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आधुनिक इतिहास Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for आधुनिक इतिहास in BPSC CCE Prelims in English & Hindi Medium.
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स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, भारतीय रियासतों में (भारतीय शासकों द्वारा शासित राज्यों जैसे कश्मीर, निजाम का हैदराबाद, त्रावणकोर आदि में) शुरू किया गया एक समानांतर आंदोलन था
Detailed Explanation:
प्रजा मंडल आंदोलन स्वतंत्रता संग्राम के दौरान रियासती राज्यों (कश्मीर, हैदराबाद, त्रावणकोर आदि) में शुरू किया गया समानांतर आंदोलन था, जो भारतीय शासकों से उत्तरदायी सरकार और नागरिक अधिकारों की मांग करता था।
यह आंदोलन ब्रिटिश भारत में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की गतिविधियों के समान था लेकिन रियासती राज्यों के भीतर राजनीतिक अधिकारों पर केंद्रित था, जिसमें अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (1927) विभिन्न राज्यों में इन प्रयासों का समन्वय करती थी।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: महात्मा गांधी को 10 मार्च 1922 को गिरफ्तार किया गया था, 1921 में नहीं, असहयोग आंदोलन वापस लेने के बाद।
✅ कथन 2 – सही: चौरी चौरा की घटना (5 फरवरी 1922) के कारण गांधी ने हिंसा के कारण असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
✅ कथन 3 – सही: गांधी का पहला प्रमुख सार्वजनिक भाषण फरवरी 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन पर था, जहां उन्होंने भारतीय अभिजात वर्ग की आलोचना की।
निम्नलिखित में से कौन सी पत्रिका अबुल कलाम आज़ाद द्वारा निकाली गई थी?
Detailed Explanation:
अल-हिलाल एक उर्दू साप्ताहिक पत्रिका थी जिसे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने 1912 में कलकत्ता से स्थापित और संपादित की थी।
ज़मींदार लाहौर से ज़फर अली खान द्वारा प्रकाशित की गई थी, और द कॉमरेड 1911 में मौलाना मुहम्मद अली जौहर द्वारा शुरू की गई थी।
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19वीं सदी के अंत में भारत में राष्ट्रवाद की भावना पैदा करने में इतिहास के अध्ययन ने किस प्रकार मदद की?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: आर.सी. दत्त जैसे राष्ट्रवादी इतिहासकारों ने ब्रिटिश शासन के तहत आर्थिक शोषण का विश्लेषण किया, धन के निकास और गरीबी का दस्तावेजीकरण किया, जिसने लोगों को औपनिवेशिक उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
✅ कथन 2 – सही: इतिहासकारों ने विज्ञान, गणित, कला और शासन में प्राचीन भारतीय उपलब्धियों को उजागर करके भारतीय पिछड़ेपन की औपनिवेशिक कथा का खंडन किया, भारतीयों की स्वशासन की क्षमता सिद्ध की।
✅ कथन 3 – सही: रमेश चंद्र दत्त और जदुनाथ सरकार जैसे विद्वानों ने भारत के गौरवशाली अतीत (प्राचीन साम्राज्य, सांस्कृतिक उपलब्धियां) के बारे में लिखा, जिससे भारतीयों में राष्ट्रीय गर्व और आत्मविश्वास का विकास हुआ।
शहरों में असहयोग आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही नहीं हैं?
- केवल उच्च जाति और अमीर लोगों ने आंदोलन में भाग लिया।
- मद्रास की जस्टिस पार्टी द्वारा भी परिषद चुनावों का बहिष्कार किया गया।
- हजारों छात्रों ने सरकारी नियंत्रित स्कूलों को छोड़ दिया, प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने इस्तीफा दे दिया और वकीलों ने अपनी प्रैक्टिस छोड़ दी।
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: शहरों में असहयोग आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों जैसे मध्यम वर्ग, मजदूर, छात्र और व्यापारियों ने भाग लिया – केवल उच्च जाति और अमीर लोगों ने नहीं।
❌ कथन 2 – गलत: मद्रास की जस्टिस पार्टी (गैर-ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व करने वाली) ने परिषद चुनावों का बहिष्कार नहीं किया; उन्होंने ब्राह्मण वर्चस्व के खिलाफ अपने हितों की रक्षा के लिए भाग लिया।
✅ कथन 3 – सही: हजारों छात्रों, शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और वकीलों ने 1920-1922 में आंदोलन के हिस्से के रूप में सरकारी संस्थानों और कानूनी प्रैक्टिस का बहिष्कार किया।
उत्तर: कथन 1 और 2 गलत हैं, इसलिए विकल्प 1 सही है।
"एक संन्यासी जो फिजी में एक अनुबंधित मजदूर के रूप में कुछ समय बिताने के बाद उस जिले में आया, अपनी पीठ पर तुलसीदास रामायण की एक प्रति लेकर आया, जिसमें से वह ग्रामीण दर्शकों को छंद सुनाया करता था।" यहां संदर्भित किसान नेता हैं
Detailed Explanation:
बाबा राम चन्द्र अवध (औध) के एक किसान नेता थे जिन्होंने भारत लौटने से पहले फिजी में अनुबंधित मजदूर के रूप में काम किया था।
वे ग्रामीण दर्शकों को तुलसीदास रामायण के छंद सुनाया करते थे और जमींदारों (तालुकदारों) के खिलाफ अवध किसान सभा आंदोलन (1920-21) को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1932 में अखिल भारतीय हरिजन संघ के संस्थापक कौन थे?
Detailed Explanation:
महात्मा गांधी ने 1932 में अखिल भारतीय हरिजन संघ की स्थापना दलितों (जिन्हें वे हरिजन कहते थे) के उत्थान के लिए की थी।
यह संगठन अस्पृश्यता हटाने, मंदिर प्रवेश को बढ़ावा देने और शिक्षा तथा रोजगार के अवसरों के माध्यम से दलित वर्गों की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों में सुधार पर केंद्रित था।
20 फरवरी, 1947 को प्रधानमंत्री एटली ने ब्रिटिश सरकार के भारत से अंततः कब तक वापस जाने के निर्णय की घोषणा की?
Detailed Explanation:
20 फरवरी, 1947 को प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने ब्रिटिश संसद में घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 तक भारतीयों को सत्ता हस्तांतरित कर देगी।
यह घोषणा एटली घोषणा का हिस्सा थी, जिसमें भारत से ब्रिटिश वापसी की निश्चित समय सीमा तय की गई थी, हालांकि वास्तविक सत्ता हस्तांतरण 15 अगस्त, 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत हुआ।
1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं का सीमांकन करने के लिए गठित दो सीमा आयोगों की अध्यक्षता निम्नलिखित में से किसने की?
Detailed Explanation:
सिरिल रेडक्लिफ, एक ब्रिटिश वकील जिन्हें भारत का कोई पूर्व अनुभव नहीं था, ने 1947 में पंजाब और बंगाल में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमाओं का सीमांकन करने के लिए स्थापित दोनों सीमा आयोगों की अध्यक्षता की।
रेडक्लिफ रेखा, जो 17 अगस्त 1947 (स्वतंत्रता के दो दिन बाद) को घोषित की गई, ने दोनों प्रांतों को विभाजित किया और अंतर्राष्ट्रीय सीमा बनी, जिसने विभाजन के माध्यम से लाखों लोगों को प्रभावित किया।
बंगाल में महालवाड़ी बंदोबस्त की प्रणाली किसने शुरू की?
Detailed Explanation:
महालवाड़ी बंदोबस्त की शुरुआत होल्ट मैकेंजी ने 1822 में उत्तर-पश्चिमी प्रांतों (वर्तमान उत्तर प्रदेश) में की थी, बंगाल में नहीं।
लॉर्ड कॉर्नवालिस ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा में स्थायी बंदोबस्त (1793) शुरू किया, जबकि लॉर्ड हेस्टिंग्स महालवाड़ी प्रणाली के प्रारंभिक प्रयोगों के दौरान गवर्नर-जनरल थे, लेकिन राजस्व बोर्ड के सचिव के रूप में होल्ट मैकेंजी महालवाड़ी प्रणाली के वास्तविक वास्तुकार थे।
1940 में, विनोबा भावे ने व्यक्तिगत सत्याग्रह कहाँ से शुरू किया था?
Detailed Explanation:
विनोबा भावे ने 17 अक्टूबर 1940 को पवनार, महाराष्ट्र से व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू किया, जो महात्मा गांधी द्वारा चुने गए पहले व्यक्तिगत सत्याग्रही बने।
पुन्नप्रा-वायलार केरल में 1946 के कम्युनिस्ट विद्रोह को संदर्भित करता है, जबकि गुजरात का नडियाद 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह से नहीं बल्कि खेड़ा सत्याग्रह (1918) से जुड़ा था।
कांग्रेस ने 1918 में मोंटफोर्ड सुधारों पर एक आलोचनात्मक रुख अपनाया, जिसके कारण पुराने उदारवादी अवशेषों (सप्रू, जयकर, और चिंतामणि) के साथ संबंध टूट गए, जिन्होंने निम्नलिखित में से किसका गठन किया:
Detailed Explanation:
मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919), न कि 1918, ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में दरार पैदा की जब तेज बहादुर सप्रू, एम.आर. जयकर, और सी.वाई. चिंतामणि जैसे उदारवादियों ने सुधारों का समर्थन किया जबकि कांग्रेस ने अधिक आलोचनात्मक रुख अपनाया।
इन उदारवादियों ने अलग होकर भारतीय राष्ट्रीय उदारवादी संघ (1918-1919) का गठन किया ताकि सुधारों द्वारा प्रदान किए गए संवैधानिक ढांचे के भीतर काम किया जा सके।
सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी (1905) की स्थापना पहले गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा की गई थी, और स्वराज पार्टी (1923) का गठन बाद में सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा असहयोग आंदोलन के बाद किया गया था।
कैबिनेट मिशन भारत में निम्नलिखित में से किस उद्देश्य के लिए भेजा गया था?
- एक राष्ट्रीय सरकार की स्थापना के लिए
- सत्ता हस्तांतरण के लिए संवैधानिक व्यवस्था तैयार करने के लिए
- पाकिस्तान के लिए जिन्ना की मांग के विवरण पर कार्य करने के लिए
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: कैबिनेट मिशन 1946 का उद्देश्य भारत को एकजुट रखना था, राष्ट्रीय सरकार की स्थापना करना नहीं।
✅ कथन 2 – सही: मिशन का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों से भारतीयों को सत्ता हस्तांतरण के लिए संवैधानिक व्यवस्था तैयार करना था।
❌ कथन 3 – गलत: मिशन ने पाकिस्तान की मांग को अस्वीकार कर दिया और इसके बजाय मुस्लिम चिंताओं को समायोजित करते हुए एकता बनाए रखने के लिए त्रि-स्तरीय संघीय संरचना का प्रस्ताव दिया।
बारदोली सत्याग्रह का सफलतापूर्वक नेतृत्व किसने किया?
Detailed Explanation:
वल्लभभाई पटेल ने गुजरात में ब्रिटिश द्वारा लगाए गए भू-राजस्व में 30% वृद्धि के खिलाफ 1928 में बारदोली सत्याग्रह का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। इस अहिंसक आंदोलन ने सरकार को वृद्धि वापस लेने पर मजबूर किया और पटेल को "सरदार" की उपाधि दिलाई।
मोतीलाल नेहरू, जे.बी. कृपलानी और जवाहरलाल नेहरू प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे लेकिन बारदोली आंदोलन के नेतृत्व से जुड़े नहीं थे।
अतः, वल्लभभाई पटेल ने इस ऐतिहासिक किसान सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जिससे विकल्प 4 सही उत्तर है।
1946 ईस्वी में भारत भेजे गए कैबिनेट मिशन के सदस्य निम्नलिखित में से कौन नहीं था?
Detailed Explanation:
कैबिनेट मिशन 1946 में तीन सदस्य थे: लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस (भारत के राज्य सचिव), स्टैफोर्ड क्रिप्स (व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष), और ए. वी. अलेक्जेंडर (एडमिरल्टी के प्रथम लॉर्ड)।
रैम्से मैकडोनाल्ड पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री (1924, 1929–1935) थे जिनकी 1946 के मिशन में कोई भूमिका नहीं थी; उनकी मृत्यु 1937 में हुई थी, मिशन के भारत आने से लगभग एक दशक पहले।
अतः, रैम्से मैकडोनाल्ड कैबिनेट मिशन के सदस्य नहीं थे, इसलिए विकल्प 1 सही उत्तर है।