UPSC CSE Prelims
जैव प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: जैव प्रौद्योगिकी
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जेनोमइंडिया प्रोजेक्ट के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है/हैं?
- यह मानव जीनोम परियोजना का एक हिस्सा है।
- परियोजना भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा वित्त पोषित है।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य भारतीय जनसंख्या की आनुवंशिक विविधता की एक सूची बनाना है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 गलत है क्योंकि जीनोमइंडिया परियोजना एक स्वतंत्र भारतीय पहल है, यह ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं है।
कथन 2 और 3 सही हैं। यह परियोजना जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा वित्तपोषित है और इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय आबादी की आनुवंशिक विविधता का विस्तृत डेटाबेस तैयार करना है।
इसलिए विकल्प B (केवल 2 और 3) सही उत्तर है।
जीनोमइंडिया परियोजना 2020 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य भारत के विभिन्न समुदायों के जीनोम का अध्ययन करना है। इससे आनुवंशिक रोगों की बेहतर पहचान, व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) और जैव-चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा मिलता है।
आनुवांशिक चिकित्सा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- आनुवंशिक दवाएं बीमारी के लिए जिम्मेदार दोषपूर्ण जीन को ठीक करती हैं/क्षतिपूर्ति करती हैं।
- इंजीनियर्ड वायरस और लिपिड नैनोकणों का उपयोग आनुवंशिक चिकित्सा के वाहक के रूप में किया जाता है।
- जेनेटिक दवाएं संपूर्ण डीएनए अनुक्रम को बदल देती हैं।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। आनुवंशिक दवाएं (जीन थेरेपी और जीन एडिटिंग) रोगों का मूल कारण पर उपचार करती हैं — रोग के लिए जिम्मेदार दोषपूर्ण/अनुपस्थित जीन को ठीक करने या उसकी भरपाई के लिए आनुवंशिक सामग्री को बदलकर।
कथन 2 — सही। आनुवंशिक सामग्री को सीधे इंजेक्ट नहीं किया जा सकता — इसके लिए वाहक (Vector) की आवश्यकता होती है:
| वाहक प्रकार | उदाहरण | कार्यविधि |
|---|---|---|
| इंजीनियर्ड वायरस | AAV, लेंटीवायरस | रोग-जनक गुण हटाकर चिकित्सीय जीन पहुँचाते हैं |
| लिपिड नैनोपार्टिकल (LNPs) | mRNA/CRISPR वितरण | सुरक्षात्मक वसा परत में आनुवंशिक पेलोड को समाहित करते हैं |
कथन 3 — गलत। आनुवंशिक दवाएं संपूर्ण DNA अनुक्रम को नहीं बदलतीं। मानव जीनोम में ~3 अरब बेस पेयर और 20,000+ जीन हैं। जीन थेरेपी अत्यंत सटीक होती है — केवल विशिष्ट अनुक्रमों या एकल जीन को लक्षित करती है।
मुख्य ट्रिक: कथन 3 में "संपूर्ण" शब्द का प्रयोग — यह UPSC का क्लासिक अतिशयोक्ति罗 जाल है। आनुवंशिक चिकित्सा की पहचान सटीकता है, न कि संपूर्ण परिवर्तन।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. समुद्र के पानी में कोई भी वायरस जीवित नहीं रह सकता।
II. कोई भी वायरस बैक्टीरिया को संक्रमित नहीं कर सकता।
III. कोई भी वायरस मेजबान कोशिकाओं में सेलुलर ट्रांसक्रिप्शनल गतिविधि को नहीं बदल सकता।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
तीनों कथन गलत हैं क्योंकि वायरस समुद्रों में पाए जाते हैं, बैक्टीरिया को संक्रमित कर सकते हैं और मेज़बान कोशिका की गतिविधियों को भी बदल सकते हैं।
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कथन I गलत है: समुद्री जल में बड़ी संख्या में वायरस पाए जाते हैं।
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कथन II गलत है: बैक्टीरियोफेज (Bacteriophages) ऐसे वायरस हैं जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं।
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कथन III गलत है: वायरस मेज़बान कोशिका की ट्रांसक्रिप्शनल गतिविधि को बदलकर अपनी प्रतिकृति बनाते हैं।
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अतः कोई भी कथन सही नहीं है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (D) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. कोई वायरस समुद्री जल में जीवित नहीं रह सकता | ❌ गलत | समुद्रों में अत्यधिक संख्या में वायरस पाए जाते हैं। |
| II. कोई वायरस बैक्टीरिया को संक्रमित नहीं कर सकता | ❌ गलत | बैक्टीरियोफेज विशेष रूप से बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं। |
| III. कोई वायरस कोशिका की ट्रांसक्रिप्शनल गतिविधि नहीं बदल सकता | ❌ गलत | वायरस अपनी वृद्धि के लिए कोशिका की जीन अभिव्यक्ति को बदलते हैं। |
वायरस
वायरस क्या हैं?
वायरस सूक्ष्म संक्रामक कण हैं जो केवल जीवित कोशिकाओं के भीतर ही अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
मिट्टी, वायु, जल और समुद्रों में पाए जाते हैं।
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स्वयं प्रजनन नहीं कर सकते।
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मेज़बान कोशिका की मशीनरी का उपयोग करते हैं।
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पौधों, जानवरों, कवकों और बैक्टीरिया को संक्रमित कर सकते हैं।
बैक्टीरियोफेज
-
बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस।
-
पृथ्वी पर सबसे अधिक पाए जाने वाले जैविक घटकों में से एक।
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चिकित्सा और जैव-प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण।
वायरस मेज़बान कोशिका को कैसे प्रभावित करते हैं?
-
जीन अभिव्यक्ति बदलते हैं।
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कोशिका की मशीनरी को नियंत्रित करते हैं।
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प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
-
ट्रांसक्रिप्शन और प्रोटीन निर्माण को संशोधित करते हैं।
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निम्नलिखित में से किसमें हाइड्रोजेल का उपयोग किया जाता है?
- मरीज़ों में नियंत्रित दवा वितरण
- मोबाइल एयर कंडीशनिंग सिस्टम
- औद्योगिक स्नेहक तैयार करना
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Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ केवल 1 (Option A)
हाइड्रोजेल ऐसे बहुलक (polymer) पदार्थ होते हैं जो बहुत अधिक मात्रा में पानी को सोखकर अपने भीतर बनाए रख सकते हैं। उनकी जैव-संगतता (biocompatibility) और नियंत्रित रूप से पदार्थ छोड़ने की क्षमता उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में बहुत उपयोगी बनाती है।
✅ कथन I सही है: हाइड्रोजेल का उपयोग नियंत्रित दवा वितरण (Controlled Drug Delivery) में किया जाता है क्योंकि ये दवा को धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से छोड़ सकते हैं।
❌ कथन II गलत है: मोबाइल एयर-कंडीशनिंग सिस्टम में रेफ्रिजरेंट, कंप्रेसर और हीट एक्सचेंजर उपयोग होते हैं। हाइड्रोजेल इनका सामान्य हिस्सा नहीं हैं।
❌ कथन III गलत है: औद्योगिक लुब्रिकेंट सामान्यतः तेल या सिंथेटिक पदार्थों पर आधारित होते हैं। हाइड्रोजेल में आवश्यक स्नेहन (lubrication) गुण नहीं होते।
संक्षिप्त नोट्स: हाइड्रोजेल (Hydrogels)
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हाइड्रोजेल पानी सोखने वाले पॉलीमर नेटवर्क होते हैं।
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इनमें 90–99% तक पानी संग्रहित रह सकता है।
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इनका प्रमुख उपयोग Controlled Drug Delivery में होता है।
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कॉन्टैक्ट लेंस, घाव की ड्रेसिंग और टिश्यू इंजीनियरिंग में उपयोग किए जाते हैं।
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अधिकांश हाइड्रोजेल जैव-संगत (Biocompatible) और सुरक्षित होते हैं।
-
ये pH, तापमान और नमी के अनुसार प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
-
बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और पुनर्जनन चिकित्सा में इनका महत्वपूर्ण उपयोग है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कुछ सूक्ष्मजीव जल के क्वथनांक से अधिक तापमान वाले वातावरण में वृद्धि कर सकते हैं।
- कुछ सूक्ष्मजीव जल के हिमांक से नीचे तापमान वाले वातावरण में वृद्धि कर सकते हैं।
- कुछ सूक्ष्मजीव 3 से कम pH वाले अत्यधिक अम्लीय वातावरण में वृद्धि कर सकते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सभी तीन
तीनों कथन सही हैं क्योंकि एक्सट्रीमोफाइल्स (चरम परिस्थितियों के अनुकूल सूक्ष्मजीव) ऐसे वातावरण में जीवित रह सकते हैं और पनप सकते हैं जो अधिकांश जीवन रूपों के लिए घातक होंगे। इनमें क्वथनांक से ऊपर और हिमांक से नीचे चरम तापमान के साथ-साथ अत्यधिक अम्लीय परिस्थितियाँ शामिल हैं।
✅ कथन 1 – सही: हाइपरथर्मोफाइल्स जैसे Pyrolobus fumarii 100°C (जल का क्वथनांक) से अधिक तापमान में पनप सकते हैं, जो अक्सर हाइड्रोथर्मल वेंट्स में 113°C तक के तापमान में पाए जाते हैं।
✅ कथन 2 – सही: साइक्रोफाइल्स (क्रायोफाइल्स) शीत-प्रेमी सूक्ष्मजीव हैं जो -20°C से +10°C तक के तापमान में वृद्धि करने में सक्षम हैं, जो जल के हिमांक (0°C) से काफी नीचे है।
✅ कथन 3 – सही: एसिडोफाइल्स जैसे Picrophilus oshimae 3 से कम pH वाले अत्यधिक अम्लीय वातावरण में पनपते हैं, कुछ प्रजातियाँ 0 के करीब pH स्तर पर भी जीवित रहती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: एक्सट्रीमोफाइल्स
| एक्सट्रीमोफाइल का प्रकार | चरम स्थिति | उदाहरण | आवास |
|---|---|---|---|
| हाइपरथर्मोफाइल्स | 80-100°C से अधिक तापमान | Pyrolobus fumarii, Thermococcus | हाइड्रोथर्मल वेंट्स, गर्म झरने |
| साइक्रोफाइल्स | 15°C से कम तापमान (अक्सर -20°C से +10°C) | Psychrobacter, Colwellia | आर्कटिक बर्फ, गहरे समुद्री जल |
| एसिडोफाइल्स | 3 से कम pH | Picrophilus oshimae, Acidithiobacillus | अम्ल खदान जल निकासी, ज्वालामुखी क्षेत्र |
| अल्कलीफाइल्स | 9 से अधिक pH | Bacillus alcalophilus | सोडा झीलें, क्षारीय मिट्टी |
| हैलोफाइल्स | उच्च नमक सांद्रता | Halobacterium, Dunaliella | नमक झीलें, नमक दलदल |
| बैरोफाइल्स (पीजोफाइल्स) | उच्च दबाव | Moritella, Shewanella | गहरे समुद्री खाइयाँ |
'एरियल मेटाजेनोमिक्स' निम्नलिखित में से किस स्थिति को सर्वोत्तम रूप से संदर्भित करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — एक आवास में हवा से DNA नमूनों को एक साथ एकत्र करना
एरियल मेटाजेनोमिक्स एक अत्याधुनिक तकनीक है जिसमें विशेष फिल्टर या वैक्यूम सिस्टम का उपयोग करके सीधे हवा से पर्यावरणीय DNA (e-DNA) एकत्र किया जाता है। जीव लगातार श्वास, त्वचा कोशिकाओं, फर, पराग, बीजाणुओं और अन्य जैविक कणों के माध्यम से अपने आसपास के वातावरण में आनुवंशिक सामग्री छोड़ते हैं, जिसे हवा के नमूनों से एकत्र किया जा सकता है। यह विधि शोधकर्ताओं को भौतिक घुसपैठ के बिना एक विशिष्ट आवास में एक साथ कई प्रजातियों—जिनमें जानवर, पौधे, कवक और सूक्ष्मजीव शामिल हैं—की पहचान और निगरानी करने की अनुमति देती है, जो इसे जैव विविधता मूल्यांकन के लिए एक शक्तिशाली गैर-आक्रामक उपकरण बनाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मेटाजेनोमिक्स और पर्यावरणीय DNA
- मेटाजेनोमिक्स: प्रयोगशाला संस्कृतियों में व्यक्तिगत जीवों को अलग किए बिना पर्यावरणीय नमूनों (मिट्टी, पानी, हवा) से सीधे प्राप्त आनुवंशिक सामग्री का अध्ययन।
- पर्यावरणीय DNA (e-DNA): जीवों द्वारा त्वचा कोशिकाओं, बलगम, मल, युग्मकों और अन्य जैविक सामग्रियों के माध्यम से अपने पर्यावरण में छोड़ी गई आनुवंशिक सामग्री।
- एरियल मेटाजेनोमिक्स: विशेष रूप से किसी आवास में जैव विविधता का आकलन करने के लिए वायु निस्पंदन प्रणालियों का उपयोग करके वायुजनित कणों से DNA एकत्र करने पर केंद्रित है।
- अनुप्रयोग: गैर-आक्रामक जैव विविधता निगरानी, दुर्लभ या मायावी प्रजातियों का पता लगाना, रोग वाहकों को ट्रैक करना, और पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य का अध्ययन करना।
- लाभ: कई टैक्सा का एक साथ पता लगाना, दृश्य अवलोकन या भौतिक कैप्चर की आवश्यकता नहीं, बड़े पैमाने के सर्वेक्षणों के लिए समय और लागत कुशल।
'माइक्रोसैटेलाइट DNA' का उपयोग निम्नलिखित में से किस मामले में किया जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — विभिन्न जीव-जंतु प्रजातियों के बीच विकासवादी संबंधों का अध्ययन करना
माइक्रोसैटेलाइट DNA, जिसे शॉर्ट टेंडम रिपीट्स (STRs) के रूप में भी जाना जाता है, अत्यधिक बहुरूपी DNA अनुक्रम हैं जो व्यक्तियों और जनसंख्याओं के बीच महत्वपूर्ण भिन्नता दर्शाते हैं। ये भिन्नताएं इन्हें विभिन्न जीव-जंतु प्रजातियों के बीच विकासवादी संबंधों, जनसंख्या आनुवंशिकी और फाइलोजेनेटिक अध्ययनों के लिए उत्कृष्ट आनुवंशिक मार्कर बनाती हैं। उच्च उत्परिवर्तन दर और दोहराए गए अनुक्रमों की संख्या में परिवर्तनशीलता शोधकर्ताओं को आनुवंशिक वंशावली का पता लगाने और विकासवादी विचलन पैटर्न को समझने में सक्षम बनाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: माइक्रोसैटेलाइट DNA (शॉर्ट टेंडम रिपीट्स)
- परिभाषा: माइक्रोसैटेलाइट छोटे दोहराए जाने वाले DNA अनुक्रम (सामान्यतः 1-6 बेस पेयर) हैं जो संपूर्ण जीनोम में टेंडम सरणियों में दोहराए जाते हैं।
- बहुरूपता: व्यक्तियों के बीच दोहराव की संख्या में अत्यधिक परिवर्तनशील, जो उन्हें पहचान और विविधता अध्ययन के लिए उपयोगी आनुवंशिक मार्कर बनाता है।
- विकासवादी जीवविज्ञान में अनुप्रयोग: आनुवंशिक विविधता, जनसंख्या संरचना, जीन प्रवाह और प्रजातियों के बीच फाइलोजेनेटिक संबंधों का अध्ययन करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- अन्य अनुप्रयोग: DNA फिंगरप्रिंटिंग, पितृत्व परीक्षण, फोरेंसिक विश्लेषण, संरक्षण आनुवंशिकी और प्रजनन कार्यक्रम।
- लाभ: सह-प्रभावी वंशानुक्रम, उच्च उत्परिवर्तन दर, जीनोम में प्रचुरता और PCR का उपयोग करके प्रवर्धन में आसानी।
- संबंधित नहीं: स्टेम सेल रूपांतरण, क्लोनल प्रवर्धन तकनीकों या प्रत्यक्ष दवा प्रभावकारिता परीक्षण से (इनमें विभिन्न आणविक तकनीकें शामिल हैं)।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कुछ मशरूम में औषधीय गुण होते हैं।
- कुछ मशरूम में मनोसक्रिय गुण होते हैं।
- कुछ मशरूम में कीटनाशक गुण होते हैं।
- कुछ मशरूम में जैव-दीप्तिमान गुण होते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — सभी चार
मशरूम के गुणों के बारे में सभी चार कथन वैज्ञानिक रूप से सटीक हैं। मशरूम जैविक गुणों की उल्लेखनीय विविधता प्रदर्शित करते हैं जो औषधीय, मनोरंजक, कृषि और पारिस्थितिक संदर्भों में प्रलेखित और उपयोग किए गए हैं।
✅ कथन 1 – सही: औषधीय मशरूम जैसे रेशी (Ganoderma lucidum), टर्की टेल (Trametes versicolor), और लायन्स मेन (Hericium erinaceus) में जैव-सक्रिय यौगिक होते हैं जिनमें प्रतिरक्षा-मॉड्यूलेटिंग, सूजन-रोधी और न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण होते हैं।
✅ कथन 2 – सही: साइलोसाइबिन युक्त मनोसक्रिय मशरूम (जैसे Psilocybe cubensis) मतिभ्रमी प्रभाव उत्पन्न करते हैं और अवसाद और PTSD के उपचार में चिकित्सीय अनुप्रयोगों के लिए शोधित किए जा रहे हैं।
✅ कथन 3 – सही: कीटनाशक मशरूम जैसे Metarhizium anisopliae और Beauveria bassiana कीड़ों के लिए विषैले यौगिक उत्पन्न करते हैं और कृषि में जैविक कीट नियंत्रण एजेंट के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
✅ कथन 4 – सही: जैव-दीप्तिमान मशरूम जैसे Mycena chlorophos और Panellus stipticus ल्यूसिफेरिन और ल्यूसिफेरेज से जुड़ी एंजाइमेटिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से प्रकाश उत्पन्न करते हैं, जो अंधेरे वन वातावरण में प्राकृतिक चमक पैदा करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मशरूम के गुण
| गुण | उदाहरण | प्रमुख अनुप्रयोग/यौगिक |
|---|---|---|
| औषधीय | रेशी, टर्की टेल, लायन्स मेन, कॉर्डिसेप्स, चागा | पॉलीसैकेराइड्स (बीटा-ग्लूकन्स), ट्राइटरपीन; प्रतिरक्षा समर्थन, संज्ञानात्मक वृद्धि, कैंसर-रोधी शोध |
| मनोसक्रिय | Psilocybe cubensis, Psilocybe semilanceata | साइलोसाइबिन और साइलोसिन; मतिभ्रमी प्रभाव, मानसिक स्वास्थ्य विकारों के लिए चिकित्सीय शोध |
| कीटनाशक | Metarhizium anisopliae, Beauveria bassiana | एंटोमोपैथोजेनिक कवक; जैविक कीट नियंत्रण, कीट-विषैले यौगिक उत्पन्न करता है |
| जैव-दीप्तिमान | Mycena chlorophos, Panellus stipticus, Omphalotus olearius | ल्यूसिफेरिन-ल्यूसिफेरेज प्रणाली; हरी रोशनी उत्पन्न करता है, बीजाणु प्रसार में पारिस्थितिक भूमिका |
समाचारों में कभी-कभी उल्लिखित "गुच्छी" के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह एक कवक है।
2. यह कुछ हिमालयी वन क्षेत्रों में उगता है।
3. इसकी व्यावसायिक खेती पूर्वोत्तर भारत की हिमालयी तलहटी में की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2
गुच्छी (Morchella esculenta) एक दुर्लभ और महंगी जंगली मशरूम कवक है जो हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है। यह बर्फ पिघलने के बाद शीतोष्ण वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगती है लेकिन व्यावसायिक रूप से इसकी खेती नहीं की जा सकती, इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।
✅ कथन 1 – सही: गुच्छी एक कवक (Morchella esculenta) है जो Morchellaceae परिवार से संबंधित है, जो अपनी विशिष्ट मधुकोश जैसी आकृति और बहुमूल्य पाक मूल्य के लिए जाना जाता है।
✅ कथन 2 – सही: यह हिमालय के शीतोष्ण कोणधारी वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगता है, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फ पिघलने के बाद वसंत ऋतु में।
❌ कथन 3 – गलत: गुच्छी मशरूम को पेड़ों के साथ इसके जटिल माइकोराइजल संबंधों के कारण व्यावसायिक रूप से उगाया नहीं जा सकता; ये जंगली संग्रहित होते हैं, और ये मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालय में उगते हैं, न कि पूर्वोत्तर की तलहटी में।
📝 संक्षिप्त नोट्स: गुच्छी (मोरचेला मशरूम)
- वैज्ञानिक नाम: Morchella esculenta, Morchellaceae परिवार से संबंधित
- रूप-रंग: विशिष्ट मधुकोश या स्पंज जैसी टोपी संरचना, हल्के भूरे से गहरे भूरे रंग की
- आवास: पश्चिमी हिमालय (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) के शीतोष्ण कोणधारी वनों में 2,500-3,500 मीटर की ऊंचाई पर
- मौसम: वसंत ऋतु (मार्च-मई) में बर्फ पिघलने के बाद नम, छायादार वन तल में उगता है
- आर्थिक मूल्य: विश्व स्तर पर सबसे महंगे मशरूमों में से एक, ₹10,000-30,000 प्रति किलो तक मिलता है; प्रमुख निर्यात वस्तु
- खेती की स्थिति: पेड़ों की जड़ों के साथ जटिल सहजीवी संबंध के कारण व्यावसायिक रूप से खेती नहीं की जा सकती; केवल स्थानीय समुदायों द्वारा जंगली संग्रह
- पोषण मूल्य: प्रोटीन, विटामिन (विशेष रूप से विटामिन डी), खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध
- संरक्षण चिंता: अत्यधिक संग्रह से जंगली आबादी को खतरा; सतत संग्रह प्रथाओं की आवश्यकता
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बायोफिल्म मानव ऊतकों के भीतर चिकित्सा प्रत्यारोपणों पर बन सकती हैं।
- बायोफिल्म खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण सतहों पर बन सकती हैं।
- बायोफिल्म एंटीबायोटिक प्रतिरोध प्रदर्शित कर सकती हैं।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
बायोफिल्म के बारे में तीनों कथन सही हैं। बायोफिल्म स्व-उत्पादित सुरक्षात्मक मैट्रिक्स में संलग्न जटिल सूक्ष्मजीव समुदाय हैं जो चिकित्सा प्रत्यारोपण, खाद्य प्रसंस्करण उपकरण और जैविक ऊतकों सहित विभिन्न सतहों पर बन सकते हैं, तथा महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक प्रतिरोध प्रदर्शित करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: बायोफिल्म आसानी से कैथेटर, हृदय वाल्व और कृत्रिम जोड़ों जैसे चिकित्सा प्रत्यारोपणों पर मानव ऊतकों के भीतर बनती हैं, जिससे दीर्घकालिक संक्रमण होते हैं जिनका उपचार करना कठिन होता है।
✅ कथन 2 – सही: बायोफिल्म सामान्यतः खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण सतहों पर बनती हैं, खाद्य उत्पादों को दूषित करती हैं और खराब होने में योगदान देती हैं, जबकि मानक सफाई विधियों के प्रति प्रतिरोधी होती हैं।
✅ कथन 3 – सही: बायोफिल्म के भीतर जीवाणु प्लैंकटोनिक (मुक्त-तैरते) जीवाणुओं की तुलना में 10-1000 गुना अधिक एंटीबायोटिक प्रतिरोध प्रदर्शित करते हैं, जो सुरक्षात्मक मैट्रिक्स बाधा, परिवर्तित चयापचय अवस्थाओं और क्षैतिज जीन स्थानांतरण तंत्रों के कारण होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बायोफिल्म
- परिभाषा: बायोफिल्म स्व-उत्पादित बाह्यकोशिकीय बहुलक पदार्थ (EPS) मैट्रिक्स में संलग्न सूक्ष्मजीवों के संरचित समुदाय हैं, जो सतहों का पालन करते हैं।
- चिकित्सीय निहितार्थ: मनुष्यों में सभी सूक्ष्मजीव संक्रमणों के 65-80% के लिए जिम्मेदार; इंड्वेलिंग चिकित्सा उपकरणों, दांतों (डेंटल प्लाक) और दीर्घकालिक घावों पर बनते हैं।
- प्रतिरोध तंत्र: EPS मैट्रिक्स रोगाणुरोधी के लिए एक बाधा के रूप में कार्य करता है; बायोफिल्म में धीमी वृद्धि दर एंटीबायोटिक प्रभावकारिता को कम करती है; पर्सिस्टर कोशिकाएं उपचार से बच जाती हैं; जीन स्थानांतरण प्रतिरोध के प्रसार को बढ़ावा देता है।
- औद्योगिक प्रभाव: जल पाइप, जहाज की पतवार (बायोफाउलिंग), हीट एक्सचेंजर और खाद्य प्रसंस्करण उपकरण को दूषित करते हैं; आर्थिक नुकसान और दक्षता में कमी का कारण बनते हैं।
- खाद्य सुरक्षा: खाद्य उद्योग में बायोफिल्म लिस्टीरिया, साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे रोगजनकों को आश्रय देती हैं; मानक स्वच्छता प्रक्रियाओं के प्रति प्रतिरोधी हैं।
- नियंत्रण रणनीतियां: यांत्रिक हटाने, EPS के एंजाइमेटिक व्यवधान, क्वोरम सेंसिंग अवरोधक और संयोजन रोगाणुरोधी चिकित्सा शामिल हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
DNA बारकोडिंग निम्नलिखित के लिए एक साधन हो सकती है:
1. किसी पौधे या जानवर की आयु का आकलन करना।
2. उन प्रजातियों में अंतर करना जो एक जैसी दिखती हैं।
3. प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में अवांछनीय पशु या पौधे की सामग्री की पहचान करना।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 2 और 3
DNA बारकोडिंग एक आणविक तकनीक है जो प्रजातियों की पहचान के लिए लघु, मानकीकृत जीन अनुक्रमों का उपयोग करती है। यह आकारिकी रूप से समान प्रजातियों को अलग करने और प्रसंस्कृत सामग्री में प्रजाति संरचना का पता लगाने के लिए विशेष रूप से प्रभावी है, लेकिन यह जीवों की आयु निर्धारित नहीं कर सकती है।
❌ कथन 1 – गलत: DNA बारकोडिंग आनुवंशिक अनुक्रमों के आधार पर प्रजातियों की पहचान करती है लेकिन किसी पौधे या जानवर की आयु का आकलन नहीं कर सकती, क्योंकि आयु निर्धारण के लिए डेंड्रोक्रोनोलॉजी या कार्बन डेटिंग जैसी अन्य विधियों की आवश्यकता होती है।
✅ कथन 2 – सही: DNA बारकोडिंग उनके अद्वितीय आनुवंशिक बारकोड (सामान्यतः जानवरों में COI जीन, पौधों में rbcL या matK) की तुलना करके आकारिकी रूप से समान दिखने वाली प्रजातियों में अंतर करने में उत्कृष्ट है।
✅ कथन 3 – सही: DNA बारकोडिंग का व्यापक रूप से खाद्य सुरक्षा में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में अघोषित या अवांछनीय पशु/पौधे की सामग्री की पहचान के लिए उपयोग किया जाता है, जो खाद्य मिलावट और गलत लेबलिंग का पता लगाने में मदद करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: DNA बारकोडिंग
- परिभाषा: एक आणविक उपकरण जो प्रजातियों की तीव्र पहचान के लिए लघु, मानकीकृत DNA अनुक्रमों का उपयोग करता है
- जीन मार्कर: जानवरों के लिए COI (साइटोक्रोम सी ऑक्सीडेज I); पौधों के लिए rbcL, matK, ITS
- अनुप्रयोग: प्रजाति पहचान, जैव विविधता मूल्यांकन, खाद्य प्रमाणीकरण, अवैध वन्यजीव व्यापार का पता लगाना, औषधीय पौधों की पहचान
- लाभ: छोटे ऊतक नमूनों के साथ काम करता है, गुप्त प्रजातियों की पहचान करता है, अपरिपक्व/क्षतिग्रस्त नमूनों के लिए उपयोगी
- सीमाएं: आयु निर्धारित नहीं कर सकता, हाल के प्रजातीकरण में समान अनुक्रम दिखा सकते हैं, संदर्भ डेटाबेस की आवश्यकता है
- वैश्विक पहल: इंटरनेशनल बारकोड ऑफ लाइफ (iBOL) परियोजना व्यापक DNA बारकोड पुस्तकालय बनाए रखती है
प्रोबायोटिक्स के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
प्रोबायोटिक्स बैक्टीरिया और यीस्ट दोनों से बने होते हैं।
प्रोबायोटिक्स में मौजूद जीव उन खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं जिन्हें हम ग्रहण करते हैं, लेकिन वे स्वाभाविक रूप से हमारे आंत में नहीं पाए जाते हैं।
प्रोबायोटिक्स दूध की शर्करा के पाचन में मदद करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 3
यह प्रश्न प्रोबायोटिक्स के बारे में ज्ञान की परीक्षा करता है, जो आंत के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी जीवित सूक्ष्मजीव हैं। कथन 1 और 3 सही हैं क्योंकि प्रोबायोटिक्स में बैक्टीरिया और यीस्ट दोनों शामिल हैं, और कुछ स्ट्रेन लैक्टोज (दूध की शर्करा) को पचाने में मदद करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: प्रोबायोटिक्स में बैक्टीरिया (जैसे लैक्टोबैसिलस, बिफीडोबैक्टीरियम) और यीस्ट (जैसे सैकेरोमाइसिस बाउलार्डी) दोनों शामिल हैं।
❌ कथन 2 – गलत: प्रोबायोटिक जीव स्वाभाविक रूप से हमारे आंत में सामान्य आंत माइक्रोबायोम के हिस्से के रूप में पाए जाते हैं; प्रोबायोटिक्स इन लाभकारी सूक्ष्मजीवों की पूर्ति करते हैं।
✅ कथन 3 – सही: कुछ प्रोबायोटिक स्ट्रेन लैक्टेज एंजाइम उत्पन्न करते हैं, जो लैक्टोज (दूध की शर्करा) को तोड़ने में मदद करता है, विशेष रूप से लैक्टोज असहिष्णु व्यक्तियों में पाचन में सहायता करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रोबायोटिक्स
- परिभाषा: जीवित सूक्ष्मजीव जो पर्याप्त मात्रा में सेवन करने पर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं, विशेष रूप से आंत के स्वास्थ्य के लिए।
- सामान्य प्रकार: बैक्टीरिया (लैक्टोबैसिलस, बिफीडोबैक्टीरियम, स्ट्रेप्टोकोकस थर्मोफिलस) और यीस्ट (सैकेरोमाइसिस बाउलार्डी)।
- प्राकृतिक स्रोत: दही, केफिर, सॉरक्रॉट, किमची, टेम्पेह, मिसो, अचार और अन्य किण्वित खाद्य पदार्थ।
- लाभ: पाचन स्वास्थ्य में सुधार, प्रतिरक्षा कार्य में वृद्धि, लैक्टोज पाचन में सहायता, विटामिन (B और K) का संश्लेषण, दस्त और कब्ज की रोकथाम।
- आंत माइक्रोबायोम: मानव आंत में स्वाभाविक रूप से खरबों सूक्ष्मजीव होते हैं; प्रोबायोटिक्स पहले से मौजूद लाभकारी स्ट्रेन की पूर्ति करते हैं।
- बनाम प्रीबायोटिक्स: प्रोबायोटिक्स जीवित जीव हैं; प्रीबायोटिक्स गैर-पाच्य खाद्य घटक हैं जो लाभकारी आंत बैक्टीरिया को पोषित करते हैं।
निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- जीवाणु (Bacteria)
- कवक (Fungi)
- विषाणु (Virus)
उपर्युक्त में से किसे कृत्रिम/संश्लेषित माध्यम में संवर्धित किया जा सकता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
जीवाणु और कवक को कृत्रिम/संश्लेषित माध्यम में संवर्धित किया जा सकता है क्योंकि उनके पास स्वतंत्र वृद्धि और प्रजनन के लिए पूर्ण कोशिकीय तंत्र होता है। विषाणु, अनिवार्य अंतःकोशिकीय परजीवी होने के कारण, कोशिकीय तंत्र से रहित होते हैं और केवल जीवित परपोषी कोशिकाओं के अंदर ही प्रतिकृति बना सकते हैं, जिससे वे संश्लेषित माध्यम में वृद्धि करने में असमर्थ होते हैं।
✅ कथन 1 (जीवाणु) – सही: जीवाणु को विभिन्न कृत्रिम माध्यम जैसे पोषक अगार, पोषक शोरबा और अन्य विशिष्ट माध्यम में संवर्धित किया जा सकता है क्योंकि वे पूर्ण उपापचयी तंत्र वाले आत्मनिर्भर जीव हैं।
✅ कथन 2 (कवक) – सही: कवक को कृत्रिम माध्यम जैसे पोटैटो डेक्सट्रोज अगार (PDA), सैबोराउड डेक्सट्रोज अगार और ज़ैपेक डॉक्स अगार में संवर्धित किया जा सकता है, क्योंकि वे वृद्धि के लिए स्वतंत्र रूप से पोषक तत्वों का उपयोग कर सकते हैं।
❌ कथन 3 (विषाणु) – गलत: विषाणु को कृत्रिम/संश्लेषित माध्यम में संवर्धित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे अकोशिकीय हैं और प्रतिकृति के लिए जीवित परपोषी कोशिकाओं (भ्रूणित अंडे, कोशिका संवर्धन, या जीवित जीव) की आवश्यकता होती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सूक्ष्मजीव संवर्धन विधियाँ
| सूक्ष्मजीव | संवर्धन विधि | माध्यम/विधियों के उदाहरण | कारण |
|---|---|---|---|
| जीवाणु | कृत्रिम/संश्लेषित माध्यम | पोषक अगार, मैकॉन्की अगार, रक्त अगार, पोषक शोरबा | पूर्ण कोशिकीय तंत्र; आवश्यक अणुओं को संश्लेषित कर सकते हैं |
| कवक | कृत्रिम/संश्लेषित माध्यम | पोटैटो डेक्सट्रोज अगार (PDA), सैबोराउड डेक्सट्रोज अगार, ज़ैपेक डॉक्स अगार | पूर्ण उपापचयी मार्गों वाली यूकैरियोटिक कोशिकाएँ |
| विषाणु | केवल जीवित परपोषी कोशिकाएँ | कोशिका संवर्धन, भ्रूणित अंडे, जीवित जंतु/पादप | अनिवार्य अंतःकोशिकीय परजीवी; उपापचयी तंत्र की कमी |
- कृत्रिम माध्यम: जीवित कोशिकाओं के बिना प्रयोगशाला में तैयार रासायनिक रूप से परिभाषित या जटिल माध्यम
- जीवाणु संवर्धन: विशिष्ट तापमान और pH पर ठोस (अगार प्लेट्स) या तरल (शोरबा) माध्यम पर बढ़ सकते हैं
- कवक संवर्धन: जीवाणु की तुलना में थोड़ा अम्लीय pH और लंबी ऊष्मायन अवधि की आवश्यकता होती है
- विषाणु संवर्धन: ऊतक संवर्धन, भ्रूणित मुर्गी के अंडे, या प्रायोगिक जंतुओं की आवश्यकता होती है
- मुख्य अंतर: विषाणु अकोशिकीय हैं और प्रतिकृति के लिए पूरी तरह से परपोषी कोशिका के राइबोसोम, एंजाइम और न्यूक्लियोटाइड पर निर्भर हैं
बॉलगार्ड I और बॉलगार्ड II प्रौद्योगिकियों का उल्लेख किस संदर्भ में किया जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — आनुवंशिक रूप से संशोधित फसल पौधों का विकास करना।
बॉलगार्ड I और बॉलगार्ड II जैव प्रौद्योगिकी उत्पाद हैं जो कीट प्रतिरोधी आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) कपास पौधों के निर्माण के लिए विकसित किए गए हैं। ये प्रौद्योगिकियां बैसिलस थुरिंजिएन्सिस (Bt) बैक्टीरिया से जीन का उपयोग करती हैं जो कीटनाशक प्रोटीन उत्पन्न करते हैं जो कपास के पौधों को बॉलवर्म और अन्य लेपिडोप्टेरन कीटों से बचाते हैं, जिससे रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता कम हो जाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: Bt कपास प्रौद्योगिकियां
| विशेषता | बॉलगार्ड I | बॉलगार्ड II |
|---|---|---|
| शुरुआत का वर्ष | 2002 (भारत की पहली अनुमोदित GM फसल) | 2006 |
| उपयोग किए गए Bt जीन | एकल जीन (Cry1Ac) | दो जीन (Cry1Ac और Cry2Ab) |
| लक्षित कीट | मुख्य रूप से अमेरिकन बॉलवर्म (हेलिकोवर्पा आर्मिजेरा) | व्यापक स्पेक्ट्रम: अमेरिकन बॉलवर्म, स्पोडोप्टेरा प्रजातियां, और अन्य लेपिडोप्टेरन कैटरपिलर |
| तंत्र | Bt जीन विशिष्ट कीटों के लिए विषाक्त कीटनाशक प्रोटीन उत्पन्न करता है | द्वि-जीन प्रौद्योगिकी बढ़ी हुई और व्यापक प्रतिरोधकता प्रदान करती है |
| लाभ | कीटनाशक उपयोग में कमी, उत्पादन में वृद्धि | बेहतर कीट प्रतिरोध, विलंबित प्रतिरोध विकास, उच्च प्रभावकारिता |
वंशानुगत रोगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- माता-पिता से संतान में माइटोकॉन्ड्रियल रोगों के संचरण को माइटोकॉन्ड्रियल प्रतिस्थापन चिकित्सा द्वारा अंडे के इन विट्रो निषेचन से पहले या बाद में रोका जा सकता है।
- एक बच्चा माइटोकॉन्ड्रियल रोगों को पूरी तरह से माता से प्राप्त करता है और पिता से नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
माइटोकॉन्ड्रियल प्रतिस्थापन चिकित्सा (MRT) एक प्रजनन तकनीक है जो माता से संतान में माइटोकॉन्ड्रियल रोगों के संचरण को रोकने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिसमें दोषपूर्ण माइटोकॉन्ड्रिया को स्वस्थ दाता माइटोकॉन्ड्रिया से प्रतिस्थापित किया जाता है, या तो इन विट्रो निषेचन से पहले या बाद में। माइटोकॉन्ड्रियल DNA विशेष रूप से मातृ वंश के माध्यम से विरासत में मिलता है, क्योंकि शुक्राणु में मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया आमतौर पर निषेचन के बाद नष्ट हो जाते हैं, जिससे बच्चे के लिए पिता से माइटोकॉन्ड्रियल रोग विरासत में लेना असंभव हो जाता है।
✅ कथन 1 – सही: MRT को निषेचन से पहले (मातृ स्पिंडल स्थानांतरण का उपयोग करके) या निषेचन के बाद (प्रोन्यूक्लियर स्थानांतरण का उपयोग करके) माइटोकॉन्ड्रियल रोग संचरण को रोकने के लिए किया जा सकता है।
✅ कथन 2 – सही: माइटोकॉन्ड्रियल DNA पूरी तरह से माता से विरासत में मिलता है, क्योंकि केवल अंडा ही भ्रूण को माइटोकॉन्ड्रिया प्रदान करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: माइटोकॉन्ड्रियल वंशानुक्रम और प्रतिस्थापन चिकित्सा
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| माइटोकॉन्ड्रियल DNA (mtDNA) | माइटोकॉन्ड्रिया में उपस्थित वृत्ताकार DNA; कोशिकीय ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक 37 जीन को एनकोड करता है; विशेष रूप से माता से विरासत में मिलता है |
| माइटोकॉन्ड्रियल रोग | mtDNA में उत्परिवर्तन के कारण होते हैं; कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन को प्रभावित करते हैं; उदाहरणों में MELAS सिंड्रोम, लेह सिंड्रोम और लेबर की वंशानुगत ऑप्टिक न्यूरोपैथी शामिल हैं |
| मातृ वंशानुक्रम | शुक्राणु माइटोकॉन्ड्रिया निषेचन के बाद नष्ट हो जाते हैं; केवल अंडे के माइटोकॉन्ड्रिया भ्रूण में योगदान करते हैं; इस प्रकार, mtDNA केवल माता से आता है |
| माइटोकॉन्ड्रियल प्रतिस्थापन चिकित्सा (MRT) | माइटोकॉन्ड्रियल रोगों के संचरण को रोकने की तकनीक; दोषपूर्ण माइटोकॉन्ड्रिया को स्वस्थ दाता माइटोकॉन्ड्रिया से प्रतिस्थापित करना शामिल है |
| MRT तकनीकें | मातृ स्पिंडल स्थानांतरण: निषेचन से पहले - माता के अंडे से नाभिक को स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रिया वाले एन्यूक्लिएटेड दाता अंडे में स्थानांतरित किया जाता है प्रोन्यूक्लियर स्थानांतरण: निषेचन के बाद - निषेचित अंडे से प्रोन्यूक्लियाई को एन्यूक्लिएटेड दाता भ्रूण में स्थानांतरित किया जाता है |
| तीन-माता-पिता शिशु | MRT के माध्यम से जन्म लेने वाले बच्चे में तीन लोगों से आनुवंशिक सामग्री होती है: दोनों माता-पिता से परमाणु DNA और दाता से mtDNA |
| नैतिक और कानूनी स्थिति | यूके 2015 में MRT को वैध बनाने वाला पहला देश बना; नैतिक निहितार्थों के संबंध में कई देशों में बहस जारी है |