प्राचीन दक्षिण भारत के संदर्भ में, कोरकाई, पूम्पुहर और मुचिरी किस रूप में प्रसिद्ध थे
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — पत्तन (बंदरगाह)
कोरकाई, पूम्पुहर और मुचिरी संगम काल (लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी) के दौरान दक्षिण भारत के प्रमुख प्राचीन बंदरगाह नगर थे। ये भारत और रोमन साम्राज्य के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण केंद्र थे। कोरकाई (पांड्य राजवंश) मोती मत्स्यन के लिए प्रसिद्ध था, पूम्पुहर/कावेरीपट्टिनम (चोल राजवंश) कावेरी के मुहाने पर एक व्यस्त अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र था, और मुचिरी/मुजिरिस (चेर राजवंश) मालाबार तट पर रोम के साथ काली मिर्च व्यापार का प्रमुख केंद्र था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संगम काल के प्रमुख बंदरगाह
| बंदरगाह | स्थान | राजवंश | महत्व |
|---|---|---|---|
| कोरकाई | ताम्रपर्णी नदी का मुहाना, तमिलनाडु | पांड्य | मोती मत्स्यन; अंतर्राष्ट्रीय व्यापार |
| पूम्पुहर (कावेरीपट्टिनम) | कावेरी नदी का मुहाना, तमिलनाडु | प्रारंभिक चोल | मुख्य बंदरगाह; शिलप्पदिकारम में वर्णित; व्यस्त व्यापार केंद्र |
| मुचिरी (मुजिरिस) | मालाबार तट, केरल | चेर | रोमन साम्राज्य के साथ प्रमुख काली मिर्च व्यापार केंद्र |
| टोंडी | पूर्वी तट | पांड्य | महत्वपूर्ण द्वितीयक बंदरगाह |
| अरिकमेडु | पांडिचेरी के निकट | — | भारत-रोम व्यापारिक बस्ती; पुरातात्विक साक्ष्य |
- संगम साहित्य संदर्भ: संगम ग्रंथों में 'पुहर' शब्द विशेष रूप से नदी के मुहाने या बंदरगाह नगर को दर्शाता है जहाँ माल उतारा जाता था।
- व्यापारिक वस्तुएँ: काली मिर्च, मोती, बहुमूल्य रत्न, मसाले, हाथी दांत, रेशम और मलमल का निर्यात होता था; शराब, सोने के सिक्के, कांच के बर्तन और मिट्टी के बर्तन आयात होते थे।
- अंतर्राष्ट्रीय संबंध: ये बंदरगाह दक्षिण भारत को रोम, मिस्र, अरब, दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन से जोड़ते थे।
- ऐतिहासिक महत्व: संगम राजवंशों की समृद्धि इन बंदरगाहों के माध्यम से समुद्री व्यापार से निकटता से जुड़ी थी।
Question 1 of 1 समाज एवं अर्थव्यवस्था
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