'माइक्रोसैटेलाइट DNA' का उपयोग निम्नलिखित में से किस मामले में किया जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — विभिन्न जीव-जंतु प्रजातियों के बीच विकासवादी संबंधों का अध्ययन करना
माइक्रोसैटेलाइट DNA, जिसे शॉर्ट टेंडम रिपीट्स (STRs) के रूप में भी जाना जाता है, अत्यधिक बहुरूपी DNA अनुक्रम हैं जो व्यक्तियों और जनसंख्याओं के बीच महत्वपूर्ण भिन्नता दर्शाते हैं। ये भिन्नताएं इन्हें विभिन्न जीव-जंतु प्रजातियों के बीच विकासवादी संबंधों, जनसंख्या आनुवंशिकी और फाइलोजेनेटिक अध्ययनों के लिए उत्कृष्ट आनुवंशिक मार्कर बनाती हैं। उच्च उत्परिवर्तन दर और दोहराए गए अनुक्रमों की संख्या में परिवर्तनशीलता शोधकर्ताओं को आनुवंशिक वंशावली का पता लगाने और विकासवादी विचलन पैटर्न को समझने में सक्षम बनाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: माइक्रोसैटेलाइट DNA (शॉर्ट टेंडम रिपीट्स)
- परिभाषा: माइक्रोसैटेलाइट छोटे दोहराए जाने वाले DNA अनुक्रम (सामान्यतः 1-6 बेस पेयर) हैं जो संपूर्ण जीनोम में टेंडम सरणियों में दोहराए जाते हैं।
- बहुरूपता: व्यक्तियों के बीच दोहराव की संख्या में अत्यधिक परिवर्तनशील, जो उन्हें पहचान और विविधता अध्ययन के लिए उपयोगी आनुवंशिक मार्कर बनाता है।
- विकासवादी जीवविज्ञान में अनुप्रयोग: आनुवंशिक विविधता, जनसंख्या संरचना, जीन प्रवाह और प्रजातियों के बीच फाइलोजेनेटिक संबंधों का अध्ययन करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- अन्य अनुप्रयोग: DNA फिंगरप्रिंटिंग, पितृत्व परीक्षण, फोरेंसिक विश्लेषण, संरक्षण आनुवंशिकी और प्रजनन कार्यक्रम।
- लाभ: सह-प्रभावी वंशानुक्रम, उच्च उत्परिवर्तन दर, जीनोम में प्रचुरता और PCR का उपयोग करके प्रवर्धन में आसानी।
- संबंधित नहीं: स्टेम सेल रूपांतरण, क्लोनल प्रवर्धन तकनीकों या प्रत्यक्ष दवा प्रभावकारिता परीक्षण से (इनमें विभिन्न आणविक तकनीकें शामिल हैं)।
Question 1 of 1 डीएनए, आरएनए एवं आनुवंशिकी
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