UPSC Prelims 2021
आधुनिक इतिहास Previous Year Questions (PYQs)
Explore 7 solved UPSC Prelims 2021 आधुनिक इतिहास questions with detailed step-by-step bilingual solutions, option analysis, and answer keys.
औपनिवेशिक भारत के संदर्भ में, शाहनवाज खान, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों को किस रूप में याद किया जाता है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — भारतीय राष्ट्रीय सेना के अधिकारी
शाहनवाज खान, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के वरिष्ठ अधिकारी थे, जिसे आजाद हिंद फौज के नाम से भी जाना जाता है, जिसका नेतृत्व नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया था। उन्हें 1945-46 के ऐतिहासिक लाल किला परीक्षण (INA परीक्षण) के लिए प्रसिद्ध रूप से याद किया जाता है, जहाँ अंग्रेजों द्वारा उन पर 'सम्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ने' के आरोप में सैन्य न्यायालय में मुकदमा चलाया गया था। इन परीक्षणों ने पूरे भारत में बड़े पैमाने पर राष्ट्रवादी प्रदर्शनों को जन्म दिया और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भूलाभाई देसाई, तेज बहादुर सप्रू और जवाहरलाल नेहरू जैसे कानूनी विद्वानों वाली एक INA रक्षा समिति का गठन किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: लाल किला परीक्षण और INA
- भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA): 1942 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा दक्षिण पूर्व एशिया में भारतीय युद्ध बंदियों और प्रवासियों से ब्रिटिश शासन से लड़ने के लिए गठित।
- लाल किला परीक्षण (नवंबर 1945 - मई 1946): दिल्ली के लाल किले में INA अधिकारियों का सैन्य न्यायालय। पहले मुकदमे में तीन अधिकारी थे जो विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे - शाहनवाज खान (मुस्लिम), प्रेम कुमार सहगल (हिंदू), और गुरबख्श सिंह ढिल्लों (सिख)।
- आरोप: सम्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ना, हत्या और हत्या में सहयोग।
- सार्वजनिक प्रतिक्रिया: पूरे भारत में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, हड़तालें और विरोध; हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों को राष्ट्रवादी उत्साह में एकजुट किया।
- रक्षा समिति: भूलाभाई देसाई के नेतृत्व में; इसमें तेज बहादुर सप्रू, जवाहरलाल नेहरू और कैलाश नाथ काटजू शामिल थे।
- परिणाम: तीनों को आजीवन निर्वासन की सजा सुनाई गई, लेकिन सार्वजनिक दबाव के कारण कमांडर-इन-चीफ ने सजा माफ कर दी। परीक्षणों ने भारत छोड़ने के ब्रिटिश निर्णय को तेज किया।
- विरासत: INA परीक्षणों ने प्रदर्शित किया कि अंग्रेज अब भारतीय सशस्त्र बलों की वफादारी पर भरोसा नहीं कर सकते थे और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भारतीय इतिहास में 8 अगस्त 1942 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा भारत छोड़ो प्रस्ताव को अपनाया गया।
8 अगस्त 1942 को, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने बॉम्बे में ऐतिहासिक भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया, जिसने महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक निर्णायक चरण था, जिसमें भारत से तत्काल ब्रिटिश वापसी की मांग की गई थी।
✅ विकल्प 1 – सही: 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे (अब मुंबई) में AICC द्वारा भारत छोड़ो प्रस्ताव वास्तव में अपनाया गया था।
❌ विकल्प 2 – गलत: वायसराय की कार्यकारी परिषद का विस्तार 1940 के अगस्त प्रस्ताव का हिस्सा था, 8 अगस्त 1942 से संबंधित नहीं।
❌ विकल्प 3 – गलत: कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने द्वितीय विश्व युद्ध के प्रकोप के बाद अक्टूबर-नवंबर 1939 में सात प्रांतों में इस्तीफा दिया था, 1942 में नहीं।
❌ विकल्प 4 – गलत: डोमिनियन दर्जे का प्रस्ताव करने वाला क्रिप्स मिशन मार्च 1942 में आया था, 8 अगस्त 1942 को नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| तिथि | 8 अगस्त 1942 (प्रस्ताव अपनाया गया) |
| स्थान | बॉम्बे (गोवालिया टैंक मैदान) |
| नेता | महात्मा गांधी |
| नारा | "करो या मरो" |
| मुख्य मांग | भारत में ब्रिटिश शासन का तत्काल अंत |
| सरकारी प्रतिक्रिया | 9 अगस्त 1942 को शीर्ष कांग्रेस नेताओं की तत्काल गिरफ्तारी |
| चरित्र | व्यापक हिंसा और तोड़फोड़ के साथ स्वतःस्फूर्त जन आंदोलन |
| समानांतर सरकारें | बलिया (उत्तर प्रदेश), सतारा (महाराष्ट्र), मिदनापुर (बंगाल) में स्थापित |
सत्रहवीं शताब्दी की पहली तिमाही में, निम्नलिखित में से किसमें/किन में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की फैक्ट्री/फैक्ट्रियां स्थित थी/थीं?
1. ब्रोच
2. चिकाकोल
3. त्रिचिनोपोली
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
यह प्रश्न 17वीं शताब्दी की पहली तिमाही (1600-1625) में स्थापित प्रारंभिक अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की फैक्ट्रियों के ज्ञान का परीक्षण करता है। उल्लिखित तीन स्थानों में से केवल ब्रोच में इस अवधि के दौरान एक कार्यशील अंग्रेजी फैक्ट्री थी।
✅ कथन 1 – सही: ब्रोच (भरूच, गुजरात) को 1616-1617 में एक अंग्रेजी फैक्ट्री के रूप में स्थापित किया गया था, जो सूरत फैक्ट्री (1613) की स्थापना के तुरंत बाद था, जिससे यह पश्चिमी तट पर प्रारंभिक व्यापारिक केंद्रों में से एक बन गया।
❌ कथन 2 – गलत: चिकाकोल (श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश) 17वीं शताब्दी की पहली तिमाही में अंग्रेजी फैक्ट्री नहीं थी; पूर्वी तट पर अंग्रेजी उपस्थिति मुख्य रूप से मसूलीपट्टनम (1611 में स्थापित) में थी।
❌ कथन 3 – गलत: त्रिचिनोपोली (तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु) में 17वीं शताब्दी की शुरुआत में अंग्रेजी फैक्ट्री नहीं थी; यह केवल 18वीं शताब्दी के मध्य में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच कर्नाटक युद्धों के दौरान रणनीतिक महत्व प्राप्त किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रारंभिक अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की फैक्ट्रियां (17वीं शताब्दी)
| काल | फैक्ट्री/स्थान | स्थापना वर्ष | महत्व |
|---|---|---|---|
| पहली तिमाही (1600-1625) | सूरत | 1613 | भारत में पहली स्थायी अंग्रेजी फैक्ट्री; मुगल व्यापार का प्रवेश द्वार |
| मसूलीपट्टनम | 1611 | पूर्वी तट पर पहली अंग्रेजी फैक्ट्री; वस्त्र व्यापार केंद्र | |
| अहमदाबाद | 1618 | महत्वपूर्ण वस्त्र विनिर्माण केंद्र | |
| ब्रोच (भरूच) | 1616-1617 | पश्चिमी तट की फैक्ट्री; वस्त्र और नील का व्यापार | |
| दूसरी तिमाही (1625-1650) | आर्मागन | 1626 | दक्षिण-पूर्वी तट पर पहली फैक्ट्री (वर्तमान चेन्नई के पास) |
| बालासोर | 1633 | पूर्वी तट; बंगाल व्यापार तक पहुंच | |
| फोर्ट सेंट जॉर्ज (मद्रास) | 1639 | कोरोमंडल तट पर प्रमुख किलेबंद बस्ती | |
| बाद में (1650 के बाद) | हुगली/कलकत्ता | 1651/1690 | बंगाल तक पहुंच; फोर्ट विलियम 1696 में स्थापित |
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आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — रवींद्रनाथ टैगोर ने यहां राष्ट्रगान का बंगाली से अंग्रेजी में अनुवाद किया।
आंध्र प्रदेश का मदनपल्ले भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है क्योंकि यहां रवींद्रनाथ टैगोर ने 'जन गण मन' का बंगाली से अंग्रेजी में अनुवाद किया था। फरवरी 1919 में मदनपल्ले के बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज में अपने प्रवास के दौरान, टैगोर ने "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" शीर्षक से अनुवाद प्रस्तुत किया।
❌ विकल्प 1 – गलत: पिंगली वेंकय्या ने तिरंगे भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की रूपरेखा तैयार की लेकिन इसे बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में INC सत्र में महात्मा गांधी को प्रस्तुत किया, मदनपल्ले में नहीं।
❌ विकल्प 2 – गलत: पट्टाभि सीतारमैया आंध्र प्रदेश में एक प्रमुख नेता थे और कांग्रेस अध्यक्ष रहे, लेकिन उन्होंने मदनपल्ले से भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व नहीं किया।
✅ विकल्प 3 – सही: रवींद्रनाथ टैगोर ने 1919 में मदनपल्ले में अपने प्रवास के दौरान जन गण मन का बंगाली से अंग्रेजी में "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" के रूप में अनुवाद किया।
❌ विकल्प 4 – गलत: थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना न्यूयॉर्क (1875) में हुई थी और इसका अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय अड्यार, चेन्नई (1882) में स्थानांतरित किया गया, मदनपल्ले में नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जन गण मन और राष्ट्रीय प्रतीक
- रचना: जन गण मन मूल रूप से 1911 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बंगाली में रचित किया गया था।
- पहला प्रदर्शन: इसे पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता सत्र में गाया गया था।
- अंग्रेजी अनुवाद: टैगोर ने फरवरी 1919 में आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में इसका अंग्रेजी में "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" के रूप में अनुवाद किया।
- राष्ट्रगान के रूप में अंगीकरण: संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को जन गण मन को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया।
- अवधि: पूर्ण संस्करण में पांच छंद हैं; संक्षिप्त संस्करण का आधिकारिक बजाने का समय लगभग 52 सेकंड है।
- नोबेल पुरस्कार: रवींद्रनाथ टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया, वे यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय बने।
निम्नलिखित में से कौन हिंदू फीमेल स्कूल के सचिव के रूप में जुड़े थे, जिसे बाद में बेथ्यून फीमेल स्कूल के नाम से जाना गया?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — ईश्वर चंद्र विद्यासागर
ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने हिंदू फीमेल स्कूल (1849 में स्थापित) के सचिव के रूप में कार्य किया, जिसे बाद में इसके संस्थापक जे.ई.डी. बेथ्यून के सम्मान में बेथ्यून फीमेल स्कूल का नाम दिया गया। विद्यासागर ने बंगाल में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारत में महिला उच्च शिक्षा के लिए इस अग्रणी संस्थान के प्रशासन और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: समाज सुधारक और महिला शिक्षा
| सुधारक | महिला शिक्षा और समाज सुधार में प्रमुख योगदान |
|---|---|
| ईश्वर चंद्र विद्यासागर | • हिंदू फीमेल स्कूल (बाद में बेथ्यून फीमेल स्कूल, 1849) के सचिव • विधवा पुनर्विवाह की वकालत से हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 • बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया और महिलाओं के लिए विद्यालय खोले • कुलीन बहुविवाह और बाल विवाह का विरोध किया |
| एनी बेसेंट | • सेंट्रल हिंदू कॉलेज, बनारस (1898) की स्थापना, बीएचयू की नींव • सेंट्रल हिंदू स्कूल फॉर गर्ल्स, वाराणसी की स्थापना • आईएनसी की पहली महिला अध्यक्ष (1917, कलकत्ता अधिवेशन) • तिलक के साथ ऑल इंडिया होम रूल लीग की स्थापना (1916) |
| देबेंद्रनाथ टैगोर | • तत्त्वबोधिनी सभा (1839) की स्थापना • आदि ब्रह्म समाज का नेतृत्व • ब्रह्म आंदोलन के माध्यम से तर्कवाद और समाज सुधार को बढ़ावा |
| सरोजिनी नायडू | • आईएनसी की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष (1925, कानपुर अधिवेशन) • गांधी द्वारा चुनी गई नमक सत्याग्रह की नेता (1930) • द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में गांधी के साथ • प्लेग महामारी सेवा के लिए कैसर-ए-हिंद पदक से सम्मानित |
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को मताधिकार देने की सिफारिश की।
- 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने महिलाओं को विधानमंडल में आरक्षित सीटें प्रदान कीं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने सीमित निर्वाचन सुधार शुरू किए लेकिन 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को सार्वभौमिक मताधिकार प्रदान नहीं किया। हालांकि, 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने स्पष्ट रूप से प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों दोनों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान किया, जो महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
❌ कथन 1 – गलत: मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को मताधिकार देने की सिफारिश नहीं की; मताधिकार संपत्ति, आय और शिक्षा योग्यताओं के आधार पर प्रतिबंधित रहा।
✅ कथन 2 – सही: 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में उनके लिए आरक्षित सीटें शुरू कीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संवैधानिक सुधार (1919-1935)
| विशेषता | भारत सरकार अधिनियम, 1919 | भारत सरकार अधिनियम, 1935 |
|---|---|---|
| निर्वाचन सुधार | प्रतिबंधित आधार पर मताधिकार का विस्तार (संपत्ति, आय, शिक्षा); महिलाओं के लिए सार्वभौमिक मताधिकार नहीं | प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें |
| प्रांतीय प्रशासन | द्वैध शासन की शुरुआत (हस्तांतरित और आरक्षित विषय) | द्वैध शासन समाप्त; प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत |
| केंद्रीय विधानमंडल | द्विसदनीय विधानमंडल की स्थापना | संघीय संरचना का प्रस्ताव (कभी लागू नहीं हुआ) |
| विषयों का विभाजन | केंद्रीय और प्रांतीय सूचियाँ | संघीय, प्रांतीय और समवर्ती सूचियाँ |
| सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व | पृथक निर्वाचक मंडल जारी | महिलाओं सहित अधिक समुदायों तक विस्तारित |
| न्यायिक पहलू | - | भारत के संघीय न्यायालय की स्थापना |
निम्नलिखित में से कौन 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' से संबंधित है, जो प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों का अंग्रेजी में अनुवाद है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — मोहनदास करमचंद गांधी
मोहनदास करमचंद गांधी ने 1930 में यरवदा जेल में अपने कारावास के दौरान संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं से प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों के संग्रह का अंग्रेजी में अनुवाद किया। यह कार्य 1934 में लंदन में 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' शीर्षक के तहत प्रकाशित हुआ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
बाल गंगाधर तिलक: वे अपनी कृति 'गीता रहस्य' के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसे उन्होंने मांडले में कारावास के दौरान (1908-1914) लिखा था, और 'द आर्कटिक होम इन द वेदास' के लिए भी जाने जाते हैं। वे 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' से संबंधित नहीं हैं।
जवाहरलाल नेहरू: उनके प्रमुख साहित्यिक योगदानों में 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' और 'ग्लिम्प्सेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' शामिल हैं, जो दोनों उनके विभिन्न कारावास के दौरान लिखी गईं, लेकिन 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' नहीं।
सरोजिनी नायडू: 'भारत कोकिला' के रूप में जानी जाने वाली, वे एक विपुल कवयित्री थीं जिनकी कृतियों में 'द गोल्डन थ्रेशोल्ड', 'द बर्ड ऑफ टाइम', और 'द ब्रोकन विंग' शामिल हैं, लेकिन वे 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' के अनुवाद से संबंधित नहीं हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा जेल साहित्य
| नेता | साहित्यिक कृति | जेल/वर्ष | विषय |
|---|---|---|---|
| महात्मा गांधी | सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन | यरवदा जेल, 1930 | प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों का अनुवाद |
| बाल गंगाधर तिलक | गीता रहस्य | मांडले जेल, 1908-1914 | भगवद गीता पर टीका |
| जवाहरलाल नेहरू | डिस्कवरी ऑफ इंडिया | अहमदनगर किला, 1942-1946 | भारतीय इतिहास और संस्कृति |
| जवाहरलाल नेहरू | ग्लिम्प्सेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री | विभिन्न जेलें, 1930-1933 | बेटी को विश्व इतिहास पर पत्र |
| विनायक दामोदर सावरकर | कमला; प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 | सेल्युलर जेल, अंडमान | कविता और इतिहास |
UPSC Prelims 2021 - आधुनिक इतिहास Chapter-wise Distribution
शिक्षा, प्रेस एवं सांस्कृतिक जागरण
2 Qs (28.6%)संवैधानिक एवं प्रशासनिक विकास
1 Qs (14.3%)सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन
1 Qs (14.3%)भारत में यूरोपियों का आगमन
1 Qs (14.3%)जन-आधारित राष्ट्रीय आंदोलन
1 Qs (14.3%)क्रांतिकारी राष्ट्रवाद
1 Qs (14.3%)UPSC Prelims 2021 - आधुनिक इतिहास Questions FAQs
Q1 How many आधुनिक इतिहास questions were asked in UPSC Prelims 2021?
Q2 What is the chapter-wise question distribution for आधुनिक इतिहास in UPSC Prelims 2021?
- शिक्षा, प्रेस एवं सांस्कृतिक जागरण: 2 questions (28.6%)
- संवैधानिक एवं प्रशासनिक विकास: 1 questions (14.3%)
- सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन: 1 questions (14.3%)
- भारत में यूरोपियों का आगमन: 1 questions (14.3%)
- जन-आधारित राष्ट्रीय आंदोलन: 1 questions (14.3%)
- क्रांतिकारी राष्ट्रवाद: 1 questions (14.3%)