UPSC Prelims 2016
भारतीय राजव्यवस्था Previous Year Questions (PYQs)
Explore 5 solved UPSC Prelims 2016 भारतीय राजव्यवस्था questions with detailed step-by-step bilingual solutions, option analysis, and answer keys.
भारत की संसद को राज्य सूची की किसी भी मद पर राष्ट्रीय हित में कानून बनाने की शक्ति प्राप्त होती है, यदि इस आशय का प्रस्ताव पारित किया जाता है -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — राज्य सभा द्वारा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 249 के तहत संसद को राज्य सूची के किसी भी विषय पर कानून बनाने की शक्ति मिलती है यदि राज्य सभा एक प्रस्ताव पारित करके यह घोषित करती है कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है। इस प्रस्ताव के लिए राज्य सभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। एक बार पारित होने के बाद, संसद को उस विषय पर एक वर्ष के लिए कानून बनाने की शक्ति मिलती है, जिसे एक और ऐसा प्रस्ताव पारित करके बढ़ाया जा सकता है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि राज्यों के विधायी क्षेत्र का सम्मान किया जाए और साथ ही राष्ट्रीय आपातकाल या तत्काल राष्ट्रीय महत्व के मामलों में लचीलापन बना रहे।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- पंचायत का सदस्य बनने के लिए किसी व्यक्ति की न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है।
- समय से पूर्व विघटन के बाद पुनर्गठित पंचायत केवल शेष अवधि के लिए जारी रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
❌ कथन 1 – गलत: पंचायत का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष है, 25 वर्ष नहीं। संविधान के अनुच्छेद 243F में यह निर्धारित है कि किसी व्यक्ति को पंचायत की सदस्यता के लिए पात्र होने हेतु कम से कम 21 वर्ष की आयु होनी चाहिए।
✅ कथन 2 – सही: जब किसी पंचायत का समय से पूर्व विघटन के बाद पुनर्गठन किया जाता है, तो वह केवल मूल अवधि के शेष भाग के लिए जारी रहती है। अनुच्छेद 243E(4) स्पष्ट रूप से कहता है कि विघटन के बाद पुनर्गठित पंचायत केवल मूल अवधि की अव्यपगत अवधि के लिए जारी रहेगी, नए पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए नहीं।
'ग्राम न्यायालय अधिनियम' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- अधिनियम के अनुसार, ग्राम न्यायालय केवल दीवानी मामलों की सुनवाई कर सकते हैं, फौजदारी मामलों की नहीं
- अधिनियम स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को मध्यस्थ/सुलहकर्ता के रूप में अनुमति देता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
❌ कथन 1 – गलत: ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 ग्राम न्यायालयों को दीवानी और फौजदारी दोनों अधिकार क्षेत्र प्रदान करता है। धारा 12 के तहत, वे प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय फौजदारी मामलों की सुनवाई और निर्णय कर सकते हैं। धारा 13 के तहत, उनके पास अधिनियम की अनुसूची में निर्दिष्ट विवादों पर दीवानी अधिकार क्षेत्र है। इसलिए, यह दावा कि वे केवल दीवानी मामलों की सुनवाई कर सकते हैं, गलत है।
✅ कथन 2 – सही: अधिनियम की धारा 27 अनिवार्य करती है कि जिला न्यायालय, जिला मजिस्ट्रेट के परामर्श से, सुलहकर्ताओं का एक पैनल तैयार करेगा। ये गांव स्तर के ईमानदार सामाजिक कार्यकर्ता होते हैं जिनके पास निर्धारित योग्यता और अनुभव है। धारा 26 के अनुसार ग्राम न्यायालयों को औपचारिक निर्णय से पहले दीवानी विवादों के सुलह और समझौते के प्रयास करने होते हैं, जिसमें इन स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को मध्यस्थ/सुलहकर्ता के रूप में उपयोग किया जाता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- लोक सभा के सत्रावसान पर लोक सभा में लंबित विधेयक समाप्त हो जाता है।
- राज्य सभा में लंबित विधेयक, जो लोक सभा द्वारा पारित नहीं किया गया है, लोक सभा के विघटन पर समाप्त नहीं होगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
❌ कथन 1 – गलत: लोक सभा में लंबित विधेयक सत्रावसान पर समाप्त नहीं होता है। सत्रावसान केवल संसदीय सत्र की समाप्ति है, सदन का विघटन नहीं। सभी लंबित विधेयक, प्रस्ताव और अन्य कार्य बरकरार रहते हैं और अगले सत्र में जहां से छोड़े गए थे वहीं से जारी रहते हैं।
✅ कथन 2 – सही: राज्य सभा में लंबित विधेयक जो लोक सभा द्वारा पारित नहीं किया गया है, लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता है। राज्य सभा एक स्थायी सदन है (कभी विघटित नहीं होता), इसलिए वहां से उत्पन्न या लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन के बावजूद जारी रहते हैं। केवल लोक सभा में ही लंबित विधेयक उसके विघटन पर व्यपगत होते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- किसी राज्य में मुख्य सचिव की नियुक्ति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
- किसी राज्य में मुख्य सचिव का एक निश्चित कार्यकाल होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — न तो 1, न ही 2
❌ कथन 1 – गलत: मुख्य सचिव की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, मुख्यमंत्री द्वारा नहीं। संविधान के अनुच्छेद 166 के तहत, राज्य सरकार की सभी कार्यकारी कार्रवाइयां औपचारिक रूप से राज्यपाल के नाम पर की जाती हैं। हालांकि मुख्यमंत्री नियुक्ति की सिफारिश करते हैं, लेकिन औपचारिक नियुक्ति प्राधिकारी राज्यपाल है। मुख्य सचिव राज्य सिविल सेवाओं का प्रशासनिक प्रमुख होता है और राज्य में सेवारत IAS अधिकारियों में से नियुक्त किया जाता है।
❌ कथन 2 – गलत: मुख्य सचिव के लिए कोई निश्चित कार्यकाल नहीं है। यह पद सरकार की इच्छा पर निर्भर करता है, और अधिकारी को सेवानिवृत्ति से पहले किसी भी समय स्थानांतरित या हटाया जा सकता है। कार्यकाल राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करता है, और प्रशासनिक और राजनीतिक विचारों के आधार पर मुख्य सचिवों में बार-बार बदलाव आम बात है।
UPSC Prelims 2016 - भारतीय राजव्यवस्था Chapter-wise Distribution
राज्य सरकार
1 Qs (20%)संसद
1 Qs (20%)उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय
1 Qs (20%)स्थानीय स्वशासन
1 Qs (20%)केंद्र-राज्य संबंध
1 Qs (20%)UPSC Prelims 2016 - भारतीय राजव्यवस्था Questions FAQs
Q1 How many भारतीय राजव्यवस्था questions were asked in UPSC Prelims 2016?
Q2 What is the chapter-wise question distribution for भारतीय राजव्यवस्था in UPSC Prelims 2016?
- राज्य सरकार: 1 questions (20%)
- संसद: 1 questions (20%)
- उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय: 1 questions (20%)
- स्थानीय स्वशासन: 1 questions (20%)
- केंद्र-राज्य संबंध: 1 questions (20%)