"योगवासिष्ठ" का फारसी में अनुवाद निज़ामुद्दीन पानीपती द्वारा किसके शासनकाल में किया गया था:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — अकबर
निज़ामुद्दीन पानीपती, एक फारसी विद्वान, ने सम्राट अकबर (1556-1605) के शासनकाल के दौरान "योगवासिष्ठ" का फारसी में अनुवाद किया। यह अनुवाद अकबर की महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक नीति का हिस्सा था, जिसमें संस्कृत ग्रंथों का फारसी में अनुवाद को बढ़ावा दिया गया, जो मुगल साम्राज्य की प्रशासनिक भाषा थी। अकबर के दरबार में महाभारत (रज़्मनामा के रूप में), रामायण और विभिन्न अन्य धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथों का अनुवाद हुआ, जिससे बौद्धिक आदान-प्रदान और धार्मिक सद्भाव को सुविधा मिली।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अकबर के शासनकाल में अनुवाद
- मकतब खाना (अनुवाद ब्यूरो): अकबर द्वारा संस्कृत, अरबी, ग्रीक और अन्य भाषाओं के कार्यों को फारसी में अनुवाद करने के लिए स्थापित किया गया।
- योगवासिष्ठ: ऋषि वसिष्ठ और राजकुमार राम के बीच संवाद के रूप में एक दार्शनिक ग्रंथ, जिसका अनुवाद निज़ामुद्दीन पानीपती ने किया।
- रज़्मनामा: महाभारत का फारसी अनुवाद 1589 में पूरा हुआ, जिसमें बदायूंनी और फैजी जैसे विद्वानों का योगदान था।
- रामायण: अकबर के संरक्षण में "रामायण" के रूप में फारसी में अनुवादित।
- अथर्व वेद: हाजी इब्राहिम सरहिंदी द्वारा अनुवादित।
- अकबर की दृष्टि: ये अनुवाद उनकी सुल्ह-ए-कुल (सार्वभौमिक शांति) और बौद्धिक समन्वयवाद की नीति को दर्शाते थे।
Question 1 of 3 अकबर
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