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जैव भूगोल एवं पर्यावरण Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: जैव भूगोल एवं पर्यावरण
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I : उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की मिट्टी पोषक तत्वों से समृद्ध होती है।
कथन-II : उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों के उच्च तापमान और नमी के कारण मिट्टी में मृत कार्बनिक पदार्थ शीघ्रता से विघटित हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
यह प्रश्न उष्णकटिबंधीय वर्षा वन की मिट्टी की विशेषताओं और पोषक चक्र की समझ का परीक्षण करता है। कथन I गलत रूप से दावा करता है कि उष्णकटिबंधीय वर्षा वन की मिट्टी पोषक तत्वों से समृद्ध होती है, जबकि वास्तव में भारी वर्षा द्वारा तीव्र निक्षालन के कारण वे पोषक तत्वों से गरीब होती हैं। कथन II सही ढंग से बताता है कि उच्च तापमान और नमी कार्बनिक पदार्थ के अपघटन को तेज करते हैं।
❌ कथन I – गलत: उष्णकटिबंधीय वर्षा वन की मिट्टी वास्तव में पोषक तत्वों से गरीब (समृद्ध नहीं) होती है क्योंकि भारी वर्षा तीव्र निक्षालन का कारण बनती है, जो मिट्टी में जमा होने से पहले पोषक तत्वों को बहा देती है।
✅ कथन II – सही: उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में उच्च तापमान और नमी बैक्टीरिया और कवक द्वारा मृत कार्बनिक पदार्थ के तीव्र अपघटन के लिए आदर्श परिस्थितियाँ उत्पन्न करते हैं, जो पोषक तत्वों को शीघ्रता से पारिस्थितिकी तंत्र में वापस पुनर्चक्रित करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: उष्णकटिबंधीय वर्षा वन की मिट्टी और पोषक चक्र
- मिट्टी की विशेषताएँ: उष्णकटिबंधीय वर्षा वन की मिट्टी सामान्यतः पोषक तत्वों से गरीब, अम्लीय और कम उर्वरता वाली होती है, फिर भी घनी वनस्पति का समर्थन करती है।
- तीव्र निक्षालन: भारी वर्षा (वार्षिक 2000-10000 मिमी) ऊपरी मिट्टी से घुलनशील पोषक तत्वों को बहा देती है, उनके संचय को रोकती है।
- पोषक विरोधाभास: खराब मिट्टी के बावजूद, वर्षा वन घनी वृद्धि का समर्थन करते हैं क्योंकि पोषक तत्व मिट्टी के बजाय जैव भार (जीवित पौधों और जीवों) में बंद होते हैं।
- तीव्र अपघटन: उच्च तापमान (25-30°C) और आर्द्रता (>80%) अपघटकों द्वारा कुछ सप्ताहों के भीतर कार्बनिक पदार्थ के शीघ्र टूटने की सुविधा देते हैं।
- बंद पोषक चक्र: अपघटन से मुक्त पोषक तत्वों को पौधों की जड़ों और माइकोराइजल कवक द्वारा तुरंत अवशोषित कर लिया जाता है, निक्षालन के माध्यम से हानि को रोकते हुए।
- उथली जड़ प्रणाली: अधिकांश वर्षा वन के पेड़ों में उथली, फैली हुई जड़ें होती हैं जो निक्षालित होने से पहले पोषक तत्वों को शीघ्रता से ग्रहण करती हैं।
- कृषि निहितार्थ: जब वर्षा वनों को कृषि के लिए साफ किया जाता है, तो पतली पोषक परत शीघ्रता से समाप्त हो जाती है, जिससे 2-3 वर्षों के भीतर भूमि बंजर हो जाती है।
निम्नलिखित वृक्षों पर विचार कीजिए:
- कटहल (Artocarpus heterophyllus)
- महुआ (Madhuca indica)
- सागौन (Tectona grandis)
उपर्युक्त में से कितने पर्णपाती वृक्ष हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
उल्लिखित तीन वृक्षों में से केवल महुआ (Madhuca indica) और सागौन (Tectona grandis) पर्णपाती वृक्ष हैं जो शुष्क मौसम में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। कटहल एक सदाबहार वृक्ष है जो पूरे वर्ष अपनी पत्तियाँ बनाए रखता है।
❌ कटहल (Artocarpus heterophyllus) – सदाबहार: यह उष्णकटिबंधीय वृक्ष पश्चिमी घाट का मूल निवासी है और पूरे वर्ष हरा-भरा रहता है, जो उच्च वर्षा क्षेत्रों के सदाबहार वनों का विशिष्ट लक्षण है।
✅ महुआ (Madhuca indica) – पर्णपाती: मध्य और उत्तरी भारत के उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों में पाया जाता है, यह फरवरी-अप्रैल (शुष्क मौसम) में पत्तियाँ गिरा देता है।
✅ सागौन (Tectona grandis) – पर्णपाती: भारत के उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों की प्रमुख प्रजाति, यह नमी संरक्षण के लिए शुष्क महीनों में पत्तियाँ गिरा देता है और इमारती लकड़ी के लिए अत्यधिक मूल्यवान है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पर्णपाती बनाम सदाबहार वृक्ष
- पर्णपाती वृक्ष: वे वृक्ष जो मौसमी रूप से अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं, आमतौर पर शुष्क मौसम में जल संरक्षण के लिए। स्पष्ट आर्द्र और शुष्क अवधि वाली मानसूनी जलवायु में सामान्य।
- सदाबहार वृक्ष: वे वृक्ष जो पूरे वर्ष पत्तियाँ बनाए रखते हैं, निरंतर वर्षा और गंभीर शुष्क अवधि रहित क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- भारत में उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन: इन्हें मानसून वन भी कहा जाता है, ये भारत में सबसे व्यापक वन प्रकार हैं, जो 100-200 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में फैले हैं।
- प्रमुख पर्णपाती प्रजातियाँ: सागौन, साल, शीशम, चंदन, महुआ, कुसुम, अर्जुन, शहतूत।
- प्रमुख सदाबहार प्रजातियाँ: शीशम, महोगनी, आबनूस, कटहल, जामुन, बाँस।
- सागौन (Tectona grandis): व्यावसायिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण पर्णपाती वृक्ष; मध्यम वर्षा के साथ अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी में पनपता है; फर्नीचर और जहाज निर्माण में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
"पत्ती कूड़े (लीफ लिटर) का अपघटन किसी भी अन्य बायोम की तुलना में तेज़ी से होता है और परिणामस्वरूप मिट्टी की सतह अक्सर लगभग नंगी रहती है। वृक्षों के अलावा, वनस्पति मुख्य रूप से पादप रूपों से बनी होती है जो वृक्षों पर चढ़कर या एपिफाइट्स के रूप में बढ़कर, वृक्षों की ऊपरी शाखाओं पर जड़ें जमाकर, परोक्ष रूप से छत्र तक पहुँचती है"। यह सबसे संभावित विवरण है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — उष्णकटिबंधीय वर्षा वन
यह विवरण उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों को पूरी तरह से दर्शाता है, जहाँ साल भर उच्च तापमान और आर्द्रता पत्ती कूड़े के तीव्र सूक्ष्मजैविक अपघटन के लिए इष्टतम स्थितियाँ बनाती हैं, जिससे मिट्टी की सतह लगभग नंगी रह जाती है। घना बहु-स्तरीय छत्र वन तल तक सूर्य के प्रकाश को रोकता है, जिससे कई पौधे वृक्षों पर चढ़कर (लियाना) या प्रकाश तक पहुँचने के लिए ऊपरी शाखाओं पर एपिफाइट्स के रूप में बढ़कर अनुकूलित होते हैं। ये अनूठी विशेषताएँ—तीव्र पोषक चक्रण, नंगी मिट्टी की सतह, और प्रचुर एपिफाइट्स—उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की पहचान हैं, जो उन्हें कोणधारी, पर्णपाती या मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों से अलग करती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वन बायोम - तुलनात्मक विशेषताएँ
| वन प्रकार | अपघटन दर | मिट्टी की सतह | वनस्पति विशेषताएँ | जलवायु |
|---|---|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय वर्षा वन | अत्यंत तीव्र (सभी बायोम में सबसे तेज़) | त्वरित पोषक पुनर्चक्रण के कारण लगभग नंगी | घना छत्र; प्रचुर लियाना, एपिफाइट्स (ऑर्किड, फर्न); बहु-स्तरीय संरचना | उच्च तापमान, उच्च वर्षा (>200 सेमी), साल भर उच्च आर्द्रता |
| कोणधारी वन | अत्यंत धीमा (शीत जलवायु अपघटन को रोकती है) | अविघटित सुइयों की मोटी परत | शंकुधारी वृक्ष (पाइन, फर, स्प्रूस); सुई जैसी पत्तियाँ; सीमित अधोवनस्पति | ठंडी, लंबी सर्दियाँ; मध्यम वर्षा |
| शुष्क पर्णपाती वन | मध्यम (मौसमी) | शुष्क मौसम में पत्ती कूड़ा जमा होता है | वृक्ष शुष्क मौसम में पत्तियाँ गिराते हैं; खुला छत्र; कम घनी अधोवनस्पति | स्पष्ट आर्द्र और शुष्क मौसम; 100-200 सेमी वर्षा |
| मैंग्रोव वन | धीमा से मध्यम (जलाक्रांत, लवणीय स्थितियाँ) | जलाक्रांत, कीचड़युक्त, लवणीय | स्टिल्ट/प्रोप जड़ें; न्यूमेटोफोर्स; लवण-सहिष्णु प्रजातियाँ; विरल छत्र | तटीय उष्णकटिबंधीय/उपोष्णकटिबंधीय; ज्वारीय प्रभाव |
- उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में एपिफाइट्स: गैर-परजीवी पौधे (ऑर्किड, ब्रोमेलियाड, फर्न) जो मिट्टी के पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा किए बिना सूर्य के प्रकाश तक पहुँचने के लिए वृक्ष शाखाओं पर उगते हैं।
- तीव्र पोषक चक्रण: हरी-भरी वनस्पति के बावजूद, उष्णकटिबंधीय वर्षा वन की मिट्टी अक्सर पोषक तत्वों से कमजोर होती है क्योंकि पोषक तत्व मिट्टी में जमा होने के बजाय पौधों द्वारा तेज़ी से अवशोषित हो जाते हैं।
- भारतीय वितरण: भारत में उष्णकटिबंधीय वर्षा वन पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश), और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते हैं।
- प्रमुख प्रजातियाँ: उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में महोगनी, रोज़वुड, आबनूस, रबर, सिनकोना।
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सवाना की वनस्पति में बिखरे हुए छोटे पेड़ों के साथ घास के मैदान होते हैं, लेकिन व्यापक क्षेत्रों में कोई पेड़ नहीं होते हैं। ऐसे क्षेत्रों में वन विकास आमतौर पर एक या अधिक या कुछ परिस्थितियों के संयोजन द्वारा नियंत्रित रखा जाता है। निम्नलिखित में से कौन सी ऐसी परिस्थितियाँ हैं?
- बिल खोदने वाले जानवर और दीमक
- आग
- चरने वाले शाकाहारी जीव
- मौसमी वर्षा
- मिट्टी के गुण
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 2, 3 और 4
सवाना वनस्पति बिखरे हुए छोटे पेड़ों के साथ घास के मैदानों की विशेषता है। इन क्षेत्रों में वन विकास मुख्य रूप से आग, चरने वाले शाकाहारी जीवों और मौसमी वर्षा द्वारा सीमित होता है। आग युवा पेड़ों की पौध को जला देती है जो वन स्थापना को रोकती है, चरने वाले शाकाहारी जीव परिपक्व होने से पहले पेड़ों के बीजों को खा जाते हैं, और विशिष्ट आर्द्र-शुष्क मौसमी वर्षा पैटर्न पेड़ों की तुलना में घासों को अनुकूल बनाता है।
✅ कथन 2 (आग) – सही: सवाना में बार-बार लगने वाली आग पेड़ों की पौध को जला देती है जबकि घास अपनी भूमिगत जड़ प्रणाली और तीव्र पुनर्जनन के कारण जीवित रहती है।
✅ कथन 3 (चरने वाले शाकाहारी) – सही: बड़े शाकाहारी जीव युवा पेड़ों के बीज और पौधों को खा जाते हैं, जो पेड़ों को स्थापित होने से रोकते हैं और घास के मैदान के प्रभुत्व को बनाए रखते हैं।
✅ कथन 4 (मौसमी वर्षा) – सही: स्पष्ट आर्द्र और शुष्क मौसम घने वन विकास के बजाय घासों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करते हैं, क्योंकि पेड़ों को अधिक सुसंगत नमी की आवश्यकता होती है।
❌ कथन 1 (बिल खोदने वाले जानवर और दीमक) – गलत: जबकि ये जीव पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करते हैं, वे सवाना में वन विकास को रोकने वाले प्राथमिक कारक नहीं हैं।
❌ कथन 5 (मिट्टी के गुण) – गलत: मिट्टी के गुण वनस्पति के प्रकार को प्रभावित करते हैं लेकिन सवाना क्षेत्रों में वन विकास के लिए प्राथमिक सीमित कारक नहीं हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सवाना पारिस्थितिकी तंत्र
- स्थान: भूमध्यरेखीय वर्षावनों और गर्म रेगिस्तानों के बीच संक्रमणकालीन जलवायु क्षेत्र, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) में पाया जाता है
- जलवायु विशेषताएँ: विशिष्ट आर्द्र और शुष्क मौसम; मानसून जलवायु की तुलना में कम वर्षा; तापमान पूरे वर्ष उच्च रहता है
- वनस्पति: लंबी घासों (3-4 मीटर तक) और बिखरे हुए सूखा-प्रतिरोधी पेड़ों (बबूल, बाओबाब) का प्रभुत्व
- अग्नि पारिस्थितिकी: शुष्क मौसम में प्राकृतिक आग लगती है; घास भूमिगत तनों के साथ आग के अनुकूल होती है; युवा अवस्था में पेड़ संवेदनशील होते हैं
- शाकाहारी प्रभाव: बड़े चरने वाले जानवरों (ज़ेब्रा, वाइल्डबीस्ट, हाथी) का घर जो चरने के माध्यम से पेड़ों के अतिक्रमण को रोकते हैं
- वर्षा पैटर्न: वार्षिक 500-1500 मिमी, गर्मी के महीनों में केंद्रित; लंबा शुष्क मौसम (6-8 महीने) पेड़ों की वृद्धि को सीमित करता है
- उपनाम: प्रचुर वन्यजीव आबादी के कारण 'बिग गेम कंट्री' कहा जाता है
"जलवायु चरम है, वर्षा बहुत कम होती है और लोग घुमंतू पशुपालक हुआ करते थे।" उपरोक्त कथन निम्नलिखित में से किस क्षेत्र का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
मध्य एशियाई स्टेप की विशेषता चरम महाद्वीपीय जलवायु है जिसमें गर्मी में तापमान 45°C तक और सर्दी में -50°C तक पहुँचता है, अल्प वर्षा (250-500 मिमी वार्षिक) होती है, और ऐतिहासिक रूप से यहाँ घुमंतू पशुपालक जैसे मंगोल और कज़ाख रहते थे।
अफ्रीकी सवाना में मध्यम उष्णकटिबंधीय जलवायु और 500-1500 मिमी वर्षा होती है; उत्तरी अमेरिकी प्रेयरी में अधिक वर्षा (500-900 मिमी) और कम चरम तापमान होता है; साइबेरियाई टुंड्रा में स्थायी हिमाच्छादन और अत्यधिक ठंडी जलवायु है जो व्यापक चराई और घुमंतू पशुपालन के लिए अनुकूल नहीं है।
निम्नलिखित में से कौन सी भूमध्यरेखीय वनों की विशिष्ट विशेषता/विशेषताएँ है/हैं?
- सघन रूप से स्थित लंबे वृक्षों की उपस्थिति जिनके शिखर निरंतर छतरी बनाते हैं
- बड़ी संख्या में प्रजातियों का सहअस्तित्व
- अधिपादप (एपिफाइट्स) की अनेक किस्मों की उपस्थिति
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: भूमध्यरेखीय वनों में लंबे वृक्ष (40-60 मीटर) पास-पास उगते हैं जिनके शिखर सतत घनी छतरी बनाते हैं जो सूर्य के प्रकाश को वन तल तक पहुँचने से रोकती है।
✅ कथन 2 – सही: ये वन अधिकतम जैव विविधता प्रदर्शित करते हैं जिनमें प्रति हेक्टेयर सैकड़ों वृक्ष प्रजातियों का सहअस्तित्व होता है, जो स्थिर गर्म-आर्द्र जलवायु और वर्षभर वृद्धि मौसम के कारण है।
✅ कथन 3 – सही: उच्च आर्द्रता और घनी छतरी संरचना अनेक अधिपादपों (ऑर्किड, फर्न, मॉस, ब्रोमेलियाड) को सहारा देती है जो बिना मिट्टी में जड़ जमाए तनों और शाखाओं पर उगते हैं।