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जनजातीय, किसान एवं जनविद्रोह Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: जनजातीय, किसान एवं जनविद्रोह
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आदिवासी आंदोलन-संथाल हूल (विद्रोह) कब हुआ था?
Detailed Explanation:
संथाल हूल (विद्रोह) एक प्रमुख आदिवासी विद्रोह था जो सिद्धू और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में ब्रिटिश शासन और शोषक जमींदारी प्रथा के खिलाफ हुआ था।
यह विद्रोह 1855–56 में वर्तमान झारखंड और बंगाल के कुछ हिस्सों (पुरुलिया, बीरभूम, बांकुरा) में हुआ था, जो 1793 के स्थायी भूमि बंदोबस्त द्वारा संथालों की पैतृक भूमि छीने जाने से शुरू हुआ था।
संथालों ने स्वतंत्रता की घोषणा की, अपनी सेनाएं बनाईं, छापामार युद्ध रणनीति का उपयोग किया और रेलवे एवं डाक लाइनों को बाधित किया, लेकिन अंततः ब्रिटिश प्रेसीडेंसी सेनाओं ने इसे कुचल दिया।
बिरसा मुंडा का विद्रोह कहाँ हुआ था?
Detailed Explanation:
बिरसा मुंडा का विद्रोह (उलगुलान) छोटानागपुर पठार क्षेत्र में रांची (वर्तमान झारखंड) के आसपास 1899–1900 के दौरान हुआ था।
चंपारण का संबंध गांधी के नील सत्याग्रह (1917) से है, और बलिया का भारत छोड़ो आंदोलन (1942) से है।
बिहार में किसान सभा आंदोलन के प्रमुख नेता कौन थे?
Detailed Explanation:
स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 1929 में बिहार प्रांतीय किसान सभा (BPKS) की स्थापना की और 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के संस्थापक अध्यक्ष बने।
राज कुमार शुक्ला का संबंध चंपारण सत्याग्रह (1917) से था, आचार्य नरेंद्र देव ने राष्ट्रीय किसान आंदोलन में योगदान दिया लेकिन विशेष रूप से बिहार के किसान सभा नेता के रूप में नहीं, और बाबा राम चंद्र ने अवध (उत्तर प्रदेश) में किसान आंदोलन का नेतृत्व किया।
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अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस का गठन किस वर्ष में हुआ था
Detailed Explanation:
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की स्थापना 1920 में बम्बई (मुंबई) में हुई थी।
लाला लाजपत राय इसके पहले अध्यक्ष थे, और यह ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में श्रमिकों के अधिकारों और कल्याण को संगठित करने के लिए भारत की पहली राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन संस्था थी।
"एक संन्यासी जो फिजी में एक अनुबंधित मजदूर के रूप में कुछ समय बिताने के बाद उस जिले में आया, अपनी पीठ पर तुलसीदास रामायण की एक प्रति लेकर आया, जिसमें से वह ग्रामीण दर्शकों को छंद सुनाया करता था।" यहां संदर्भित किसान नेता हैं
Detailed Explanation:
बाबा राम चन्द्र अवध (औध) के एक किसान नेता थे जिन्होंने भारत लौटने से पहले फिजी में अनुबंधित मजदूर के रूप में काम किया था।
वे ग्रामीण दर्शकों को तुलसीदास रामायण के छंद सुनाया करते थे और जमींदारों (तालुकदारों) के खिलाफ अवध किसान सभा आंदोलन (1920-21) को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बारदोली सत्याग्रह का सफलतापूर्वक नेतृत्व किसने किया?
Detailed Explanation:
वल्लभभाई पटेल ने गुजरात में ब्रिटिश द्वारा लगाए गए भू-राजस्व में 30% वृद्धि के खिलाफ 1928 में बारदोली सत्याग्रह का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। इस अहिंसक आंदोलन ने सरकार को वृद्धि वापस लेने पर मजबूर किया और पटेल को "सरदार" की उपाधि दिलाई।
मोतीलाल नेहरू, जे.बी. कृपलानी और जवाहरलाल नेहरू प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे लेकिन बारदोली आंदोलन के नेतृत्व से जुड़े नहीं थे।
अतः, वल्लभभाई पटेल ने इस ऐतिहासिक किसान सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जिससे विकल्प 4 सही उत्तर है।
1855 ईस्वी के संथाल विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
Detailed Explanation:
सिद्धू और कान्हू मुर्मू, दो संथाल भाई, ने वर्तमान झारखंड में शोषक जमींदारों, साहूकारों और ब्रिटिश औपनिवेशिक राजस्व नीतियों के खिलाफ संथाल विद्रोह (हूल) 1855 का नेतृत्व किया।
बुधु भगत ने कोल विद्रोह (1831–32) का नेतृत्व किया, जोधा मानेक और मुलु मानेक विभिन्न क्षेत्रों में आदिवासी आंदोलनों से जुड़े थे, और मदारी पासी ने 1857 के विद्रोह में भाग लिया।
अतः, सिद्धू और कान्हू संथाल विद्रोह के मुख्य नेता थे, जो विकल्प 1 को सही उत्तर बनाता है।
संथाल विद्रोह के नेता कौन थे?
Detailed Explanation:
सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू दो भाई थे जिन्होंने वर्तमान झारखंड में ब्रिटिश शोषण, जमींदारी व्यवस्था और साहूकारों के अत्याचार के खिलाफ संथाल विद्रोह (1855–56) का नेतृत्व किया।
अन्य उल्लिखित नेता—गौरक्षिणी भगत, केशव चन्द्र रॉय, शम्भूनाथ पाल, कोर्रा मल्लैया, जरा भगत और बलराम भगत—विभिन्न आदिवासी या किसान आंदोलनों से जुड़े थे।
अतः, सिद्धू और कान्हू संथाल विद्रोह के नेता थे, इसलिए विकल्प 1 सही उत्तर है।