UPSC CSE Prelims
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
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भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी संस्थाओं की भागीदारी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) निजी संस्थाओं की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए बनाई गई एक स्वायत्त एजेंसी है।
- अग्निकुल कॉसमॉस ने 3डी-प्रिंटेड रॉकेट इंजन का उपयोग करके दुनिया की पहली उड़ान लॉन्च की।
- स्काईरूट एयरोस्पेस ने जीएसएलवी के लिए तरल ईंधन विकसित किया है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही।IN-SPACe को 2020 में अंतरिक्ष विभाग (DOS) के अंतर्गत एक स्वायत्त, एकल-खिड़की नोडल एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया था। यह ISRO और निजी क्षेत्र के बीच सेतु का कार्य करती है।
कथन 2 — सही। मई 2024 में चेन्नई स्थित स्टार्टअप Agnikul Cosmos ने श्रीहरिकोटा में अपने निजी लॉन्चपैड से Agnibaan SOrTeD सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया — यह विश्व की पहली उड़ान थी जो एकल-टुकड़े, पूर्णतः 3D-मुद्रित रॉकेट इंजन (Agnilet — अर्ध-क्रायोजेनिक) द्वारा संचालित थी।
कथन 3 — गलत। Skyroot Aerospace अपने स्वतंत्र प्रक्षेपण यान (Vikram श्रृंखला) विकसित करती है। यह GSLV के लिए ईंधन या इंजन नहीं बनाती। GSLV के तरल और क्रायोजेनिक चरण पूरी तरह ISRO के Liquid Propulsion Systems Centre (LPSC) द्वारा विकसित किए जाते हैं।
मुख्य ट्रिक: कथन 3 दो अलग निजी कंपनियों को मिलाता है — Agnikul (3D इंजन) और Skyroot (Vikram रॉकेट) — और गलत तरीके से Skyroot को GSLV से जोड़ता है।
यूके में जन्मे एक्स' को 2025 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जब इस पुरस्कार की घोषणा की गई तो वह एक अमेरिकी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। 'X' को पहचानें :
Detailed Explanation:
जॉन क्लार्क सही उत्तर हैं:
- जन्म: कैम्ब्रिज, यूनाइटेड किंगडम ✓
- पुरस्कार: 2025 नोबेल भौतिकी पुरस्कार — विद्युत परिपथ में macroscopic quantum mechanical tunneling की खोज के लिए
- पुरस्कार के समय पद: प्रोफेसर एमेरिटस, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले (अमेरिकी विश्वविद्यालय) ✓
अन्य विकल्प गलत क्यों:
| विकल्प | व्यक्ति | जन्म | विश्वविद्यालय | गलत क्यों |
|---|---|---|---|---|
| 1 | Michel H. Devoret | फ्रांस | Yale / UC Santa Barbara | UK में जन्म नहीं |
| 2 | Richard Robson | यॉर्कशायर, UK | मेलबर्न विश्वविद्यालय (ऑस्ट्रेलिया) | अमेरिकी विश्वविद्यालय नहीं |
| 4 | Joel Mokyr | नीदरलैंड्स | Northwestern University | UK में जन्म नहीं |
मुख्य तर्क: केवल जॉन क्लार्क दोनों शर्तें पूरी करते हैं — UK में जन्म और अमेरिकी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर।
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने हाल ही में बम निपटान प्रणाली का परीक्षण और मूल्यांकन करने के लिए एक राष्ट्रीय मानक पेश किया है। इस प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- नए मानक को IS 19445 : 2025 के नाम से जाना जाता है।
- यह विभिन्न एजेंसियों में उपकरणों की अंतरसंचालनीयता में सुधार करेगा।
- इसे 30वें केंद्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान, रूस के सहयोग से टीबीआरएल, डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया था।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 3 (केवल 1 और 2)
कथन 1 — सही। दिसंबर 2025 में, BIS ने बम निपटान प्रणालियों के लिए भारत का पहला समर्पित राष्ट्रीय मानक अधिसूचित किया, जिसे आधिकारिक रूप से IS 19445:2025 नामित किया गया।
कथन 2 — सही। यह मानक बम कंबल, बास्केट और इन्हिबिटर जैसे बम निपटान उपकरणों के मूल्यांकन के लिए व्यापक दिशा-निर्देश स्थापित करता है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य परीक्षण और खरीद में एकरूपता लाना है, जिससे सशस्त्र बल, CAPF, NSG और राज्य पुलिस जैसी एजेंसियों में अंतर-संचालनीयता (Interoperability) में सुधार हो।
कथन 3 — गलत। यह मानक MHA के अनुरोध पर BIS और DRDO के टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया था। किसी भी रूसी संस्था के साथ कोई सहयोग नहीं था। वास्तव में यह मानक विदेशी मानदंडों पर निर्भरता कम करने के लिए बनाया गया था।
मुख्य बिंदु: IS 19445:2025 रक्षा मानकों के स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है — यह BIS + DRDO/TBRL द्वारा पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है।
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DHRUV64 के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है/हैं?
- यह भारत के लिए माइक्रोप्रोसेसरों के निर्माण को सक्षम करने के समग्र उद्देश्य के साथ DIR-V कार्यक्रम के तहत निर्मित तीसरी चिप है।
- यह भारत का पहला घरेलू 1.0 GHz, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। DHRUV64, डिजिटल इंडिया RISC-V (DIR-V) कार्यक्रम के अंतर्गत निर्मित तीसरी चिप है, क्रम इस प्रकार है:
| क्रम | चिप |
|---|---|
| पहली | THEJAS32 |
| दूसरी | THEJAS64 |
| तीसरी | DHRUV64 |
DIR-V कार्यक्रम का उद्देश्य आयातित चिप्स और विदेशी बौद्धिक संपदा पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी RISC-V आधारित माइक्रोप्रोसेसर का पोर्टफोलियो तैयार करना है।
कथन 2 — सही। DHRUV64 भारत का पहला स्वदेशी 1.0 GHz, 64-बिट ड्यूल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है, जिसे MeitY के अंतर्गत C-DAC द्वारा विकसित किया गया है। यह ओपन-सोर्स RISC-V इंस्ट्रक्शन सेट आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो सुनिश्चित करता है:
- कोई स्वामित्व लाइसेंसिंग शुल्क नहीं
- भारत की तकनीकी संप्रभुता
याद रखने योग्य मुख्य तथ्य:
- कार्यक्रम: DIR-V (डिजिटल इंडिया RISC-V)
- डेवलपर: MeitY के अंतर्गत C-DAC
- आर्किटेक्चर: ओपन-सोर्स RISC-V
- महत्त्व: तीसरी चिप, पहला 64-बिट ड्यूल-कोर 1.0 GHz
निम्नलिखित अंतरिक्ष अभियानों पर विचार करें:
I. Axiom-4
II. SpaDeX
III. Gaganyaan
ऊपर दिए गए कितने अंतरिक्ष मिशन सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान को प्रोत्साहित और समर्थन करते हैं?
Detailed Explanation:
दिए गए मिशनों में Axiom-4 और Gaganyaan सीधे तौर पर माइक्रोग्रैविटी (सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण) अनुसंधान को बढ़ावा देते हैं, जबकि SpaDeX मुख्य रूप से एक तकनीकी प्रदर्शन मिशन है।
-
कथन I सही है: Axiom-4 मिशन ISS पर वैज्ञानिक और माइक्रोग्रैविटी प्रयोग करता है।
-
कथन II गलत है: SpaDeX का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक का परीक्षण करना है।
-
कथन III सही है: Gaganyaan मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा किए जाने वाले कई माइक्रोग्रैविटी प्रयोग शामिल हैं।
-
अतः केवल दो मिशन माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान को समर्थन देते हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
मिशन-वार विश्लेषण
| मिशन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. Axiom-4 | ✅ सही | ISS पर वैज्ञानिक एवं माइक्रोग्रैविटी प्रयोग करता है। |
| II. SpaDeX | ❌ गलत | मुख्य रूप से स्पेस डॉकिंग तकनीक का प्रदर्शन मिशन है। |
| III. Gaganyaan | ✅ सही | माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान के लिए कई प्रयोग शामिल हैं। |
Micro-gravity Research
माइक्रोग्रैविटी क्या है?
अंतरिक्ष में ऐसी स्थिति जहाँ गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव बहुत कम महसूस होता है और वस्तुएँ भारहीन दिखाई देती हैं।
महत्व
इससे वैज्ञानिक अध्ययन करते हैं:
-
मानव स्वास्थ्य
-
पदार्थ विज्ञान (Material Science)
-
जैव प्रौद्योगिकी
-
द्रव गतिकी (Fluid Dynamics)
-
पौधों की वृद्धि
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. भारतीय रेलवे ने 2028 तक भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली बनाने के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना (एनआरपी) तैयार की है।
II. 'कवच' जर्मनी के सहयोग से विकसित एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है।
III. 'कवच' प्रणाली में स्टेशन अनुभाग में ट्रैक पर लगाए गए आरएफआईडी टैग शामिल हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा नहीं सही है?
Detailed Explanation:
प्रश्न में गलत कथनों की पहचान करनी है।
-
कथन I गलत है: राष्ट्रीय रेल योजना (NRP) का लक्ष्य वर्ष 2030 है, 2028 नहीं।
-
कथन II गलत है: कवच (Kavach) एक स्वदेशी Automatic Train Protection System है, जिसे भारत में विकसित किया गया है। इसका विकास जर्मनी के साथ नहीं हुआ।
-
कथन III सही है: कवच प्रणाली में RFID टैग ट्रैक और स्टेशन सेक्शन में लगाए जाते हैं, जिससे ट्रेन की स्थिति का पता चलता रहता है।
-
अतः कथन I और II गलत हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (A) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. NRP का लक्ष्य 2028 है | ❌ गलत | सही लक्ष्य वर्ष 2030 है। |
| II. Kavach जर्मनी के साथ विकसित किया गया | ❌ गलत | यह पूरी तरह स्वदेशी प्रणाली है। |
| III. Kavach में RFID टैग का उपयोग होता है | ✅ सही | RFID टैग ट्रेन की स्थिति और गति की निगरानी में मदद करते हैं। |
Kavach प्रणाली
Kavach क्या है?
-
भारतीय रेलवे की स्वदेशी Automatic Train Protection (ATP) प्रणाली।
-
Make in India पहल के तहत विकसित।
-
ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाई गई।
मुख्य विशेषताएँ
-
चालक की गलती होने पर स्वतः ब्रेक लगाना।
-
Signal Passed At Danger (SPAD) को रोकना।
-
ट्रेन की रियल-टाइम निगरानी।
-
RFID टैग और रेडियो संचार का उपयोग।
राष्ट्रीय रेल योजना (NRP)
-
भारतीय रेलवे की दीर्घकालिक योजना।
-
2030 तक भविष्य के लिए तैयार रेलवे नेटवर्क बनाना इसका लक्ष्य है।
-
क्षमता वृद्धि और आधुनिकीकरण पर जोर।
GPS-एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (GAGAN) आवश्यक संवर्द्धन प्रदान करने के लिए ग्राउंड स्टेशनों की एक प्रणाली का उपयोग करता है।
GAGAN के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है/हैं?
I. इसे अतिरिक्त सटीकता और अखंडता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
II. यह अधिक समान और उच्च गुणवत्ता वाले हवाई यातायात प्रबंधन की अनुमति देगा।
III. यह केवल विमानन में लाभ प्रदान करेगा, परिवहन के अन्य साधनों में नहीं।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
GAGAN (GPS-Aided Geo Augmented Navigation) भारत की Satellite-Based Augmentation System (SBAS) है, जिसे ISRO और AAI ने मिलकर विकसित किया है।
-
कथन I सही है: GAGAN GPS की सटीकता (Accuracy) और विश्वसनीयता (Integrity) बढ़ाता है।
-
कथन II सही है: यह अधिक सुरक्षित और बेहतर हवाई यातायात प्रबंधन (Air Traffic Management) में मदद करता है।
-
कथन III गलत है: GAGAN का उपयोग केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं है; इसका उपयोग रेल, सड़क, समुद्री परिवहन, कृषि और आपदा प्रबंधन में भी होता है।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (D) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. अतिरिक्त सटीकता और विश्वसनीयता प्रदान करता है | ✅ सही | GPS संकेतों की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। |
| II. बेहतर एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट संभव बनाता है | ✅ सही | सुरक्षित और कुशल हवाई संचालन में सहायता करता है। |
| III. केवल विमानन क्षेत्र को लाभ देता है | ❌ गलत | इसके उपयोग कई अन्य क्षेत्रों में भी हैं। |
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: कुछ दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का उपयोग फ्लैट टेलीविजन स्क्रीन और कंप्यूटर मॉनिटर के निर्माण में किया जाता है।
कथन II: कुछ दुर्लभ पृथ्वी तत्वों में फॉस्फोरसेंट गुण होते हैं।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
यूरोपियम, टर्बियम और यिट्रियम जैसे कुछ दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements) आधुनिक डिस्प्ले तकनीक में उपयोग किए जाते हैं।
-
कथन I सही है: कुछ REEs का उपयोग फ्लैट टीवी स्क्रीन और कंप्यूटर मॉनिटर बनाने में किया जाता है।
-
कथन II सही है: कुछ REEs में फॉस्फोरेसेंस (Phosphorescence) का गुण होता है।
-
कथन II, कथन I की व्याख्या करता है क्योंकि यही गुण स्क्रीन में चमकीले और स्पष्ट रंग उत्पन्न करने में मदद करता है।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (A) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| कथन I: REEs का उपयोग टीवी और मॉनिटर में होता है | ✅ सही | ये रंग और प्रकाश उत्पन्न करने में सहायक होते हैं। |
| कथन II: कुछ REEs में फॉस्फोरेसेंस गुण होता है | ✅ सही | ये ऊर्जा को अवशोषित कर प्रकाश उत्सर्जित कर सकते हैं। |
| संबंध | ✅ सही | यही गुण डिस्प्ले तकनीक में इनके उपयोग का मुख्य कारण है। |
Rare Earth Elements (REEs)
क्या हैं Rare Earth Elements?
REEs कुल 17 धात्विक तत्वों का समूह हैं:
-
15 लैंथेनाइड
-
स्कैंडियम
-
यिट्रियम
मुख्य उपयोग
-
फ्लैट टीवी और मॉनिटर
-
स्मार्टफोन
-
इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
-
पवन टर्बाइन
-
रक्षा उपकरण
-
मेडिकल इमेजिंग
फॉस्फोरेसेंस क्या है?
यह किसी पदार्थ की वह क्षमता है जिसमें वह:
-
ऊर्जा को अवशोषित करता है,
-
कुछ समय तक संग्रहीत करता है,
-
फिर धीरे-धीरे प्रकाश उत्सर्जित करता है।
डिस्प्ले में उपयोग होने वाले प्रमुख REEs
| तत्व | उपयोग |
|---|---|
| Europium | लाल रंग |
| Terbium | हरा रंग |
| Yttrium | डिस्प्ले फॉस्फर |
भारत की रक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार करें:
विमान प्रकार - विवरण
I. Dornier-228: समुद्री गश्ती विमान
II. IL-76 : सुपरसोनिक लड़ाकू विमान
III. C-17 Globemaster III: सैन्य परिवहन विमान
ऊपर दिए गए कितने जोड़े सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
तीनों युग्मों में से Dornier-228 और C-17 Globemaster III सही हैं, जबकि IL-76 का वर्णन गलत दिया गया है।
-
युग्म I सही है: Dornier-228 का उपयोग समुद्री गश्त (Maritime Patrol) और निगरानी के लिए किया जाता है।
-
युग्म II गलत है: IL-76 एक भारी सैन्य परिवहन विमान है, न कि सुपरसोनिक लड़ाकू विमान।
-
युग्म III सही है: C-17 Globemaster III एक सैन्य परिवहन विमान है जिसका उपयोग सैनिकों और भारी सामान के परिवहन में होता है।
-
अतः केवल दो युग्म सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
युग्म-वार विश्लेषण
| युग्म | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. Dornier-228 : Maritime Patrol Aircraft | ✅ सही | भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा समुद्री निगरानी हेतु उपयोग। |
| II. IL-76 : Supersonic Combat Aircraft | ❌ गलत | यह एक भारी परिवहन विमान है, लड़ाकू विमान नहीं। |
| III. C-17 Globemaster III : Military Transport Aircraft | ✅ सही | भारतीय वायुसेना का प्रमुख रणनीतिक परिवहन विमान। |
भारत के प्रमुख परिवहन विमान
Dornier-228
-
दो इंजन वाला बहुउद्देश्यीय विमान।
-
समुद्री गश्त, निगरानी और खोज-बचाव कार्यों में उपयोग।
-
भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा संचालित।
IL-76
-
रूसी मूल का भारी परिवहन विमान।
-
सैनिकों और भारी सामान के परिवहन में उपयोग।
-
AWACS प्लेटफॉर्म के रूप में भी प्रयुक्त।
C-17 Globemaster III
-
Boeing द्वारा निर्मित रणनीतिक परिवहन विमान।
-
टैंक, हेलीकॉप्टर, सैनिक और भारी उपकरण ले जाने में सक्षम।
-
भारत की लंबी दूरी की एयरलिफ्ट क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. समुद्र के पानी में कोई भी वायरस जीवित नहीं रह सकता।
II. कोई भी वायरस बैक्टीरिया को संक्रमित नहीं कर सकता।
III. कोई भी वायरस मेजबान कोशिकाओं में सेलुलर ट्रांसक्रिप्शनल गतिविधि को नहीं बदल सकता।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
तीनों कथन गलत हैं क्योंकि वायरस समुद्रों में पाए जाते हैं, बैक्टीरिया को संक्रमित कर सकते हैं और मेज़बान कोशिका की गतिविधियों को भी बदल सकते हैं।
-
कथन I गलत है: समुद्री जल में बड़ी संख्या में वायरस पाए जाते हैं।
-
कथन II गलत है: बैक्टीरियोफेज (Bacteriophages) ऐसे वायरस हैं जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं।
-
कथन III गलत है: वायरस मेज़बान कोशिका की ट्रांसक्रिप्शनल गतिविधि को बदलकर अपनी प्रतिकृति बनाते हैं।
-
अतः कोई भी कथन सही नहीं है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (D) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. कोई वायरस समुद्री जल में जीवित नहीं रह सकता | ❌ गलत | समुद्रों में अत्यधिक संख्या में वायरस पाए जाते हैं। |
| II. कोई वायरस बैक्टीरिया को संक्रमित नहीं कर सकता | ❌ गलत | बैक्टीरियोफेज विशेष रूप से बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं। |
| III. कोई वायरस कोशिका की ट्रांसक्रिप्शनल गतिविधि नहीं बदल सकता | ❌ गलत | वायरस अपनी वृद्धि के लिए कोशिका की जीन अभिव्यक्ति को बदलते हैं। |
वायरस
वायरस क्या हैं?
वायरस सूक्ष्म संक्रामक कण हैं जो केवल जीवित कोशिकाओं के भीतर ही अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
मिट्टी, वायु, जल और समुद्रों में पाए जाते हैं।
-
स्वयं प्रजनन नहीं कर सकते।
-
मेज़बान कोशिका की मशीनरी का उपयोग करते हैं।
-
पौधों, जानवरों, कवकों और बैक्टीरिया को संक्रमित कर सकते हैं।
बैक्टीरियोफेज
-
बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस।
-
पृथ्वी पर सबसे अधिक पाए जाने वाले जैविक घटकों में से एक।
-
चिकित्सा और जैव-प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण।
वायरस मेज़बान कोशिका को कैसे प्रभावित करते हैं?
-
जीन अभिव्यक्ति बदलते हैं।
-
कोशिका की मशीनरी को नियंत्रित करते हैं।
-
प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
-
ट्रांसक्रिप्शन और प्रोटीन निर्माण को संशोधित करते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. उम्मीद है कि मेजराना 1 चिप क्वांटम कंप्यूटिंग को सक्षम बनाएगी।
II. मेजराना 1 चिप को अमेज़ॅन वेब सर्विसेज (AWS) द्वारा पेश किया गया है।
III. डीप लर्निंग मशीन लर्निंग का एक सबसेट है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
Majorana 1 एक क्वांटम कंप्यूटिंग चिप है जिसे Microsoft ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य अधिक स्थिर और उन्नत क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना है।
-
कथन I सही है: Majorana 1 चिप क्वांटम कंप्यूटिंग को आगे बढ़ाने में सहायक मानी जा रही है।
-
कथन II गलत है: इसे AWS ने नहीं, बल्कि Microsoft ने विकसित किया है।
-
कथन III सही है: Deep Learning, Machine Learning का एक उपसमूह (Subset) है।
-
अतः केवल कथन I और III सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. Majorana 1 क्वांटम कंप्यूटिंग को सक्षम करेगा | ✅ सही | यह स्केलेबल और अधिक विश्वसनीय क्वांटम कंप्यूटरों के लिए विकसित किया गया है। |
| II. AWS ने इसे विकसित किया | ❌ गलत | Majorana 1 को Microsoft ने विकसित किया है। |
| III. Deep Learning, Machine Learning का हिस्सा है | ✅ सही | Deep Learning, Machine Learning की उन्नत शाखा है। |
Majorana 1 Chip
क्या है Majorana 1?
यह Microsoft द्वारा विकसित एक Quantum Computing Chip है जो Topological Qubits पर आधारित है।
महत्व क्यों है?
-
क्वांटम त्रुटियों को कम करने का प्रयास।
-
अधिक स्थिर और बड़े क्वांटम कंप्यूटर बनाने में मदद।
-
जटिल वैज्ञानिक समस्याओं को हल करने की क्षमता।
संभावित उपयोग
-
दवा खोज (Drug Discovery)
-
नई सामग्री का विकास
-
जलवायु मॉडलिंग
-
क्रिप्टोग्राफी
-
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
Machine Learning और Deep Learning
| Machine Learning | Deep Learning |
|---|---|
| AI का व्यापक क्षेत्र | Machine Learning का उपसमूह |
| फीचर चयन अक्सर मैनुअल | फीचर स्वतः सीखता है |
| छोटे डेटा पर भी कार्य करता है | बड़े डेटा पर बेहतर कार्य करता है |
| सरल मॉडल | Neural Networks आधारित मॉडल |
मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. सभी प्रकार के यूएवी वर्टिकल लैंडिंग कर सकते हैं।
II. सभी प्रकार के यूएवी स्वचालित होवरिंग कर सकते हैं।
III. सभी प्रकार के यूएवी बैटरी का उपयोग केवल बिजली आपूर्ति के स्रोत के रूप में कर सकते हैं।
ऊपर दिए गए कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
UAV (ड्रोन) की क्षमताएँ उसके डिज़ाइन पर निर्भर करती हैं। इसलिए तीनों कथनों में
-
कथन I गलत है: सभी UAV वर्टिकल लैंडिंग नहीं कर सकते। Fixed-wing UAV को रनवे या अन्य रिकवरी सिस्टम की आवश्यकता होती है।
-
कथन II गलत है: सभी UAV हॉवर (एक स्थान पर स्थिर रहना) नहीं कर सकते। Fixed-wing UAV हॉवर नहीं कर सकते।
-
कथन III गलत है: सभी UAV केवल बैटरी से नहीं चलते। कई UAV ईंधन, हाइब्रिड या सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
-
अतः कोई भी कथन सही नहीं है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (D) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. सभी UAV वर्टिकल लैंडिंग कर सकते हैं | ❌ गलत | केवल VTOL और मल्टीरोटर UAV ऐसा कर सकते हैं। |
| II. सभी UAV हॉवर कर सकते हैं | ❌ गलत | Fixed-wing UAV हॉवर नहीं कर सकते। |
| III. सभी UAV केवल बैटरी से चलते हैं | ❌ गलत | कई UAV ईंधन, हाइब्रिड या सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं। |
UAV के प्रकार
| प्रकार | हॉवर | वर्टिकल टेक-ऑफ/लैंडिंग | ऊर्जा स्रोत |
|---|---|---|---|
| Fixed-Wing | ❌ नहीं | ❌ नहीं | ईंधन, बैटरी, हाइब्रिड |
| Multirotor | ✅ हाँ | ✅ हाँ | मुख्यतः बैटरी |
| VTOL Hybrid | ✅ हाँ | ✅ हाँ | बैटरी, ईंधन, हाइब्रिड |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
Fixed-wing UAV लंबी दूरी की निगरानी और मैपिंग के लिए उपयोगी हैं।
-
Multirotor UAV फोटोग्राफी और सर्विलांस में अधिक उपयोग होते हैं।
-
Hybrid UAV दोनों प्रणालियों के लाभ प्रदान करते हैं।
-
आधुनिक UAV बैटरी, ईंधन, हाइड्रोजन फ्यूल सेल या सौर ऊर्जा से संचालित हो सकते हैं।
निम्न प्रकार के वाहनों पर विचार करें:
I. पूर्ण बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन
II. हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहन
III. ईंधन सेल इलेक्ट्रिक हाइब्रिड वाहन
उपरोक्त में से कितने को वैकल्पिक (पावरट्रेन) वाहन माना जाता है?
Detailed Explanation:
Alternative Powertrain Vehicles वे वाहन हैं जो पारंपरिक पेट्रोल या डीज़ल इंजन पर निर्भर नहीं होते।
-
कथन I सही है: Battery Electric Vehicles (BEVs) पूरी तरह बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से चलते हैं।
-
कथन II सही है: Hydrogen Fuel Cell Vehicles (FCEVs) हाइड्रोजन से बिजली बनाकर चलते हैं।
-
कथन III सही है: Fuel Cell Electric Hybrid Vehicles (FCEHVs) में फ्यूल सेल, बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर का संयोजन होता है।
-
अतः तीनों वाहन Alternative Powertrain Vehicles माने जाते हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
वाहन-वार विश्लेषण
| वाहन | Alternative Powertrain? | कारण |
|---|---|---|
| BEV | ✅ हाँ | केवल बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से संचालित। |
| FCEV | ✅ हाँ | हाइड्रोजन फ्यूल सेल से बिजली बनाता है। |
| FCEHV | ✅ हाँ | फ्यूल सेल और बैटरी दोनों का उपयोग करता है। |
Alternative Powertrain Vehicles
क्या हैं Alternative Powertrains?
ये ऐसे वाहन प्रणोदन तंत्र हैं जो पेट्रोल-डीज़ल इंजन के विकल्प के रूप में काम करते हैं।
मुख्य प्रकार
| प्रकार | ऊर्जा स्रोत |
|---|---|
| BEV | बैटरी बिजली |
| FCEV | हाइड्रोजन फ्यूल सेल |
| FCEHV | हाइड्रोजन फ्यूल सेल + बैटरी |
| HEV | ईंधन + इलेक्ट्रिक मोटर |
| PHEV | प्लग-इन बैटरी + इंजन |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
BEVs से कोई टेलपाइप उत्सर्जन नहीं होता।
-
FCEVs का मुख्य उत्सर्जन जलवाष्प (Water Vapour) होता है।
-
हाइड्रोजन वाहन लंबी दूरी और भारी परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
-
ये वाहन जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं।
अक्सर समाचारों में उल्लिखित मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. वे मानव निर्मित प्रोटीन हैं।
II. वे विशिष्ट एंटीजन से जुड़ने की अपनी क्षमता के कारण प्रतिरक्षाविज्ञानी कार्य को उत्तेजित करते हैं।
III. इनका उपयोग निपाह वायरस जैसे वायरल संक्रमण के इलाज में किया जाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (mAbs) प्रयोगशाला में बनाए गए विशेष प्रोटीन होते हैं जो किसी एक विशेष एंटीजन को पहचानकर उससे जुड़ते हैं।
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कथन I सही है: ये मानव-निर्मित (Lab-made) प्रोटीन होते हैं।
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कथन II सही है: ये विशिष्ट एंटीजन से जुड़कर प्रतिरक्षा तंत्र को रोगजनकों से लड़ने में मदद करते हैं।
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कथन III सही है: इनका उपयोग निपाह वायरस जैसी वायरल बीमारियों के उपचार में भी किया जाता है।
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अतः तीनों कथन सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (D) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. मानव-निर्मित प्रोटीन हैं | ✅ सही | प्रयोगशाला में क्लोन की गई कोशिकाओं से बनाए जाते हैं। |
| II. विशिष्ट एंटीजन से जुड़ते हैं | ✅ सही | रोगजनकों या कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाते हैं। |
| III. निपाह वायरस में उपयोग | ✅ सही | निपाह संक्रमण के उपचार हेतु विकसित किए गए हैं। |
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी
क्या हैं Monoclonal Antibodies?
ये प्रयोगशाला में तैयार की गई एक जैसी (Identical) एंटीबॉडी होती हैं जो किसी एक विशेष एंटीजन को लक्ष्य बनाती हैं।
कैसे काम करती हैं?
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एंटीजन से जुड़ती हैं।
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वायरस या अन्य रोगजनकों को निष्क्रिय करती हैं।
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प्रतिरक्षा तंत्र को संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती हैं।
मुख्य उपयोग
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कैंसर उपचार
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ऑटोइम्यून रोग
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वायरल संक्रमण (COVID-19, Ebola, Nipah)
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डायग्नोस्टिक परीक्षण
महत्वपूर्ण तथ्य
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एक ही प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिका के क्लोन से बनाई जाती हैं।
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अत्यधिक विशिष्ट (Highly Specific) होती हैं।
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आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी और चिकित्सा में व्यापक उपयोग।
निम्नलिखित पदार्थों पर विचार करें:
I. इथेनॉल
II. नाइट्रोग्लिसरीन
III. यूरिया
कोयला गैसीकरण तकनीक का उपयोग उनमें से कितने के उत्पादन में किया जा सकता है?
Detailed Explanation:
कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) में कोयले को
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I. एथेनॉल ✅ सही – सिंगैस से एथेनॉल बनाया जा सकता है।
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II. नाइट्रोग्लिसरीन ❌ गलत – यह ग्लिसरॉल के नाइट्रेशन से बनता है, कोयला गैसीकरण से नहीं।
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III. यूरिया ✅ सही – सिंगैस से प्राप्त हाइड्रोजन से अमोनिया बनता है, जिससे आगे यूरिया तैयार किया जाता है।
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अतः केवल एथेनॉल और यूरिया का उत्पादन कोयला गैसीकरण तकनीक से किया जा सकता है। इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
पदार्थ-वार विश्लेषण
| पदार्थ | कोयला गैसीकरण से उत्पादन? | कारण |
|---|---|---|
| एथेनॉल | ✅ हाँ | सिंगैस से बनाया जा सकता है। |
| नाइट्रोग्लिसरीन | ❌ नहीं | ग्लिसरॉल के नाइट्रेशन से बनता है। |
| यूरिया | ✅ हाँ | अमोनिया और CO₂ से बनता है। |
कोयला गैसीकरण
क्या है Coal Gasification?
यह प्रक्रिया कोयले को सिंगैस में बदलती है, जिसमें मुख्यतः होते हैं:
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कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)
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हाइड्रोजन (H₂)
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कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
सिंगैस से बनने वाले प्रमुख उत्पाद
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अमोनिया
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यूरिया
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मेथेनॉल
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एथेनॉल
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सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG)
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हाइड्रोजन
महत्वपूर्ण तथ्य
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यह तकनीक आयातित तेल और गैस पर निर्भरता कम करने में मदद करती है।
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उर्वरक और रासायनिक उद्योग में इसका व्यापक उपयोग है।
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भारत घरेलू कोयले के बेहतर उपयोग के लिए कोयला गैसीकरण को बढ़ावा दे रहा है।