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संसद Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: संसद
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भारत की संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सी संसदीय समिति इस बात की जांच करती है और सदन को रिपोर्ट करती है कि क्या संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रत्यायोजित विनियम, नियम, उप-नियम, उप-विधियां आदि बनाने की शक्तियों का कार्यपालिका द्वारा ऐसे प्रत्यायोजन के दायरे में उचित रूप से प्रयोग किया जा रहा है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — अधीनस्थ विधान समिति
अधीनस्थ विधान समिति (CSL) को विशेष रूप से यह जांच करने और संसद को रिपोर्ट करने का अधिदेश प्राप्त है कि क्या विनियम, नियम, उप-नियम, उप-विधियां आदि बनाने की शक्तियां, जो संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रत्यायोजित हैं, कार्यपालिका द्वारा ऐसे प्रत्यायोजन के दायरे में उचित रूप से प्रयोग की जा रही हैं। यह समिति सुनिश्चित करती है कि कार्यपालिका अपने प्रत्यायोजित अधिकार से अधिक न जाए और सभी अधीनस्थ विधान मूल अधिनियम और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हों।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
❌ विकल्प 1 – सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति: यह समिति संसद में मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों, वादों और प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन को ट्रैक करती है, न कि अधीनस्थ विधान को।
❌ विकल्प 3 – नियम समिति: यह समिति सदन में प्रक्रिया और कार्य संचालन को विनियमित करने के लिए नियमों को बनाने और संशोधित करने से संबंधित है।
❌ विकल्प 4 – कार्य मंत्रणा समिति: यह समिति सदन में सरकारी और अन्य कार्यों की चर्चा के लिए समय आवंटित करती है और प्रत्यायोजित विधान की जांच नहीं करती।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संसदीय समितियां
| समिति | प्राथमिक कार्य |
|---|---|
| अधीनस्थ विधान समिति | यह जांच करती है कि क्या प्रत्यायोजित शक्तियां (नियम, विनियम, उप-विधियां बनाने के लिए) संवैधानिक और वैधानिक सीमाओं के भीतर कार्यपालिका द्वारा उचित रूप से प्रयोग की जा रही हैं |
| सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति | संसद में मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों, वादों और प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन की निगरानी करती है |
| नियम समिति | सदन में प्रक्रिया और कार्य संचालन को विनियमित करने वाले नियमों को बनाती और संशोधित करती है |
| कार्य मंत्रणा समिति | सदन में विधायी और अन्य कार्यों की चर्चा के लिए समय आवंटित करती है |
| याचिका समिति | सामान्य जनहित के मामलों पर नागरिकों की याचिकाओं और अभ्यावेदन की जांच करती है |
धन विधेयक के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — धन विधेयक भारत की आकस्मिकता निधि से धन के विनियोग से संबंधित होता है।
यह कथन गलत है क्योंकि भारत की आकस्मिकता निधि, जो अनुच्छेद 267 के तहत स्थापित है, अप्रत्याशित व्यय को पूरा करने के लिए राष्ट्रपति के निपटान में होती है। इस निधि से निकासी धन विधेयक द्वारा शासित नहीं होती है बल्कि बाद में संसद द्वारा पारित विनियोग विधेयक के माध्यम से नियमित की जाती है।
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 110(1)(a) स्पष्ट रूप से कहता है कि धन विधेयक में किसी कर के अधिरोपण, उन्मूलन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन से संबंधित प्रावधान होते हैं।
✅ कथन 2 – सही: अनुच्छेद 110(1)(c) प्रावधान करता है कि धन विधेयक में भारत की संचित निधि या भारत की आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा से संबंधित प्रावधान हो सकते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: आकस्मिकता निधि से धन का विनियोग धन विधेयक द्वारा शासित नहीं होता है; यह राष्ट्रपति के निपटान में होता है और बाद में विनियोग विधेयक के माध्यम से नियमित किया जाता है।
✅ कथन 4 – सही: अनुच्छेद 110(1)(d) कहता है कि भारत सरकार द्वारा धन उधार लेने या गारंटी देने से संबंधित प्रावधान धन विधेयक के दायरे में आते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: धन विधेयक (अनुच्छेद 110)
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक प्रावधान | भारतीय संविधान का अनुच्छेद 110 धन विधेयक को परिभाषित करता है |
| दायरा (अनुच्छेद 110(1)) | (a) किसी कर का अधिरोपण, उन्मूलन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन (b) भारत सरकार द्वारा धन उधार लेने या गारंटी देने का विनियमन (c) भारत की संचित निधि/आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा (d) भारत की संचित निधि से धन का विनियोग (e) संचित निधि पर भारित व्यय की घोषणा (f) संचित निधि/लोक लेखा में धन की प्राप्ति (g) इन मामलों से संबंधित कोई आनुषंगिक मामला |
| प्रमाणीकरण | लोकसभा अध्यक्ष प्रमाणित करते हैं कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं (अंतिम और निर्णायक) |
| प्रस्तुति | केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है (राज्यसभा में नहीं) |
| राज्यसभा की भूमिका | केवल 14 दिनों के भीतर सिफारिशें कर सकती है; लोकसभा उन्हें स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है |
| राष्ट्रपति की स्वीकृति | आवश्यक है, लेकिन राष्ट्रपति स्वीकृति रोक नहीं सकते (साधारण विधेयकों के विपरीत) |
| आकस्मिकता निधि | अनुच्छेद 267 के तहत स्थापित; अप्रत्याशित व्यय के लिए राष्ट्रपति के निपटान में; निकासी बाद में विनियोग विधेयक द्वारा नियमित की जाती है (धन विधेयक द्वारा नहीं) |
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- प्रथम लोकसभा में, विपक्ष में सबसे बड़ी एकल पार्टी स्वतंत्र पार्टी थी।
- लोकसभा में, "विपक्ष के नेता" को पहली बार 1969 में मान्यता दी गई थी।
- लोकसभा में, यदि किसी पार्टी के पास न्यूनतम 75 सदस्य नहीं हैं, तो उसके नेता को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
केवल कथन 2 सही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता के पद को पहली बार 1969 में औपचारिक रूप से मान्यता दी गई थी। अन्य दो कथनों में प्रथम लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी और विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या के संबंध में तथ्यात्मक त्रुटियाँ हैं।
❌ कथन 1 – गलत: प्रथम लोकसभा (1952) में, सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) थी जिसके पास 16 सीटें थीं, न कि स्वतंत्र पार्टी (जिसका गठन केवल 1959 में हुआ था)।
✅ कथन 2 – सही: लोकसभा में विपक्ष के नेता को पहली बार 1969 में औपचारिक रूप से मान्यता दी गई थी जब संसद में विपक्ष के नेताओं के वेतन और भत्ते अधिनियम, 1977 के तहत इस पद को वैधानिक मान्यता दी गई (1969 से पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ)।
❌ कथन 3 – गलत: विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता के लिए न्यूनतम आवश्यकता 75 सदस्य नहीं बल्कि सदन की कुल शक्ति का 10% है, जो वर्तमान लोकसभा में 55 सदस्य (545 का 10%) है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विपक्ष के नेता
- वैधानिक मान्यता: विपक्ष के नेता के पद को संसद में विपक्ष के नेताओं के वेतन और भत्ते अधिनियम, 1977 के माध्यम से वैधानिक मान्यता दी गई थी।
- प्रथम मान्यता (लोकसभा): कांग्रेस (O) के राम सुभग सिंह 1969 में औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त प्रथम विपक्ष के नेता थे।
- न्यूनतम संख्या की आवश्यकता: किसी पार्टी के नेता को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के लिए पार्टी के पास सदन की कुल सदस्यता का कम से कम 10% (वर्तमान में लोकसभा में 55 सदस्य) होना चाहिए।
- संवैधानिक स्थिति: यद्यपि संविधान में उल्लिखित नहीं है, विपक्ष के नेता एक महत्वपूर्ण पद धारण करते हैं और CEC, CVC, लोकपाल आदि जैसी नियुक्तियों में परामर्श लिया जाता है।
- वेतन और भत्ते: विपक्ष के नेता को केंद्रीय मंत्री के समकक्ष वेतन और भत्ते प्राप्त होते हैं।
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भारत की संसद मंत्रिपरिषद के कार्यों पर निम्नलिखित के माध्यम से नियंत्रण रखती है -
- स्थगन प्रस्ताव
- प्रश्नकाल
- अनुपूरक प्रश्न
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
भारत की संसद कार्यकारिणी की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न तंत्रों के माध्यम से मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण रखती है। उल्लिखित सभी तीन साधन—स्थगन प्रस्ताव, प्रश्नकाल और अनुपूरक प्रश्न—कार्यपालिका की जांच और नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण संसदीय उपकरण हैं।
✅ कथन 1 – सही: स्थगन प्रस्ताव सार्वजनिक महत्व के तत्काल मामलों पर चर्चा की अनुमति देता है और सरकार की निंदा के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिससे मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण रखा जा सकता है।
✅ कथन 2 – सही: प्रश्नकाल एक दैनिक तंत्र है जिसके दौरान सांसद नीतियों और प्रशासनिक कार्यों पर मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं, जिससे शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
✅ कथन 3 – सही: अनुपूरक प्रश्न प्रश्नकाल के दौरान प्रारंभिक उत्तर के बाद पूछे जाते हैं, जो सांसदों को गहराई से जांच करने और स्पष्टीकरण मांगने की अनुमति देते हैं, जिससे मंत्रिस्तरीय कार्यों पर संसदीय नियंत्रण बढ़ता है।
भारत की संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- गैर-सरकारी सदस्य विधेयक वह विधेयक है जो संसद के ऐसे सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया जाता है जो निर्वाचित नहीं है बल्कि केवल भारत के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत है।
- हाल ही में, भारत की संसद में अपने इतिहास में पहली बार एक गैर-सरकारी सदस्य विधेयक पारित किया गया है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — न तो 1 और न ही 2
भारतीय संसद में गैर-सरकारी सदस्य विधेयकों के बारे में दोनों कथन गलत हैं। गैर-सरकारी सदस्य विधेयक किसी भी ऐसे सांसद द्वारा प्रस्तुत किया जाता है जो मंत्री नहीं है, चाहे वे निर्वाचित हों या मनोनीत, न कि विशेष रूप से केवल मनोनीत सदस्यों द्वारा। इसके अतिरिक्त, संसद के इतिहास में गैर-सरकारी सदस्य विधेयक पारित किए गए हैं, 1952 से अब तक ऐसे 14 विधेयक अधिनियमित किए गए हैं, हालांकि अंतिम विधेयक 1970 में पारित हुआ था।
❌ कथन 1 – गलत: गैर-सरकारी सदस्य विधेयक किसी भी सांसद (निर्वाचित या मनोनीत) द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है जो मंत्री नहीं है, न कि केवल मनोनीत सदस्यों द्वारा।
❌ कथन 2 – गलत: संसद के इतिहास में गैर-सरकारी सदस्य विधेयक पारित किए गए हैं; 1952 और 1970 के बीच ऐसे 14 विधेयक अधिनियमित किए गए, जिनमें अंतिम विधेयक सर्वोच्च न्यायालय (आपराधिक अपीलीय अधिकार क्षेत्र का विस्तार) विधेयक, 1970 था।
निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- लोक सभा के सत्रावसान पर लोक सभा में लंबित विधेयक समाप्त हो जाता है।
- राज्य सभा में लंबित विधेयक, जो लोक सभा द्वारा पारित नहीं किया गया है, लोक सभा के विघटन पर समाप्त नहीं होगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
❌ कथन 1 – गलत: लोक सभा में लंबित विधेयक सत्रावसान पर समाप्त नहीं होता है। सत्रावसान केवल संसदीय सत्र की समाप्ति है, सदन का विघटन नहीं। सभी लंबित विधेयक, प्रस्ताव और अन्य कार्य बरकरार रहते हैं और अगले सत्र में जहां से छोड़े गए थे वहीं से जारी रहते हैं।
✅ कथन 2 – सही: राज्य सभा में लंबित विधेयक जो लोक सभा द्वारा पारित नहीं किया गया है, लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता है। राज्य सभा एक स्थायी सदन है (कभी विघटित नहीं होता), इसलिए वहां से उत्पन्न या लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन के बावजूद जारी रहते हैं। केवल लोक सभा में ही लंबित विधेयक उसके विघटन पर व्यपगत होते हैं।
जब किसी विधेयक को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में भेजा जाता है, तो उसे पारित करना होता है:
Detailed Explanation:
अनुच्छेद 108 संविधान में यह प्रावधान करता है कि जब किसी विधेयक को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में भेजा जाता है, तो इसे उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से पारित किया जाना चाहिए।
संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और दोनों सदनों के संयुक्त मत से परिणाम निर्धारित होता है, जिससे लोकसभा को अपनी बड़ी संख्यात्मक शक्ति के कारण लाभ मिलता है।
केंद्र सरकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- राजस्व विभाग संसद में प्रस्तुत किए जाने वाले केंद्रीय बजट की तैयारी के लिए उत्तरदायी है।
- भारत की संचित निधि से भारत की संसद के प्राधिकरण के बिना कोई राशि निकाली नहीं जा सकती।
- लोक लेखा से किए गए सभी संवितरणों को भी भारत की संसद से प्राधिकरण की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: राजस्व विभाग नहीं, बल्कि आर्थिक कार्य विभाग (वित्त मंत्रालय के अधीन) संसद में प्रस्तुत किए जाने वाले केंद्रीय बजट को तैयार करता है।
✅ कथन 2 – सही: संविधान के अनुच्छेद 114 के अनुसार, भारत की संचित निधि से कोई धनराशि संसदीय प्राधिकरण (विनियोग अधिनियम के माध्यम से) के बिना नहीं निकाली जा सकती।
❌ कथन 3 – गलत: लोक लेखा के लेन-देन (भविष्य निधि, न्यायिक जमा, प्रेषण) कार्यकारी कार्रवाई द्वारा संचालित होते हैं और इन्हें संसदीय विनियोग की आवश्यकता नहीं होती, ये बैंकिंग लेन-देन की तरह कार्य करते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- राज्यसभा के पास धन विधेयक को अस्वीकार करने या संशोधित करने की कोई शक्ति नहीं है।
- राज्यसभा अनुदान मांगों पर मतदान नहीं कर सकती है।
- राज्यसभा वार्षिक वित्तीय विवरण पर चर्चा नहीं कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 109 के तहत, राज्यसभा किसी धन विधेयक को अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती; यह केवल 14 दिनों के भीतर सिफारिशों के साथ इसे वापस कर सकती है, जिसे लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
✅ कथन 2 – सही: अनुच्छेद 113 के अनुसार राज्यसभा अनुदान मांगों पर मतदान नहीं कर सकती; यह लोकसभा का विशेषाधिकार है।
❌ कथन 3 – गलत: राज्यसभा अनुच्छेद 112 के तहत वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) पर चर्चा कर सकती है, हालांकि यह अनुदान मांगों पर मतदान नहीं कर सकती।
भारत में अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत के संविधान में अविश्वास प्रस्ताव का कोई उल्लेख नहीं है।
- अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: भारत का संविधान स्पष्ट रूप से अविश्वास प्रस्ताव का उल्लेख नहीं करता; यह लोकसभा में कार्य संचालन तथा प्रक्रिया के नियम के नियम 198 के तहत प्रदान किया गया है।
✅ कथन 2 – सही: अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है (राज्यसभा में नहीं) क्योंकि अनुच्छेद 75(3) के तहत मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। इसे स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।
निम्नलिखित में से कौन सी संसद की सबसे बड़ी समिति है?
Detailed Explanation:
प्राक्कलन समिति सबसे बड़ी संसदीय समिति है जिसमें 30 सदस्य हैं, जो प्रतिवर्ष केवल लोकसभा से चुने जाते हैं।
लोक लेखा समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति में प्रत्येक में 22 सदस्य हैं (15 लोकसभा से + 7 राज्यसभा से), जबकि याचिका समिति में लोकसभा में 15 सदस्य हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: लोक लेखा संबंधी संसदीय समिति:
- लोक सभा के 25 से अधिक सदस्यों से मिलकर नहीं बनती है
- सरकार के विनियोग और वित्त लेखाओं की जांच करती है
- भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट की जांच करती है
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: लोक लेखा समिति (PAC) में 22 सदस्य होते हैं (15 लोक सभा से, 7 राज्य सभा से), 25 नहीं। सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व द्वारा एकल संक्रमणीय मत से प्रतिवर्ष होता है।
✅ कथन 2 – सही: PAC सरकार के विनियोग लेखाओं और वित्त लेखाओं की जांच करती है ताकि सार्वजनिक धन कानूनी तरीके से और निर्धारित उद्देश्यों के लिए खर्च हो।
✅ कथन 3 – सही: PAC नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की लेखा परीक्षा रिपोर्टों की जांच करती है, जो PAC के विचार-विमर्श में 'मार्गदर्शक, दार्शनिक और मित्र' की भूमिका निभाते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- राज्यसभा के सभापति और उपसभापति उस सदन के सदस्य नहीं होते हैं।
- जबकि संसद के दोनों सदनों के मनोनीत सदस्यों को राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं है, उन्हें उपराष्ट्रपति के चुनाव में मतदान का अधिकार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करते हैं (अनुच्छेद 89 के तहत) और सदन के सदस्य नहीं होते हैं। लेकिन, उपसभापति राज्यसभा द्वारा अपने सदस्यों में से चुने जाते हैं, इसलिए वे सदन के सदस्य होते हैं।
✅ कथन 2 – सही: राष्ट्रपति के लिए निर्वाचक मंडल (अनुच्छेद 54 के तहत) में केवल संसद और राज्य विधानमंडलों के निर्वाचित सदस्य शामिल हैं, मनोनीत सदस्य नहीं। उपराष्ट्रपति के लिए निर्वाचक मंडल (अनुच्छेद 66 के तहत) में दोनों सदनों के सभी सदस्य — निर्वाचित और मनोनीत दोनों — शामिल हैं, जिससे मनोनीत सांसदों को उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान का अधिकार मिलता है।
यदि राज्यसभा द्वारा धन विधेयक में पर्याप्त संशोधन किए जाएं तो क्या होगा?
Detailed Explanation:
संविधान के अनुच्छेद 109 में संसद में धन विधेयक की प्रक्रिया का प्रावधान है।
जब राज्यसभा को धन विधेयक प्राप्त होता है, तो वह केवल 14 दिनों के भीतर संशोधन की सिफारिश कर सकती है लेकिन इसे अस्वीकार या पर्याप्त रूप से संशोधित करने की शक्ति नहीं रखती।
लोकसभा को राज्यसभा द्वारा की गई किसी भी सिफारिश को स्वीकार या अस्वीकार करने का पूर्ण विवेकाधिकार है।
यदि लोकसभा सिफारिशों को अस्वीकार करती है, तो विधेयक अपने मूल रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है।
धन विधेयकों के मामले में संयुक्त बैठक या विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेजने का कोई प्रावधान नहीं है।
लोक सभा अध्यक्ष के कार्यालय के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता/करती है।
- उसे अपने निर्वाचन के समय सदन का सदस्य होना आवश्यक नहीं है, लेकिन उसे अपने निर्वाचन की तिथि से छह महीने के भीतर सदन का सदस्य बनना होता है।
- यदि वह त्यागपत्र देना चाहता/चाहती है, तो उसके त्यागपत्र का पत्र उपाध्यक्ष को संबोधित होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: अध्यक्ष का पद राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत नहीं होता। वह लोक सभा द्वारा निर्वाचित होता/होती है और केवल सदन के सभी तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है। अध्यक्ष लोक सभा के विघटन के बाद भी नई लोक सभा की पहली बैठक से ठीक पहले तक पद पर बना/बनी रहता है।
❌ कथन 2 – गलत: अनुच्छेद 93 के अनुसार, अध्यक्ष को निर्वाचन के समय लोक सभा का सदस्य होना आवश्यक है। छह महीने की सदस्यता का नियम मंत्रियों (अनुच्छेद 75) पर लागू होता है, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पर नहीं।
✅ कथन 3 – सही: अनुच्छेद 94(ख) के अनुसार, अध्यक्ष अपने हस्ताक्षर से उपाध्यक्ष को संबोधित पत्र लिखकर त्यागपत्र देता/देती है। इसी प्रकार, उपाध्यक्ष का त्यागपत्र अध्यक्ष को संबोधित होता है।