेटा और संचार को सुरक्षित बनाने की तकनीक है। यह मेटावर्स का हिस्सा हो सकती है, लेकिन मेटावर्स स्वयं नहीं है।
✅ Metaverse – सही: यह आपस में जुड़े हुए 3D वर्चुअल संसारों का नेटवर्क है जहाँ उपयोगकर्ता डिजिटल संपत्तियों का स्वामित्व रख सकते हैं।
❌ Virtual Matrix – गलत: यह इस अवधारणा के लिए प्रचलित या मान्य शब्द नहीं है।
संक्षिप्त नोट्स: मेटावर्स (Metaverse)
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इंटरनेट पर आधारित 3D वर्चुअल दुनिया का नेटवर्क।
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VR, AR, AI और Blockchain तकनीकों का उपयोग करता है।
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उपयोगकर्ता डिजिटल अवतार (Avatar) के माध्यम से भाग लेते हैं।
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NFTs और डिजिटल संपत्ति अधिकारों का समर्थन करता है।
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मुख्य विशेषता: Interoperability (परस्पर संचालन क्षमता)।
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गेमिंग, शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन और ऑनलाइन बैठकों में उपयोग।
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अक्सर Web 3.0 की अवधारणा से जुड़ा हुआ माना जाता है।
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कई बड़ी तकनीकी कंपनियाँ इसके विकास में निवेश कर रही हैं।
निम्नलिखित पर विचार करें:
- बैटरी भंडारण
- बायोमास जनरेटर
- ईंधन सेल
- छत पर सौर फोटोवोल्टिक इकाइयाँ
उपरोक्त में से कितने को "वितरित ऊर्जा संसाधन" माना जाता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4 (सभी चार)
Distributed Energy Resources (DERs) ऐसे छोटे ऊर्जा उत्पादन या भंडारण स्रोत होते हैं जो उपभोक्ताओं के निकट स्थित होते हैं, न कि बड़े केंद्रीकृत बिजलीघरों में। ये ऊर्जा प्रणाली को अधिक लचीला और कुशल बनाते हैं।
✅ बैटरी स्टोरेज – सही: यह ऊर्जा को संग्रहित करता है और आवश्यकता पड़ने पर बिजली उपलब्ध कराता है, इसलिए DER माना जाता है।
✅ बायोमास जनरेटर – सही: छोटे स्तर पर बायोमास से बिजली उत्पादन उपभोक्ताओं के निकट किया जा सकता है।
✅ फ्यूल सेल – सही: फ्यूल सेल विकेन्द्रीकृत तरीके से बिजली उत्पन्न करते हैं और DER की श्रेणी में आते हैं।
✅ रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टिक यूनिट – सही: घरों, कार्यालयों और उद्योगों में सीधे बिजली उत्पादन करने वाला सबसे सामान्य DER है।
संक्षिप्त नोट्स: Distributed Energy Resources (DERs)
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DERs छोटे पैमाने के ऊर्जा संसाधन होते हैं।
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इनमें ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा भंडारण दोनों शामिल हैं।
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प्रमुख उदाहरण: रूफटॉप सोलर, बैटरी स्टोरेज, फ्यूल सेल, बायोमास प्लांट।
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ट्रांसमिशन और वितरण हानियों को कम करते हैं।
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बिजली ग्रिड की विश्वसनीयता और लचीलापन बढ़ाते हैं।
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नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में मदद करते हैं।
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मुख्य ग्रिड के साथ या स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते हैं।
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स्मार्ट ग्रिड और विकेन्द्रीकृत ऊर्जा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: भारत में यूरेनियम के भंडार होने के बावजूद, वह अपनी अधिकांश बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भर है।
कथन-II: बिजली उत्पादन के लिए कम से कम 60% तक संवर्धित यूरेनियम की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कथन-I सही है लेकिन कथन-II गलत है
भारत में वास्तव में घरेलू यूरेनियम भंडार हैं लेकिन बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर भारी निर्भरता है (कुल क्षमता का लगभग 70%)। हालांकि, कथन-II तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को 60% तक संवर्धित यूरेनियम की आवश्यकता नहीं होती है।
✅ कथन-I – सही: भारत में झारखंड (सिंहभूम), आंध्र प्रदेश (तुम्मलापल्ले) और अन्य क्षेत्रों में यूरेनियम भंडार हैं, फिर भी कोयला इसकी प्रचुरता, कम लागत और स्थापित बुनियादी ढांचे के कारण बिजली उत्पादन का प्रमुख स्रोत बना हुआ है।
❌ कथन-II – गलत: 60% या अधिक तक संवर्धित यूरेनियम को अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (HEU) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और इसका उपयोग अनुसंधान रिएक्टरों या परमाणु हथियारों के लिए किया जाता है, वाणिज्यिक बिजली उत्पादन के लिए नहीं। भारत के PHWRs प्राकृतिक यूरेनियम (0.7% U-235) का उपयोग करते हैं, जबकि विश्व स्तर पर अधिकांश वाणिज्यिक लाइट वाटर रिएक्टर केवल 3-5% U-235 तक संवर्धित निम्न संवर्धित यूरेनियम (LEU) का उपयोग करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: परमाणु ईंधन संवर्धन स्तर
| संवर्धन स्तर | U-235 प्रतिशत | प्राथमिक उपयोग |
|---|---|---|
| प्राकृतिक यूरेनियम | 0.7% | भारत के PHWRs (दाबित भारी जल रिएक्टर) |
| निम्न संवर्धित यूरेनियम (LEU) | 3-5% | विश्व स्तर पर वाणिज्यिक लाइट वाटर रिएक्टर (LWRs) |
| अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (HEU) | 20-90% | अनुसंधान रिएक्टर, नौसैनिक प्रणोदन |
| हथियार-ग्रेड यूरेनियम | ≥90% | परमाणु हथियार |
- भारत का परमाणु कार्यक्रम: PHWRs में प्राकृतिक यूरेनियम से शुरू होने वाले स्वदेशी तीन-चरणीय कार्यक्रम का उपयोग करता है
- कोयले का प्रभुत्व: भारत के कोयला भंडार (विश्व में 4वें सबसे बड़े) और कम पूंजी लागत इसे पर्यावरणीय चिंताओं के बावजूद पसंदीदा बनाती है
- यूरेनियम स्रोत: झारखंड (जादूगोड़ा), आंध्र प्रदेश (तुम्मलापल्ले - विश्व के सबसे बड़े में से एक), मेघालय, राजस्थान
- परमाणु क्षमता: भारत की कुल बिजली का केवल ~3% परमाणु ऊर्जा से आता है (2023 तक)
भारत में कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- इनमें से कोई भी समुद्री जल का उपयोग नहीं करता है।
- इनमें से कोई भी जल-तनाव वाले जिले में स्थापित नहीं है।
- इनमें से कोई भी निजी स्वामित्व वाला नहीं है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कोई नहीं
भारत में कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्रों के संबंध में तीनों कथन गलत हैं। कुछ संयंत्र शीतलन के लिए समुद्री जल का उपयोग करते हैं (जैसे मुंद्रा), कई जल-तनाव वाले जिलों में स्थित हैं, और बड़ी संख्या में निजी स्वामित्व वाले हैं।
❌ कथन 1 – गलत: मुंद्रा तापीय विद्युत संयंत्र कच्छ की खाड़ी से समुद्री जल का उपयोग बंद-चक्र शीतलन प्रणाली में करता है, और सहायक प्रणालियों के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस संयंत्रों से शुद्ध समुद्री जल का भी उपयोग करता है।
❌ कथन 2 – गलत: WRI के शोध के अनुसार, भारत के 40% तापीय विद्युत संयंत्र जल-तनाव वाले क्षेत्रों में स्थित हैं, जिनमें से 20 सबसे बड़ी तापीय उपयोगिताओं में से 14 ने 2013-2016 के बीच जल की कमी के कारण बंद का अनुभव किया।
❌ कथन 3 – गलत: भारत के 269 तापीय विद्युत संयंत्रों में से 138 सार्वजनिक स्वामित्व वाले हैं जबकि 131 निजी स्वामित्व वाले हैं, जो महत्वपूर्ण निजी क्षेत्र की भागीदारी को दर्शाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्र
- शीतलन जल स्रोत: जबकि अधिकांश संयंत्र नदियों या जलाशयों से मीठे पानी का उपयोग करते हैं, तटीय संयंत्र जैसे मुंद्रा (गुजरात) मीठे पानी के संसाधनों के संरक्षण के लिए समुद्री जल शीतलन प्रणालियों का उपयोग करते हैं।
- जल तनाव की चुनौती: 40% तापीय संयंत्र जल-तनाव वाले क्षेत्रों में हैं, जो जल की कमी की अवधि के दौरान परिचालन व्यवधान और मजबूर बंद का कारण बनते हैं।
- स्वामित्व संरचना: कुल 269 संयंत्र - 138 सार्वजनिक क्षेत्र (केंद्रीय/राज्य उपयोगिताएँ जैसे NTPC, राज्य Gencos) और 131 निजी क्षेत्र (अडानी पावर, टाटा पावर, रिलायंस पावर, आदि)।
- क्षमता वितरण: तापीय ऊर्जा भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता का लगभग 50-55% योगदान करती है।
- पर्यावरणीय चिंताएँ: उच्च जल खपत (3-5 लीटर प्रति kWh), तापीय प्रदूषण, और उत्सर्जन स्थिरता के लिए जल प्रबंधन को महत्वपूर्ण बनाते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कुछ सूक्ष्मजीव जल के क्वथनांक से अधिक तापमान वाले वातावरण में वृद्धि कर सकते हैं।
- कुछ सूक्ष्मजीव जल के हिमांक से नीचे तापमान वाले वातावरण में वृद्धि कर सकते हैं।
- कुछ सूक्ष्मजीव 3 से कम pH वाले अत्यधिक अम्लीय वातावरण में वृद्धि कर सकते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सभी तीन
तीनों कथन सही हैं क्योंकि एक्सट्रीमोफाइल्स (चरम परिस्थितियों के अनुकूल सूक्ष्मजीव) ऐसे वातावरण में जीवित रह सकते हैं और पनप सकते हैं जो अधिकांश जीवन रूपों के लिए घातक होंगे। इनमें क्वथनांक से ऊपर और हिमांक से नीचे चरम तापमान के साथ-साथ अत्यधिक अम्लीय परिस्थितियाँ शामिल हैं।
✅ कथन 1 – सही: हाइपरथर्मोफाइल्स जैसे Pyrolobus fumarii 100°C (जल का क्वथनांक) से अधिक तापमान में पनप सकते हैं, जो अक्सर हाइड्रोथर्मल वेंट्स में 113°C तक के तापमान में पाए जाते हैं।
✅ कथन 2 – सही: साइक्रोफाइल्स (क्रायोफाइल्स) शीत-प्रेमी सूक्ष्मजीव हैं जो -20°C से +10°C तक के तापमान में वृद्धि करने में सक्षम हैं, जो जल के हिमांक (0°C) से काफी नीचे है।
✅ कथन 3 – सही: एसिडोफाइल्स जैसे Picrophilus oshimae 3 से कम pH वाले अत्यधिक अम्लीय वातावरण में पनपते हैं, कुछ प्रजातियाँ 0 के करीब pH स्तर पर भी जीवित रहती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: एक्सट्रीमोफाइल्स
| एक्सट्रीमोफाइल का प्रकार | चरम स्थिति | उदाहरण | आवास |
|---|---|---|---|
| हाइपरथर्मोफाइल्स | 80-100°C से अधिक तापमान | Pyrolobus fumarii, Thermococcus | हाइड्रोथर्मल वेंट्स, गर्म झरने |
| साइक्रोफाइल्स | 15°C से कम तापमान (अक्सर -20°C से +10°C) | Psychrobacter, Colwellia | आर्कटिक बर्फ, गहरे समुद्री जल |
| एसिडोफाइल्स | 3 से कम pH | Picrophilus oshimae, Acidithiobacillus | अम्ल खदान जल निकासी, ज्वालामुखी क्षेत्र |
| अल्कलीफाइल्स | 9 से अधिक pH | Bacillus alcalophilus | सोडा झीलें, क्षारीय मिट्टी |
| हैलोफाइल्स | उच्च नमक सांद्रता | Halobacterium, Dunaliella | नमक झीलें, नमक दलदल |
| बैरोफाइल्स (पीजोफाइल्स) | उच्च दबाव | Moritella, Shewanella | गहरे समुद्री खाइयाँ |