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रसायन विज्ञान Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: रसायन विज्ञान
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तीन धातुओं A, B और C की मानक इलेक्ट्रोड विभव क्रमशः 0.5 V, -3 V और -1.2 V हैं। इन धातुओं की अपचायक क्षमता होगी
Detailed Explanation:
अपचायक क्षमता का मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) से विपरीत संबंध होता है — जितना अधिक ऋणात्मक E°, उतना प्रबल अपचायक।
धातु B (−3.0 V) सबसे अधिक ऋणात्मक विभव → सर्वाधिक अपचायक क्षमता। धातु C (−1.2 V) मध्यम ऋणात्मक → मध्यम अपचायक क्षमता। धातु A (+0.5 V) धनात्मक → न्यूनतम अपचायक क्षमता। क्रम: B > C > A।
सिरके का खट्टा स्वाद किसके कारण होता है
Detailed Explanation:
सिरके का खट्टा स्वाद एसिटिक अम्ल (CH₃COOH) के कारण होता है, जो इथेनॉल के किण्वन से बनता है।
टार्टरिक अम्ल इमली और अंगूर में, लैक्टिक अम्ल खट्टे दूध और दही में, और साइट्रिक अम्ल खट्टे फलों में पाया जाता है — इनमें से कोई भी सिरके में मौजूद अम्ल नहीं है।
0.1N HCl विलयन का pH मान लगभग होगा:
Detailed Explanation:
HCl एक प्रबल अम्ल है जो पूर्णतः वियोजित होता है: HCl → H⁺ + Cl⁻। एकक्षारकीय अम्ल के लिए 0.1N = 0.1M, इसलिए [H⁺] = 0.1 M।
pH = -log[H⁺] = -log(0.1) = -(-1) = 1.0। pH 10 या 11 वाले विकल्प क्षारीय विलयन दर्शाते हैं, अम्ल नहीं। pH 2.0 के लिए [H⁺] = 0.01 M चाहिए, जो दस गुना अधिक तनु है।
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निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक रात्रि चमकने वाला पिगमेंट के रूप में जाना जाता है?
Detailed Explanation:
यूरोपियम-डोप्ड स्ट्रोंटियम एल्युमिनेट (SrAl₂O₄:Eu²⁺,Dy³⁺) सबसे प्रभावी आधुनिक फॉस्फोरसेंट पदार्थ है जो रात्रि चमकने वाले पिगमेंट में उपयोग होता है।
यह प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करता है और अंधेरे में धीरे-धीरे छोड़ता है, जिससे 12 घंटे तक चमकदार आफ्टरग्लो मिलता है। सूचीबद्ध अन्य यौगिक (कॉपर सल्फाइड-डोप्ड जिंक ऑक्साइड, बेरियम सल्फेट-डोप्ड कॉपर कार्बोनेट, बोरॉन ऑक्साइड-डोप्ड कॉपर सल्फेट) ग्लो-इन-द-डार्क अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण या प्रभावी फॉस्फोरसेंस प्रदर्शित नहीं करते।
तेल को जस्तेदार लोहे (गैल्वनाइज़्ड आयरन) के बर्तन में क्यों नहीं रखा जाता है?
Detailed Explanation:
जस्तेदार लोहा (गैल्वनाइज़्ड आयरन) जस्ता (जिंक) की परत से ढका होता है, जो तेल के घटकों से प्रतिक्रिया कर विषाक्त जिंक यौगिक बनाता है जो तेल को उपभोग के लिए असुरक्षित बना देता है।
रासायनिक प्रतिक्रिया से विकृतगंधिता (रैंसिडिटी) भी होती है, जो तेल के स्वाद, गंध और पोषण गुणवत्ता को खराब करती है।
तेल में मौजूद नमी और अम्लीय अशुद्धियाँ जिंक की परत को संक्षारित करती हैं, जिससे अंदर का लोहा जंग निर्माण के लिए उजागर हो जाता है।
चूंकि तीनों प्रभाव—विषाक्तता, गुणवत्ता में गिरावट और संक्षारण—एक साथ होते हैं, इसलिए सही उत्तर उपरोक्त सभी है।
ऑक्टेन रेटिंग बढ़ाने के लिए कौन-सा यौगिक उपयोग किया जाता है?
Detailed Explanation:
टेट्राएथिललेड (TEL) ऐतिहासिक रूप से गैसोलीन में ऑक्टेन रेटिंग बढ़ाने और इंजन नॉकिंग रोकने के लिए सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला एंटी-नॉक एजेंट था।
हालांकि अत्यधिक प्रभावी, TEL अत्यंत विषैला है और इसे विश्वव्यापी स्तर पर बंद कर दिया गया है; आधुनिक ईंधन में इथेनॉल और सुगंधित हाइड्रोकार्बन जैसे अनलेडेड विकल्प का उपयोग होता है।
वनस्पति घी में वनस्पति तेल के हाइड्रोजनीकरण में उपयोग किया जाने वाला उत्प्रेरक है
Detailed Explanation:
निकेल (Ni) वह औद्योगिक उत्प्रेरक है जिसका उपयोग वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में वनस्पति घी बनाने के लिए किया जाता है।
यह प्रक्रिया असंतृप्त वसा (तरल तेल) को संतृप्त वसा (ठोस घी) में 140–225°C पर बारीक विभाजित निकेल की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़कर परिवर्तित करती है।
निम्नलिखित में से कौन इलेक्ट्रोफाइल नहीं है?
Detailed Explanation:
इलेक्ट्रोफाइल वे इलेक्ट्रॉन-न्यून स्पीशीज़ होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करते हैं, आमतौर पर इन पर धनात्मक आवेश होता है या अपूर्ण ऑक्टेट होता है।
Na⁺ (सोडियम आयन) की स्थिर नोबल-गैस संरचना (1s²2s²2p⁶) होती है जिसमें इलेक्ट्रॉन स्वीकार करने के लिए कोई खाली कक्षक नहीं होता, इसलिए यह इलेक्ट्रोफाइल न होकर दर्शक आयन है।
BF₃ (बोरॉन ट्राइफ्लोराइड) में बोरॉन पर अपूर्ण ऑक्टेट (केवल 6 इलेक्ट्रॉन) होता है, जो इसे लुईस अम्ल और इलेक्ट्रोफाइल बनाता है।
H⁺ (प्रोटॉन) में कोई इलेक्ट्रॉन नहीं होता और यह आसानी से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करता है, इसलिए यह प्रबल इलेक्ट्रोफाइल है।
एक प्रबल विद्युत अपघट्य की चालकता
Detailed Explanation:
चालकता (विशिष्ट चालकता) विलयन के इकाई आयतन की विद्युत संचालन क्षमता को मापती है, जो इकाई आयतन में आयनों की संख्या पर निर्भर करती है।
तनुकरण पर, कुल आयन स्थिर रहते हैं लेकिन आयतन बढ़ता है, इसलिए इकाई आयतन में आयन सांद्रता घटती है, जिससे चालकता कम हो जाती है। (नोट: मोलर चालकता तनुकरण से बढ़ती है, लेकिन प्रश्न चालकता के बारे में पूछता है।)
दो द्रवों A और B के आदर्श विलयन बनाने के लिए
Detailed Explanation:
एक आदर्श विलयन में राउल्ट का नियम लागू होता है जहाँ A–A, B–B और A–B अणुओं के बीच अंतराआण्विक बल लगभग समान होते हैं।
मिश्रण की एन्थैल्पी (ΔHmix) = 0 क्योंकि मिश्रण के दौरान कोई ऊष्मा अवशोषित या मुक्त नहीं होती।
मिश्रण की एन्ट्रॉपी (ΔSmix) > 0 (धनात्मक) बढ़ी हुई यादृच्छिकता के कारण, और मिश्रण की मुक्त ऊर्जा (ΔGmix) < 0 (ऋणात्मक), जो प्रक्रिया को स्वतःस्फूर्त बनाती है।
निम्नलिखित में से कौन सी ऊष्माक्षेपी प्रक्रियाएँ हैं?
i. पानी का वाष्पीकरण।
ii. अम्ल (H₂SO₄) का तनुकरण।
iii. पानी के साथ बुझे चूने की प्रतिक्रिया।
iv. कपूर (क्रिस्टल) का ऊर्ध्वपातन।
Detailed Explanation:
ऊष्माक्षेपी प्रक्रियाएँ वातावरण में ऊष्मा मुक्त करती हैं; ऊष्माशोषी प्रक्रियाएँ ऊष्मा अवशोषित करती हैं।
i. पानी का वाष्पीकरण – वातावरण से ऊष्मा अवशोषित करता है (ऊष्माशोषी)।
ii. H₂SO₄ का तनुकरण – पानी मिलाने पर बहुत अधिक ऊष्मा मुक्त होती है (ऊष्माक्षेपी)।
iii. पानी के साथ बुझे चूने (CaO) की प्रतिक्रिया – बुझा हुआ चूना बनता है और तीव्र ऊष्मा निकलती है (ऊष्माक्षेपी)।
iv. कपूर का ऊर्ध्वपातन – ठोस से गैस में बदलाव के लिए ऊष्मा अवशोषण आवश्यक है (ऊष्माशोषी)।
केवल ii और iii ऊष्माक्षेपी हैं।
निम्नलिखित में से कौन सा युग्म विस्थापन अभिक्रियाएँ देगा?
Detailed Explanation:
विस्थापन अभिक्रियाएँ तब होती हैं जब कोई अधिक क्रियाशील धातु किसी कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित करती है।
कॉपर (Cu), सिल्वर (Ag) से अधिक क्रियाशील है परन्तु सोडियम (Na), आयरन (Fe) और मैग्नीशियम (Mg) से कम क्रियाशील है। अतः Cu, AgNO₃ विलयन से Ag को विस्थापित कर सकता है, जिससे Cu(NO₃)₂ बनता है और धात्विक Ag जमा होता है।
अन्य विकल्पों में: Cu, Na को विस्थापित नहीं कर सकता (विकल्प 2), Ag, Fe को विस्थापित नहीं कर सकता (विकल्प 3), और Al, Mg को विस्थापित नहीं कर सकता (विकल्प 4) क्योंकि क्रियाशीलता श्रेणी क्रम के अनुसार यह संभव नहीं है।
परमाणु की संरचना के लिए मॉडल प्रस्तावित करने वाले पहले व्यक्ति कौन थे?
Detailed Explanation:
जे.जे. थॉमसन ने 1897 में पहला परमाणु मॉडल प्रस्तावित किया, जिसे प्लम पुडिंग मॉडल के नाम से जाना जाता है, जिसमें इलेक्ट्रॉन धनात्मक आवेशित गोले में समाहित होते हैं।
ई. गोल्डस्टीन ने कैनाल किरणों की खोज की, रदरफोर्ड ने 1911 में नाभिकीय मॉडल प्रस्तावित किया, और नील्स बोर ने 1913 में निश्चित कक्षाओं के साथ ग्रहीय मॉडल दिया।
डाल्टन का परमाणु सिद्धांत सफलतापूर्वक निम्नलिखित को समझाता है:
i. द्रव्यमान संरक्षण का नियम
ii. स्थिर संघटन का नियम
iii. रेडियोधर्मिता का नियम
iv. गुणित अनुपात का नियम
Detailed Explanation:
डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (1808) ने रासायनिक संयोजन के तीन मूलभूत नियमों की व्याख्या की:
✅ द्रव्यमान संरक्षण का नियम: परमाणु अभिक्रियाओं में न तो बनते हैं और न ही नष्ट होते हैं, इसलिए कुल द्रव्यमान स्थिर रहता है।
✅ स्थिर संघटन का नियम: एक यौगिक में हमेशा समान तत्व निश्चित अनुपात में होते हैं।
✅ गुणित अनुपात का नियम: जब दो तत्व कई यौगिक बनाते हैं, तो द्रव्यमान अनुपात सरल पूर्ण संख्याएँ होती हैं।
❌ रेडियोधर्मिता का नियम: रेडियोधर्मिता (बेकरल, 1896 द्वारा खोजी गई) नाभिकीय परिवर्तन से संबंधित है, जो डाल्टन के अविभाज्य परमाणु सिद्धांत से नहीं समझाया जा सकता।
गैसों के द्रवीकरण के लिए निम्नलिखित में से कौन सी उपयुक्त स्थिति का प्रतिनिधित्व करती है?
Detailed Explanation:
निम्न तापमान गैस अणुओं की गतिज ऊर्जा को कम करता है, जिससे अंतर-आणविक आकर्षण बल प्रभावी हो जाते हैं।
उच्च दाब अणुओं को पास लाता है, अंतर-आणविक दूरी कम करता है और द्रव अवस्था में संघनन को सुगम बनाता है। प्रत्येक गैस का एक क्रांतिक तापमान होता है जिसके ऊपर दाब चाहे कितना भी हो, द्रवीकरण संभव नहीं होता।