मध्यकालीन भारत में, "फणम" शब्द का अर्थ था:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — सिक्के
मध्यकालीन भारत में "फणम" शब्द एक स्वर्ण या रजत सिक्के को संदर्भित करता था जो दक्षिण भारत में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता था, विशेष रूप से विजयनगर साम्राज्य, मदुरै के नायक और विभिन्न दक्कन राज्यों जैसे क्षेत्रों में। यह एक छोटी मूल्यवर्ग की मुद्रा थी जिसका उपयोग मध्यकाल से लेकर 19वीं शताब्दी तक व्यापार और वाणिज्य में व्यापक रूप से किया जाता था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मध्यकालीन भारतीय मुद्रा
- फणम: एक स्वर्ण/रजत सिक्का जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत में उपयोग किया जाता था (विजयनगर साम्राज्य, मदुरै नायक, त्रावणकोर, मैसूर); कुछ क्षेत्रों में ब्रिटिश काल तक जारी रहा
- टंका: दिल्ली सल्तनत के इल्तुतमिश द्वारा प्रस्तुत रजत सिक्का; उत्तर भारत में मानक मुद्रा बन गया
- जीतल: दिल्ली सल्तनत काल में छोटे लेनदेन के लिए उपयोग किया जाने वाला ताम्र सिक्का
- हून: विभिन्न क्षेत्रीय राज्यों में उपयोग किया जाने वाला छोटा ताम्र सिक्का; 1 टंका = 48 जीतल या कई हून
- पगोडा (वराह): दक्षिण भारत, विशेष रूप से विजयनगर साम्राज्य का स्वर्ण सिक्का; हिंदू देवताओं की छवि वाला
- रुपया: शेरशाह सूरी (1540-1545) द्वारा प्रस्तुत रजत सिक्का; अकबर द्वारा मानकीकृत; आधुनिक रुपये की नींव बना
Question 1 of 2 समाज एवं अर्थव्यवस्था
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