भारत की जैव विविधता के संदर्भ में, सीलोन फ्रॉगमाउथ, कॉपरस्मिथ बार्बेट, ग्रे-चिन्ड मिनिवेट और व्हाइट-थ्रोटेड रेडस्टार्ट हैं
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — पक्षी
उल्लिखित सभी चार प्रजातियाँ—सीलोन फ्रॉगमाउथ, कॉपरस्मिथ बार्बेट, ग्रे-चिन्ड मिनिवेट और व्हाइट-थ्रोटेड रेडस्टार्ट—भारत और पड़ोसी क्षेत्रों में पाए जाने वाले पक्षी हैं। सीलोन फ्रॉगमाउथ पश्चिमी घाट का एक निशाचर पक्षी है, कॉपरस्मिथ बार्बेट का नाम इसकी धातु जैसी आवाज़ के कारण पड़ा है, ग्रे-चिन्ड मिनिवेट अपने रंगीन पंखों के लिए जाना जाता है, और व्हाइट-थ्रोटेड रेडस्टार्ट अपनी विशिष्ट लाल पूंछ के लिए जाना जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारतीय पक्षी प्रजातियाँ
- सीलोन फ्रॉगमाउथ (Batrachostomus moniliger): पश्चिमी घाट और श्रीलंका का एक निशाचर पक्षी; अपने चौड़े मुँह और छलावरण वाले पंखों के कारण मेंढक जैसा दिखता है; घने उष्णकटिबंधीय वनों में निवास करता है।
- कॉपरस्मिथ बार्बेट (Psilopogon haemacephalus): भारतीय उपमहाद्वीप में स्थायी रूप से रहने वाला पक्षी; इसका नाम इसकी बार-बार की जाने वाली धातु जैसी 'टुक-टुक-टुक' आवाज़ से पड़ा है जो तांबे के कारीगर के हथौड़े की आवाज़ जैसी होती है; इसमें लाल माथा और गला तथा हरा शरीर होता है।
- ग्रे-चिन्ड मिनिवेट (Pericrocotus solaris): हिमालय और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है; नर नारंगी-लाल पंखों और मादाएँ पीले रंग के साथ यौन द्विरूपता प्रदर्शित करते हैं; उपोष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण वनों में निवास करता है।
- व्हाइट-थ्रोटेड रेडस्टार्ट (Phoenicurus schisticeps): हिमालय, नेपाल, भूटान और चीन के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला एक छोटा गौरैया पक्षी; नर में सफेद गले और चमकदार लाल-भूरी पूंछ के साथ काला पंख होता है; उच्च-ऊंचाई वाले झाड़ीदार और चट्टानी क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है।
- जैव विविधता का महत्व: ये प्रजातियाँ विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों—उष्णकटिबंधीय वनों से लेकर उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक—में भारत की समृद्ध पक्षी विविधता का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो आवास संरक्षण के महत्व को रेखांकित करती हैं।
Question 14 of 22 कीस्टोन एवं फ्लैगशिप प्रजातियाँ
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