UPSC Prelims 2023
अंतरराष्ट्रीय संबंध Previous Year Questions (PYQs)
Explore 11 solved UPSC Prelims 2023 अंतरराष्ट्रीय संबंध questions with detailed step-by-step bilingual solutions, option analysis, and answer keys.
G-20 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- G-20 समूह मूल रूप से वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के लिए अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में स्थापित किया गया था।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भारत की G-20 प्राथमिकताओं में से एक है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
G-20 के बारे में दोनों कथन सही हैं। G-20 वास्तव में 1999 में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के लिए अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय स्थिरता पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में स्थापित किया गया था। भारत की 2023 G-20 अध्यक्षता ने समावेशी विकास और वृद्धि में इसकी भूमिका पर जोर देते हुए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) को एक प्रमुख प्राथमिकता के रूप में रखा।
✅ कथन 1 – सही: G-20 मूल रूप से 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के लिए अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में स्थापित किया गया था।
✅ कथन 2 – सही: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भारत की 2023 G-20 अध्यक्षता के दौरान प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक थी, जो समावेशी विकास के लिए DPI का लाभ उठाने और डिजिटल विभाजन को पाटने पर केंद्रित थी।
📝 संक्षिप्त नोट्स: G-20
- गठन: एशियाई वित्तीय संकट के बाद 1999 में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के लिए एक मंच के रूप में स्थापित
- पहला नेताओं का शिखर सम्मेलन: वैश्विक वित्तीय संकट के जवाब में 2008 में वाशिंगटन डी.सी. में आयोजित
- सदस्यता: 19 देश और यूरोपीय संघ तथा अफ्रीकी संघ (2023 में जोड़ा गया)
- उद्देश्य: वैश्विक अर्थव्यवस्था, वित्तीय स्थिरता, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा
- भारत की 2023 अध्यक्षता प्राथमिकताएं: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, हरित विकास, महिला-नेतृत्व विकास, और समावेशन
- प्रतिनिधित्व: G-20 सदस्य वैश्विक GDP का लगभग 85%, वैश्विक व्यापार का 75%, और विश्व जनसंख्या का दो-तिहाई प्रतिनिधित्व करते हैं
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
यूरोपीय संघ का 'स्थिरता और विकास संधिपत्र' (Stability and Growth Pact) एक संधि है जो
- यूरोपीय संघ के देशों के बजटीय घाटे के स्तर को सीमित करती है
- यूरोपीय संघ के देशों को अपनी अवसंरचना सुविधाओं को साझा करने के लिए बाध्य करती है
- यूरोपीय संघ के देशों को अपनी प्रौद्योगिकियों को साझा करने में सक्षम बनाती है
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल एक
स्थिरता और विकास संधिपत्र (SGP) 27 यूरोपीय संघ सदस्य देशों के बीच एक समझौता है जो यूरोपीय संघ के भीतर राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मुख्य रूप से निगरानी और सुधारात्मक तंत्रों के माध्यम से सदस्य देशों के बजट घाटे और सार्वजनिक ऋण स्तरों को नियंत्रित करने पर केंद्रित है।
✅ कथन 1 – सही: SGP अत्यधिक घाटा प्रक्रिया (EDP) के माध्यम से बजटीय घाटे को सीमित करता है, जिसमें सदस्य देशों को घाटा GDP के 3% से कम और ऋण GDP के 60% से कम रखना आवश्यक है।
❌ कथन 2 – गलत: SGP एक राजकोषीय शासन ढांचा है और यूरोपीय संघ के देशों के बीच अवसंरचना सुविधाओं को साझा करने को अनिवार्य नहीं बनाता है।
❌ कथन 3 – गलत: प्रौद्योगिकी साझाकरण SGP के अधिदेश का हिस्सा नहीं है, जो केवल राजकोषीय नीति समन्वय और बजटीय अनुशासन पर केंद्रित है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्थिरता और विकास संधिपत्र (SGP)
- स्थापना: 1997, यूरो की शुरुआत के साथ 1999 में लागू
- सदस्य: सभी 27 यूरोपीय संघ सदस्य देश (19 यूरोज़ोन + 8 गैर-यूरोज़ोन देश)
- मुख्य उद्देश्य: यूरोपीय संघ के भीतर राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना
- प्रमुख राजकोषीय नियम: बजट घाटा GDP के 3% से अधिक नहीं होना चाहिए; सार्वजनिक ऋण GDP के 60% से अधिक नहीं होना चाहिए
- दो भुजाएँ: (1) निवारक भुजा - राजकोषीय योजनाओं और नीति समन्वय की निगरानी करती है; (2) सुधारात्मक भुजा - उल्लंघनकर्ताओं के लिए अत्यधिक घाटा प्रक्रिया लागू करती है
- निगरानी निकाय: यूरोपीय आयोग और यूरोपीय संघ की परिषद अनुपालन को ट्रैक करते हैं
- सुधार: सख्त प्रवर्तन के लिए 2011-2013 में 'सिक्स-पैक' और 'टू-पैक' कानून के माध्यम से मजबूत किया गया
निम्नलिखित में से कौन सा देश दशकों से गृह युद्ध और खाद्य की कमी से पीड़ित रहा है और हाल ही में अपने अत्यंत गंभीर अकाल के कारण समाचारों में था?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — सोमालिया
सोमालिया 1990 के दशक की शुरुआत से अपनी केंद्रीय सरकार के पतन के बाद से लंबे समय तक गृह युद्ध से पीड़ित रहा है। जारी संघर्ष, बार-बार सूखा, टिड्डी दल के हमलों और आर्थिक अस्थिरता के संयोजन ने सोमालिया को विश्व के सबसे अधिक खाद्य असुरक्षित देशों में से एक बना दिया है, जो 2011 के विनाशकारी अकाल और 2020-2021 की अकाल जैसी स्थिति सहित गंभीर अकाल का सामना कर रहा है। देश मानवीय संकटों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है, जहां लाखों लोगों को खाद्य सहायता की आवश्यकता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सोमालिया संकट
- गृह युद्ध: सोमालिया 1991 से गृह युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति में है जब केंद्रीय सरकार का पतन हो गया था।
- मानवीय संकट: दशकों के संघर्ष ने बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया है, कृषि को बाधित किया है और लाखों लोगों को विस्थापित किया है।
- 2011 का अकाल: घोषित अकाल में अनुमानित 260,000 लोग मारे गए, जिनमें से आधे पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे।
- 2020-2021 का संकट: संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर सूखा, रेगिस्तानी टिड्डी दल के हमलों, COVID-19 के आर्थिक प्रभाव और जारी संघर्ष के कारण आसन्न अकाल की चेतावनी दी।
- संवेदनशीलता कारक: जलवायु परिवर्तन, कमजोर शासन, अल-शबाब विद्रोह और अत्यधिक गरीबी सोमालिया को लंबे समय तक खाद्य असुरक्षित बनाती है।
- अन्य विकल्प: अंगोला (गृह युद्ध के बाद पुनर्प्राप्ति में), कोस्टा रिका (स्थिर लोकतंत्र), और इक्वाडोर (अपेक्षाकृत स्थिर) चल रहे गृह युद्ध और हाल के गंभीर अकाल के विवरण से मेल नहीं खाते हैं।
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निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए : समाचारों में उल्लिखित संघर्ष क्षेत्र वह देश जहाँ यह स्थित है
- डोनबास : सीरिया
- काचिन : इथियोपिया
- टाइग्रे : उत्तरी यमन
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कोई नहीं
दिए गए युग्मों में से कोई भी सही सुमेलित नहीं है। सभी तीन संघर्ष क्षेत्रों को गलत देशों के साथ जोड़ा गया है।
❌ युग्म 1 – गलत: डोनबास पूर्वी यूक्रेन (सीरिया नहीं) में स्थित है। यह 2014 से यूक्रेनी बलों और रूसी समर्थित अलगाववादियों के बीच संघर्ष का केंद्र रहा है, जिसमें डोनेट्स्क और लुहांस्क क्षेत्र शामिल हैं।
❌ युग्म 2 – गलत: काचिन उत्तरी म्यांमार (इथियोपिया नहीं) में एक राज्य है। काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) जातीय स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों के नियंत्रण के लिए म्यांमार सेना के साथ लंबे समय से सशस्त्र संघर्ष में लगी हुई है।
❌ युग्म 3 – गलत: टाइग्रे इथियोपिया (उत्तरी यमन नहीं) का सबसे उत्तरी क्षेत्र है। नवंबर 2020 से, यहाँ इथियोपियाई संघीय सरकार, टाइग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF), और इरिट्रियाई बलों के बीच विनाशकारी गृह युद्ध देखा गया है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रमुख समकालीन संघर्ष क्षेत्र
| संघर्ष क्षेत्र | देश | प्रमुख पक्षकार | संघर्ष की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| डोनबास | यूक्रेन | यूक्रेन बनाम रूसी समर्थित अलगाववादी | 2014 से क्षेत्रीय/अलगाववादी संघर्ष |
| काचिन | म्यांमार | म्यांमार सेना बनाम काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) | जातीय स्वायत्तता संघर्ष |
| टाइग्रे | इथियोपिया | इथियोपियाई सरकार बनाम TPLF, इरिट्रिया | गृह युद्ध/क्षेत्रीय संघर्ष (2020-2022) |
| नागोर्नो-काराबाख | अजरबैजान/आर्मेनिया | अजरबैजान बनाम आर्मेनिया | क्षेत्रीय विवाद |
| इदलिब | सीरिया | सीरियाई सरकार बनाम विद्रोही समूह | गृह युद्ध क्षेत्र |
निम्नलिखित कथन पर विचार कीजिए:
- हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र के सभी देशों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन के लिए पहली बार एक समझौता अपनाया है, 'सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता (GCM)'।
- GCM में उल्लिखित उद्देश्य और प्रतिबद्धताएं संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी हैं।
- GCM अपने उद्देश्यों और प्रतिबद्धताओं में आंतरिक प्रवासन या आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को भी संबोधित करता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कोई नहीं
सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता (GCM) के बारे में तीनों कथन गलत हैं। GCM को सभी संयुक्त राष्ट्र देशों द्वारा अपनाया नहीं गया था, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, और यह आंतरिक विस्थापन को संबोधित नहीं करता है।
❌ कथन 1 – गलत: सभी संयुक्त राष्ट्र देशों ने GCM को नहीं अपनाया; 2018 में 163 देशों ने इसे अपनाया, जबकि अमेरिका, हंगरी, इज़राइल, चेक गणराज्य और पोलैंड जैसे देशों ने समझौते के खिलाफ मतदान किया या इससे अलग रहे।
❌ कथन 2 – गलत: GCM अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन पर सहयोग के लिए एक गैर-कानूनी रूप से बाध्यकारी ढांचा है; यह संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों पर कानूनी दायित्व नहीं लगाता है।
❌ कथन 3 – गलत: GCM विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन पर केंद्रित है और आंतरिक प्रवासन या आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) को संबोधित नहीं करता है, जो आंतरिक विस्थापन पर मार्गदर्शक सिद्धांतों जैसे अलग ढांचे के अंतर्गत आते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता (GCM)
- अंगीकरण: दिसंबर 2018 में मराकेच, मोरक्को में अंतर-सरकारी सम्मेलन में अपनाया गया।
- प्रकृति: गैर-कानूनी रूप से बाध्यकारी, अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन के सभी आयामों को कवर करने वाला सहकारी ढांचा।
- हस्ताक्षरकर्ता: 163 देशों ने इसे अपनाया; उल्लेखनीय गैर-हस्ताक्षरकर्ताओं में अमेरिका, हंगरी, इज़राइल, चेक गणराज्य और पोलैंड शामिल हैं।
- उद्देश्य: 23 उद्देश्य जिनमें सुरक्षित प्रवासन को सुविधाजनक बनाना, मानव तस्करी का मुकाबला करना, कमजोरियों को कम करना और सीमा प्रबंधन में सुधार शामिल है।
- दायरा: केवल अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन पर लागू होता है; आंतरिक विस्थापन या शरणार्थियों को कवर नहीं करता है (1951 के शरणार्थी सम्मेलन और शरणार्थियों पर वैश्विक समझौते द्वारा अलग से कवर किया गया)।
- सिद्धांत: राज्य संप्रभुता, जिम्मेदारी-साझाकरण, गैर-भेदभाव और मानवाधिकारों पर आधारित।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: इज़रायल ने कुछ अरब राज्यों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं।
कथन-II: सऊदी अरब द्वारा मध्यस्थता किए गए 'अरब शांति पहल' पर इज़रायल और अरब लीग द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कथन-I सही है लेकिन कथन-II गलत है
यह प्रश्न अरब राज्यों के साथ इज़रायल के राजनयिक संबंधों और अरब शांति पहल के ज्ञान का परीक्षण करता है। कथन-I अब्राहम समझौतों और पूर्व शांति संधियों को सही ढंग से दर्शाता है, जबकि कथन-II गलत तरीके से दावा करता है कि इज़रायल ने अरब शांति पहल पर हस्ताक्षर किए।
✅ कथन-I – सही: इज़रायल ने मिस्र (1979), जॉर्डन (1994), यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान (2020 अब्राहम समझौते) सहित कई अरब राज्यों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं।
❌ कथन-II – गलत: अरब शांति पहल (2002), जिसे सऊदी अरब द्वारा प्रस्तावित किया गया और अरब लीग द्वारा समर्थन दिया गया, पर इज़रायल द्वारा कभी हस्ताक्षर नहीं किए गए। यह कब्जे वाले क्षेत्रों से इज़रायली वापसी के बदले सामान्यीकरण की पेशकश करने वाला एक प्रस्ताव बना हुआ है, लेकिन इज़रायल ने औपचारिक रूप से इसकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: इज़रायल-अरब संबंध और शांति पहल
| शांति समझौता/पहल | वर्ष | मुख्य विवरण |
|---|---|---|
| कैंप डेविड समझौता | 1978 | मिस्र-इज़रायल शांति संधि; मिस्र इज़रायल को मान्यता देने वाला पहला अरब राज्य बना (1979) |
| ओस्लो समझौता | 1993 | इज़रायली-फिलिस्तीनी शांति प्रक्रिया के लिए रूपरेखा; फिलिस्तीनी प्राधिकरण की स्थापना |
| इज़रायल-जॉर्डन शांति संधि | 1994 | जॉर्डन इज़रायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला दूसरा अरब राज्य बना |
| अरब शांति पहल | 2002 | सऊदी अरब द्वारा प्रस्तावित; 1967 की सीमाओं तक इज़रायली वापसी के बदले अरब सामान्यीकरण की पेशकश; इज़रायल द्वारा हस्ताक्षरित नहीं |
| अब्राहम समझौते | 2020 | यूएई, बहरीन, मोरक्को, सूडान ने इज़रायल के साथ संबंध सामान्य किए; अमेरिका द्वारा मध्यस्थता |
निम्नलिखित बुनियादी ढांचा क्षेत्रों पर विचार कीजिए:
- किफायती आवास
- मास रैपिड ट्रांसपोर्ट
- स्वास्थ्य देखभाल
- नवीकरणीय ऊर्जा
उपर्युक्त में से कितने क्षेत्रों पर UNOPS सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट्स इन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इनोवेशन (S3i) पहल अपने निवेश के लिए ध्यान केंद्रित करती है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल तीन
UNOPS सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट्स इन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इनोवेशन (S3i) पहल तीन विशिष्ट बुनियादी ढांचा क्षेत्रों पर केंद्रित है: किफायती आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, और स्वास्थ्य अवसंरचना। मास रैपिड ट्रांसपोर्ट S3i निवेश अधिदेश में शामिल नहीं है।
✅ किफायती आवास – शामिल: S3i वैश्विक आवास की कमी को दूर करने के लिए सतत, किफायती आवास में निवेश करता है।
❌ मास रैपिड ट्रांसपोर्ट – शामिल नहीं: परिवहन अवसंरचना S3i पहल के विशिष्ट निवेश फोकस का हिस्सा नहीं है।
✅ स्वास्थ्य देखभाल – शामिल: स्वास्थ्य अवसंरचना आवश्यक चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच में सुधार के लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र है।
✅ नवीकरणीय ऊर्जा – शामिल: स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-लचीली अवसंरचना S3i के लिए प्रमुख निवेश क्षेत्र हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: UNOPS S3i पहल
- पूरा नाम: सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट्स इन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इनोवेशन (S3i)
- द्वारा शुरू: संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (UNOPS)
- प्राथमिक उद्देश्य: SDGs के अनुरूप सतत बुनियादी ढांचा निवेश के लिए निजी पूंजी जुटाना
- तीन फोकस क्षेत्र: किफायती आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, और स्वास्थ्य अवसंरचना
- निवेश दृष्टिकोण: सार्वजनिक और निजी संसाधनों को मिलाकर मिश्रित वित्त मॉडल
- लक्षित क्षेत्र: मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे की कमी वाले विकासशील देश
- संरेखण: SDG 3 (स्वास्थ्य), SDG 7 (ऊर्जा), SDG 9 (बुनियादी ढांचा), और SDG 11 (शहर) का समर्थन करता है
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
क्षेत्र : अक्सर समाचारों में रहने का कारण
- उत्तरी किवु और इतुरी : आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच युद्ध
- नागोर्नो-काराबाख : मोज़ाम्बिक में विद्रोह
- खेरसॉन और ज़ापोरिज़िया : इज़रायल और लेबनान के बीच विवाद
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कोई नहीं
दिए गए युग्मों में से कोई भी सही सुमेलित नहीं है। तीनों युग्म गलत तरीके से क्षेत्रों को उन संघर्षों या विवादों से जोड़ते हैं जिनसे वे संबंधित नहीं हैं।
❌ युग्म 1 – गलत: उत्तरी किवु और इतुरी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के प्रांत हैं जो जातीय संघर्षों और विद्रोह का सामना कर रहे हैं, आर्मेनिया-अज़रबैजान युद्ध से संबंधित नहीं हैं।
❌ युग्म 2 – गलत: नागोर्नो-काराबाख आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच विवादित क्षेत्र है, मोज़ाम्बिक में विद्रोह (जो काबो डेलगाडो प्रांत में होता है) से संबंधित नहीं है।
❌ युग्म 3 – गलत: खेरसॉन और ज़ापोरिज़िया यूक्रेन के क्षेत्र हैं जो रूस-यूक्रेन संघर्ष में केंद्रबिंदु रहे हैं, इज़रायल और लेबनान के बीच किसी विवाद से संबंधित नहीं हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: हाल के वैश्विक संघर्ष क्षेत्र
| क्षेत्र | स्थान | वास्तविक संघर्ष/मुद्दा |
|---|---|---|
| उत्तरी किवु और इतुरी | कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) | जातीय संघर्ष, M23 विद्रोही विद्रोह, विस्थापन संकट |
| नागोर्नो-काराबाख | दक्षिण काकेशस (आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच विवादित) | क्षेत्रीय विवाद; 2020 युद्ध के परिणामस्वरूप अज़रबैजान का नियंत्रण; 2023 सैन्य अभियान से आर्मेनियाई लोगों का पलायन |
| खेरसॉन और ज़ापोरिज़िया | दक्षिणी यूक्रेन | रूस द्वारा विलय (2022); रूस-यूक्रेन युद्ध में सक्रिय युद्धक्षेत्र; ज़ापोरिज़िया परमाणु ऊर्जा संयंत्र सुरक्षा चिंताएं |
| काबो डेलगाडो | उत्तरी मोज़ाम्बिक | 2017 से इस्लामी विद्रोह; ISIS से संबद्ध समूह; गैस-समृद्ध क्षेत्र |
| इज़रायल-लेबनान सीमा | मध्य पूर्व | हिज़्बुल्लाह से जुड़े तनाव; विवादित समुद्री सीमाएं; आंतरायिक सीमा पार घटनाएं |
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और यूरोपीय संघ (EU) ने 'व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद' की शुरुआत की है।
कथन-II: USA और EU का दावा है कि इसके माध्यम से वे तकनीकी प्रगति और भौतिक उत्पादकता को अपने नियंत्रण में लाने का प्रयास कर रहे हैं।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कथन-I सही है लेकिन कथन-II गलत है
संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ ने वास्तव में जून 2021 में व्यापार, आर्थिक और प्रौद्योगिकी मुद्दों पर ट्रान्सअटलांटिक सहयोग बढ़ाने के लिए व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की शुरुआत की। हालांकि, कथन-II में TTC के उद्देश्य को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
✅ कथन-I – सही: USA और EU ने 15 जून, 2021 को ब्रुसेल्स में EU-US शिखर सम्मेलन में वैश्विक व्यापार, आर्थिक और प्रौद्योगिकी चुनौतियों के प्रति दृष्टिकोण समन्वित करने के लिए व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की औपचारिक शुरुआत की।
❌ कथन-II – गलत: TTC का उद्देश्य तकनीकी प्रगति और भौतिक उत्पादकता को "अपने नियंत्रण में लाना" नहीं है; बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकी मानकों पर समन्वय करने, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को दूर करने, निवेश जांच को बढ़ाने, और खुले बाजारों और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखते हुए प्रौद्योगिकी के सत्तावादी उपयोग का मुकाबला करने का प्रयास करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: US-EU व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC)
- शुरुआत: 15 जून, 2021, ब्रुसेल्स में EU-US शिखर सम्मेलन में
- उद्देश्य: ट्रान्सअटलांटिक व्यापार और निवेश संबंधों का विस्तार और गहनता; प्रौद्योगिकी, डिजिटल मुद्दों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दृष्टिकोण समन्वित करना
- मुख्य फोकस क्षेत्र: प्रौद्योगिकी मानक सहयोग, सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला, डेटा शासन, निर्यात नियंत्रण, निवेश जांच, जलवायु और स्वच्छ प्रौद्योगिकी, और प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग का मुकाबला
- संरचना: अमेरिकी पक्ष से विदेश मंत्री और वाणिज्य सचिव और EU पक्ष से यूरोपीय आयोग के कार्यकारी उपाध्यक्षों द्वारा सह-अध्यक्षता
- कार्य समूह: AI, सेमीकंडक्टर, डेटा शासन और ICT सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को कवर करने वाले दस कार्य समूह
- रणनीतिक संदर्भ: चीन और अन्य गैर-बाजार अर्थव्यवस्थाओं से चुनौतियों का सामना करने और प्रौद्योगिकी शासन में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए नवीनीकृत ट्रान्सअटलांटिक सहयोग का हिस्सा
हाल के वर्षों में चाड, गिनी, माली और सूडान ने निम्नलिखित में से किस एक कारण से अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया, जो उन सभी में समान है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — सफल सैन्य तख्तापलट
चाड, गिनी, माली और सूडान सभी ने हाल के वर्षों में सफल सैन्य तख्तापलट का अनुभव किया है, जो अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने वाला सामान्य कारक है। चाड ने 2021 में राष्ट्रपति इद्रिस डेबी की मृत्यु के बाद सैन्य अधिग्रहण देखा, गिनी ने सितंबर 2021 में राष्ट्रपति अल्फा कोंडे को उखाड़ फेंकने वाला एक तख्तापलट का अनुभव किया, माली ने दो तख्तापलट (अगस्त 2020 और मई 2021 में) का सामना किया, और सूडान ने अप्रैल 2019 में एक सैन्य तख्तापलट किया जिसने राष्ट्रपति उमर अल-बशीर को हटा दिया, इसके बाद अक्टूबर 2021 में एक और तख्तापलट हुआ। इन सैन्य अधिग्रहणों ने लोकतांत्रिक पतन, राजनीतिक अस्थिरता, मानवाधिकार उल्लंघन और अफ्रीका में क्षेत्रीय सुरक्षा के बारे में महत्वपूर्ण चिंताएं उठाई हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अफ्रीका में हाल के सैन्य तख्तापलट
| देश | तख्तापलट की तारीख(ें) | प्रमुख विवरण |
|---|---|---|
| चाड | अप्रैल 2021 | राष्ट्रपति इद्रिस डेबी की मृत्यु के बाद सैन्य परिषद ने सत्ता संभाली; उनके बेटे महामत डेबी ने नेतृत्व संभाला |
| गिनी | सितंबर 2021 | कर्नल ममाडी दूम्बुया ने राष्ट्रपति अल्फा कोंडे के खिलाफ तख्तापलट का नेतृत्व किया; संवैधानिक संशोधन मुद्दा उद्धृत |
| माली | अगस्त 2020, मई 2021 | पहले तख्तापलट ने राष्ट्रपति इब्राहिम बूबाकर केइता को हटाया; दूसरे तख्तापलट में कर्नल असिमी गोइटा ने अंतरिम नेताओं को हटाया |
| सूडान | अप्रैल 2019, अक्टूबर 2021 | 2019 के तख्तापलट ने उमर अल-बशीर के 30 साल के शासन को समाप्त किया; 2021 के तख्तापलट ने नागरिक शासन में संक्रमण को बाधित किया |
- क्षेत्रीय प्रभाव: ये तख्तापलट अफ्रीका के साहेल और उप-सहारा क्षेत्रों में व्यापक लोकतांत्रिक चुनौतियों को दर्शाते हैं
- अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया: अफ्रीकी संघ, ECOWAS और संयुक्त राष्ट्र ने इन सैन्य अधिग्रहणों की निंदा की और प्रतिबंध लगाए
- सामान्य कारक: भ्रष्टाचार, आर्थिक कुप्रबंधन, सुरक्षा चिंताएं और विवादित चुनाव अधिकांश तख्तापलटों से पहले हुए
- लोकतंत्र संबंधी चिंताएं: तख्तापलटों की लहर अफ्रीका में लोकतांत्रिक शासन के लिए महत्वपूर्ण झटका दर्शाती है
होम गार्ड्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- होम गार्ड्स की स्थापना केंद्र सरकार के होम गार्ड्स अधिनियम और नियमों के तहत की जाती है।
- होम गार्ड्स की भूमिका आंतरिक सुरक्षा के रखरखाव में पुलिस के सहायक बल के रूप में कार्य करना है।
- अंतर्राष्ट्रीय सीमा/तटीय क्षेत्रों में घुसपैठ को रोकने के लिए, कुछ राज्यों में बॉर्डर विंग होम गार्ड्स बटालियनों का गठन किया गया है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
होम गार्ड्स के बारे में तीन कथनों में से दो सही हैं (कथन 2 और 3), जबकि कथन 1 गलत है क्योंकि होम गार्ड्स की स्थापना राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के अधिनियमों और नियमों के तहत की जाती है, न कि केंद्र सरकार द्वारा।
❌ कथन 1 – गलत: होम गार्ड्स की स्थापना राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के होम गार्ड्स अधिनियम और नियमों के तहत की जाती है, न कि केंद्र सरकार द्वारा। इनकी भर्ती उन स्वयंसेवकों से की जाती है जो सामुदायिक सेवा के लिए अपना खाली समय देते हैं।
✅ कथन 2 – सही: होम गार्ड्स आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने में पुलिस के सहायक बल के रूप में कार्य करते हैं, आपातकाल (हवाई हमले, आग, चक्रवात, भूकंप, महामारी) के दौरान सहायता करते हैं, आवश्यक सेवाओं का रखरखाव करते हैं, सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं, और नागरिक रक्षा कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।
✅ कथन 3 – सही: सीमावर्ती राज्यों—पंजाब (6), राजस्थान (4), गुजरात (2), और मेघालय, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल में एक-एक—में पंद्रह बॉर्डर विंग होम गार्ड्स (BWHG) बटालियनों का गठन किया गया है ताकि अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं/तटीय क्षेत्रों पर घुसपैठ रोकने में सीमा सुरक्षा बल की सहायता की जा सके।
📝 संक्षिप्त नोट्स: होम गार्ड्स
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| कानूनी आधार | राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के होम गार्ड्स अधिनियम और नियमों के तहत गठित (केंद्र सरकार द्वारा नहीं) |
| प्रकृति | सामुदायिक सेवा के लिए खाली समय देने वाले नागरिकों का स्वैच्छिक बल |
| प्राथमिक भूमिका | आंतरिक सुरक्षा रखरखाव में पुलिस के सहायक |
| कार्य | आपातकालीन प्रतिक्रिया (प्राकृतिक आपदाएं, आग आदि), नागरिक रक्षा कर्तव्य, सांप्रदायिक सद्भाव, आवश्यक सेवाओं का रखरखाव |
| बॉर्डर विंग होम गार्ड्स (BWHG) | सीमावर्ती राज्यों में 15 बटालियन: पंजाब (6), राजस्थान (4), गुजरात (2), मेघालय (1), त्रिपुरा (1), पश्चिम बंगाल (1) |
| BWHG भूमिका | सीमाओं/तटीय क्षेत्रों पर घुसपैठ रोकने, संवेदनशील क्षेत्रों/बिंदुओं की सुरक्षा के लिए BSF के सहायक |
UPSC Prelims 2023 - अंतरराष्ट्रीय संबंध Chapter-wise Distribution
अंतरराष्ट्रीय संबंध समसामयिकी
5 Qs (45.5%)अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय संगठन
3 Qs (27.3%)वैश्विक शासन एवं वैश्विक मुद्दे
2 Qs (18.2%)अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा
1 Qs (9.1%)UPSC Prelims 2023 - अंतरराष्ट्रीय संबंध Questions FAQs
Q1 How many अंतरराष्ट्रीय संबंध questions were asked in UPSC Prelims 2023?
Q2 What is the chapter-wise question distribution for अंतरराष्ट्रीय संबंध in UPSC Prelims 2023?
- अंतरराष्ट्रीय संबंध समसामयिकी: 5 questions (45.5%)
- अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय संगठन: 3 questions (27.3%)
- वैश्विक शासन एवं वैश्विक मुद्दे: 2 questions (18.2%)
- अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा: 1 questions (9.1%)