UPSC Prelims 2022
मध्यकालीन इतिहास Previous Year Questions (PYQs)
Explore 6 solved UPSC Prelims 2022 मध्यकालीन इतिहास questions with detailed step-by-step bilingual solutions, option analysis, and answer keys.
भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन "कुलहदरान" के नाम से जाने जाते थे?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — सैय्यद
सैय्यदों को मुस्लिम समाज में पैगंबर मुहम्मद की पुत्री फातिमा के वंशज के रूप में सम्मानित किया जाता था। दिल्ली सल्तनत काल के दौरान, वे 'कुलह' नामक एक विशिष्ट नुकीली टोपी पहनते थे, जिससे उन्हें 'कुलहदरान' (टोपी पहनने वाले) की उपाधि मिली। 1398 में तैमूर के विनाशकारी भारत आक्रमण के दौरान भी, उसने सामान्य नरसंहार की नीति के बावजूद विशेष रूप से सैय्यदों के जीवन को बख्शा, जो इस्लामी समाज में उनकी विशेष स्थिति को प्रदर्शित करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: दिल्ली सल्तनत में सामाजिक वर्ग
- सैय्यद (कुलहदरान): पैगंबर मुहम्मद से फातिमा के माध्यम से वंश का दावा; नुकीली टोपी (कुलह) पहनते थे; विशेष विशेषाधिकार और सम्मान का आनंद लेते थे; तैमूर के आक्रमण के दौरान भी सुरक्षित रहे
- शेख: अरब मुसलमान और उनके वंशज जो भारत में बस गए; सामाजिक पदानुक्रम में उच्च माने जाते थे
- क़लन्दर: मुस्लिम भिक्षु रहस्यवादी जिन्होंने पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को अस्वीकार किया; अक्सर भटकते हुए तपस्वी
- उलेमा: इस्लामी विद्वान और धार्मिक नेता जो शरिया कानून की व्याख्या करते थे
- खुद्दाम: तुर्की कुलीन जिन्होंने प्रारंभिक दिल्ली सल्तनत में शासक वर्ग का गठन किया
- सामाजिक पदानुक्रम: सैय्यद और शेख → विदेशी मुसलमान (तुर्क, अफगान, फारसी) → भारतीय मुसलमान (धर्मांतरित) → गैर-मुसलमान
भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत पर पहला मंगोल आक्रमण जलाल-उद-दीन खिलजी के शासनकाल में हुआ था।
- अला-उद-दीन खिलजी के शासनकाल के दौरान, एक मंगोल सेना दिल्ली तक पहुंची और शहर को घेर लिया।
- मुहम्मद-बिन-तुगलक ने अपने राज्य के उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्से अस्थायी रूप से मंगोलों से खो दिए।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
यह प्रश्न दिल्ली सल्तनत काल के दौरान मंगोल आक्रमणों के ज्ञान का परीक्षण करता है। केवल कथन 2 सही है, क्योंकि 1303 ई. में दिल्ली की मंगोल घेराबंदी अला-उद-दीन खिलजी के शासनकाल में हुई थी, जबकि अन्य कथनों में समयरेखा और शासकों के संबंध में तथ्यात्मक त्रुटियाँ हैं।
❌ कथन 1 – गलत: भारत पर पहला मंगोल आक्रमण 1221 ई. में चंगेज खान के अधीन इल्तुतमिश (1211-1236 ई.) के शासनकाल में हुआ था, जलाल-उद-दीन खिलजी (1290-1296 ई.) के शासनकाल में नहीं।
✅ कथन 2 – सही: 1303 ई. में, अला-उद-दीन खिलजी के शासनकाल (1296-1316 ई.) के दौरान, तारघी के नेतृत्व में एक विशाल मंगोल सेना ने दिल्ली को घेर लिया, जिससे सुल्तान को कई महीनों तक सीरी किले में शरण लेनी पड़ी।
❌ कथन 3 – गलत: मुहम्मद-बिन-तुगलक (1325-1351 ई.) ने अपने शासनकाल की शुरुआत में मंगोल आक्रमणों को सफलतापूर्वक विफल किया और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों को कभी नहीं खोया; बल्कि, उन्होंने मंगोल क्षेत्रों के खिलाफ एक महत्वाकांक्षी खुरासान अभियान की योजना भी बनाई।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत पर मंगोल आक्रमण (13वीं-14वीं शताब्दी)
| वर्ष/काल | शासक | घटना |
|---|---|---|
| 1221 ई. | इल्तुतमिश | ख्वारिज्म शाह का पीछा करते हुए चंगेज खान के अधीन पहला मंगोल आक्रमण; सिंधु तक पहुंचने के बाद मंगोल वापस लौट गए |
| 1241 ई. | रजिया सुल्तान | पंजाब और लाहौर पर मंगोल छापे |
| 1279-1290 ई. | बलबन | कई मंगोल आक्रमण; बलबन ने उत्तर-पश्चिमी सीमा को मजबूत किया और मजबूत सैन्य उपस्थिति स्थापित की |
| 1292 ई. | जलाल-उद-दीन खिलजी | अब्दुल्लाह के नेतृत्व में मंगोल आक्रमण को पराजित किया; मंगोल कैदियों पर दया दिखाई (उन्हें दिल्ली के पास 'नव मुसलमानों' के रूप में बसाया) |
| 1299-1308 ई. | अला-उद-दीन खिलजी | बार-बार मंगोल आक्रमण; 1303 ई. में तारघी की सेना द्वारा दिल्ली की घेराबंदी; अला-उद-दीन ने बाद में मंगोलों को निर्णायक रूप से कुचल दिया |
| 1327-1328 ई. | मुहम्मद-बिन-तुगलक | तरमाशिरीन के नेतृत्व में मंगोल आक्रमण को पराजित किया; उत्तर-पश्चिमी सीमाओं को प्रभावी ढंग से सुरक्षित किया |
- अला-उद-दीन खिलजी के प्रति-उपाय: सीरी किले का निर्माण, 4,75,000 घुड़सवारों की बड़ी स्थायी सेना बनाए रखी, गाजी मलिक (बाद में गयासुद्दीन तुगलक) को सीमा गवर्नर नियुक्त किया
- प्रभाव: मंगोल खतरे ने दिल्ली सल्तनत की सैन्य नीतियों, किलेबंदी रणनीतियों और आर्थिक सुधारों (विशेष रूप से अला-उद-दीन के मूल्य नियंत्रण और सैन्य सुधारों) को आकार दिया
- बस्तियाँ: कुछ मंगोल समूहों को धर्मांतरित कर भारत में बसाया गया ('नव मुसलमान' या नव-मुसलमान कहलाए), हालांकि विद्रोह की आशंका के कारण अला-उद-दीन ने बाद में कई का नरसंहार किया
मध्यकालीन भारत में, "फणम" शब्द का अर्थ था:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — सिक्के
मध्यकालीन भारत में "फणम" शब्द एक स्वर्ण या रजत सिक्के को संदर्भित करता था जो दक्षिण भारत में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता था, विशेष रूप से विजयनगर साम्राज्य, मदुरै के नायक और विभिन्न दक्कन राज्यों जैसे क्षेत्रों में। यह एक छोटी मूल्यवर्ग की मुद्रा थी जिसका उपयोग मध्यकाल से लेकर 19वीं शताब्दी तक व्यापार और वाणिज्य में व्यापक रूप से किया जाता था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मध्यकालीन भारतीय मुद्रा
- फणम: एक स्वर्ण/रजत सिक्का जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत में उपयोग किया जाता था (विजयनगर साम्राज्य, मदुरै नायक, त्रावणकोर, मैसूर); कुछ क्षेत्रों में ब्रिटिश काल तक जारी रहा
- टंका: दिल्ली सल्तनत के इल्तुतमिश द्वारा प्रस्तुत रजत सिक्का; उत्तर भारत में मानक मुद्रा बन गया
- जीतल: दिल्ली सल्तनत काल में छोटे लेनदेन के लिए उपयोग किया जाने वाला ताम्र सिक्का
- हून: विभिन्न क्षेत्रीय राज्यों में उपयोग किया जाने वाला छोटा ताम्र सिक्का; 1 टंका = 48 जीतल या कई हून
- पगोडा (वराह): दक्षिण भारत, विशेष रूप से विजयनगर साम्राज्य का स्वर्ण सिक्का; हिंदू देवताओं की छवि वाला
- रुपया: शेरशाह सूरी (1540-1545) द्वारा प्रस्तुत रजत सिक्का; अकबर द्वारा मानकीकृत; आधुनिक रुपये की नींव बना
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निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| राजा | राजवंश |
| 1. नन्नुक | चंदेल |
| 2. जयशक्ति | परमार |
| 3. नागभट द्वितीय | गुर्जर-प्रतिहार |
| 4. भोज | राष्ट्रकूट |
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो युग्म
यह प्रश्न भारतीय मध्यकालीन राजवंशों और उनके शासकों के ज्ञान का परीक्षण करता है। दिए गए चार युग्मों में से केवल युग्म 1 (नन्नुक-चंदेल) और युग्म 3 (नागभट द्वितीय-गुर्जर-प्रतिहार) सही सुमेलित हैं, जबकि युग्म 2 और 4 में गलत राजवंश संबद्धता है।
✅ युग्म 1 – सही: नन्नुक 9वीं शताब्दी ईस्वी में चंदेल राजवंश के संस्थापक थे, जिन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र पर शासन किया।
❌ युग्म 2 – गलत: जयशक्ति चंदेल राजवंश (वह कीर्तिवर्मन के पुत्र थे) से संबंधित थे, परमार राजवंश से नहीं।
✅ युग्म 3 – सही: नागभट द्वितीय (लगभग 805-833 ईस्वी) गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के एक प्रमुख शासक थे जिन्होंने अरब आक्रमणों के खिलाफ सफलतापूर्वक रक्षा की।
❌ युग्म 4 – गलत: भोज (लगभग 1010-1055 ईस्वी) मालवा के परमार राजवंश के सबसे प्रतिष्ठित शासक थे, राष्ट्रकूट राजवंश के नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रमुख मध्यकालीन भारतीय राजवंश
| राजवंश | काल | राजधानी/क्षेत्र | उल्लेखनीय शासक |
|---|---|---|---|
| चंदेल | 9वीं-13वीं शताब्दी ईस्वी | खजुराहो, बुंदेलखंड | नन्नुक (संस्थापक), यशोवर्मन, धंग, विद्याधर |
| परमार | 9वीं-14वीं शताब्दी ईस्वी | धार/धारा, मालवा | उपेन्द्र (संस्थापक), भोज, सिंधुराज |
| गुर्जर-प्रतिहार | 6वीं-11वीं शताब्दी ईस्वी | कन्नौज | नागभट प्रथम, नागभट द्वितीय, मिहिर भोज, महेन्द्रपाल प्रथम |
| राष्ट्रकूट | 6वीं-10वीं शताब्दी ईस्वी | मान्यखेत (दक्कन) | दन्तिदुर्ग, कृष्ण प्रथम, गोविंद तृतीय, अमोघवर्ष प्रथम, कृष्ण तृतीय |
हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री द्वारा हैदराबाद में बैठी हुई मुद्रा में रामानुज की विश्व की दूसरी सबसे ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन किया गया। निम्नलिखित में से कौन सा कथन रामानुज की शिक्षाओं को सही ढंग से प्रस्तुत करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — मोक्ष का सर्वोत्तम साधन भक्ति था।
रामानुज (11वीं-12वीं शताब्दी ईस्वी) एक प्रमुख वैष्णव दार्शनिक थे जिन्होंने विशिष्टाद्वैत (योग्य अद्वैतवाद) के दर्शन का प्रतिपादन किया। उनकी केंद्रीय शिक्षा इस बात पर बल देती थी कि मोक्ष सर्वोत्तम रूप से एक व्यक्तिगत ईश्वर (विष्णु/नारायण) के प्रति गहन भक्ति और दिव्य कृपा के माध्यम से प्राप्त होता है, न कि केवल ज्ञान या कर्मकांडीय प्रथाओं के माध्यम से।
✅ विकल्प 1 – सही: रामानुज की मूल शिक्षा यह थी कि भक्ति मोक्ष का सर्वोच्च मार्ग है, जो ईश्वर की कृपा से पूरक है।
❌ विकल्प 2 – गलत: यद्यपि रामानुज वेदों का सम्मान करते थे, यह कथन मीमांसा दर्शन या रूढ़िवादी वैदिक दर्शन के विचारों को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है, न कि रामानुज की विशिष्ट शिक्षा को।
❌ विकल्प 3 – गलत: परम आनंद के लिए आवश्यक साधन के रूप में तार्किक तर्कों पर बल न्याय दर्शन की विशेषता है, न कि रामानुज के भक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण की।
❌ विकल्प 4 – गलत: मोक्ष के प्राथमिक साधन के रूप में ध्यान पतंजलि के योग दर्शन या शंकर के अद्वैत वेदांत के साथ अधिक संरेखित है, न कि रामानुज के भक्ति मार्ग के साथ।
📝 संक्षिप्त नोट्स: रामानुज और विशिष्टाद्वैत दर्शन
- काल: 11वीं-12वीं शताब्दी ईस्वी (लगभग 1017-1137 ईस्वी)
- दर्शन: विशिष्टाद्वैत (योग्य अद्वैतवाद) - व्यक्तिगत आत्माएं और विश्व वास्तविक हैं और ब्रह्म के गुण हैं, लेकिन अलग रहते हैं
- मूल शिक्षा: मोक्ष के सर्वोच्च मार्ग के रूप में एक व्यक्तिगत ईश्वर (विष्णु) के प्रति भक्ति
- ईश्वर की अवधारणा: व्यक्तिगत ईश्वर (सगुण ब्रह्म) - विष्णु/नारायण गुणों के साथ, दोनों अतींद्रिय और अंतर्निहित
- मोक्ष का मार्ग: प्रपत्ति (आत्म-समर्पण) और भक्ति, ईश्वर की कृपा (प्रसाद) द्वारा सहायता प्राप्त
- प्रमुख कृतियाँ: श्री भाष्य (ब्रह्म सूत्र पर टीका), गीता भाष्य, वेदार्थ संग्रह
- प्रभाव: दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को प्रेरित किया; सामाजिक समानता और मंदिर पूजा की पहुंच को बढ़ावा दिया
- शंकर से भिन्नता: शंकर के अद्वैत (निर्गुण ब्रह्म के साथ पूर्ण अद्वैतवाद) के विपरीत, रामानुज ने व्यक्तिगत आत्माओं और भौतिक जगत की वास्तविकता को ईश्वर के वास्तविक गुणों के रूप में स्वीकार किया
"योगवासिष्ठ" का फारसी में अनुवाद निज़ामुद्दीन पानीपती द्वारा किसके शासनकाल में किया गया था:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — अकबर
निज़ामुद्दीन पानीपती, एक फारसी विद्वान, ने सम्राट अकबर (1556-1605) के शासनकाल के दौरान "योगवासिष्ठ" का फारसी में अनुवाद किया। यह अनुवाद अकबर की महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक नीति का हिस्सा था, जिसमें संस्कृत ग्रंथों का फारसी में अनुवाद को बढ़ावा दिया गया, जो मुगल साम्राज्य की प्रशासनिक भाषा थी। अकबर के दरबार में महाभारत (रज़्मनामा के रूप में), रामायण और विभिन्न अन्य धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथों का अनुवाद हुआ, जिससे बौद्धिक आदान-प्रदान और धार्मिक सद्भाव को सुविधा मिली।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अकबर के शासनकाल में अनुवाद
- मकतब खाना (अनुवाद ब्यूरो): अकबर द्वारा संस्कृत, अरबी, ग्रीक और अन्य भाषाओं के कार्यों को फारसी में अनुवाद करने के लिए स्थापित किया गया।
- योगवासिष्ठ: ऋषि वसिष्ठ और राजकुमार राम के बीच संवाद के रूप में एक दार्शनिक ग्रंथ, जिसका अनुवाद निज़ामुद्दीन पानीपती ने किया।
- रज़्मनामा: महाभारत का फारसी अनुवाद 1589 में पूरा हुआ, जिसमें बदायूंनी और फैजी जैसे विद्वानों का योगदान था।
- रामायण: अकबर के संरक्षण में "रामायण" के रूप में फारसी में अनुवादित।
- अथर्व वेद: हाजी इब्राहिम सरहिंदी द्वारा अनुवादित।
- अकबर की दृष्टि: ये अनुवाद उनकी सुल्ह-ए-कुल (सार्वभौमिक शांति) और बौद्धिक समन्वयवाद की नीति को दर्शाते थे।
UPSC Prelims 2022 - मध्यकालीन इतिहास Chapter-wise Distribution
दिल्ली सल्तनत
2 Qs (33.3%)मुगल साम्राज्य
1 Qs (16.7%)भक्ति आंदोलन
1 Qs (16.7%)राजपूत राज्य एवं मराठा
1 Qs (16.7%)विजयनगर साम्राज्य
1 Qs (16.7%)UPSC Prelims 2022 - मध्यकालीन इतिहास Questions FAQs
Q1 How many मध्यकालीन इतिहास questions were asked in UPSC Prelims 2022?
Q2 What is the chapter-wise question distribution for मध्यकालीन इतिहास in UPSC Prelims 2022?
- दिल्ली सल्तनत: 2 questions (33.3%)
- मुगल साम्राज्य: 1 questions (16.7%)
- भक्ति आंदोलन: 1 questions (16.7%)
- राजपूत राज्य एवं मराठा: 1 questions (16.7%)
- विजयनगर साम्राज्य: 1 questions (16.7%)