UPSC Prelims 2023
प्राचीन इतिहास Previous Year Questions (PYQs)
Explore 3 solved UPSC Prelims 2023 प्राचीन इतिहास questions with detailed step-by-step bilingual solutions, option analysis, and answer keys.
निम्नलिखित में से कौन सा संगम कविताओं में उल्लिखित 'वट्टकिरुतल' की प्रथा की व्याख्या करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — युद्ध में पराजित राजा द्वारा भूखे रहकर आत्महत्या करने की अनुष्ठानिक प्रथा
'वट्टकिरुतल' (जिसे 'वटक्किरुथल' भी लिखा जाता है) संगम साहित्य में उल्लिखित एक अनुष्ठानिक प्रथा थी जिसमें पराजित राजा अपने सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए मृत्यु तक उपवास करता था। यह प्रथा प्राचीन तमिल समाज की योद्धा नैतिकता को दर्शाती थी, जहां सम्मान के साथ मृत्यु को पराजय और बंदी बनाए जाने के अपमान से बेहतर माना जाता था। यह शब्द शाब्दिक रूप से 'उत्तर की ओर मुख करके बैठना' का अर्थ रखता है और इसमें राजा मृत्यु तक भोजन और पानी से परहेज करता था, जो सम्मान की संहिता के प्रति उसकी परम प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संगम साहित्य और समाज
- संगम काल: लगभग 300 ईसा पूर्व से 300 ईस्वी के बीच रचित प्राचीन तमिल साहित्य को संदर्भित करता है, जिसका नाम तमिल कवियों की पौराणिक 'संगम' (सभा) के नाम पर रखा गया है।
- योद्धा संस्कृति: संगम कविताएं, विशेष रूप से 'पुरनानूरु' (पट्टुप्पट्टु संग्रहों में से एक) में, युद्ध, वीरता और तमिल राजाओं और योद्धाओं के बीच सम्मान की संहिता का व्यापक वर्णन है।
- वट्टकिरुतल: उपवास द्वारा अनुष्ठानिक आत्महत्या, जो पराजित राजाओं या योद्धाओं द्वारा अपमान से बचने के लिए की जाती थी; उत्तर की ओर मुख करके बैठना मृत्यु की दिशा माना जाता था।
- सामाजिक मूल्य: सम्मान, साहस और आत्म-सम्मान सर्वोपरि थे; शत्रुओं द्वारा बंदी बनाया जाना या समर्पण को मृत्यु से भी बदतर माना जाता था।
- अन्य संगम प्रथाएं: संगम ग्रंथों में 'सती' (हालांकि कम सामान्य), वीर पत्थर (नाडु काल), और योद्धाओं के लिए विस्तृत अंत्येष्टि संस्कार जैसी विभिन्न प्रथाओं का उल्लेख है।
"आत्माएं केवल पशु और पौधों की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि चट्टानों, बहते पानी और कई अन्य प्राकृतिक वस्तुओं की भी हैं, जिन्हें अन्य धार्मिक संप्रदायों द्वारा जीवित नहीं माना जाता।" उपरोक्त कथन प्राचीन भारत के निम्नलिखित में से किस धार्मिक संप्रदाय की मूल मान्यताओं में से एक को दर्शाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — जैन धर्म
यह कथन इस मूलभूत जैन सिद्धांत को दर्शाता है कि संपूर्ण ब्रह्मांड सजीव है। जैन दर्शन के अनुसार, आत्माएं (जीव) केवल मनुष्यों, पशुओं और पौधों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि चट्टानों (पृथ्वी), बहते पानी, वायु और अग्नि जैसे तत्वों में भी विद्यमान हैं। इन्हें स्थावर जीव (अचल जीवित प्राणी) या एकेंद्रिय (एक-इंद्रिय वाले प्राणी) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह सत्तामूलक विश्वास जैन धर्म में अहिंसा के कठोर अभ्यास की नींव है, क्योंकि किसी भी प्राकृतिक तत्व को नुकसान पहुंचाना एक जीवित आत्मा को नुकसान पहुंचाना माना जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जीव का जैन सिद्धांत
- जीव (आत्मा): जैन धर्म का मानना है कि आत्माएं पदार्थ के सभी रूपों में मौजूद हैं—पारंपरिक मानकों के अनुसार जीवित और निर्जीव दोनों में।
- जीवों का वर्गीकरण: दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित: स्थावर (अचल) और त्रस (चल)।
- एकेंद्रिय (एक-इंद्रिय प्राणी): इसमें पृथ्वी-कायिक, जल-कायिक, अग्नि-कायिक, वायु-कायिक और वनस्पति-कायिक प्राणी शामिल हैं—सभी में केवल स्पर्श की इंद्रिय होती है।
- बहु-इंद्रिय प्राणी: दो-इंद्रिय (कीड़े) से लेकर पांच-इंद्रिय प्राणियों (मनुष्य, पशु) तक जिनमें क्रमशः अधिक इंद्रियां होती हैं।
- अहिंसा (अहिंसा): सार्वभौमिक आत्माओं में यह विश्वास जैन धर्म को अहिंसा के अभ्यास में सबसे कठोर धर्म बनाता है, यहां तक कि सबसे छोटे तत्वों को भी नुकसान पहुंचाने से बचा जाता है।
- अनेकांतवाद: अनेकांतवाद या दृष्टिकोणों की बहुलता का सिद्धांत—यह मानता है कि सत्य के कई पहलू हैं और कोई एक दृष्टिकोण पूर्ण नहीं है।
- अन्य धर्मों से अंतर: बौद्ध धर्म, शैव धर्म और वैष्णव धर्म चट्टानों और पानी जैसी निर्जीव प्राकृतिक वस्तुओं को आत्मा नहीं मानते हैं।
प्राचीन दक्षिण भारत के संदर्भ में, कोरकाई, पूम्पुहर और मुचिरी किस रूप में प्रसिद्ध थे
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — पत्तन (बंदरगाह)
कोरकाई, पूम्पुहर और मुचिरी संगम काल (लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी) के दौरान दक्षिण भारत के प्रमुख प्राचीन बंदरगाह नगर थे। ये भारत और रोमन साम्राज्य के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण केंद्र थे। कोरकाई (पांड्य राजवंश) मोती मत्स्यन के लिए प्रसिद्ध था, पूम्पुहर/कावेरीपट्टिनम (चोल राजवंश) कावेरी के मुहाने पर एक व्यस्त अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र था, और मुचिरी/मुजिरिस (चेर राजवंश) मालाबार तट पर रोम के साथ काली मिर्च व्यापार का प्रमुख केंद्र था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संगम काल के प्रमुख बंदरगाह
| बंदरगाह | स्थान | राजवंश | महत्व |
|---|---|---|---|
| कोरकाई | ताम्रपर्णी नदी का मुहाना, तमिलनाडु | पांड्य | मोती मत्स्यन; अंतर्राष्ट्रीय व्यापार |
| पूम्पुहर (कावेरीपट्टिनम) | कावेरी नदी का मुहाना, तमिलनाडु | प्रारंभिक चोल | मुख्य बंदरगाह; शिलप्पदिकारम में वर्णित; व्यस्त व्यापार केंद्र |
| मुचिरी (मुजिरिस) | मालाबार तट, केरल | चेर | रोमन साम्राज्य के साथ प्रमुख काली मिर्च व्यापार केंद्र |
| टोंडी | पूर्वी तट | पांड्य | महत्वपूर्ण द्वितीयक बंदरगाह |
| अरिकमेडु | पांडिचेरी के निकट | — | भारत-रोम व्यापारिक बस्ती; पुरातात्विक साक्ष्य |
- संगम साहित्य संदर्भ: संगम ग्रंथों में 'पुहर' शब्द विशेष रूप से नदी के मुहाने या बंदरगाह नगर को दर्शाता है जहाँ माल उतारा जाता था।
- व्यापारिक वस्तुएँ: काली मिर्च, मोती, बहुमूल्य रत्न, मसाले, हाथी दांत, रेशम और मलमल का निर्यात होता था; शराब, सोने के सिक्के, कांच के बर्तन और मिट्टी के बर्तन आयात होते थे।
- अंतर्राष्ट्रीय संबंध: ये बंदरगाह दक्षिण भारत को रोम, मिस्र, अरब, दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन से जोड़ते थे।
- ऐतिहासिक महत्व: संगम राजवंशों की समृद्धि इन बंदरगाहों के माध्यम से समुद्री व्यापार से निकटता से जुड़ी थी।
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UPSC Prelims 2023 - प्राचीन इतिहास Chapter-wise Distribution
संगम काल एवं दक्षिण भारत
2 Qs (66.7%)धार्मिक आंदोलन
1 Qs (33.3%)UPSC Prelims 2023 - प्राचीन इतिहास Questions FAQs
Q1 How many प्राचीन इतिहास questions were asked in UPSC Prelims 2023?
Q2 What is the chapter-wise question distribution for प्राचीन इतिहास in UPSC Prelims 2023?
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