UPSC Prelims 2013
भारतीय अर्थव्यवस्था Previous Year Questions (PYQs)
Explore 20 solved UPSC Prelims 2013 भारतीय अर्थव्यवस्था questions with detailed step-by-step bilingual solutions, option analysis, and answer keys.
भारत में बैंकों द्वारा प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) में निम्नलिखित को ऋण देना शामिल है:
Detailed Explanation:
प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के तहत बैंकों को समायोजित शुद्ध बैंक ऋण (ANBC) का 40% निर्धारित क्षेत्रों को आवंटित करना अनिवार्य है, जिसमें कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ, सूक्ष्म और लघु उद्यम, कमजोर वर्ग (निम्न आय समूह, शिक्षा के लिए छात्र, आवास), निर्यात ऋण, नवीकरणीय ऊर्जा और सामाजिक बुनियादी ढाँचा शामिल हैं।
तीनों विकल्प – कृषि, सूक्ष्म और लघु उद्यम, और कमजोर वर्ग – स्पष्ट रूप से RBI के PSL दिशानिर्देशों में शामिल हैं, इसलिए विकल्प 4 सही उत्तर है।
जनसांख्यिकीय लाभांश के पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए भारत को क्या करना चाहिए?
Detailed Explanation:
जनसांख्यिकीय लाभांश का अर्थ आर्थिक विकास की संभावना है जब कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या (15-64 वर्ष) गैर-कार्यशील आयु वर्ग से अधिक हो।
कौशल विकास को बढ़ावा देना इस बड़े कार्यबल को उत्पादक और रोजगार योग्य मानव पूंजी में बदलने के लिए आवश्यक है। पर्याप्त तकनीकी और व्यावसायिक कौशल के बिना, बड़ी कार्यशील जनसंख्या आर्थिक विकास के बजाय बेरोजगारी और सामाजिक अस्थिरता की ओर ले जाती है। सामाजिक सुरक्षा योजनाएं सुरक्षा जाल प्रदान करती हैं लेकिन उत्पादकता नहीं बढ़ातीं। शिशु मृत्यु दर कम करना भविष्य की जनसांख्यिकी को प्रभावित करता है, वर्तमान कार्यबल की गुणवत्ता को नहीं। केवल उच्च शिक्षा का निजीकरण सभी आर्थिक क्षेत्रों में कौशल-आधारित रोजगार सुनिश्चित नहीं करता।
चीनी उद्योग के उप-उत्पादों की उपयोगिता के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- बगास को ऊर्जा उत्पादन के लिए बायोमास ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
- शीरे (मोलासेस) को सिंथेटिक रासायनिक उर्वरकों के उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
- शीरे (मोलासेस) को इथेनॉल के उत्पादन के लिए उपयोग किया जा सकता है।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: बगास (गन्ने की पिसाई के बाद रेशेदार अवशेष) का व्यापक रूप से चीनी मिलों में बिजली के सह-उत्पादन के लिए बायोमास ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे वे ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनती हैं।
❌ कथन 2 – गलत: शीरा (मोलासेस) सिंथेटिक रासायनिक उर्वरकों के लिए फीडस्टॉक नहीं है; ये हेबर-बॉश प्रक्रिया (अमोनिया) और फॉस्फेट/पोटाश खनन के माध्यम से उत्पादित होते हैं, न कि चीनी के उप-उत्पादों से।
✅ कथन 3 – सही: शीरा (मोलासेस) किण्वन के माध्यम से इथेनॉल उत्पादन के लिए एक प्रमुख फीडस्टॉक है, जो भारत के इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (EBP) को ईंधन के लिए समर्थन देता है।
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ठंडे कक्ष में संग्रहित फल अधिक समय तक संग्रहित रहते हैं क्योंकि -
Detailed Explanation:
शीत भंडारण तापमान को कम करता है, जो सीधे फलों में श्वसन की दर को घटाता है।
धीमी उपापचयी और एंजाइमी प्रक्रियाएं पकने में देरी करती हैं, सूक्ष्मजीवी गतिविधि को कम करती हैं, और संग्रहण जीवन को काफी बढ़ाती हैं।
देश X में आर्थिक वृद्धि आवश्यक रूप से तब होगी जब
Detailed Explanation:
पूंजी निर्माण दिए गए विकल्पों में एकमात्र कारक है जो देश में आर्थिक वृद्धि को आवश्यक रूप से सुनिश्चित करता है।
✅ कथन 3 – सही: X में पूंजी निर्माण (मशीनरी, बुनियादी ढांचे जैसी भौतिक पूंजी और मानव पूंजी में निवेश) सीधे अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे वृद्धि अनिवार्य हो जाती है।
❌ कथन 1 – गलत: विश्व अर्थव्यवस्था में तकनीकी प्रगति देश X में वृद्धि की गारंटी नहीं देती जब तक X उन प्रौद्योगिकियों को अपनाए और लागू न करे।
❌ कथन 2 – गलत: X में जनसंख्या वृद्धि अकेले आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित नहीं करती; यदि उत्पादन में समानुपातिक वृद्धि न हो तो यह प्रति व्यक्ति आय को भी कम कर सकती है।
❌ कथन 4 – गलत: विश्व व्यापार की मात्रा में वृद्धि देश X को तभी लाभ देती है जब वह सक्रिय रूप से भाग ले और अपना हिस्सा बढ़ाए; केवल वैश्विक व्यापार विस्तार अपर्याप्त है।
प्रच्छन्न बेरोजगारी का सामान्यतः अर्थ है
Detailed Explanation:
प्रच्छन्न बेरोजगारी तब होती है जब वास्तविक आवश्यकता से अधिक लोग काम में लगे होते हैं, जो आमतौर पर कृषि में देखा जाता है जहां पूरा परिवार छोटे भूखंडों पर काम करता है।
मुख्य विशेषता यह है कि अतिरिक्त श्रमिकों को हटाने से कुल उत्पादन में कमी नहीं होगी, अर्थात उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य है।
सामान्य कीमत स्तर में वृद्धि निम्नलिखित के कारण हो सकती है:
- मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि
- उत्पादन के समग्र स्तर में कमी
- प्रभावी मांग में वृद्धि
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: उत्पादन में बिना संगत वृद्धि के मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि से अधिक मुद्रा कम वस्तुओं का पीछा करती है, जिससे मुद्रा के मात्रा सिद्धांत के अनुसार मांग-जनित मुद्रास्फीति होती है।
✅ कथन 2 – सही: मांग स्थिर रहने पर समग्र उत्पादन/आपूर्ति में कमी से अतिरिक्त मांग उत्पन्न होती है, जो आपूर्ति-पक्ष मुद्रास्फीति के माध्यम से कीमतों को ऊपर धकेलती है।
✅ कथन 3 – सही: अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता से अधिक प्रभावी मांग (क्रय शक्ति-समर्थित मांग) में वृद्धि मांग-जनित मुद्रास्फीति का कारण बनती है।
मुद्रा की पूर्ति समान रहने पर जब मुद्रा की मांग में वृद्धि होती है, तो होगा:
Detailed Explanation:
जब मुद्रा की पूर्ति स्थिर रहती है और मुद्रा की मांग बढ़ती है, तो अर्थव्यवस्था में उपलब्ध धन के लिए अधिक प्रतिस्पर्धा होती है।
तरलता पसंद सिद्धांत के अनुसार, बैंक और ऋणदाता मुद्रा बाजार को संतुलित करने के लिए ब्याज दर बढ़ाते हैं—उच्च दर मुद्रा की मांग को कम करती है और अधिक जमा आकर्षित करती है, जिससे आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बहाल होता है।
किसी देश का भुगतान संतुलन एक व्यवस्थित अभिलेख है
Detailed Explanation:
भुगतान संतुलन (BoP) एक देश के निवासियों और शेष विश्व के बीच एक विशिष्ट अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) के दौरान सभी आर्थिक लेनदेन का एक व्यवस्थित अभिलेख है।
इसमें वस्तुओं का व्यापार (दृश्य व्यापार), सेवाओं का व्यापार (अदृश्य व्यापार), आय प्रवाह, चालू हस्तांतरण, और पूंजी तथा वित्तीय खाता लेनदेन शामिल हैं—जो इसे व्यापक बनाता है, न कि केवल वस्तुओं के आयात/निर्यात या केवल सरकारी लेनदेन तक सीमित।
निम्नलिखित में से कौन सा अपने प्रभाव में सबसे अधिक मुद्रास्फीतिकारी होने की संभावना है?
Detailed Explanation:
नई मुद्रा का सृजन (विकल्प 4) सबसे अधिक मुद्रास्फीतिकारी तरीका है क्योंकि यह वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में बिना किसी वृद्धि के सीधे मुद्रा आपूर्ति को बढ़ाता है, जिससे मांग-जनित मुद्रास्फीति होती है।
सार्वजनिक ऋण की अदायगी मुद्रा आपूर्ति को कम करती है; जनता से उधार केवल मौजूदा मुद्रा को स्थानांतरित करता है; बैंकों से उधार का साख सृजन के माध्यम से मध्यम मुद्रास्फीतिकारी प्रभाव होता है, लेकिन नई करेंसी छापने का अतिरिक्त तरलता और मूल्य स्तरों पर सबसे मजबूत प्रत्यक्ष प्रभाव होता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- मुद्रास्फीति ऋणियों को लाभ पहुँचाती है।
- मुद्रास्फीति बांडधारकों को लाभ पहुँचाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: मुद्रास्फीति से धन का वास्तविक मूल्य घटता है। ऋणी ऋण ऐसे धन से चुकाते हैं जिसकी क्रय शक्ति उधार लेते समय से कम होती है, जिससे उनका वास्तविक ऋण भार घटता है।
❌ कथन 2 – गलत: बांडधारकों को निश्चित नाममात्र भुगतान मिलता है। मुद्रास्फीति के दौरान, इन भुगतानों का वास्तविक मूल्य गिरता है, जिससे बांडधारक क्रय शक्ति खो देते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक निम्नलिखित मामलों में वाणिज्यिक बैंकों को विनियमित करता है -
- परिसंपत्तियों की तरलता
- शाखा विस्तार
- बैंकों का विलय
- बैंकों का परिसमापन
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत व्यापक रूप से विनियमित करता है। यह CRR (नकद आरक्षित अनुपात) और SLR (सांविधिक तरलता अनुपात) के माध्यम से परिसंपत्तियों की तरलता को नियंत्रित करता है, नई शाखाओं के लिए लाइसेंस देकर शाखा विस्तार को विनियमित करता है, वित्तीय स्थिरता और जमाकर्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए बैंकों के विलय की निगरानी करता है, और गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति में बैंकों का परिसमापन शुरू करता है। सभी चार विनियामक कार्य RBI की मुख्य शक्तियाँ हैं।
भारत में, घाटे की वित्त व्यवस्था (deficit financing) का उपयोग किसके लिए संसाधन जुटाने के लिए किया जाता है?
Detailed Explanation:
घाटे की वित्त व्यवस्था भारत में सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से उधार लेकर या मुद्रा सृजन के माध्यम से अपने बजटीय अंतर को पूरा करने की प्रक्रिया है।
इसका उपयोग मुख्य रूप से आर्थिक विकास के उद्देश्यों के लिए किया जाता है—बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, पंचवर्षीय योजनाओं और अन्य पूंजीगत व्यय के वित्तपोषण के लिए—न कि ऋण अदायगी या भुगतान संतुलन समायोजन के लिए, जिन्हें अन्य राजकोषीय और मौद्रिक साधनों से प्रबंधित किया जाता है।
किसी देश की राष्ट्रीय आय एक निश्चित अवधि के लिए निम्नलिखित के बराबर होती है:
Detailed Explanation:
राष्ट्रीय आय एक अर्थव्यवस्था में निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) के दौरान उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को दर्शाती है।
✅ विकल्प 4 – सही: उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य राष्ट्रीय आय को सही तरीके से परिभाषित करता है, मध्यवर्ती वस्तुओं को छोड़कर दोहरी गणना से बचाता है।
❌ विकल्प 1 – गलत: नागरिकों द्वारा उत्पादन सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) को संदर्भित करता है, राष्ट्रीय आय नहीं जो भौगोलिक सीमाओं के भीतर उत्पादन को मापती है।
❌ विकल्प 2 – गलत: उपभोग + निवेश केवल पूर्ण व्यय दृष्टिकोण: Y = C + I + G + (X-M) से सरकारी व्यय (G) और शुद्ध निर्यात (X-M) को छोड़ देता है।
❌ विकल्प 3 – गलत: व्यक्तिगत आय का योग उत्पादन में उत्पन्न कॉर्पोरेट लाभ, अवितरित आय और अन्य कारक आय को छोड़ देता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, 'खुले बाजार की कार्यवाही' से तात्पर्य है:
Detailed Explanation:
खुले बाजार की कार्यवाही (OMO) एक मौद्रिक नीति उपकरण है जिसमें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद या बिक्री करता है ताकि मुद्रा आपूर्ति और तरलता को नियंत्रित किया जा सके।
जब RBI प्रतिभूतियाँ खरीदता है, तो यह बैंकिंग प्रणाली में तरलता डालता है और ब्याज दरें कम करता है; जब यह प्रतिभूतियाँ बेचता है, तो अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करता है और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाता है।
निम्नलिखित में से कौन ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष ऋण सहायता प्रदान करता है/करते हैं?
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
- राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
- भूमि विकास बैंक
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष ऋण सहायता प्रदान करते हैं, जिसमें लघु और सीमांत किसान, कृषि मजदूर और ग्रामीण कारीगर शामिल हैं।
❌ कथन 2 – गलत: NABARD एक शीर्ष विकास बैंक है जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों को पुनर्वित्त सुविधाएं प्रदान करता है; यह सीमित पायलट योजनाओं को छोड़कर ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष ऋण नहीं देता।
✅ कथन 3 – सही: भूमि विकास बैंक (राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) किसानों को भूमि विकास, सिंचाई और कृषि सुधार के लिए दीर्घकालिक प्रत्यक्ष ऋण प्रदान करते हैं।
निम्नलिखित तरल परिसंपत्तियों पर विचार कीजिए:
- बैंकों के पास मांग जमा
- बैंकों के पास सावधि जमा
- बैंकों के पास बचत जमा
- मुद्रा
इनके घटते क्रम में तरलता का सही क्रम है
Detailed Explanation:
तरलता का अर्थ है किसी परिसंपत्ति को बिना मूल्य हानि के नकद में बदलने की सुगमता और गति।
मुद्रा सबसे अधिक तरल परिसंपत्ति है क्योंकि यह पहले से ही नकद रूप में होती है।
मांग जमा को किसी भी समय मांग पर बिना सूचना या जुर्माने के निकाला जा सकता है, जो इसे अत्यधिक तरल बनाता है।
बचत जमा को निकाला जा सकता है लेकिन पूर्व सूचना या निकासी सीमा की आवश्यकता हो सकती है, जो इसे मध्यम तरल बनाता है।
सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) की एक निश्चित परिपक्वता अवधि होती है और समय से पहले निकासी पर जुर्माना लगता है, जो इसे सबसे कम तरल बनाता है।
तरलता का घटता क्रम: मुद्रा (4) > मांग जमा (1) > बचत जमा (3) > सावधि जमा (2) = 4-1-3-2
निम्नलिखित में से कौन पूंजी खाता का गठन करते हैं?
- विदेशी ऋण
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
- निजी प्रेषण
- पोर्टफोलियो निवेश
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
1. विदेशी ऋण – पूंजी खाता: सरकार या निजी क्षेत्र द्वारा विदेश से लिए गए ऋण पूंजी प्रवाह का प्रतिनिधित्व करते हैं और पूंजी खाता में दर्ज किए जाते हैं।
2. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) – पूंजी खाता: घरेलू कंपनियों में विदेशी संस्थाओं द्वारा दीर्घकालिक निवेश जो स्थायी रुचि पैदा करते हैं, पूंजी खाता का हिस्सा हैं।
3. निजी प्रेषण – चालू खाता: व्यक्तियों (जैसे प्रवासी श्रमिक) द्वारा अपने देश को भेजी गई धनराशि हस्तांतरण भुगतान है जो चालू खाता में दर्ज की जाती है, पूंजी खाता में नहीं।
4. पोर्टफोलियो निवेश – पूंजी खाता: विदेशियों द्वारा शेयर, बॉन्ड और वित्तीय प्रतिभूतियों में निवेश अल्पकालिक पूंजी प्रवाह है जो पूंजी खाता का हिस्सा है।
सही उत्तर: विकल्प 2 (केवल 1, 2 और 4) – निजी प्रेषण चालू खाता के अंतर्गत आते हैं।
बैंक दर में वृद्धि सामान्यतः यह संकेत देती है कि:
Detailed Explanation:
बैंक दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को धन उधार देता है।
बैंक दर में वृद्धि से उधार लेना महंगा हो जाता है, अर्थव्यवस्था में तरलता कम होती है, और यह मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए कठोर/संकुचनकारी मौद्रिक नीति का संकेत देती है।
निम्नलिखित में से कौन सी मदों का समूह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल है?
Detailed Explanation:
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में चार घटक होते हैं: विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCAs), RBI द्वारा रखी गई स्वर्ण धारिताएँ, IMF से विशेष आहरण अधिकार (SDRs), और IMF में आरक्षित किश्त स्थिति (RTP)।
विदेशी देशों, विश्व बैंक या अन्य संस्थानों से ऋण बाह्य ऋण/देनदारियाँ हैं, विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा नहीं जो RBI द्वारा रखी गई परिसंपत्तियाँ हैं जिन्हें तुरंत उपयोग किया जा सकता है।
UPSC Prelims 2013 - भारतीय अर्थव्यवस्था Chapter-wise Distribution
मुद्रा, बैंकिंग एवं वित्तीय प्रणाली
6 Qs (30%)बाह्य क्षेत्र
4 Qs (20%)मुद्रास्फीति
2 Qs (10%)कृषि
2 Qs (10%)लोक वित्त एवं राजकोषीय नीति
2 Qs (10%)रोजगार, गरीबी एवं समावेशी विकास
1 Qs (5%)उद्योग
1 Qs (5%)सरकारी योजनाएँ एवं सामाजिक क्षेत्र
1 Qs (5%)राष्ट्रीय आय एवं आर्थिक विकास
1 Qs (5%)UPSC Prelims 2013 - भारतीय अर्थव्यवस्था Questions FAQs
Q1 How many भारतीय अर्थव्यवस्था questions were asked in UPSC Prelims 2013?
Q2 What is the chapter-wise question distribution for भारतीय अर्थव्यवस्था in UPSC Prelims 2013?
- मुद्रा, बैंकिंग एवं वित्तीय प्रणाली: 6 questions (30%)
- बाह्य क्षेत्र: 4 questions (20%)
- मुद्रास्फीति: 2 questions (10%)
- कृषि: 2 questions (10%)
- लोक वित्त एवं राजकोषीय नीति: 2 questions (10%)
- रोजगार, गरीबी एवं समावेशी विकास: 1 questions (5%)
- उद्योग: 1 questions (5%)
- सरकारी योजनाएँ एवं सामाजिक क्षेत्र: 1 questions (5%)
- राष्ट्रीय आय एवं आर्थिक विकास: 1 questions (5%)