UPSC CSE Prelims
ग्राम न्यायालय Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for ग्राम न्यायालय with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
Filter & practice questions topic-wise
'ग्राम न्यायालय अधिनियम' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- अधिनियम के अनुसार, ग्राम न्यायालय केवल दीवानी मामलों की सुनवाई कर सकते हैं, फौजदारी मामलों की नहीं
- अधिनियम स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को मध्यस्थ/सुलहकर्ता के रूप में अनुमति देता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
❌ कथन 1 – गलत: ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 ग्राम न्यायालयों को दीवानी और फौजदारी दोनों अधिकार क्षेत्र प्रदान करता है। धारा 12 के तहत, वे प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय फौजदारी मामलों की सुनवाई और निर्णय कर सकते हैं। धारा 13 के तहत, उनके पास अधिनियम की अनुसूची में निर्दिष्ट विवादों पर दीवानी अधिकार क्षेत्र है। इसलिए, यह दावा कि वे केवल दीवानी मामलों की सुनवाई कर सकते हैं, गलत है।
✅ कथन 2 – सही: अधिनियम की धारा 27 अनिवार्य करती है कि जिला न्यायालय, जिला मजिस्ट्रेट के परामर्श से, सुलहकर्ताओं का एक पैनल तैयार करेगा। ये गांव स्तर के ईमानदार सामाजिक कार्यकर्ता होते हैं जिनके पास निर्धारित योग्यता और अनुभव है। धारा 26 के अनुसार ग्राम न्यायालयों को औपचारिक निर्णय से पहले दीवानी विवादों के सुलह और समझौते के प्रयास करने होते हैं, जिसमें इन स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को मध्यस्थ/सुलहकर्ता के रूप में उपयोग किया जाता है।
🧐 Not Sure What to Study Next?
Get a personalised study plan based on your goals, time and revision needs.
Related Topics in भारतीय राजव्यवस्था
राष्ट्रपति
पंचायती राज व्यवस्था
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों (DPSP) की प्रकृति और विशेषताएँ
बजट एवं वित्तीय प्रक्रिया
विधि का शासन
संसदीय प्रक्रियाएँ
विधायी प्रक्रिया
Frequently Asked Questions
Common questions about ग्राम न्यायालय in UPSC CSE PRELIMS