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बायोम Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for बायोम with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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"पत्ती कूड़े (लीफ लिटर) का अपघटन किसी भी अन्य बायोम की तुलना में तेज़ी से होता है और परिणामस्वरूप मिट्टी की सतह अक्सर लगभग नंगी रहती है। वृक्षों के अलावा, वनस्पति मुख्य रूप से पादप रूपों से बनी होती है जो वृक्षों पर चढ़कर या एपिफाइट्स के रूप में बढ़कर, वृक्षों की ऊपरी शाखाओं पर जड़ें जमाकर, परोक्ष रूप से छत्र तक पहुँचती है"। यह सबसे संभावित विवरण है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — उष्णकटिबंधीय वर्षा वन
यह विवरण उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों को पूरी तरह से दर्शाता है, जहाँ साल भर उच्च तापमान और आर्द्रता पत्ती कूड़े के तीव्र सूक्ष्मजैविक अपघटन के लिए इष्टतम स्थितियाँ बनाती हैं, जिससे मिट्टी की सतह लगभग नंगी रह जाती है। घना बहु-स्तरीय छत्र वन तल तक सूर्य के प्रकाश को रोकता है, जिससे कई पौधे वृक्षों पर चढ़कर (लियाना) या प्रकाश तक पहुँचने के लिए ऊपरी शाखाओं पर एपिफाइट्स के रूप में बढ़कर अनुकूलित होते हैं। ये अनूठी विशेषताएँ—तीव्र पोषक चक्रण, नंगी मिट्टी की सतह, और प्रचुर एपिफाइट्स—उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की पहचान हैं, जो उन्हें कोणधारी, पर्णपाती या मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों से अलग करती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वन बायोम - तुलनात्मक विशेषताएँ
| वन प्रकार | अपघटन दर | मिट्टी की सतह | वनस्पति विशेषताएँ | जलवायु |
|---|---|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय वर्षा वन | अत्यंत तीव्र (सभी बायोम में सबसे तेज़) | त्वरित पोषक पुनर्चक्रण के कारण लगभग नंगी | घना छत्र; प्रचुर लियाना, एपिफाइट्स (ऑर्किड, फर्न); बहु-स्तरीय संरचना | उच्च तापमान, उच्च वर्षा (>200 सेमी), साल भर उच्च आर्द्रता |
| कोणधारी वन | अत्यंत धीमा (शीत जलवायु अपघटन को रोकती है) | अविघटित सुइयों की मोटी परत | शंकुधारी वृक्ष (पाइन, फर, स्प्रूस); सुई जैसी पत्तियाँ; सीमित अधोवनस्पति | ठंडी, लंबी सर्दियाँ; मध्यम वर्षा |
| शुष्क पर्णपाती वन | मध्यम (मौसमी) | शुष्क मौसम में पत्ती कूड़ा जमा होता है | वृक्ष शुष्क मौसम में पत्तियाँ गिराते हैं; खुला छत्र; कम घनी अधोवनस्पति | स्पष्ट आर्द्र और शुष्क मौसम; 100-200 सेमी वर्षा |
| मैंग्रोव वन | धीमा से मध्यम (जलाक्रांत, लवणीय स्थितियाँ) | जलाक्रांत, कीचड़युक्त, लवणीय | स्टिल्ट/प्रोप जड़ें; न्यूमेटोफोर्स; लवण-सहिष्णु प्रजातियाँ; विरल छत्र | तटीय उष्णकटिबंधीय/उपोष्णकटिबंधीय; ज्वारीय प्रभाव |
- उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में एपिफाइट्स: गैर-परजीवी पौधे (ऑर्किड, ब्रोमेलियाड, फर्न) जो मिट्टी के पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा किए बिना सूर्य के प्रकाश तक पहुँचने के लिए वृक्ष शाखाओं पर उगते हैं।
- तीव्र पोषक चक्रण: हरी-भरी वनस्पति के बावजूद, उष्णकटिबंधीय वर्षा वन की मिट्टी अक्सर पोषक तत्वों से कमजोर होती है क्योंकि पोषक तत्व मिट्टी में जमा होने के बजाय पौधों द्वारा तेज़ी से अवशोषित हो जाते हैं।
- भारतीय वितरण: भारत में उष्णकटिबंधीय वर्षा वन पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश), और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते हैं।
- प्रमुख प्रजातियाँ: उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में महोगनी, रोज़वुड, आबनूस, रबर, सिनकोना।
"जलवायु चरम है, वर्षा बहुत कम होती है और लोग घुमंतू पशुपालक हुआ करते थे।" उपरोक्त कथन निम्नलिखित में से किस क्षेत्र का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
मध्य एशियाई स्टेप की विशेषता चरम महाद्वीपीय जलवायु है जिसमें गर्मी में तापमान 45°C तक और सर्दी में -50°C तक पहुँचता है, अल्प वर्षा (250-500 मिमी वार्षिक) होती है, और ऐतिहासिक रूप से यहाँ घुमंतू पशुपालक जैसे मंगोल और कज़ाख रहते थे।
अफ्रीकी सवाना में मध्यम उष्णकटिबंधीय जलवायु और 500-1500 मिमी वर्षा होती है; उत्तरी अमेरिकी प्रेयरी में अधिक वर्षा (500-900 मिमी) और कम चरम तापमान होता है; साइबेरियाई टुंड्रा में स्थायी हिमाच्छादन और अत्यधिक ठंडी जलवायु है जो व्यापक चराई और घुमंतू पशुपालन के लिए अनुकूल नहीं है।
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