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सौर विकिरण एवं ऊष्मा संतुलन Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. वायुमंडल के बिना, पृथ्वी की सतह पर हर जगह तापमान हिमांक बिंदु से काफी नीचे होगा।
II. वायुमंडल द्वारा अवशोषित और फँसी हुई ऊष्मा हमारे ग्रह के औसत तापमान को बनाए रखती है।
III. वायुमंडल की गैसें, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, विकिरण को अवशोषित करने और फंसाने में विशेष रूप से अच्छी हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (I, II और III)
तीनों कथन पृथ्वी के तापमान को बनाए रखने में वायुमंडल की भूमिका को सही ढंग से बताते हैं। वायुमंडल एक कंबल की तरह काम करता है, जो ऊष्मा को अवशोषित और रोककर पृथ्वी को अत्यधिक ठंडा होने से बचाता है। कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और जलवाष्प जैसी गैसें ऊष्मा को रोकने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
✅ कथन I सही है: यदि वायुमंडल न हो, तो पृथ्वी की अधिकांश ऊष्मा अंतरिक्ष में निकल जाएगी और तापमान हिमांक से काफी नीचे चला जाएगा।
✅ कथन II सही है: वायुमंडल ऊष्मा को अवशोषित और संचित करके पृथ्वी का औसत तापमान जीवन के अनुकूल बनाए रखता है।
✅ कथन III सही है: कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और जलवाष्प जैसी गैसें अवरक्त विकिरण (Infrared Radiation) को अवशोषित और रोकने में बहुत प्रभावी होती हैं।
संक्षिप्त नोट्स: Greenhouse Effect (हरितगृह प्रभाव)
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प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव पृथ्वी को जीवन के लिए उपयुक्त तापमान प्रदान करता है।
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वायुमंडल के साथ पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 15°C है।
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वायुमंडल के बिना औसत तापमान लगभग –18°C होता।
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CO₂, CH₄ और जलवाष्प प्रमुख हरितगृह गैसें हैं।
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ये गैसें पृथ्वी से निकलने वाले अवरक्त विकिरण को अवशोषित करती हैं।
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हरितगृह प्रभाव प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसकी अधिकता वैश्विक ऊष्मीकरण का कारण बनती है।
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जलवाष्प सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली प्राकृतिक हरितगृह गैस है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: जनवरी में, उत्तरी गोलार्ध में, समताप रेखाएं भूभाग को पार करते समय भूमध्य रेखा की ओर झुकती हैं, और महासागरों को पार करते समय ध्रुव की ओर झुकती हैं।
कथन II: जनवरी में, महासागरों के ऊपर की हवा उत्तरी गोलार्ध के स्थलखंडों की तुलना में अधिक गर्म होती है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
जनवरी में (उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों के दौरान) भूमि महासागरों की तुलना में अधिक तेजी से ठंडी हो जाती है क्योंकि भूमि की ऊष्मा धारण क्षमता कम होती है। इसलिए समान अक्षांश पर महासागर भूमि की अपेक्षा अधिक गर्म रहते हैं। यही तापांतर समताप रेखाओं (Isotherms) को मोड़ देता है।
✅ कथन I सही है: जनवरी में उत्तरी गोलार्ध में समताप रेखाएँ स्थलखंडों पर भूमध्य रेखा की ओर तथा महासागरों पर ध्रुवों की ओर मुड़ती हैं।
✅ कथन II सही है: सर्दियों में महासागरों के ऊपर की वायु, स्थलखंडों के ऊपर की वायु की तुलना में अधिक गर्म रहती है।
✅ कथन II, कथन I की व्याख्या करता है: भूमि और महासागर के बीच तापमान का अंतर ही समताप रेखाओं के मुड़ने का मुख्य कारण है।
संक्षिप्त नोट्स: Isotherms (समताप रेखाएँ)
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समताप रेखाएँ समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ती हैं।
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जनवरी में उत्तरी गोलार्ध के महाद्वीप महासागरों की तुलना में अधिक ठंडे होते हैं।
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भूमि का विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat) कम होने से वह जल्दी गर्म और जल्दी ठंडी होती है।
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महासागर ऊष्मा को लंबे समय तक संचित रखते हैं।
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सर्दियों में समताप रेखाएँ स्थल पर भूमध्य रेखा की ओर तथा महासागर पर ध्रुवों की ओर मुड़ती हैं।
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जुलाई में उत्तरी गोलार्ध में यह प्रवृत्ति सामान्यतः उलट जाती है।
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यूरेशिया और उत्तरी अमेरिका में समताप रेखाओं का विचलन सबसे अधिक देखा जाता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: वायुमंडल आने वाले सौर विकिरण की तुलना में स्थलीय विकिरण द्वारा अधिक गर्म होता है। कथन-II: वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसें दीर्घ तरंग विकिरण की अच्छी अवशोषक हैं।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कथन-I गलत है, परंतु कथन-II सही है
यह प्रश्न वायुमंडलीय तापन तंत्र और ग्रीनहाउस प्रभाव की समझ का परीक्षण करता है। कथन-I गलत तरीके से सुझाव देता है कि आने वाला सौर विकिरण वायुमंडल को स्थलीय विकिरण की तुलना में अधिक गर्म करता है, जबकि कथन-II ग्रीनहाउस गैसों के अवशोषण गुणों का सही वर्णन करता है।
❌ कथन-I – गलत: वायुमंडल आने वाले सौर (लघु तरंग) विकिरण की तुलना में स्थलीय (दीर्घ तरंग) विकिरण द्वारा अधिक गर्म होता है। सौर विकिरण अवशोषित हुए बिना वायुमंडल से अधिकतर गुजर जाता है, जबकि पृथ्वी की सतह सौर ऊर्जा को अवशोषित करती है और इसे दीर्घ तरंग विकिरण के रूप में पुनः विकिरित करती है, जिसे वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसें अवशोषित करती हैं, जिससे वह गर्म होता है।
✅ कथन-II – सही: कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसें वास्तव में पृथ्वी की सतह द्वारा उत्सर्जित दीर्घ तरंग (अवरक्त) विकिरण की अच्छी अवशोषक हैं, जो ग्रीनहाउस प्रभाव का मूल सिद्धांत है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वायुमंडलीय तापन और पृथ्वी का ऊष्मा बजट
- आपतन (इन्सोलेशन): आने वाला सौर विकिरण लघु तरंगों (0.2 से 4 माइक्रोमीटर) में पृथ्वी तक पहुंचता है। इसका अधिकांश भाग न्यूनतम अवशोषण के साथ वायुमंडल से गुजर जाता है।
- स्थलीय विकिरण: पृथ्वी की सतह सौर ऊर्जा को अवशोषित करती है और इसे दीर्घ तरंग अवरक्त विकिरण (4 से 80 माइक्रोमीटर) के रूप में पुनः विकिरित करती है।
- वायुमंडलीय तापन: वायुमंडल आने वाले लघु तरंग सौर विकिरण के लिए काफी हद तक पारदर्शी है लेकिन ग्रीनहाउस गैसों के कारण बाहर जाने वाले दीर्घ तरंग स्थलीय विकिरण के लिए अपारदर्शी है।
- ग्रीनहाउस प्रभाव: CO₂, जल वाष्प, मीथेन और अन्य ग्रीनहाउस गैसें दीर्घ तरंग विकिरण को अवशोषित करती हैं, जिससे निचला वायुमंडल गर्म होता है। यही कारण है कि वायुमंडल ऊपर से (सौर विकिरण द्वारा) की तुलना में नीचे से (स्थलीय विकिरण द्वारा) अधिक गर्म होता है।
- ऊष्मा बजट घटक: पृथ्वी तक पहुंचने वाले सौर विकिरण का लगभग 35% परावर्तित होता है, 14% वायुमंडल द्वारा अवशोषित होता है, और 51% पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित होता है। सतह फिर विकिरण, चालन और संवहन के माध्यम से वायुमंडल को गर्म करती है।
- एल्बिडो प्रभाव: आने वाले सौर विकिरण का लगभग 30% बादलों, वायुमंडलीय कणों और पृथ्वी की सतह द्वारा बिना वायुमंडल को महत्वपूर्ण रूप से गर्म किए परावर्तित होता है।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: महाद्वीपों और महासागरों के बीच तापमान का अंतर शीत ऋतु की अपेक्षा ग्रीष्म ऋतु में अधिक होता है।
कथन-II: जल की विशिष्ट ऊष्मा स्थल सतह की तुलना में अधिक होती है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कथन-I गलत है लेकिन कथन-II सही है
कथन-I में दावा किया गया है कि महाद्वीपों और महासागरों के बीच तापमान का अंतर ग्रीष्म ऋतु में अधिक होता है, जो गलत है। वास्तव में, यह अंतर शीत ऋतु में अधिक होता है क्योंकि स्थल तेजी से ठंडा होता है जबकि महासागर ऊष्मा को बनाए रखते हैं, जिससे बड़ा तापमान अंतर उत्पन्न होता है। ग्रीष्म ऋतु में, स्थल और महासागर दोनों गर्म होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप तापमान का अंतर कम होता है।
❌ कथन-I – गलत: महाद्वीपों और महासागरों के बीच तापमान का अंतर ग्रीष्म ऋतु में नहीं बल्कि शीत ऋतु में अधिक होता है, क्योंकि स्थल शीत ऋतु में तेजी से ऊष्मा खो देता है जबकि महासागर अपेक्षाकृत गर्म बने रहते हैं।
✅ कथन-II – सही: जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता स्थल की तुलना में अधिक होती है, जिसका अर्थ है कि यह धीरे-धीरे गर्म और ठंडा होता है, जो तापमान पर महासागरों के नियामक प्रभाव की व्याख्या करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्थल और जल का विभेदी तापन
- विशिष्ट ऊष्मा धारिता: जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता स्थल की तुलना में लगभग 4 गुना अधिक होती है, जिससे इसके तापमान को बदलने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- ग्रीष्म ऋतु का पैटर्न: स्थल तेजी से गर्म होता है और महासागरों से अधिक गर्म हो जाता है; तापमान अंतर मध्यम होता है (सामान्यतः 5-10°C)।
- शीत ऋतु का पैटर्न: स्थल तेजी से ठंडा होता है और महासागरों की तुलना में बहुत अधिक ठंडा हो जाता है; तापमान अंतर बड़ा होता है (20-30°C से अधिक हो सकता है), जिससे अधिकतम अंतर उत्पन्न होता है।
- महाद्वीपीयता प्रभाव: महासागरों से दूर के क्षेत्र नियामक महासागरीय प्रभाव की कमी के कारण चरम तापमान भिन्नता का अनुभव करते हैं।
- सामुद्रिक जलवायु: तटीय क्षेत्रों में महासागरीय प्रभाव के कारण वार्षिक तापमान परिसर छोटा होता है।
- मानसून का निर्माण: स्थल और महासागर के बीच विभेदी तापन मानसूनी परिसंचरण को संचालित करता है, विशेष रूप से शीत ऋतु में जब अंतर अधिकतम होता है।
पृथ्वी के वायुमंडल के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — अवरक्त तरंगें जलवाष्प द्वारा बड़े पैमाने पर अवशोषित होती हैं जो निचले वायुमंडल में संकेंद्रित है।
जलवाष्प, क्षोभमंडल (निचला वायुमंडल) में संकेंद्रित एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस होने के कारण, पृथ्वी की सतह से उत्सर्जित अवरक्त विकिरण को प्रभावी रूप से अवशोषित करती है। यह अवशोषण पृथ्वी पर ग्रीनहाउस प्रभाव और तापमान नियमन के लिए महत्वपूर्ण है।
❌ विकल्प 1 – गलत: भूमध्य रेखा ध्रुवों की तुलना में लगभग 2.5 गुना अधिक सूर्यातप प्राप्त करती है, 10 गुना नहीं। यह अंतर आपतन कोण और पृथ्वी की वक्रता के कारण है।
❌ विकल्प 2 – गलत: दृश्य प्रकाश सूर्यातप का लगभग 44%, अवरक्त लगभग 49%, और पराबैंगनी लगभग 7% बनाता है। अवरक्त सूर्यातप का दो-तिहाई भाग नहीं बनाता।
✅ विकल्प 3 – सही: निचले वायुमंडल (क्षोभमंडल) में जलवाष्प अवरक्त विकिरण का प्राथमिक अवशोषक है, जो इसे सही कथन बनाता है।
❌ विकल्प 4 – गलत: अवरक्त तरंगों की तरंगदैर्ध्य दृश्य प्रकाश (700 nm से 1 mm) से अधिक होती है और ये दृश्य स्पेक्ट्रम (380-700 nm) का भाग नहीं हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सौर विकिरण और वायुमंडल
- सूर्यातप संरचना: पराबैंगनी किरणें (7%), दृश्य प्रकाश (44%), अवरक्त किरणें (49%)
- वायुमंडलीय अवशोषण: ओजोन समताप मंडल में अधिकांश UV विकिरण को अवशोषित करता है; जलवाष्प और CO₂ क्षोभमंडल में अवरक्त विकिरण को अवशोषित करते हैं
- अक्षांशीय विविधता: भूमध्यरेखीय क्षेत्र आपतन कोण के कारण ध्रुवीय क्षेत्रों की तुलना में 2-2.5 गुना अधिक सूर्यातप प्राप्त करते हैं
- ग्रीनहाउस गैसें: जलवाष्प (सबसे महत्वपूर्ण), CO₂, मीथेन, और ओजोन बाहर जाने वाले पार्थिव अवरक्त विकिरण को अवशोषित करती हैं
- विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम: दृश्य प्रकाश (380-700 nm), अवरक्त (700 nm-1 mm), छोटी तरंगदैर्ध्य में अधिक ऊर्जा होती है
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Frequently Asked Questions
Common questions about सौर विकिरण एवं ऊष्मा संतुलन in UPSC CSE PRELIMS