UPSC CSE Prelims
कीस्टोन एवं फ्लैगशिप प्रजातियाँ Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for कीस्टोन एवं फ्लैगशिप प्रजातियाँ with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
Filter & practice questions topic-wise
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- शेरों का कोई विशेष प्रजनन मौसम नहीं होता है।
- अधिकांश अन्य बड़ी बिल्लियों के विपरीत, चीता दहाड़ता नहीं है।
- नर शेरों के विपरीत, नर तेंदुए गंध अंकन द्वारा अपने क्षेत्र की घोषणा नहीं करते हैं।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
यह प्रश्न बड़ी बिल्लियों, विशेष रूप से शेरों, चीतों और तेंदुओं की व्यवहारिक विशेषताओं के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। इन प्रजातियों के क्षेत्रीय अंकन, प्रजनन पैटर्न और मुखर क्षमताओं को समझना वन्यजीव पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है।
✅ कथन 1 – सही: शेरों का कोई सख्ती से परिभाषित प्रजनन मौसम नहीं होता है और वे वर्ष भर प्रजनन कर सकते हैं, हालांकि शिकार की उपलब्धता और वर्षा जैसी पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर कुछ मौसमी चरम हो सकते हैं।
✅ कथन 2 – सही: चीतों में विशेष स्वरयंत्र संरचना (हाइड अस्थि तंत्र) का अभाव होता है जो अन्य बड़ी बिल्लियों को दहाड़ने की अनुमति देता है; इसके बजाय, वे चहचहाहट, गड़गड़ाहट और पक्षियों के समान उच्च-स्वर वाली आवाज़ें निकालते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: नर तेंदुए, नर शेरों की तरह, सक्रिय रूप से गंध अंकन (मूत्र का छिड़काव, खुरचना और मल निक्षेप) का उपयोग अपने क्षेत्रों की घोषणा और रक्षा के लिए करते हैं; यह कथन गलत रूप से सुझाव देता है कि तेंदुए क्षेत्रीय गंध अंकन में संलग्न नहीं होते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बड़ी बिल्लियाँ - व्यवहारिक विशेषताएँ
| बड़ी बिल्ली प्रजाति | प्रजनन मौसम | दहाड़ने की क्षमता | क्षेत्रीय अंकन |
|---|---|---|---|
| शेर | वर्ष भर (कोई निश्चित मौसम नहीं) | हाँ (दहाड़ सकते हैं) | हाँ (गंध अंकन, दहाड़ना) |
| तेंदुआ | वर्ष भर (क्षेत्रीय चरम के साथ) | हाँ (दहाड़ सकते हैं) | हाँ (व्यापक गंध अंकन) |
| बाघ | सर्दियों में चरम (भारत में नवं-अप्रैल) | हाँ (दहाड़ सकते हैं) | हाँ (गंध अंकन, खरोंचना) |
| चीता | वर्ष भर (मामूली मौसमी भिन्नता) | नहीं (गड़गड़ाहट, चहचहाहट) | हाँ (लेकिन कम आक्रामक) |
| जगुआर | वर्ष भर | हाँ (दहाड़ सकते हैं) | हाँ (गंध अंकन) |
- दहाड़ने की प्रणाली: शेर, बाघ, तेंदुए और जगुआर पैंथेरा वंश से संबंधित हैं जिनमें लचीली हाइड अस्थि होती है जो दहाड़ने में सक्षम बनाती है।
- चीता विशिष्टता: एसिनोनिक्स वंश से संबंधित; निश्चित हाइड अस्थि होती है, दहाड़ने से रोकती है लेकिन निरंतर गड़गड़ाहट की अनुमति देती है।
- क्षेत्रीय व्यवहार: सभी बड़ी बिल्लियाँ क्षेत्रों को स्थापित करने के लिए गंध अंकन (मूत्र, मल, ग्रंथि स्राव) और दृश्य संकेतों (खरोंच के निशान) का उपयोग करती हैं।
- प्रजनन पैटर्न: अधिकांश बड़ी बिल्लियाँ वर्ष भर प्रजनन कर सकती हैं, लेकिन पर्यावरणीय कारक (शिकार घनत्व, जलवायु) चरम प्रजनन समय को प्रभावित करते हैं।
निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
तितलियाँ
मछलियाँ
मेंढक
उपर्युक्त में से कितनों में विषैली प्रजातियाँ पायी जाती हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सभी तीन
प्रश्न में उल्लिखित सभी तीन समूहों—तितलियाँ, मछलियाँ और मेंढक—में विषैली प्रजातियाँ पायी जाती हैं। मोनार्क जैसी तितलियाँ अपने लार्वा अवस्था में मिल्कवीड के आहार से विषाक्त पदार्थ संचित करती हैं, जो उन्हें शिकारियों के लिए विषैला बनाता है। कई मछली प्रजातियाँ जैसे कि पफरफिश, लायनफिश और स्टोनफिश घातक विष या टॉक्सिन रखती हैं। पॉइजन डार्ट फ्रॉग उभयचरों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं जो रक्षा तंत्र के रूप में अपनी त्वचा के माध्यम से शक्तिशाली विषाक्त पदार्थ स्रावित करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विभिन्न पशु समूहों में विषैली प्रजातियाँ
- विषैली तितलियाँ: मोनार्क तितलियाँ अपनी कैटरपिलर अवस्था के दौरान मिल्कवीड पौधों से कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स संचित करती हैं, जो उन्हें पक्षियों और अन्य शिकारियों के लिए विषाक्त बनाता है। अन्य उदाहरणों में पाइपवाइन स्वैलोटेल शामिल है।
- विषैली मछलियाँ: पफरफिश में टेट्रोडोटॉक्सिन होता है, जो मनुष्यों के लिए घातक न्यूरोटॉक्सिन है। लायनफिश और स्टोनफिश में विषैले कांटे होते हैं। स्टिंगरे की पूंछ पर विषैले कांटे होते हैं।
- विषैले मेंढक: मध्य और दक्षिण अमेरिका के पॉइजन डार्ट फ्रॉग (परिवार डेंड्रोबैटिडे) अपनी त्वचा के माध्यम से एल्कलॉइड विष स्रावित करते हैं। गोल्डन पॉइजन फ्रॉग पृथ्वी पर सबसे विषैले कशेरुकियों में से एक है।
- विषाक्तता का तंत्र: कुछ प्रजातियाँ अंतर्जात रूप से (अपने शरीर के भीतर) विष उत्पन्न करती हैं, जबकि अन्य इन्हें अपने आहार से संचित करती हैं (जैसे मोनार्क तितलियाँ और पॉइजन डार्ट फ्रॉग)।
- विष का उद्देश्य: ये विषाक्त पदार्थ मुख्य रूप से शिकारियों के खिलाफ रक्षा तंत्र के रूप में कार्य करते हैं, जिनका कई मामलों में चेतावनी रंग (एपोसेमेटिज्म) के माध्यम से प्रचार किया जाता है।
जीव "सिकाडा, फ्रॉगहॉपर और पॉन्ड स्केटर" क्या हैं:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कीट
तीनों जीव—सिकाडा, फ्रॉगहॉपर और पॉन्ड स्केटर—कीट वर्ग (Insecta) के अंतर्गत विभिन्न परिवारों से संबंधित कीटों के रूप में वर्गीकृत हैं। सिकाडा अपनी तेज़ संभोग ध्वनियों के लिए जाने जाते हैं, फ्रॉगहॉपर (स्पिटलबग) अपने द्वारा शिशु अवस्था में उत्पन्न झाग के लिए प्रसिद्ध हैं, और पॉन्ड स्केटर सतह तनाव का उपयोग करके पानी पर चलते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सामान्य कीटों का वर्गीकरण
- सिकाडा: क्रम हेमिप्टेरा; संभोग के मौसम में नर द्वारा उत्पन्न विशिष्ट तेज़ भिनभिनाहट ध्वनियों के लिए जाने जाते हैं; लंबा जीवन चक्र होता है और कुछ प्रजातियाँ हर 13-17 वर्षों में उभरती हैं।
- फ्रॉगहॉपर (स्पिटलबग): क्रम हेमिप्टेरा; छोटे उछलने वाले कीट; शिशु पौधों पर सुरक्षा के लिए झाग (कोयल की थूक) उत्पन्न करते हैं; वयस्क शक्तिशाली उछलने वाले होते हैं।
- पॉन्ड स्केटर (वाटर स्ट्राइडर): क्रम हेमिप्टेरा, परिवार गेरिडी; पानी पर चलने के लिए सतह तनाव और जलविरोधी पैरों का उपयोग करते हैं; छोटे जलीय जीवों के शिकारी।
- सामान्य विशेषता: तीनों क्रम हेमिप्टेरा (सच्चे बग) से संबंधित हैं, जो भेदने-चूसने वाले मुखांगों और अपूर्ण कायांतरण द्वारा विशेषता रखते हैं।
- पारिस्थितिक भूमिका: ये कीट अपने संबंधित पारिस्थितिक तंत्रों में शाकाहारी, शिकारी और शिकार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🧐 Not Sure What to Study Next?
Get a personalised study plan based on your goals, time and revision needs.
भारतीय गिलहरियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- वे जमीन में बिल बनाकर घोंसले बनाती हैं।
- वे अपनी खाद्य सामग्री जैसे मेवे और बीज जमीन में संग्रहित करती हैं।
- वे सर्वाहारी हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
यह प्रश्न भारतीय गिलहरियों की व्यवहारिक पारिस्थितिकी के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। तीन कथनों में से दो सही हैं (कथन 2 और 3), जबकि कथन 1 गलत है क्योंकि भारतीय गिलहरियाँ मुख्य रूप से वृक्षवासी हैं और जमीन में बिल बनाने के बजाय पेड़ों पर घोंसले बनाती हैं।
❌ कथन 1 – गलत: भारतीय पाम गिलहरी (फनैम्बुलस) और मालाबार विशाल गिलहरी (रतुफा इंडिका) जैसी भारतीय गिलहरियाँ वृक्षवासी प्रजातियाँ हैं जो टहनियों और पत्तियों का उपयोग करके पेड़ की शाखाओं, कोटरों या दरारों में घोंसले (ड्रे) बनाती हैं, न कि जमीन में बिल।
✅ कथन 2 – सही: भारतीय गिलहरियाँ बिखरे हुए संग्रहण (स्कैटर होर्डिंग) व्यवहार प्रदर्शित करती हैं, मेवे और बीजों को बाद में उपयोग के लिए जमीन के उथले स्थानों में दबा देती हैं, जो बीज प्रसार और वन पुनर्जनन में भी सहायता करता है।
✅ कथन 3 – सही: गिलहरियाँ अवसरवादी सर्वाहारी हैं; जबकि उनके मुख्य आहार में बीज, मेवे, फल और कवक शामिल हैं, वे कीड़े, कैटरपिलर, पक्षियों के अंडे और कभी-कभी छोटे कशेरुकियों का भी सेवन करती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारतीय गिलहरियाँ - पारिस्थितिकी और व्यवहार
- सामान्य प्रजातियाँ: भारतीय पाम गिलहरी (फनैम्बुलस पाल्मारम), थ्री-स्ट्राइप्ड पाम गिलहरी (एफ. ट्रिस्टिस), मालाबार विशाल गिलहरी (रतुफा इंडिका), और भारतीय विशाल गिलहरी (रतुफा मैक्रोरा)
- आवास: मुख्य रूप से वृक्षवासी (पेड़ों पर रहने वाली); वनों, शहरी उद्यानों, बगीचों और कृषि परिदृश्यों में पाई जाती हैं
- घोंसला निर्माण: पेड़ की शाखाओं में ड्रे (पत्ती और टहनियों के घोंसले) बनाती हैं या पेड़ की कोटरों का उपयोग करती हैं; अन्य क्षेत्रों में पाई जाने वाली जमीनी गिलहरियों के विपरीत जमीन में बिल नहीं बनातीं
- भोजन संग्रहण: बिखरे हुए संग्रहण का अभ्यास करती हैं - एक केंद्रीय भंडार के बजाय कई बिखरे स्थानों में खाद्य पदार्थों को दबाती हैं; पुनर्प्राप्ति के लिए उत्कृष्ट स्थानिक स्मृति
- आहार: सर्वाहारी - मुख्य रूप से शाकाहारी (मेवे, बीज, फल, फूल, छाल) लेकिन कीड़े, पक्षियों के अंडे और कभी-कभी छोटे जानवरों का भी सेवन करती हैं
- पारिस्थितिक भूमिका: कई वृक्ष प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण बीज प्रसारक; भूली हुई संग्रहित वस्तुएँ नए पौधों में अंकुरित होती हैं, जो वन पुनर्जनन में सहायता करती हैं
- संरक्षण स्थिति: अधिकांश प्रजातियाँ न्यूनतम चिंता की श्रेणी में हैं, लेकिन मालाबार विशाल गिलहरी जैसी आवास विशेषज्ञों को आवास विखंडन से खतरा है
निम्नलिखित जीवों पर विचार कीजिए:
- शेर पुच्छ मकाक (लायन-टेल्ड मकाक)
- मालाबार सिवेट
- सांभर हिरण
उपर्युक्त में से कितने सामान्यतः निशाचर हैं या सूर्यास्त के बाद सर्वाधिक सक्रिय होते हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल एक
सूचीबद्ध तीन जीवों में से केवल मालाबार सिवेट एक निशाचर प्राणी है, जो मुख्य रूप से रात के दौरान सक्रिय रहता है। शेर पुच्छ मकाक एक दिवाचर प्रजाति है, जो दिन में सक्रिय रहती है, जबकि सांभर हिरण संधिकालीन है, जो भोर और शाम के समय सर्वाधिक सक्रिय होता है न कि सूर्यास्त के बाद।
प्रत्येक प्रजाति का विश्लेषण:
🦁 शेर पुच्छ मकाक: पश्चिमी घाट में पाया जाने वाला दिवाचर प्राइमेट, दिन के उजाले में सक्रिय।
🐆 मालाबार सिवेट: पश्चिमी घाट में स्थानिक निशाचर मांसाहारी, सूर्यास्त के बाद सर्वाधिक सक्रिय। ✅
🦌 सांभर हिरण: संधिकालीन शाकाहारी, भोर और शाम को सर्वाधिक सक्रिय, सख्ती से निशाचर नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जंतुओं में सक्रियता प्रतिरूप
| सक्रियता प्रतिरूप | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| दिवाचर (Diurnal) | दिन के उजाले में सक्रिय | शेर पुच्छ मकाक, अधिकांश प्राइमेट, गरुड़ |
| निशाचर (Nocturnal) | रात्रि के घंटों में सक्रिय | मालाबार सिवेट, उल्लू, चमगादड़, स्लो लोरिस |
| संधिकालीन (Crepuscular) | भोर और गोधूलि में सक्रिय | सांभर हिरण, बाघ, खरगोश |
| कैथेमेरल (Cathemeral) | दिन और रात दोनों में छिटपुट रूप से सक्रिय | सिंह, कुछ लीमर |
निम्नलिखित में से कौन एक छड़ी से उपकरण बनाकर पेड़ या लकड़ी के लट्ठे में छेद से कीड़ों को खुरचता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — ओरंगुटान
ओरंगुटान अत्यधिक बुद्धिमान महान वानर हैं जो अपनी उल्लेखनीय उपकरण-उपयोग क्षमताओं के लिए जाने जाते हैं। उन्हें पेड़ों और लट्ठों में छेद से कीड़ों को खुरचने और निकालने, शहद की जांच करने, और यहां तक कि पत्तियों को दस्ताने या रूमाल के रूप में तैयार करने के लिए छड़ियों का उपयोग करते हुए व्यापक रूप से देखा गया है। यह व्यवहार उनकी उन्नत संज्ञानात्मक क्षमताओं और समस्या-समाधान कौशल को प्रदर्शित करता है, जो उन्हें सबसे अधिक उपकरण-प्रवीण गैर-मानव प्राइमेट्स में से एक बनाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जानवरों में उपकरण उपयोग
- ओरंगुटान: कीड़े, शहद और बीज निकालने के लिए छड़ियों का उपयोग करते हैं; छतरी, दस्ताने और रूमाल के रूप में पत्तियों का उपयोग करते हैं; बोर्नियो और सुमात्रा में पाए जाते हैं।
- चिंपैंजी: दीमक के लिए मछली पकड़ने, मेवे तोड़ने के लिए पत्थर, और पानी पीने के लिए स्पंज के रूप में पत्तियों का उपयोग करते हैं।
- कौवे: कीड़े निकालने के लिए टहनियों से हुक वाले उपकरण बनाते हैं; उन्नत समस्या-समाधान क्षमताओं का प्रदर्शन करते हैं।
- समुद्री ऊदबिलाव: अपनी पीठ के बल तैरते हुए शेलफिश को तोड़ने के लिए चट्टानों को निहाई के रूप में उपयोग करते हैं।
- हाथी: मक्खियों को हटाने, खुद को खुजलाने और भोजन तक पहुंचने के लिए शाखाओं और छड़ियों का उपयोग करते हैं।
- डॉल्फिन: समुद्र तल पर चारा खोजते समय अपनी थूथनी की रक्षा के लिए समुद्री स्पंज का उपयोग करते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: मार्सुपियल प्राकृतिक रूप से भारत में नहीं पाए जाते हैं।
कथन II: मार्सुपियल केवल पर्वतीय घास के मैदानों में ही पनप सकते हैं जहां कोई शिकारी नहीं होते।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कथन-I सही है लेकिन कथन-II गलत है
यह प्रश्न मार्सुपियल के जैवभौगोलिक वितरण और उनके पारिस्थितिक अनुकूलन के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। कथन I सही रूप से पहचानता है कि मार्सुपियल प्राकृतिक रूप से भारत में नहीं पाए जाते हैं, जबकि कथन II गलत तरीके से उनके आवास आवश्यकताओं को सीमित करता है।
✅ कथन I – सही: मार्सुपियल वास्तव में प्राकृतिक रूप से भारत में नहीं पाए जाते हैं। वे मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया (कंगारू, कोआला, वोम्बैट), अमेरिका (ओपोसम), और पापुआ न्यू गिनी के मूल निवासी हैं। भारत मार्सुपियल की प्राकृतिक वितरण सीमा से बाहर आता है।
❌ कथन II – गलत: यह कथन कई मायनों में तथ्यात्मक रूप से गलत है। मार्सुपियल को विशेष रूप से पर्वतीय घास के मैदानों की आवश्यकता नहीं है और वे वनों, रेगिस्तानों, सवाना, आर्द्रभूमि और यहां तक कि शहरी क्षेत्रों सहित विविध आवासों में पनप सकते हैं। वे अपने प्राकृतिक आवासों में विभिन्न शिकारियों के साथ भी सह-अस्तित्व में रहते हैं (उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया में डिंगो)। यह दावा कि वे "केवल" बिना शिकारियों वाले पर्वतीय घास के मैदानों में ही पनप सकते हैं, पूरी तरह से गलत है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मार्सुपियल - वितरण और पारिस्थितिकी
- परिभाषा: मार्सुपियल स्तनधारी हैं जो अपेक्षाकृत अविकसित बच्चों को जन्म देने की विशेषता रखते हैं जो एक थैली (मार्सुपियम) में विकास जारी रखते हैं।
- प्राथमिक वितरण: ऑस्ट्रेलिया (सभी मार्सुपियल प्रजातियों का ~70%), अमेरिका (ओपोसम), पापुआ न्यू गिनी, और आसपास के द्वीप।
- आवास विविधता: मार्सुपियल विभिन्न आवासों में पाए जाते हैं - वर्षावन (वृक्ष कंगारू), रेगिस्तान (बिल्बीज़), घास के मैदान (कंगारू), वन (कोआला), और आर्द्रभूमि (जल ओपोसम)।
- उदाहरण: कंगारू, वालाबी, कोआला, वोम्बैट, तस्मानियाई डेविल, पॉसम, और ओपोसम।
- विकासवादी महत्व: मार्सुपियल एक प्राचीन स्तनधारी वंश का प्रतिनिधित्व करते हैं जो महाद्वीपीय विस्थापन द्वारा आबादी को अलग करने से पहले गोंडवानालैंड में पनपे।
- भारतीय संदर्भ: जैवभौगोलिक पृथक्करण और भारतीय उपमहाद्वीप में विभिन्न विकासवादी मार्गों के कारण भारत में कोई मूल मार्सुपियल मौजूद नहीं हैं।
निम्नलिखित में से कौन सा जीव अपने साथियों को भोजन के स्रोत की दिशा और दूरी का संकेत देने के लिए वैगल नृत्य (waggle dance) करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — मधुमक्खियाँ
वैगल नृत्य (waggle dance) श्रमिक मधुमक्खियों द्वारा किया जाने वाला संचार का एक अनूठा रूप है जो कॉलोनी के अन्य सदस्यों को भोजन स्रोतों की दिशा और दूरी के बारे में सूचित करने के लिए किया जाता है। इस उल्लेखनीय व्यवहार को ऑस्ट्रियाई वैज्ञानिक कार्ल वॉन फ्रिश ने समझा, जिन्हें इस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। ऊर्ध्वाधर के सापेक्ष नृत्य की दिशा सूर्य के संबंध में भोजन स्रोत के कोण को दर्शाती है, जबकि वैगल भाग की अवधि दूरी को इंगित करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मधुमक्खी वैगल नृत्य
- खोजकर्ता: कार्ल वॉन फ्रिश (ऑस्ट्रियाई प्राणी व्यवहार विज्ञानी, नोबेल पुरस्कार 1973)
- उद्देश्य: भोजन स्रोत स्थान (मकरंद, पराग, पानी) के बारे में श्रमिक मधुमक्खियों के बीच संचार
- दिशा संकेत: ऊर्ध्वाधर के सापेक्ष वैगल दौड़ का कोण = सूर्य की स्थिति के सापेक्ष भोजन स्रोत का कोण
- दूरी संकेत: वैगल की अवधि और संख्या स्रोत की दूरी को दर्शाती है (लंबा नृत्य = अधिक दूरी)
- गोल नृत्य: छत्ते के बहुत करीब (50-100 मीटर के भीतर) भोजन स्रोतों के लिए किया जाता है
- महत्व: कीड़ों में जटिल सामाजिक संचार और गैर-मानव प्रजातियों में प्रतीकात्मक भाषा को प्रदर्शित करता है
निम्नलिखित में से किस एक जीव की कुछ प्रजातियाँ कवक (फफूंद) की खेती करने वालों के रूप में जानी जाती हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — चींटी
कुछ चींटी प्रजातियाँ, विशेष रूप से पत्ती काटने वाली चींटियाँ और Attini जनजाति की अन्य चींटियाँ, कवक की खेती के लिए जानी जाती हैं। ये चींटियाँ पौधों की सामग्री को काटकर उसे सब्सट्रेट के रूप में उपयोग करके भूमिगत बगीचों में विशिष्ट कवक प्रजातियों को उगाती हैं, जो फिर उनके प्राथमिक भोजन स्रोत के रूप में काम करती हैं। यह उल्लेखनीय सहजीवी संबंध प्रकृति में गैर-मानव कृषि के सबसे उन्नत उदाहरणों में से एक है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
• तिलचट्टे सर्वाहारी मैला ढोने वाले होते हैं जो कवक की खेती नहीं करते
• केकड़े जलीय मैला ढोने वाले या शिकारी होते हैं जिनमें कवक की खेती का व्यवहार नहीं होता
• मकड़ियाँ शिकारी होती हैं जो शिकार को पकड़ती हैं और कवक की खेती में संलग्न नहीं होती
📝 संक्षिप्त नोट्स: कवक उगाने वाली चींटियाँ
- प्रमुख प्रजातियाँ: पत्ती काटने वाली चींटियाँ (Atta और Acromyrmex जीनस) और कवक उगाने वाली चींटियाँ (Tribe Attini) अपने प्राथमिक भोजन स्रोत के रूप में कवक की खेती करती हैं
- कृषि प्रक्रिया: श्रमिक चींटियाँ ताजी पौधों की सामग्री को काटती हैं, उसे गूदे में चबाती हैं, और इसे विशेष भूमिगत कक्षों में कवक की खेती के लिए सब्सट्रेट के रूप में उपयोग करती हैं
- कवक की प्रजातियाँ: वे Lepiotaceae परिवार से विशिष्ट कवक की खेती करती हैं, जो चींटी कॉलोनियों के बाहर जीवित नहीं रह सकते
- पारस्परिक सहजीविता: चींटियाँ कवक को पोषक तत्व और सुरक्षा प्रदान करती हैं, जबकि कवक चींटियों के लिए भोजन के रूप में विशेष संरचनाएँ (gongylidia) प्रदान करता है
- एंटीबायोटिक उत्पादन: कुछ कवक उगाने वाली चींटियाँ अपने शरीर पर बैक्टीरिया (Actinomycetes) रखती हैं जो परजीवी कवक से उनके कवक उद्यानों की रक्षा के लिए एंटीबायोटिक्स का उत्पादन करते हैं
- विकासवादी महत्व: यह चींटी-कवक पारस्परिकता लगभग 50-60 मिलियन वर्ष पहले विकसित हुई और मानव कृषि के साथ अभिसारी विकास का प्रतिनिधित्व करती है
निम्नलिखित जानवरों पर विचार कीजिए:
1. हेजहॉग (साही)
2. मार्मोट
3. पैंगोलिन (चींटीखोर)
शिकारियों द्वारा पकड़े जाने की संभावना को कम करने के लिए, उपर्युक्त में से कौन सा/से जीव लुढ़ककर/लुढ़ककर अपने असुरक्षित भागों की रक्षा करता है/करते हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — केवल 1 और 3
दिए गए जानवरों में से, हेजहॉग और पैंगोलिन अपने असुरक्षित भागों को शिकारियों से बचाने के लिए एक रक्षात्मक तंत्र के रूप में गेंद की तरह लुढ़क जाते हैं। हेजहॉग अपनी तीखी कांटेदार त्वचा का उपयोग करते हैं, जबकि पैंगोलिन सुरक्षा के लिए अपने कठोर केराटिन शल्कों का उपयोग करते हैं। दूसरी ओर, मार्मोट लुढ़कते नहीं हैं; वे शिकारियों से बचने के लिए बिलों और चेतावनी की आवाजों पर निर्भर करते हैं।
✅ हेजहॉग – सही: खतरे की स्थिति में कांटों से ढके हुए गेंद की तरह लुढ़ककर अपने कोमल पेट के असुरक्षित भागों को सुरक्षित करता है।
❌ मार्मोट – गलत: लुढ़कता नहीं है; शिकारियों से बचाव के लिए बिलों और चेतावनी की आवाजों को प्राथमिक रक्षा के रूप में उपयोग करता है।
✅ पैंगोलिन – सही: सुरक्षात्मक गेंद में लुढ़क जाता है, असुरक्षित निचले हिस्से को बचाने के लिए केराटिन शल्कों का कवच के रूप में उपयोग करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जानवरों में रक्षात्मक तंत्र
- हेजहॉग: यूरोप, एशिया और अफ्रीका में पाए जाने वाले छोटे कांटेदार स्तनधारी; केराटिन से बने लगभग 5,000-7,000 कांटों से ढके होते हैं; खतरे में गेंद की तरह लुढ़क जाते हैं, जिससे शिकारियों के लिए हमला करना मुश्किल हो जाता है।
- पैंगोलिन: शल्कों से ढका एकमात्र स्तनधारी; एशिया और अफ्रीका में पाया जाता है; केराटिन (मानव नाखूनों के समान सामग्री) से बने शल्क; अवैध वन्यजीव व्यापार के कारण गंभीर रूप से संकटग्रस्त; सभी आठ प्रजातियाँ CITES के तहत संरक्षित हैं।
- मार्मोट: पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली बड़ी जमीनी गिलहरियाँ; बिलों में रहने वाले सामाजिक जानवर; प्रहरी व्यवहार का उपयोग करते हैं जहाँ एक व्यक्ति शिकारियों के लिए देखता है जबकि अन्य चारा खोजते हैं; अलार्म कॉल के रूप में तेज सीटी बजाते हैं।
- अन्य लुढ़कने वाले जानवर: आर्मडिलो (तीन-पट्टीदार आर्मडिलो पूरी तरह से लुढ़क सकता है), पिल मिलीपीड, पिल बग (वुडलाइस), और कुछ प्रजातियों के बख्तरबंद कैटरपिलर भी रक्षा के रूप में लुढ़कने का उपयोग करते हैं।
- रक्षा तंत्रों के प्रकार: भौतिक बाधाएं (कांटे, शल्क, खोल), छलावरण, चेतावनी रंग, रासायनिक रक्षा (विषाक्त पदार्थ), व्यवहारिक (भागना, जमना, लुढ़कना), और समूह रक्षा।
निम्नलिखित में से कौन एक निस्यंदन भोजी (फिल्टर फीडर) है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सीप (ऑयस्टर)
सीप निस्यंदन भोजी होती हैं जो जल से निलंबित पदार्थ और खाद्य कणों को विशिष्ट निस्यंदन संरचनाओं जिन्हें गिल्स कहा जाता है, के माध्यम से छानती हैं। दिए गए विकल्पों में से केवल सीप में यह भोजन तंत्र होता है, जबकि कैटफिश तल भोजी होती हैं, ऑक्टोपस शिकारी होते हैं, और पेलिकन दृश्य शिकारी होते हैं जो मछलियाँ पकड़ते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: निस्यंदन भोजी
- परिभाषा: निस्यंदन भोजी वे जीव होते हैं जो विशिष्ट निस्यंदन संरचनाओं के माध्यम से जल से निलंबित पदार्थ और खाद्य कणों को छानकर भोजन करते हैं।
- सामान्य उदाहरण: क्लैम, सीप, मसल्स, स्पंज, क्रिल, बेलीन व्हेल और कुछ शार्क सहित कुछ मछलियाँ।
- पक्षी निस्यंदन भोजी: फ्लेमिंगो और बत्तख की कुछ प्रजातियाँ निस्यंदन भोजन तंत्र का उपयोग करती हैं।
- पारिस्थितिक भूमिका: निस्यंदन भोजी जल को स्पष्ट करके और निलंबित कणों को हटाकर पारिस्थितिकी तंत्र अभियंता के रूप में कार्य करते हैं, जल की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।
- जैव संचयन: वे जल से प्रदूषकों और विषाक्त पदार्थों के जैव संचयन में अपनी भूमिका के कारण संकेतक जीवों के रूप में कार्य करते हैं।
- मोती उत्पादन: सीप और मसल्स मोती की खेती के लिए व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, जो गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, ओडिशा और भारत के अन्य राज्यों में की जाती है।
प्रकृति में, निम्नलिखित में से कौन सा/से बिना मिट्टी की सतह पर जीवित रहते हुए पाए जाने की सबसे अधिक संभावना है?
- फर्न (Fern)
- लाइकेन (Lichen)
- मॉस (Moss)
- मशरूम (Mushroom)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 2 और 3
लाइकेन और मॉस बिना मिट्टी के नंगी सतहों पर जीवित रहने के लिए विशिष्ट रूप से अनुकूलित हैं। लाइकेन, कवक और शैवाल/सायनोबैक्टीरिया के सहजीवी संघ होने के कारण, हवा और बारिश से सीधे पोषक तत्व अवशोषित करके चट्टानों और पेड़ की छाल पर उपनिवेश स्थापित कर सकते हैं। मॉस, हालांकि अनाहारी पादप हैं, विशेष संरचनाएं रखते हैं जो उन्हें मिट्टी की आवश्यकता के बिना अपने तत्काल वातावरण से पानी और पोषक तत्व अवशोषित करने में सक्षम बनाती हैं।
जीवों का विश्लेषण:
1. फर्न – मिट्टी के बिना जीवित नहीं रह सकता: फर्न संवहनी पादप हैं जिन्हें अपनी जड़ों को स्थिर करने और अपनी सुविकसित जड़ प्रणाली के माध्यम से पानी अवशोषित करने के लिए मिट्टी की आवश्यकता होती है।
2. लाइकेन – ✅ मिट्टी के बिना जीवित रह सकता है: लाइकेन सहजीवी जीव हैं (कवक + शैवाल/सायनोबैक्टीरिया) जो हवा और वर्षा से सीधे पोषक तत्व प्राप्त करते हैं, चट्टानों, छाल और अन्य नंगी सतहों पर पनपते हैं।
3. मॉस – ✅ मिट्टी के बिना जीवित रह सकता है: मॉस ब्रायोफाइट्स (अनाहारी पादप) हैं जिनमें राइजॉइड होते हैं जो नंगी सतहों से जुड़ सकते हैं और वातावरण से सीधे पानी और खनिज अवशोषित कर सकते हैं।
4. मशरूम – मिट्टी के बिना जीवित नहीं रह सकता: मशरूम कवक के फलन निकाय हैं जिन्हें माइसेलियम को बढ़ने और फलन संरचनाओं का उत्पादन करने के लिए कार्बनिक सब्सट्रेट (सड़ता हुआ पदार्थ, पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी) की आवश्यकता होती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मिट्टी के बिना जीवित रहने वाले जीव
| जीव | प्रकार | नंगी सतह पर जीवन | मुख्य विशेषताएं |
|---|---|---|---|
| फर्न | संवहनी पादप (टेरिडोफाइट) | नहीं | जड़ स्थिरता के लिए मिट्टी की आवश्यकता; सच्ची जड़ें, तने और पत्तियां होती हैं |
| लाइकेन | सहजीवी संघ | हां | कवक + शैवाल/सायनोबैक्टीरिया; हवा से पोषक तत्व अवशोषित; वायु गुणवत्ता का संकेतक |
| मॉस | अनाहारी पादप (ब्रायोफाइट) | हां | राइजॉइड होते हैं (सच्ची जड़ें नहीं); सीधे पानी अवशोषित; चट्टानों, छाल पर उग सकता है |
| मशरूम | कवक का फलन निकाय | नहीं | माइसेलियम के लिए कार्बनिक सब्सट्रेट की आवश्यकता; कार्बनिक पदार्थ को विघटित करता है |
- लाइकेन पारिस्थितिक उत्तराधिकार में अग्रणी प्रजातियां हैं, नंगी चट्टानों का उपनिवेश करती हैं और समय के साथ उन्हें मिट्टी में अपक्षयित करती हैं।
- जैव-संकेतक के रूप में लाइकेन: SO₂, NOₓ और भारी धातुओं जैसे वायु प्रदूषकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील; अनुपस्थिति खराब वायु गुणवत्ता को इंगित करती है।
- मॉस बीजाणुओं के माध्यम से प्रजनन करते हैं और निषेचन के लिए नमी की आवश्यकता होती है लेकिन शुष्क परिस्थितियों में निर्जलीकरण से बच सकते हैं।
- ब्रायोफाइट्स (मॉस, लिवरवॉर्ट्स, हॉर्नवॉर्ट्स) में संवहनी ऊतकों (जाइलम और फ्लोएम) का अभाव होता है लेकिन विभिन्न सब्सट्रेट पर नम, छायादार वातावरण में पनप सकते हैं।
- फर्न मॉस की तुलना में अधिक उन्नत हैं, जिनमें संवहनी ऊतक होते हैं, लेकिन फिर भी इष्टतम वृद्धि के लिए नम स्थितियों और मिट्टी की आवश्यकता होती है।
भारतीय हाथियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- हाथियों के समूह का नेता एक मादा होती है।
- अधिकतम गर्भधारण अवधि 22 महीने हो सकती है।
- एक हाथी सामान्यतः केवल 40 वर्ष की आयु तक ही बच्चे जन सकती है।
- भारत के राज्यों में, सर्वाधिक हाथी जनसंख्या केरल में है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
भारतीय हाथी मातृसत्तात्मक समाजों में रहते हैं जहां सबसे बुजुर्ग और अनुभवी मादा झुंड का नेतृत्व करती है, जबकि नर आमतौर पर एकाकी जीवन जीते हैं या कुंवारों के समूह बनाते हैं। हाथियों की गर्भधारण अवधि स्थलीय स्तनधारियों में सबसे लंबी है, जो 18 से 22 महीने तक होती है।
✅ कथन 1 – सही: हाथियों के झुंड मातृसत्तात्मक होते हैं, जिनका नेतृत्व सबसे बुजुर्ग और अनुभवी मादा (मातृसत्ताधारी) करती है, जबकि वयस्क नर आमतौर पर अकेले या कुंवारों के समूह में रहते हैं।
✅ कथन 2 – सही: हाथियों की गर्भधारण अवधि स्तनधारियों में सबसे लंबी है, जो 18 से 22 महीने तक होती है, औसतन लगभग 22 महीने।
❌ कथन 3 – गलत: मादा हाथी 40 वर्ष की आयु से अधिक भी प्रजनन कर सकती हैं, अक्सर 50 के दशक में और कभी-कभी 60 के प्रारंभ तक बच्चे जन सकती हैं, हालांकि उम्र के साथ प्रजनन क्षमता कम हो सकती है।
❌ कथन 4 – गलत: कर्नाटक में भारत में सर्वाधिक हाथी जनसंख्या है (लगभग 6,000), इसके बाद असम और केरल का स्थान है। केरल तीसरे स्थान पर है, पहले नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारतीय हाथी
- वैज्ञानिक नाम: एलिफस मैक्सिमस इंडिकस (एशियाई हाथी की उप-प्रजाति)
- संरक्षण स्थिति: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I; CITES के परिशिष्ट I; IUCN रेड लिस्ट - संकटग्रस्त
- सामाजिक संरचना: सबसे बुजुर्ग मादा के नेतृत्व में 6-12 व्यक्तियों के मातृसत्तात्मक झुंड; वयस्क नर एकाकी या अस्थायी कुंवारों के समूह बनाते हैं
- प्रजनन: गर्भधारण अवधि 18-22 महीने (स्तनधारियों में सबसे लंबी); मादाएं 10-12 वर्ष की आयु में यौन परिपक्वता प्राप्त करती हैं; 50-60 वर्ष की आयु तक प्रजनन कर सकती हैं; आमतौर पर हर 4-5 साल में एक बच्चे को जन्म देती हैं
- भारत में वितरण: कर्नाटक (सर्वाधिक जनसंख्या ~6,000), असम (~5,700), केरल (~3,000), तमिलनाडु, और उत्तर-पूर्वी राज्य
- प्रोजेक्ट एलीफेंट: 1992 में हाथियों, उनके आवासों और प्रवास गलियारों की रक्षा के लिए शुरू किया गया; 16 राज्यों में 33 हाथी रिजर्व स्थापित
- प्रमुख खतरे: आवास हानि और विखंडन, मानव-हाथी संघर्ष, हाथीदांत के लिए अवैध शिकार (हालांकि भारतीय हाथियों के दांत अफ्रीकी हाथियों की तुलना में छोटे होते हैं), रेलवे और सड़क दुर्घटनाएं
भारत की जैव विविधता के संदर्भ में, सीलोन फ्रॉगमाउथ, कॉपरस्मिथ बार्बेट, ग्रे-चिन्ड मिनिवेट और व्हाइट-थ्रोटेड रेडस्टार्ट हैं
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — पक्षी
उल्लिखित सभी चार प्रजातियाँ—सीलोन फ्रॉगमाउथ, कॉपरस्मिथ बार्बेट, ग्रे-चिन्ड मिनिवेट और व्हाइट-थ्रोटेड रेडस्टार्ट—भारत और पड़ोसी क्षेत्रों में पाए जाने वाले पक्षी हैं। सीलोन फ्रॉगमाउथ पश्चिमी घाट का एक निशाचर पक्षी है, कॉपरस्मिथ बार्बेट का नाम इसकी धातु जैसी आवाज़ के कारण पड़ा है, ग्रे-चिन्ड मिनिवेट अपने रंगीन पंखों के लिए जाना जाता है, और व्हाइट-थ्रोटेड रेडस्टार्ट अपनी विशिष्ट लाल पूंछ के लिए जाना जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारतीय पक्षी प्रजातियाँ
- सीलोन फ्रॉगमाउथ (Batrachostomus moniliger): पश्चिमी घाट और श्रीलंका का एक निशाचर पक्षी; अपने चौड़े मुँह और छलावरण वाले पंखों के कारण मेंढक जैसा दिखता है; घने उष्णकटिबंधीय वनों में निवास करता है।
- कॉपरस्मिथ बार्बेट (Psilopogon haemacephalus): भारतीय उपमहाद्वीप में स्थायी रूप से रहने वाला पक्षी; इसका नाम इसकी बार-बार की जाने वाली धातु जैसी 'टुक-टुक-टुक' आवाज़ से पड़ा है जो तांबे के कारीगर के हथौड़े की आवाज़ जैसी होती है; इसमें लाल माथा और गला तथा हरा शरीर होता है।
- ग्रे-चिन्ड मिनिवेट (Pericrocotus solaris): हिमालय और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है; नर नारंगी-लाल पंखों और मादाएँ पीले रंग के साथ यौन द्विरूपता प्रदर्शित करते हैं; उपोष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण वनों में निवास करता है।
- व्हाइट-थ्रोटेड रेडस्टार्ट (Phoenicurus schisticeps): हिमालय, नेपाल, भूटान और चीन के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला एक छोटा गौरैया पक्षी; नर में सफेद गले और चमकदार लाल-भूरी पूंछ के साथ काला पंख होता है; उच्च-ऊंचाई वाले झाड़ीदार और चट्टानी क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है।
- जैव विविधता का महत्व: ये प्रजातियाँ विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों—उष्णकटिबंधीय वनों से लेकर उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक—में भारत की समृद्ध पक्षी विविधता का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो आवास संरक्षण के महत्व को रेखांकित करती हैं।
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| वन्यजीव | प्राकृतिक रूप से पाया जाता है |
|---|---|
| 1. ब्लू-फिन्ड महासीर | कावेरी नदी |
| 2. इरावदी डॉल्फिन | चंबल नदी |
| 3. रस्टी-स्पॉटेड कैट | पूर्वी घाट |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1 और 3
यह प्रश्न वन्यजीव प्रजातियों और भारत में उनके प्राकृतिक आवासों के ज्ञान का परीक्षण करता है। दिए गए तीन युग्मों में से केवल युग्म 1 और 3 सही सुमेलित हैं, जबकि युग्म 2 गलत तरीके से इरावदी डॉल्फिन को चंबल नदी से जोड़ता है।
✅ युग्म 1 – सही: ब्लू-फिन्ड महासीर वास्तव में कावेरी नदी और दक्कन पठार की अन्य नदियों में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है। यह एक लुप्तप्राय मीठे पानी की मछली प्रजाति है।
❌ युग्म 2 – गलत: इरावदी डॉल्फिन चंबल नदी में नहीं पाई जाती है। चंबल नदी गंगा डॉल्फिन के लिए जानी जाती है। इरावदी डॉल्फिन दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के तटीय क्षेत्रों में पाई जाती है, और भारत में ये चिल्का झील (ओडिशा) में पाई जाती हैं।
✅ युग्म 3 – सही: रस्टी-स्पॉटेड कैट प्राकृतिक रूप से पूर्वी घाट में पाई जाती है। यह छोटी जंगली बिल्ली प्रजाति पश्चिमी घाट, मध्य भारत और श्रीलंका में भी पाई जाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारतीय वन्यजीव प्रजातियाँ और आवास
| प्रजाति | प्राकृतिक आवास/वितरण | संरक्षण स्थिति |
|---|---|---|
| ब्लू-फिन्ड महासीर | कावेरी नदी, दक्कन पठार की नदियाँ | लुप्तप्राय (मीठे पानी की मछली) |
| इरावदी डॉल्फिन | दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के तटीय क्षेत्र; भारत में चिल्का झील (ओडिशा); अयेयारवाडी, महाकम और मेकांग नदियाँ | लुप्तप्राय |
| गंगा डॉल्फिन | गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी प्रणाली, चंबल नदी | लुप्तप्राय; राष्ट्रीय जलीय जीव |
| रस्टी-स्पॉटेड कैट | पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट, मध्य भारत, श्रीलंका | निकट संकटग्रस्त; विश्व की सबसे छोटी जंगली बिल्लियों में से एक |
Showing 1 to 15 of 22 questions
Related Topics in पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
स्थानिक एवं संकटग्रस्त प्रजातियाँ
जैव विविधता संरक्षण
जैव विविधता हॉटस्पॉट
जैव विविधता के लिए खतरे
जैव विविधता के स्तर
आक्रामक प्रजातियाँ और उनका प्रभाव
Frequently Asked Questions
Common questions about कीस्टोन एवं फ्लैगशिप प्रजातियाँ in UPSC CSE PRELIMS