UPSC CSE Prelims
क्षेत्रीय संगठन और समूह Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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भारत इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के संस्थापक सदस्यों में से एक है, जो एक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्टेशन कॉरिडोर है, जो जुड़ेगा
Detailed Explanation:
INSTC भारत → ईरान → मध्य एशिया/रूस → यूरोप को जोड़ता है, समुद्र, रेल और सड़क के मिश्रण से।
मार्ग इस प्रकार है: मुंबई (भारत) → बंदर अब्बास (ईरान) → अज़रबैजान/रूस → यूरोप, साथ ही मध्य एशिया तक भी शाखाएँ।
अन्य विकल्प गलत क्यों:
| विकल्प | समस्या |
|---|---|
| विकल्प 2 | गलत मार्ग — INSTC ईरान से होकर जाता है, चीन से नहीं |
| विकल्प 3 | पूरी तरह अलग गलियारा — यह एक्ट ईस्ट पॉलिसी से संबंधित है |
| विकल्प 4 | अधूरा — अज़रबैजान केवल एक पड़ाव है, पूरा मार्ग ईरान से पहले शुरू होता है |
📝 संक्षिप्त नोट्स: INSTC
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा |
| स्थापना | 2000, भारत, ईरान और रूस द्वारा |
| प्रकार | बहुविधि (समुद्र + रेल + सड़क) |
| मार्ग | मुंबई → बंदर अब्बास (ईरान) → कैस्पियन सागर/अज़रबैजान/रूस → यूरोप |
| लंबाई | ~7,200 किमी |
| उद्देश्य | भारत-यूरोप/मध्य एशिया/रूस के बीच समय/लागत कम करना |
| भारत के लिए महत्व | पाकिस्तान को बायपास करता है; स्वेज नहर मार्ग पर निर्भरता कम |
| चाबहार बंदरगाह संबंध | ईरान का चाबहार बंदरगाह एक प्रमुख नोड, भारत की सहायता से विकसित |
निम्नलिखित देशों पर विचार करें:
I. ऑस्ट्रिया
II. बुल्गारिया
III. क्रोएशिया
IV. सर्बिया
V. स्वीडन
VI. उत्तर मैसेडोनिया
उपरोक्त में से कितने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन के सदस्य हैं?
Detailed Explanation:
दिए गए देशों में बुल्गारिया, क्रोएशिया, स्वीडन और नॉर्थ मैसेडोनिया NATO के सदस्य हैं।
-
❌ ऑस्ट्रिया NATO का सदस्य नहीं है और तटस्थता की नीति अपनाता है।
-
❌ सर्बिया NATO का सदस्य नहीं है, हालांकि वह Partnership for Peace कार्यक्रम में शामिल है।
-
✅ बुल्गारिया, ✅ क्रोएशिया, ✅ स्वीडन और ✅ नॉर्थ मैसेडोनिया NATO सदस्य हैं।
इस प्रकार, कुल 4 देश NATO के सदस्य हैं।
देशवार स्थिति:
| देश | NATO सदस्य? |
|---|---|
| ऑस्ट्रिया | ❌ नहीं |
| बुल्गारिया | ✅ हाँ |
| क्रोएशिया | ✅ हाँ |
| सर्बिया | ❌ नहीं |
| स्वीडन | ✅ हाँ |
| नॉर्थ मैसेडोनिया | ✅ हाँ |
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. भारत खनिज सुरक्षा साझेदारी में सदस्य के रूप में शामिल हो गया है।
II. भारत उन सभी 30 महत्वपूर्ण खनिजों में एक संसाधन संपन्न देश है जिनकी उसने पहचान की है।
III. संसद ने 2023 में खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन किया है, जिससे केंद्र सरकार को कुछ महत्वपूर्ण खनिजों के लिए विशेष रूप से खनन पट्टे और मिश्रित लाइसेंस की नीलामी करने का अधिकार मिल गया है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (केवल I और III)
क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और रक्षा उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत ने इनके सुरक्षित और विश्वसनीय स्रोत सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तरों पर कदम उठाए हैं।
✅ कथन I सही है: भारत 2023 में Minerals Security Partnership का सदस्य बना ताकि महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा सके।
❌ कथन II गलत है: भारत सरकार द्वारा पहचाने गए सभी 30 क्रिटिकल मिनरल्स में भारत संसाधन-संपन्न नहीं है। लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और ग्रेफाइट जैसे कई खनिजों के लिए भारत आयात पर निर्भर है।
✅ कथन III सही है: Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2023 के तहत केंद्र सरकार को कुछ महत्वपूर्ण खनिजों के लिए खनन पट्टों और कंपोजिट लाइसेंस की नीलामी का विशेष अधिकार दिया गया।
Short Notes: Critical Minerals in India
-
क्रिटिकल मिनरल्स नवीकरणीय ऊर्जा, EV, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक हैं।
-
भारत ने 30 क्रिटिकल मिनरल्स की पहचान की है।
-
भारत 2023 में Minerals Security Partnership (MSP) में शामिल हुआ।
-
MSP का उद्देश्य सुरक्षित और टिकाऊ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना है।
-
प्रमुख खनिज: लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स।
-
MMDR Amendment Act, 2023 ने महत्वपूर्ण खनिजों के खनन को बढ़ावा देने हेतु सुधार किए।
-
कई रणनीतिक खनिजों के लिए भारत अभी भी आयात पर निर्भर है।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
यूरोपीय संघ का 'स्थिरता और विकास संधिपत्र' (Stability and Growth Pact) एक संधि है जो
- यूरोपीय संघ के देशों के बजटीय घाटे के स्तर को सीमित करती है
- यूरोपीय संघ के देशों को अपनी अवसंरचना सुविधाओं को साझा करने के लिए बाध्य करती है
- यूरोपीय संघ के देशों को अपनी प्रौद्योगिकियों को साझा करने में सक्षम बनाती है
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल एक
स्थिरता और विकास संधिपत्र (SGP) 27 यूरोपीय संघ सदस्य देशों के बीच एक समझौता है जो यूरोपीय संघ के भीतर राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मुख्य रूप से निगरानी और सुधारात्मक तंत्रों के माध्यम से सदस्य देशों के बजट घाटे और सार्वजनिक ऋण स्तरों को नियंत्रित करने पर केंद्रित है।
✅ कथन 1 – सही: SGP अत्यधिक घाटा प्रक्रिया (EDP) के माध्यम से बजटीय घाटे को सीमित करता है, जिसमें सदस्य देशों को घाटा GDP के 3% से कम और ऋण GDP के 60% से कम रखना आवश्यक है।
❌ कथन 2 – गलत: SGP एक राजकोषीय शासन ढांचा है और यूरोपीय संघ के देशों के बीच अवसंरचना सुविधाओं को साझा करने को अनिवार्य नहीं बनाता है।
❌ कथन 3 – गलत: प्रौद्योगिकी साझाकरण SGP के अधिदेश का हिस्सा नहीं है, जो केवल राजकोषीय नीति समन्वय और बजटीय अनुशासन पर केंद्रित है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्थिरता और विकास संधिपत्र (SGP)
- स्थापना: 1997, यूरो की शुरुआत के साथ 1999 में लागू
- सदस्य: सभी 27 यूरोपीय संघ सदस्य देश (19 यूरोज़ोन + 8 गैर-यूरोज़ोन देश)
- मुख्य उद्देश्य: यूरोपीय संघ के भीतर राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना
- प्रमुख राजकोषीय नियम: बजट घाटा GDP के 3% से अधिक नहीं होना चाहिए; सार्वजनिक ऋण GDP के 60% से अधिक नहीं होना चाहिए
- दो भुजाएँ: (1) निवारक भुजा - राजकोषीय योजनाओं और नीति समन्वय की निगरानी करती है; (2) सुधारात्मक भुजा - उल्लंघनकर्ताओं के लिए अत्यधिक घाटा प्रक्रिया लागू करती है
- निगरानी निकाय: यूरोपीय आयोग और यूरोपीय संघ की परिषद अनुपालन को ट्रैक करते हैं
- सुधार: सख्त प्रवर्तन के लिए 2011-2013 में 'सिक्स-पैक' और 'टू-पैक' कानून के माध्यम से मजबूत किया गया
निम्नलिखित देशों पर विचार कीजिए:
- आर्मेनिया
- अज़रबैजान
- क्रोएशिया
- रोमानिया
- उज़्बेकिस्तान
उपर्युक्त में से कौन तुर्किक राज्यों के संगठन के सदस्य हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 2 और 5
तुर्किक राज्यों का संगठन (OTS), जिसे पूर्व में तुर्किक काउंसिल के नाम से जाना जाता था, तुर्किक भाषी राष्ट्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है। सूचीबद्ध देशों में से केवल अज़रबैजान (संस्थापक सदस्य) और उज़्बेकिस्तान (2019 में शामिल हुआ) OTS के पूर्ण सदस्य हैं।
✅ कथन 2 – सही: अज़रबैजान 2009 में स्थापित तुर्किक राज्यों के संगठन का एक संस्थापक सदस्य है।
✅ कथन 5 – सही: उज़्बेकिस्तान 2019 में तुर्किक राज्यों के संगठन का पूर्ण सदस्य बना।
❌ कथन 1 – गलत: आर्मेनिया तुर्किक राज्यों के संगठन का सदस्य नहीं है; यह मुख्य रूप से अर्मेनियाई जातीयता वाला एक इंडो-यूरोपीय राष्ट्र है।
❌ कथन 3 – गलत: क्रोएशिया तुर्किक राज्यों के संगठन का सदस्य नहीं है; यह एक स्लाविक यूरोपीय राष्ट्र और EU सदस्य है।
❌ कथन 4 – गलत: रोमानिया तुर्किक राज्यों के संगठन का सदस्य नहीं है; यह एक रोमांस भाषा बोलने वाला यूरोपीय राष्ट्र है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: तुर्किक राज्यों का संगठन
- स्थापना: अक्टूबर 2009 में तुर्किक काउंसिल के रूप में; नवंबर 2021 में तुर्किक राज्यों का संगठन के रूप में नामकरण
- पूर्ण सदस्य (5): अज़रबैजान, कज़ाकिस्तान, किर्गिज़स्तान, तुर्की और उज़्बेकिस्तान
- पर्यवेक्षक राज्य (3): हंगरी, तुर्कमेनिस्तान और उत्तरी साइप्रस तुर्की गणराज्य
- उद्देश्य: तुर्किक भाषी राज्यों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा क्षेत्रों में व्यापक सहयोग को बढ़ावा देना
- सचिवालय: इस्तांबुल, तुर्की में स्थित
- साझा विरासत: साझा तुर्किक भाषाई, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों पर आधारित
निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक
- मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था
- शंघाई सहयोग संगठन
भारत उपर्युक्त में से किसका सदस्य है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
भारत प्रश्न में उल्लिखित तीनों संगठनों का सदस्य है। भारत 2015 में एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (AIIB) में संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल हुआ और चीन के बाद इसका दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है। भारत 27 जून 2016 को मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR) का 35वां भागीदार देश बनकर पूर्ण सदस्य बना। भारत 2017 में पाकिस्तान के साथ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का पूर्ण सदस्य बना।
✅ कथन 1 – सही: भारत AIIB का संस्थापक सदस्य (2015) है और चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखता है।
✅ कथन 2 – सही: भारत जून 2016 में MTCR का 35वां सदस्य बना, जिससे महत्वपूर्ण मिसाइल और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों तक पहुंच मिली।
✅ कथन 3 – सही: भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना, अपनी पूर्व पर्यवेक्षक स्थिति से उन्नत होकर।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भारत की सदस्यता
| संगठन | भारत की सदस्यता का वर्ष | प्रमुख विवरण |
|---|---|---|
| एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (AIIB) | 2015 (संस्थापक सदस्य) | मुख्यालय बीजिंग में; भारत 7.6% मतदान अधिकार के साथ दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक; 2024 तक 109 सदस्य |
| मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR) | 2016 (35वां सदस्य) | सामूहिक विनाश के हथियारों के लिए मानव रहित वितरण प्रणालियों के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से अनौपचारिक राजनीतिक साझेदारी; 35 सदस्य |
| शंघाई सहयोग संगठन (SCO) | 2017 (पूर्ण सदस्य) | यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन; 10 पूर्ण सदस्य; भारत 2005 से पर्यवेक्षक था; पाकिस्तान के साथ शामिल हुआ |
एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (AIIB) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- AIIB के 80 से अधिक सदस्य देश हैं।
- भारत AIIB में सबसे बड़ा शेयरधारक है।
- AIIB में एशिया के बाहर का कोई भी सदस्य नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (AIIB) एक बहुपक्षीय विकास बैंक है जिसकी स्थापना 2016 में बीजिंग में मुख्यालय के साथ की गई थी। तीन कथनों में से केवल AIIB के 80 से अधिक सदस्य देशों के बारे में पहला कथन सही है।
✅ कथन 1 – सही: AIIB के 80 से अधिक सदस्य देश हैं (2024 तक, इसके विश्व भर से 109 स्वीकृत सदस्य हैं)।
❌ कथन 2 – गलत: भारत AIIB में दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है जिसके पास लगभग 7.5% मतदान हिस्सेदारी है, जबकि चीन लगभग 26.6% मतदान हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा शेयरधारक है।
❌ कथन 3 – गलत: AIIB में एशिया के बाहर के सदस्य हैं, जिनमें कई यूरोपीय देश (जैसे यूके, जर्मनी, फ्रांस), साथ ही दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और ओशिनिया के सदस्य शामिल हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (AIIB)
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| स्थापना | जनवरी 2016 |
| मुख्यालय | बीजिंग, चीन |
| कुल सदस्य | 109 स्वीकृत सदस्य (2024 तक) |
| सबसे बड़ा शेयरधारक | चीन (~26.6% मतदान हिस्सेदारी) |
| दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक | भारत (~7.5% मतदान हिस्सेदारी) |
| उद्देश्य | एशिया-प्रशांत में अवसंरचना विकास और क्षेत्रीय संपर्क |
| वैश्विक पहुंच | एशिया, यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और ओशिनिया के सदस्य |
| प्रमुख फोकस क्षेत्र | सतत अवसंरचना, हरित ऊर्जा, परिवहन, शहरी विकास |
निम्नलिखित में से किसने अप्रैल 2016 में अपने नागरिकों के लिए डेटा संरक्षण और गोपनीयता पर 'जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन' नामक कानून अपनाया और 25 मई, 2018 से इसका कार्यान्वयन शुरू किया?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — यूरोपीय संघ
जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) को यूरोपीय संघ द्वारा अप्रैल 2016 में अपनाया गया था और 25 मई 2018 से लागू किया गया था। यह यूरोपीय संघ के नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा और गोपनीयता अधिकारों की रक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया एक व्यापक कानूनी ढांचा है, जो डेटा संग्रह, प्रसंस्करण और भंडारण के लिए कड़े मानक निर्धारित करता है और भौगोलिक स्थान की परवाह किए बिना यूरोपीय संघ के निवासियों के डेटा को संभालने वाले किसी भी संगठन पर लागू होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR)
- अपनाना और कार्यान्वयन: यूरोपीय संघ द्वारा अप्रैल 2016 में अपनाया गया; 25 मई 2018 को लागू हुआ।
- दायरा: यूरोपीय संघ/EEA निवासियों के व्यक्तिगत डेटा को संसाधित करने वाले सभी संगठनों पर लागू होता है, चाहे संगठन की स्थिति कुछ भी हो।
- प्रमुख सिद्धांत: वैधता, निष्पक्षता, पारदर्शिता, उद्देश्य सीमा, डेटा न्यूनीकरण, सटीकता, भंडारण सीमा, अखंडता और गोपनीयता।
- व्यक्तिगत अधिकार: पहुंच का अधिकार, सुधार, विलोपन (भुलाए जाने का अधिकार), प्रसंस्करण पर प्रतिबंध, डेटा पोर्टेबिलिटी और आपत्ति।
- दंड: गंभीर उल्लंघनों के लिए संगठनों को €20 मिलियन या वार्षिक वैश्विक कारोबार का 4% तक जुर्माना हो सकता है, जो भी अधिक हो।
- डेटा संरक्षण अधिकारी: कुछ संगठनों को GDPR अनुपालन की देखरेख के लिए एक DPO नियुक्त करना होगा।
- भारत पर प्रभाव: यूरोपीय संघ के नागरिकों के डेटा को संभालने वाली भारतीय कंपनियों को GDPR का पालन करना होगा; भारत के व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक चर्चाओं को प्रभावित किया।
'परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह' (Nuclear Suppliers Group) का सदस्य बनने के किसी देश के लिए क्या परिणाम/परिणाम है/हैं?
- इसे नवीनतम और सबसे कुशल परमाणु प्रौद्योगिकियों तक पहुंच प्राप्त होगी।
- यह स्वतः ही "परमाणु अप्रसार संधि (NPT)" का सदस्य बन जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) एक बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था है जो शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकी की आपूर्ति को विनियमित करती है। सदस्यता उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों तक पहुंच प्रदान करती है और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु वाणिज्य को सुगम बनाती है, लेकिन यह स्वतः NPT सदस्यता प्रदान नहीं करती है।
✅ कथन 1 – सही: NSG सदस्य नवीनतम और सबसे कुशल परमाणु प्रौद्योगिकियों तक पहुंच प्राप्त करते हैं क्योंकि यह समूह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए सदस्य देशों के बीच परमाणु सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकी में व्यापार को सुगम बनाता है।
❌ कथन 2 – गलत: NSG सदस्यता स्वतः किसी देश को NPT का सदस्य नहीं बनाती; ये अलग-अलग ढांचे हैं जिनके भिन्न सदस्यता मानदंड और उद्देश्य हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG)
- गठन: 1975 में भारत के 1974 के परमाणु परीक्षण (पोखरण-I) के जवाब में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए स्थापित।
- मुख्यालय: वियना, ऑस्ट्रिया (प्रशासनिक रूप से IAEA के अंतर्गत)।
- सदस्य: अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और जापान सहित 48 देश।
- उद्देश्य: परमाणु हथियारों के लिए उनके उपयोग को रोकने के लिए परमाणु सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकी के निर्यात को नियंत्रित करना।
- दिशानिर्देश: दो सेट – भाग 1 (परमाणु सामग्री और उपकरणों की ट्रिगर सूची) और भाग 2 (दोहरे उपयोग की वस्तुएं)।
- निर्णय-निर्माण: सर्वसम्मति के आधार पर संचालित; नई सदस्यता के लिए सभी सदस्यों को सहमत होना आवश्यक है।
- भारत की स्थिति: अमेरिकी समर्थन के बावजूद सदस्य नहीं; चीन भारत की गैर-NPT स्थिति का हवाला देते हुए प्रमुख अवरोधक रहा है।
- भारत-NSG छूट (2008): भारत को NSG सदस्य या NPT हस्ताक्षरकर्ता बने बिना परमाणु व्यापार की अनुमति देने वाली विशेष छूट प्राप्त हुई।
शब्द 'क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी' अक्सर समाचारों में किस देशों के समूह के संदर्भ में दिखाई देता है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — आसियान
क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) नवंबर 2020 में हस्ताक्षरित एक विशाल मुक्त व्यापार समझौता है जिसमें आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन) और इसके पांच प्रमुख व्यापारिक भागीदार — चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। आसियान इस साझेदारी के केंद्र में है, जो इसे विश्व की सकल घरेलू उत्पाद और जनसंख्या के लगभग 30% को कवर करने वाला सबसे बड़ा क्षेत्रीय व्यापार समूह बनाता है। भारत शुरू में बातचीत का हिस्सा था लेकिन 2019 में व्यापार घाटे और घरेलू उद्योगों पर प्रभाव की चिंताओं का हवाला देते हुए हट गया। यह समझौता जनवरी 2022 में लागू हुआ और इसका उद्देश्य शुल्क कम करना, व्यापार नियमों को सुव्यवस्थित करना और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक एकीकरण को बढ़ाना है।
निम्नलिखित में से कौन 'खाड़ी सहयोग परिषद' का सदस्य नहीं है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — ईरान
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) एक क्षेत्रीय राजनीतिक और आर्थिक संघ है जिसकी स्थापना 25 मई 1981 को हुई थी। इसमें फारस की खाड़ी के छह अरब राज्य शामिल हैं: बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात। ईरान, खाड़ी क्षेत्र का देश होने के बावजूद, अरब सदस्य राज्यों के साथ राजनीतिक, सांप्रदायिक और वैचारिक मतभेदों के कारण GCC का सदस्य नहीं है।
भारत निम्नलिखित में से किसका सदस्य है?
- एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग।
- दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ।
- पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: भारत APEC (एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग) का सदस्य नहीं है; उसने सदस्यता मांगी है लेकिन कुछ मौजूदा सदस्यों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
❌ कथन 2 – गलत: भारत ASEAN (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ) का सदस्य नहीं है, हालांकि यह क्षेत्रीय संवाद भागीदार (1992) और पूर्ण संवाद भागीदार (1995) है।
✅ कथन 3 – सही: भारत पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) का संस्थापक सदस्य है, जो 2005 में स्थापित हुआ और क्षेत्रीय रणनीतिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच है।
'इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (IOR-ARC)' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह समुद्री डकैती की घटनाओं और तेल रिसाव की दुर्घटनाओं के जवाब में हाल ही में स्थापित किया गया था
- यह केवल समुद्री सुरक्षा के लिए एक गठबंधन है
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: IOR-ARC (इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन) की स्थापना मार्च 1997 में मॉरीशस में हुई थी, हाल ही में नहीं, और इसका उद्देश्य हिंद महासागर के तटवर्ती देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना था, न कि समुद्री डकैती या तेल रिसाव के जवाब में।
❌ कथन 2 – गलत: IOR-ARC एक बहु-क्षेत्रीय क्षेत्रीय सहयोग मंच है जो व्यापार, निवेश, पर्यटन, मत्स्य पालन और सांस्कृतिक सहयोग को कवर करता है, केवल समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं है।
निम्नलिखित देशों पर विचार कीजिए:
- डेनमार्क
- जापान
- रूसी संघ
- यूनाइटेड किंगडम
- संयुक्त राज्य अमेरिका
उपर्युक्त में से कौन से 'आर्कटिक काउंसिल' के सदस्य हैं?
Detailed Explanation:
✅ डेनमार्क (1) – सही: आर्कटिक काउंसिल का सदस्य राष्ट्र है जो डेनमार्क राज्य का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें ग्रीनलैंड और फरो द्वीप समूह शामिल हैं।
❌ जापान (2) – गलत: आर्कटिक काउंसिल में पर्यवेक्षक का दर्जा रखता है, सदस्य राष्ट्र नहीं है।
✅ रूसी संघ (3) – सही: आर्कटिक वृत्त के भीतर भूमि पर संप्रभुता वाले आठ राष्ट्रों में से एक होने के कारण सदस्य राष्ट्र है।
❌ यूनाइटेड किंगडम (4) – गलत: आर्कटिक काउंसिल में पर्यवेक्षक का दर्जा रखता है, सदस्य राष्ट्र नहीं है।
✅ संयुक्त राज्य अमेरिका (5) – सही: आर्कटिक क्षेत्र के भीतर अपने अलास्का क्षेत्र के कारण सदस्य राष्ट्र है।
आर्कटिक काउंसिल में आठ सदस्य राष्ट्र हैं: कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, रूसी संघ, स्वीडन और संयुक्त राज्य अमेरिका।
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