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पृथ्वी एवं ब्रह्मांड Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for पृथ्वी एवं ब्रह्मांड with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन-I: विशाल तारे बौने तारों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं।
कथन-II: बौने तारों की तुलना में, विशाल तारों में परमाणु प्रतिक्रियाओं की दर अधिक होती है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4 (कथन-I गलत है, लेकिन कथन-II सही है)
किसी तारे का जीवनकाल इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपना नाभिकीय ईंधन कितनी तेजी से खर्च करता है। विशाल (Giant) तारों में ईंधन अधिक होता है, लेकिन वे उसे बहुत तेजी से जला देते हैं।
❌ कथन I गलत है: Giant stars, dwarf stars की तुलना में अधिक समय तक नहीं जीते। वे अपना ईंधन तेजी से समाप्त कर लेते हैं, इसलिए उनका जीवनकाल छोटा होता है।
✅ कथन II सही है: Giant stars के केंद्र में तापमान और दाब बहुत अधिक होते हैं, जिससे नाभिकीय संलयन (fusion) की दर अधिक होती है।
संबंध: कथन II यह समझाता है कि कथन I क्यों गलत है। अधिक तेज़ नाभिकीय अभिक्रियाएँ ईंधन को जल्दी समाप्त कर देती हैं, जिससे तारे का जीवनकाल कम हो जाता है।
संक्षिप्त नोट्स: तारों का जीवन चक्र (Stellar Life Cycle)
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किसी तारे का जीवनकाल मुख्यतः उसके द्रव्यमान (Mass) पर निर्भर करता है।
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अधिक द्रव्यमान वाले तारों में अधिक तापमान और दाब होता है।
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Giant stars अपना ईंधन तेजी से जलाते हैं और केवल लाखों वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।
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Dwarf stars अरबों से खरबों वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।
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सूर्य एक मध्यम आकार का तारा है जिसका अनुमानित जीवनकाल लगभग 10 अरब वर्ष है।
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Red dwarf तारे ब्रह्मांड के सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले तारे हैं।
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तारे ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए नाभिकीय संलयन (Fusion) का उपयोग करते हैं।
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ईंधन समाप्त होने पर तारे अपने द्रव्यमान के अनुसार White Dwarf, Neutron Star या Black Hole बन सकते हैं।
उत्तरी गोलार्द्ध में, वर्ष का सबसे लंबा दिन सामान्यतः किसमें होता है:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — जून महीने का दूसरा पखवाड़ा
उत्तरी गोलार्द्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन ग्रीष्म संक्रांति के रूप में जाना जाता है, जो आमतौर पर 20 या 21 जून को होता है, जो जून के दूसरे पखवाड़े में आता है। इस दिन, सूर्य कर्क रेखा (23.5°N अक्षांश) के ठीक ऊपर होता है, जिसके परिणामस्वरूप उत्तरी गोलार्द्ध में अधिकतम दिन के प्रकाश घंटे होते हैं। कैलेंडर प्रणाली और पृथ्वी की कक्षीय यांत्रिकी के कारण सटीक तारीख साल-दर-साल थोड़ी भिन्न हो सकती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संक्रांति और विषुव
| घटना | तिथि (लगभग) | उत्तरी गोलार्द्ध | दक्षिणी गोलार्द्ध |
|---|---|---|---|
| ग्रीष्म संक्रांति | 20-21 जून | सबसे लंबा दिन, सबसे छोटी रात | सबसे छोटा दिन, सबसे लंबी रात |
| शीत संक्रांति | 21-22 दिसंबर | सबसे छोटा दिन, सबसे लंबी रात | सबसे लंबा दिन, सबसे छोटी रात |
| वसंत विषुव | 20-21 मार्च | दिन और रात बराबर | दिन और रात बराबर |
| शरद विषुव | 22-23 सितंबर | दिन और रात बराबर | दिन और रात बराबर |
- संक्रांति के दौरान, सूर्य कर्क रेखा (जून) या मकर रेखा (दिसंबर) के ठीक ऊपर होता है
- विषुव के दौरान, सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है, जिसके परिणामस्वरूप विश्व स्तर पर दिन और रात बराबर होते हैं
- पृथ्वी की धुरी का झुकाव (23.5°) मौसमी विविधताओं और संक्रांति के लिए जिम्मेदार है
- 'संक्रांति' शब्द लैटिन 'सोल' (सूर्य) और 'सिस्टेरे' (स्थिर खड़े होना) से आया है, क्योंकि सूर्य अपनी उत्तरी या दक्षिणी स्थिति पर रुका हुआ प्रतीत होता है
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र हर कुछ सौ हजार वर्षों में उलट जाता है।
- जब पृथ्वी 4000 मिलियन वर्ष से अधिक पहले बनी थी, तो 54% ऑक्सीजन थी और कोई कार्बन डाइऑक्साइड नहीं थी।
- जब जीवित जीव उत्पन्न हुए, तो उन्होंने पृथ्वी के प्रारंभिक वायुमंडल को संशोधित किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1 और 3
यह प्रश्न पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र उत्क्रमण और पृथ्वी के वायुमंडल के विकास के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। कथन 1 और 3 वैज्ञानिक रूप से सटीक हैं, जबकि कथन 2 में प्रारंभिक पृथ्वी की वायुमंडलीय संरचना के बारे में तथ्यात्मक त्रुटियाँ हैं।
✅ कथन 1 – सही: पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र लगभग हर कुछ सौ हजार वर्षों में भू-चुंबकीय उत्क्रमण से गुजरता है, जो ज्वालामुखी चट्टानों और महासागर तल अवसादों में दर्ज है।
❌ कथन 2 – गलत: प्रारंभिक पृथ्वी के वायुमंडल (4 अरब वर्ष से अधिक पहले) में लगभग कोई मुक्त ऑक्सीजन नहीं थी और यह कार्बन डाइऑक्साइड, जल वाष्प, नाइट्रोजन और मीथेन से प्रभुत्व में था—54% ऑक्सीजन नहीं।
✅ कथन 3 – सही: जीवित जीवों, विशेष रूप से सायनोबैक्टीरिया ने महान ऑक्सीजनीकरण घटना (~2.4 अरब वर्ष पहले) के दौरान प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से ऑक्सीजन जोड़कर पृथ्वी के वायुमंडल को मौलिक रूप से परिवर्तित किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पृथ्वी का वायुमंडलीय विकास
- आदिम वायुमंडल: प्रारंभिक पृथ्वी (4+ अरब वर्ष पहले) में कोई मुक्त ऑक्सीजन नहीं थी; वायुमंडल मुख्य रूप से हाइड्रोजन, हीलियम, जल वाष्प, मीथेन, अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड से बना था।
- द्वितीयक वायुमंडल: ज्वालामुखीय गैस उत्सर्जन के माध्यम से बना, जिसमें CO₂, नाइट्रोजन, जल वाष्प और सल्फर यौगिकों का निकलना शामिल है।
- महान ऑक्सीजनीकरण घटना (GOE): लगभग 2.4 अरब वर्ष पहले, सायनोबैक्टीरिया ने प्रकाश संश्लेषण शुरू किया, जिससे वायुमंडलीय ऑक्सीजन धीरे-धीरे ~0% से आज ~21% तक बढ़ी।
- भू-चुंबकीय उत्क्रमण: पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुव अनियमित रूप से स्थान बदलते हैं; अंतिम उत्क्रमण ~780,000 वर्ष पहले हुआ (ब्रुन्स-मटुयामा उत्क्रमण)।
- उत्क्रमण के प्रमाण: ज्वालामुखी चट्टानों (प्राचीन चुंबकत्व) और मध्य-महासागरीय कटकों से फैलने वाली महासागरीय भूपर्पटी में चुंबकीय खनिजों में संरक्षित।
- जीवन पर प्रभाव: ऑक्सीजन क्रांति ने अवायवीय जीवों के सामूहिक विलुप्ति का कारण बना लेकिन जटिल वायवीय जीव रूपों के विकास को सक्षम किया।
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पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिए निम्नलिखित में से कौन सा तत्वों का समूह मुख्य रूप से उत्तरदायी था?
Detailed Explanation:
कार्बन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी तत्व हैं।
कार्बन सभी कार्बनिक अणुओं की रीढ़ बनाता है, जबकि हाइड्रोजन और नाइट्रोजन जीवन के मूलभूत घटक — अमीनो अम्ल, न्यूक्लिक अम्ल (DNA/RNA) और प्रोटीन — के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
अंतरिक्ष से आने वाले विद्युत आवेशित कण जो कई सौ किमी/सेकंड की गति से यात्रा करते हैं, यदि वे पृथ्वी की सतह तक पहुँच जाएं तो जीवित प्राणियों को गंभीर क्षति पहुँचा सकते हैं। उन्हें पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से क्या रोकता है?
Detailed Explanation:
पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटोस्फीयर) एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है, जो आवेशित कणों (सौर पवन, कॉस्मिक किरणें) को ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर मोड़ देता है।
जब ये कण ध्रुवों के पास वायुमंडलीय गैसों से टकराते हैं, तो ध्रुवीय ज्योति (ऑरोरा बोरियालिस और ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस) उत्पन्न होती है, जो सतह पर सीधे संपर्क को रोकती है जो जीवित जीवों को हानि पहुँचा सकता है।
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