खेती की "System of Rice Intensification" प्रणाली, जिसमें धान के खेतों की एकांतर गीला करने और सुखाने (alternate wetting and drying) की प्रथा अपनाई जाती है, के परिणामस्वरूप:
1. बीज की आवश्यकता में कमी
2. मीथेन उत्पादन में कमी
3. बिजली की खपत में कमी
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
System of Rice Intensification (SRI) एक जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धति है जो धान के खेतों की एकांतर गीला करने और सुखाने (AWD) के माध्यम से संसाधन उपयोग को अनुकूलित करती है। यह विधि बीज, जल और ऊर्जा की आवश्यकताओं को काफी कम करती है और साथ ही धान के खेतों से मीथेन उत्सर्जन को न्यूनतम करती है।
✅ कथन 1 – सही: SRI में पारंपरिक विधियों के 60-80 किग्रा/हेक्टेयर की तुलना में केवल 5-8 किग्रा/हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है, क्योंकि एकल युवा पौध को अधिक दूरी पर लगाया जाता है।
✅ कथन 2 – सही: एकांतर गीला करने और सुखाने (AWD) से निरंतर जलभराव नहीं होता, जिससे अवायवीय परिस्थितियाँ कम होती हैं जो मेथनोजेनिक बैक्टीरिया द्वारा मीथेन उत्पन्न करती हैं, जिससे उत्सर्जन में 30-40% की कमी आती है।
✅ कथन 3 – सही: SRI नियंत्रित सिंचाई के माध्यम से जल की आवश्यकता को 30-50% तक कम करता है, जिससे भूजल पंप करने के लिए आवश्यक बिजली/ईंधन की खपत सीधे कम हो जाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: System of Rice Intensification (SRI)
- उत्पत्ति: 1980 के दशक में मेडागास्कर में Fr. Henri de Laulanié द्वारा विकसित; सतत धान की खेती के लिए विश्व स्तर पर प्रचारित।
- मुख्य सिद्धांत: शीघ्र, त्वरित और स्वस्थ पौध स्थापना; कम पौध घनत्व; जैविक पदार्थ के साथ बेहतर मृदा स्थितियाँ; कम और नियंत्रित जल अनुप्रयोग।
- रोपण विधि: एकल पौध (8-12 दिन पुरानी) को 25×25 सेमी की चौड़ी दूरी पर प्रत्यारोपित किया जाता है, पारंपरिक 3-4 पौधों के गुच्छों के विपरीत।
- जल प्रबंधन: निरंतर जलभराव के बजाय एकांतर गीला करना और सुखाना (AWD); खेतों को नम रखा जाता है लेकिन जलमग्न नहीं, जिससे 25-50% पानी की बचत होती है।
- पर्यावरणीय लाभ: मीथेन उत्सर्जन में 30-40% कमी; जल प्रदूषण में कमी; ऊर्जा खपत में कमी; मृदा स्वास्थ्य और जैव विविधता में वृद्धि।
- उपज और अर्थशास्त्र: 80-90% कम बीज आवश्यकता के साथ 20-50% अधिक उपज; अनाज की गुणवत्ता और किसान की आय में सुधार के साथ इनपुट लागत कम करता है।
- चुनौतियाँ: प्रारंभ में श्रम-गहन; ज्ञान और प्रशिक्षण की आवश्यकता; सभी मृदा प्रकारों के लिए उपयुक्त नहीं; अच्छे जल नियंत्रण अवसंरचना की आवश्यकता।
Question 3 of 13 सतत कृषि
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