भारतीय न्यायपालिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
भारत के उच्चतम न्यायालय के किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा भारत के राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में बैठने और कार्य करने के लिए वापस बुलाया जा सकता है।
भारत में एक उच्च न्यायालय को अपने स्वयं के निर्णय की समीक्षा करने की शक्ति प्राप्त है जैसा कि उच्चतम न्यायालय के पास है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
यह प्रश्न भारतीय संविधान के अंतर्गत न्यायिक प्रावधानों की समझ का परीक्षण करता है। कथन 1 अनुच्छेद 128 के अनुसार सही है, जबकि कथन 2 गलत है क्योंकि उच्च न्यायालयों के पास अनुच्छेद 137 के समतुल्य कोई स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान नहीं है जो उच्चतम न्यायालय को समीक्षा शक्ति प्रदान करता है।
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 128 भारत के मुख्य न्यायाधीश को भारत के राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्चतम न्यायालय के किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश (या योग्य सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश) को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में बैठने और कार्य करने का अनुरोध करने का अधिकार देता है।
❌ कथन 2 – गलत: यद्यपि उच्च न्यायालयों के पास अपने स्वयं के निर्णयों की समीक्षा करने की शक्ति है, लेकिन यह शक्ति उच्चतम न्यायालय के समतुल्य नहीं है। उच्चतम न्यायालय की समीक्षा शक्ति अनुच्छेद 137 के अंतर्गत स्पष्ट रूप से प्रदान की गई है, जबकि उच्च न्यायालय अपनी समीक्षा शक्ति अनुच्छेद 215 के अंतर्गत अभिलेख न्यायालय के रूप में अपनी अंतर्निहित शक्तियों से प्राप्त करते हैं, न कि किसी स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान से। दोनों के बीच समीक्षा शक्तियों के स्रोत और दायरे में अंतर है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: न्यायिक शक्तियाँ - समीक्षा और तदर्थ न्यायाधीश
| प्रावधान | अनुच्छेद | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| उच्चतम न्यायालय के तदर्थ न्यायाधीश | अनुच्छेद 128 | • CJI सेवानिवृत्त SC न्यायाधीशों या योग्य सेवानिवृत्त HC न्यायाधीशों को SC न्यायाधीश के रूप में बैठने का अनुरोध कर सकते हैं • राष्ट्रपति की पूर्व सहमति आवश्यक है • ऐसे न्यायाधीशों को कार्यरत SC न्यायाधीश की सभी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं |
| समीक्षा शक्ति - उच्चतम न्यायालय | अनुच्छेद 137 | • समीक्षा के लिए स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान • SC अपने द्वारा दिए गए किसी भी निर्णय या आदेश की समीक्षा कर सकता है • कानून के प्रावधानों और अनुच्छेद 145 के अंतर्गत बनाए गए नियमों के अधीन |
| समीक्षा शक्ति - उच्च न्यायालय | अनुच्छेद 215 | • अनुच्छेद 137 जैसा कोई स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान नहीं • अभिलेख न्यायालय के रूप में अंतर्निहित शक्तियों से प्राप्त • उच्चतम न्यायालय की तुलना में सीमित दायरा • CPC प्रावधानों और अंतर्निहित शक्तियों पर आधारित |
| अभिलेख न्यायालय | अनुच्छेद 129 और 215 | • SC और HC दोनों अभिलेख न्यायालय हैं • अवमानना के लिए दंडित कर सकते हैं • उनके अभिलेखों का साक्ष्य मूल्य है |
Question 2 of 3 संरचना एवं नियुक्ति
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