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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं प्रारंभिक राष्ट्रवादी Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं प्रारंभिक राष्ट्रवादी
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1939 में सुभाष चंद्र बोस के त्यागपत्र देने पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष कौन बना?
Detailed Explanation:
सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस कार्यसमिति और महात्मा गांधी के साथ मतभेद के बाद अप्रैल 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
राजेंद्र प्रसाद को बोस के इस्तीफे से उत्पन्न रिक्ति को भरने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया, जो 1939 से 1940 तक इस पद पर रहे।
प्रसाद पहले भी 1934 में कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके थे और गांधी के विश्वसनीय सहयोगी थे, जिन्होंने चंपारण सत्याग्रह (1917) का नेतृत्व किया और असहयोग आंदोलन में भाग लिया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष कौन थे?
Detailed Explanation:
बदरुद्दीन तैयबजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष थे, जिन्होंने मद्रास में तीसरे अधिवेशन (1887) की अध्यक्षता की।
हसरत मोहानी कभी INC अध्यक्ष नहीं बने; मौलाना आज़ाद बहुत बाद में अध्यक्ष बने (1940–1946)।
होम रूल लीग की गतिविधियों को मजबूत करने के लिए 1918 में बिहार की यात्रा किसने की?
Detailed Explanation:
एनी बेसेंट ने 1918 में बिहार की यात्रा होम रूल लीग की गतिविधियों को मजबूत करने के लिए की, तथा दक्षिण भारत (1916 में शुरू) के बाद आंदोलन का विस्तार किया।
बी.जी. तिलक ने होम रूल लीग का नेतृत्व महाराष्ट्र में किया, बिहार में नहीं; महात्मा गांधी कृषि मुद्दों के लिए 1917 में चंपारण में थे, 1918 में होम रूल लीग के लिए नहीं; एम.ए. अंसारी इस विशेष यात्रा से संबंधित नहीं थे।
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1922 के गया अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष कौन थे?
Detailed Explanation:
चित्तरंजन दास को दिसंबर 1922 में गया अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया था।
इस अधिवेशन में परिवर्तनवादियों (सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व में), जो विधान परिषदों में प्रवेश के पक्ष में थे, और अपरिवर्तनवादियों (वल्लभभाई पटेल और राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में), जो इसके विरोध में थे, के बीच बड़ी बहस हुई; दास ने बाद में इस्तीफा दे दिया और 1923 में स्वराज पार्टी का गठन किया।
किस भारतीय नेता ने पहली बार कांग्रेस में नरमपंथियों पर हमला करने के लिए 'सेफ्टी-वाल्व सिद्धांत' का प्रयोग किया?
Detailed Explanation:
लाला लाजपत राय पहले भारतीय नेता थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में नरमपंथियों की आलोचना के लिए सेफ्टी-वाल्व सिद्धांत का उपयोग किया।
यह सिद्धांत, जो डब्ल्यू.सी. बनर्जी और ए.ओ. ह्यूम द्वारा प्रस्तावित था, यह सुझाव देता था कि कांग्रेस की स्थापना अंग्रेजों ने सेफ्टी वाल्व के रूप में की थी ताकि ब्रिटिश-विरोधी भावनाओं को शांतिपूर्वक निकाला जा सके और 1857 जैसे विद्रोह को रोका जा सके।
लाला लाजपत राय ने अपनी आलोचना में इस सिद्धांत का उपयोग यह तर्क देने के लिए किया कि नरमपंथी भारतीय स्वतंत्रता के लिए वास्तविक संघर्ष के बजाय ब्रिटिश हितों की सेवा कर रहे थे।
राजनीतिक रणनीति संघर्ष-संधि-संघर्ष या S-T-S किसके आह्वान के साथ प्रमुखता में आई
Detailed Explanation:
संघर्ष-संधि-संघर्ष (S-T-S) रणनीति को महात्मा गांधी ने खिलाफत और असहयोग आंदोलन (1920-22) के दौरान तैयार किया था।
इस रणनीति में सक्रिय संघर्ष (सत्याग्रह), उसके बाद अस्थायी संधि (वार्ता), और यदि मांगें पूरी नहीं होतीं तो संघर्ष की पुनः शुरुआत के चरण शामिल थे। यह रणनीतिक दृष्टिकोण विशेष रूप से खिलाफत मुद्दे के साथ प्रमुखता में आया, जहां गांधी ने इसका उपयोग हिंदू-मुस्लिम एकता बनाने और तुर्की खलीफा के संबंध में ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालने के लिए किया।
1912 में पटना में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में अध्यक्ष कौन थे?
Detailed Explanation:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 27वां अधिवेशन दिसंबर 1912 में पटना, बिहार में आयोजित हुआ था।
राव बहादुर रघुनाथ नरसिन्हा मुधोलकर (जिन्हें आर. एन. माधुलकर भी लिखा जाता है) ने इस अधिवेशन की अध्यक्षता की; वे नागपुर के एक प्रमुख नरमपंथी नेता और वकील थे।
उन्होंने स्वशासन प्राप्त करने के लिए संवैधानिक तरीकों पर जोर दिया और अंग्रेजों के साथ सहयोग करते हुए सरकार में अधिक भारतीय प्रतिनिधित्व की मांग की।
स्वदेशी और बहिष्कार को संघर्ष की विधि के रूप में सर्वप्रथम किस दौरान अपनाया गया था
Detailed Explanation:
स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलनों को संघर्ष की विधि के रूप में सर्वप्रथम बंगाल विभाजन (1905) के दौरान अपनाया गया था।
विभाजन-विरोधी आंदोलन जिसका नेतृत्व नरमपंथियों जैसे सुरेंद्रनाथ बनर्जी और चरमपंथियों जैसे बाल गंगाधर तिलक ने किया, ने इन विधियों को लोकप्रिय बनाया—स्वदेशी ने देशी वस्तुओं को बढ़ावा दिया जबकि बहिष्कार ने ब्रिटिश उत्पादों और संस्थानों को निशाना बनाया, जिससे ये बंगाल विभाजन विरोध की पहचान बन गए।
1906 में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के कलकत्ता अधिवेशन में, भारत के लिए स्वराज का झंडा किसने फहराया था?
Detailed Explanation:
स्वराज का झंडा 1906 में कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी द्वारा फहराया गया था।
यह अधिवेशन महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कांग्रेस में उग्रवादी गुट का उदय हुआ और स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा पर चार प्रस्ताव पारित किए गए।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने किस अधिवेशन में पूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव पारित किया?
Detailed Explanation:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1929 के लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) का प्रस्ताव पारित किया। इस अधिवेशन में पूर्ण स्वतंत्रता को लक्ष्य घोषित किया गया, 26 जनवरी 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस तय किया गया, और सविनय अवज्ञा को अधिकृत किया गया।
1924 बेलगाँव अधिवेशन हिंदू-मुस्लिम एकता पर केंद्रित था, 1931 कराची में मौलिक अधिकारों की रूपरेखा बनाई गई, और 1920 नागपुर में असहयोग अपनाया गया—किसी ने भी पूर्ण स्वतंत्रता प्रस्ताव पारित नहीं किया।
अतः, 1929 ई. लाहौर सही उत्तर है, जो विकल्प 2 को सही बनाता है।
बंगाल विभाजन के बारे में किसने कहा था, "विभाजन की घोषणा बम के गोले की तरह गिरी"?
Detailed Explanation:
सुरेंद्र नाथ बनर्जी, एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता, ने 1905 के बंगाल विभाजन की घोषणा का वर्णन करते हुए प्रसिद्ध रूप से कहा था "विभाजन की घोषणा बम के गोले की तरह गिरी", जो पूरे बंगाल में महसूस किए गए आघात और आक्रोश को दर्शाता है।
वायसराय लॉर्ड कर्जन के तहत 20 जुलाई 1905 को घोषित और 16 अक्टूबर 1905 को लागू किया गया यह विभाजन अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो नीति के रूप में देखा गया, जिसने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलनों को जन्म दिया। इसे अंततः 1911 में निरस्त कर दिया गया।
अतः, सुरेंद्र नाथ बनर्जी ने यह प्रसिद्ध कथन दिया था, जिससे विकल्प 4 सही उत्तर है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष कौन थीं
Detailed Explanation:
एनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं, जो 1917 में कलकत्ता अधिवेशन में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण चरण में नेतृत्व किया।
सरोजिनी नायडू प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष थीं (1925), कस्तूरबा गांधी स्वतंत्रता सेनानी थीं लेकिन कभी इस पद पर नहीं रहीं, और अरुणा आसफ अली भारत छोड़ो आंदोलन में झंडा फहराने के लिए प्रसिद्ध थीं लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनीं।
अतः, एनी बेसेंट प्रथम महिला अध्यक्ष थीं, जिससे विकल्प 2 सही उत्तर है।
1929 ई. में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन के अध्यक्ष कौन थे?
Detailed Explanation:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1929 के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी, जो स्वतंत्रता संग्राम के सबसे ऐतिहासिक अधिवेशनों में से एक था।
इस अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) के लक्ष्य को अपनाया और 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यह डोमिनियन स्टेटस की मांग से पूर्ण स्वतंत्रता की ओर निर्णायक बदलाव था।
अतः, जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष थे, इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है।
1922 ईस्वी में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गया अधिवेशन के अध्यक्ष कौन थे?
Detailed Explanation:
चित्तरंजन दास ने दिसंबर 1922 में गया में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 37वें अधिवेशन की अध्यक्षता की। यह अधिवेशन स्वराज पार्टी की बहस की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण था, जिसमें दास और मोतीलाल नेहरू विधान परिषद में प्रवेश के पक्ष में थे, जबकि गांधी इसके विरोधी थे।
हकीम अजमल खान ने 1921 अहमदाबाद अधिवेशन की अध्यक्षता की, गांधी ने कभी भी किसी INC अधिवेशन की अध्यक्षता नहीं की, और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने बाद में 1923 (दिल्ली विशेष अधिवेशन) और 1940 (रामगढ़) में अध्यक्षता की।
अतः, चित्तरंजन दास ने गया अधिवेशन (1922) की अध्यक्षता की, जो विकल्प 1 को सही उत्तर बनाता है।