UPSC CSE Prelims
पृथ्वी की गतियाँ Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for पृथ्वी की गतियाँ with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
Filter & practice questions topic-wise
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि पृथ्वी के घूर्णन और धुरी में बदलाव हो रहा है।
कथन II: सौर ज्वालाओं और संबंधित कोरोनल द्रव्यमान उत्सर्जन ने पृथ्वी के सबसे बाहरी वायुमंडल पर भारी मात्रा में ऊर्जा की बमबारी की।
कथन III: जैसे ही पृथ्वी की ध्रुवीय बर्फ पिघलती है, पानी भूमध्य रेखा की ओर बढ़ने लगता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि पृथ्वी की घूर्णन धुरी (Rotation Axis) धीरे-धीरे खिसक रही है। ध्रुवीय बर्फ के पिघलने से जल का पुनर्वितरण होता है और द्रव्यमान भूमध्य रेखा की ओर बढ़ता है। इससे पृथ्वी का Moment of Inertia बदलता है, जो घूर्णन और धुरी की स्थिति को प्रभावित करता है। दूसरी ओर, सौर ज्वालाएँ ऊपरी वायुमंडल को प्रभावित करती हैं, लेकिन धुरी के खिसकने का प्रमुख कारण नहीं हैं।
✅ कथन I सही है: उपग्रह आँकड़ों से पृथ्वी की घूर्णन धुरी में बदलाव और घूर्णन गति में हल्का परिवर्तन पाया गया है।
✅ कथन II सही है: सौर ज्वालाएँ और CME पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल तथा चुंबकमंडल में बड़ी मात्रा में ऊर्जा पहुँचाते हैं।
✅ कथन III सही है: ध्रुवीय बर्फ पिघलने पर जल का पुनर्वितरण भूमध्य रेखा की ओर अधिक होता है।
❌ कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता: सौर गतिविधियाँ धुरी की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं करतीं।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर द्रव्यमान का स्थानांतरण पृथ्वी के Moment of Inertia को बदलता है, जिससे धुरी में बदलाव आता है।
अवधारणा नोट:
Moment of Inertia (जड़त्व आघूर्ण) किसी घूर्णनशील वस्तु की घूर्णन परिवर्तन का विरोध करने की क्षमता है। जब द्रव्यमान धुरी से दूर (भूमध्य रेखा की ओर) जाता है, तो इसका मान बढ़ जाता है और घूर्णन में परिवर्तन आता है।
"कोरिओलिस बल" के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह पवन वेग में वृद्धि के साथ बढ़ता है।
- यह ध्रुवों पर अधिकतम होता है और भूमध्य रेखा पर अनुपस्थित होता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
कोरिओलिस बल पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न एक आभासी विक्षेपण बल है, जो पवन और महासागरीय धाराओं सहित गतिशील वस्तुओं को प्रभावित करता है। वायुमंडलीय और समुद्र विज्ञान गतिकी के मूलभूत सिद्धांतों के आधार पर कोरिओलिस बल के बारे में दोनों कथन सही हैं।
✅ कथन 1 – सही: कोरिओलिस बल गतिशील वस्तु के वेग के सीधे समानुपाती होता है (F = 2mΩv sinφ), इसलिए उच्च पवन वेग के परिणामस्वरूप अधिक कोरिओलिस बल और विक्षेपण होता है।
✅ कथन 2 – सही: कोरिओलिस बल अक्षांश की साइन (sinφ) के साथ परिवर्तित होता है, ध्रुवों पर अधिकतम (sin 90° = 1) और भूमध्य रेखा पर शून्य (sin 0° = 0) होता है, जहां कोई विक्षेपण नहीं होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: कोरिओलिस बल
- परिभाषा: पृथ्वी के घूर्णन के कारण गतिशील वस्तुओं पर कार्य करने वाला एक आभासी विक्षेपण बल, जिसका नाम फ्रांसीसी वैज्ञानिक गैस्पार्ड-गुस्ताव डी कोरिओलिस के नाम पर रखा गया है।
- गणितीय व्यंजक: F = 2mΩv sinφ, जहां m = द्रव्यमान, Ω = पृथ्वी का कोणीय वेग, v = वस्तु का वेग, φ = अक्षांश।
- विक्षेपण की दिशा: उत्तरी गोलार्ध में वस्तुएं दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित होती हैं।
- अक्षांशीय विविधता: भूमध्य रेखा पर शून्य, अक्षांश के साथ बढ़ता है, और ध्रुवों पर अधिकतम होता है; यही कारण है कि उष्णकटिबंधीय चक्रवात भूमध्य रेखा के 5° के भीतर नहीं बनते हैं।
- वेग पर निर्भरता: गतिशील वस्तु (पवन, महासागरीय धारा, मिसाइल) की गति जितनी अधिक होगी, कोरिओलिस विक्षेपण उतना ही अधिक होगा।
- पवन पैटर्न पर प्रभाव: चक्रवातों, प्रतिचक्रवातों के घूर्णन, व्यापारिक पवनों के विक्षेपण और भूस्थैतिक पवन संतुलन के लिए जिम्मेदार।
- महासागरीय धाराएं: प्रमुख महासागरीय धाराओं को वृत्ताकार पैटर्न (चक्र) में प्रवाहित करता है - उत्तरी गोलार्ध में दक्षिणावर्त और दक्षिणी गोलार्ध में वामावर्त।
- व्यावहारिक अनुप्रयोग: लंबी दूरी की तोपखाने, मिसाइल प्रक्षेपवक्र, विमानन मार्गों और वैश्विक परिसंचरण पैटर्न को समझने के लिए महत्वपूर्ण।
प्रत्येक वर्ष 21 जून को, निम्नलिखित में से कौन-सी अक्षांश रेखा(एँ) 12 घंटे से अधिक सूर्य का प्रकाश प्राप्त करती है/हैं?
- भूमध्य रेखा
- कर्क रेखा
- मकर रेखा
- आर्कटिक वृत्त
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 2 और 4
21 जून को, उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म संक्रांति होती है, जब सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं, और भूमध्य रेखा के उत्तर की सभी अक्षांश रेखाएँ 12 घंटे से अधिक दिन का अनुभव करती हैं। आर्कटिक वृत्त 24 घंटे निरंतर सूर्य का प्रकाश (मध्यरात्रि सूर्य) प्राप्त करता है, जबकि भूमध्य रेखा पर वर्ष भर हमेशा ठीक 12 घंटे का दिन होता है।
❌ कथन 1 (भूमध्य रेखा) – गलत: भूमध्य रेखा वर्ष के सभी दिनों में ठीक 12 घंटे का दिन प्राप्त करती है, 12 घंटे से अधिक नहीं।
✅ कथन 2 (कर्क रेखा) – सही: 21 जून को, कर्क रेखा सीधी सूर्य की रोशनी प्राप्त करती है और 12 घंटे से अधिक दिन का अनुभव करती है।
❌ कथन 3 (मकर रेखा) – गलत: मकर रेखा दक्षिणी गोलार्ध में स्थित है, जो 21 जून को सूर्य से दूर झुका होता है, जिसके परिणामस्वरूप 12 घंटे से कम दिन होता है।
✅ कथन 4 (आर्कटिक वृत्त) – सही: आर्कटिक वृत्त 21 जून को 24 घंटे निरंतर दिन का अनुभव करता है, जिसे मध्यरात्रि सूर्य घटना के रूप में जाना जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ग्रीष्म संक्रांति और दिन की लंबाई
- ग्रीष्म संक्रांति (21 जून): उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अपने अधिकतम झुकाव (23.5°) पर होता है, जिसके परिणामस्वरूप उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है।
- कर्क रेखा पर सीधी किरणें: इस दिन, सूर्य की किरणें कर्क रेखा (23.5° N) पर लंबवत पड़ती हैं, जो अधिकतम सौर ऊर्जा प्राप्त करती है।
- दिन की लंबाई का पैटर्न: भूमध्य रेखा के उत्तर की सभी अक्षांश रेखाएँ 21 जून को 12 घंटे से अधिक दिन का अनुभव करती हैं, दिन की लंबाई उत्तरी ध्रुव की ओर बढ़ती जाती है।
- भूमध्य रेखा: भूमध्य रेखा वर्ष के सभी दिनों में ठीक 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात का अनुभव करती है क्योंकि यह ध्रुवों के बीच मध्य में स्थित है।
- मध्यरात्रि सूर्य: आर्कटिक वृत्त (66.5° N) और उत्तरी ध्रुव की ओर इससे आगे की सभी अक्षांश रेखाओं पर, 21 जून को सूर्य अस्त नहीं होता, जिसके परिणामस्वरूप 24 घंटे निरंतर दिन होता है।
- दक्षिणी गोलार्ध: 21 जून को (दक्षिणी गोलार्ध में शीत संक्रांति), भूमध्य रेखा के दक्षिण की सभी अक्षांश रेखाएँ 12 घंटे से कम दिन का अनुभव करती हैं, अंटार्कटिक वृत्त 24 घंटे अंधकार का अनुभव करता है।
- मकर रेखा: 23.5° S पर स्थित, यह 21 जून को अपना सबसे छोटा दिन अनुभव करती है जो 12 घंटे से काफी कम होता है।
🧐 Not Sure What to Study Next?
Get a personalised study plan based on your goals, time and revision needs.
21 जून को, सूर्य
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — आर्कटिक वृत्त पर क्षितिज के नीचे अस्त नहीं होता है
21 जून को, उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म संक्रांति होती है, जब उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर अपने अधिकतम कोण (23.5°) पर झुका होता है। इसके परिणामस्वरूप आर्कटिक वृत्त (66.5°N) पर 24 घंटे निरंतर दिन का अनुभव होता है, जिसका अर्थ है कि सूर्य क्षितिज के नीचे अस्त नहीं होता है। इसके विपरीत, अंटार्कटिक वृत्त पर ध्रुवीय रात होती है, भूमध्य रेखा पर दिन और रात बराबर होते हैं, और सूर्य कर्क रेखा (मकर रेखा नहीं) पर सीधे ऊपर होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संक्रांति और सूर्य की स्थिति
| तिथि | घटना | सूर्य की स्थिति | आर्कटिक वृत्त | अंटार्कटिक वृत्त |
|---|---|---|---|---|
| 21 जून | ग्रीष्म संक्रांति (उत्तरी गोलार्ध) | कर्क रेखा (23.5°N) पर सीधे ऊपर | 24 घंटे दिन (सूर्य अस्त नहीं होता) | 24 घंटे अंधकार (ध्रुवीय रात) |
| 22 दिसंबर | शीत संक्रांति (उत्तरी गोलार्ध) | मकर रेखा (23.5°S) पर सीधे ऊपर | 24 घंटे अंधकार (ध्रुवीय रात) | 24 घंटे दिन (सूर्य अस्त नहीं होता) |
| 21 मार्च | वसंत विषुव | भूमध्य रेखा (0°) पर सीधे ऊपर | 12 घंटे दिन/रात | 12 घंटे दिन/रात |
| 23 सितंबर | शरद विषुव | भूमध्य रेखा (0°) पर सीधे ऊपर | 12 घंटे दिन/रात | 12 घंटे दिन/रात |
- आर्कटिक वृत्त: 66.5°N अक्षांश पर स्थित; ग्रीष्म संक्रांति के दौरान मध्यरात्रि सूर्य का अनुभव करता है
- अंटार्कटिक वृत्त: 66.5°S अक्षांश पर स्थित; शीत संक्रांति (दिसंबर) के दौरान मध्यरात्रि सूर्य का अनुभव करता है
- कर्क रेखा: 23.5°N - 21 जून को सूर्य सीधे ऊपर होता है
- मकर रेखा: 23.5°S - 22 दिसंबर को सूर्य सीधे ऊपर होता है
- पृथ्वी का अक्षीय झुकाव: कक्षीय तल से 23.5° का झुकाव मौसमी भिन्नताओं का कारण बनता है
मौसम के अनुसार दिन और रात की लंबाई में भिन्नता किसके कारण होती है -
Detailed Explanation:
दिन और रात की लंबाई में मौसमी भिन्नता पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिक्रमण और इसके 23.5° के अक्षीय झुकाव के संयोजन से होती है।
झुका हुआ अक्ष विभिन्न गोलार्द्धों को वर्ष भर अलग-अलग मात्रा में सीधी सूर्य की रोशनी प्राप्त करने का कारण बनता है – जब उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर झुका होता है (ग्रीष्म संक्रांति), तो वहाँ दिन लंबे होते हैं; जब दूर झुका होता है (शीत संक्रांति), तो दिन छोटे होते हैं।
❌ विकल्प 1 – गलत: पृथ्वी का घूर्णन दिन और रात के दैनिक चक्र (24 घंटे) का कारण है, न कि उनकी लंबाई में मौसमी भिन्नता का।
❌ विकल्प 3 – गलत: अक्षांशीय स्थिति भिन्नता की मात्रा निर्धारित करती है (ध्रुवीय क्षेत्रों में अत्यधिक भिन्नता, भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में न्यूनतम), लेकिन मौसमी परिवर्तनों का कारण नहीं है।
❌ विकल्प 4 – गलत: दीर्घवृत्ताकार कक्षा पृथ्वी-सूर्य की दूरी को प्रभावित करती है लेकिन मौसमी दिन-लंबाई भिन्नता का कारण नहीं है; झुकाव मुख्य कारक है।
Related Topics in विश्व भूगोल
Frequently Asked Questions
Common questions about पृथ्वी की गतियाँ in UPSC CSE PRELIMS