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पंचायती राज व्यवस्था Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for पंचायती राज व्यवस्था with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for BPSC CCE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
Filter & practice questions topic-wise
पंचायत राज व्यवस्था में शासन की प्रणाली क्या है?
Detailed Explanation:
भारत में पंचायती राज व्यवस्था, 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के अनुसार स्थानीय स्वशासन की तीन-स्तरीय संरचना का पालन करती है।
तीन स्तर हैं: ग्राम पंचायत (गाँव स्तर), पंचायत समिति/ब्लॉक पंचायत (मध्यवर्ती/ब्लॉक स्तर), और जिला परिषद (जिला स्तर)।
20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों में दो-स्तरीय प्रणाली (मध्यवर्ती स्तर को छोड़कर) हो सकती है, लेकिन मानक संवैधानिक ढांचा तीन-स्तरीय है।
पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने का अधिकार किसे है?
Detailed Explanation:
संविधान के अनुच्छेद 243-I के तहत राज्यपाल हर पांच वर्ष में एक राज्य वित्त आयोग का गठन करते हैं जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।
वित्त आयोग राज्य और पंचायतों के बीच करों के वितरण, राज्य की संचित निधि से अनुदान-सहायता के सिद्धांतों, और पंचायतों की वित्तीय स्थिति सुधारने के उपायों की सिफारिश करता है।
पंचायती राज का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Detailed Explanation:
पंचायती राज एक विकेंद्रीकृत शासन प्रणाली है जो 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए स्थापित की गई थी।
इसका मुख्य उद्देश्य गाँव, खंड और जिला स्तर पर स्थानीय स्वशासन के माध्यम से विकास प्रशासन में लोगों की भागीदारी को सक्षम बनाना है। यद्यपि रोजगार वृद्धि, कृषि उत्पादन और राजनीतिक जागरूकता परिणाम हो सकते हैं, मूल उद्देश्य सहभागी विकास है जहाँ समुदाय सीधे अपने विकास कार्यक्रमों की योजना और कार्यान्वयन करते हैं।
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अनुच्छेद "243J" के तहत निम्नलिखित में से कौन पंचायतों द्वारा लेखा रखरखाव के लिए प्रावधान कर सकता है?
Detailed Explanation:
अनुच्छेद 243J राज्य विधानमंडल को पंचायतों द्वारा लेखा रखरखाव और ऐसे लेखाओं की लेखा परीक्षा से संबंधित कानून बनाने का अधिकार देता है।
संसद को इस अनुच्छेद के तहत अधिकार नहीं है क्योंकि यह भाग IX (पंचायती राज) के अंतर्गत आता है, जो एक राज्य का विषय है। जिला कलेक्टर एक कार्यकारी अधिकारी है जिसके पास कोई विधायी शक्ति नहीं है, और राज्य वित्त आयोग केवल वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और अनुदान की सिफारिश करता है, लेखा रखरखाव नियम नहीं बनाता।
पंचायती राज संरचना में पंचायत समिति किस स्तर पर कार्य करती है?
Detailed Explanation:
पंचायत समिति, त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में ब्लॉक स्तर (तालुका या मंडल स्तर भी कहा जाता है) पर कार्य करती है।
त्रि-स्तरीय संरचना में शामिल हैं: ग्राम पंचायत (गाँव स्तर), पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर), और जिला परिषद (जिला स्तर), जो 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के अनुसार है।
निम्नलिखित में से किसे सामुदायिक विकास के प्रथम कार्यक्रम के रूप में स्थापित किया गया था?
Detailed Explanation:
राष्ट्रीय प्रसार सेवा (NES) को 1953 में स्थायी आधार पर भारत के प्रथम सामुदायिक विकास कार्यक्रम के रूप में स्थापित किया गया था।
सहकारिता आंदोलन 1904 में शुरू हुआ (सहकारी ऋण समिति अधिनियम) लेकिन यह सामुदायिक विकास कार्यक्रम नहीं था।
एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) को 1978-80 में शुरू किया गया, जो NES से बहुत बाद में था।
NES का उद्देश्य बहुउद्देशीय ग्राम-स्तरीय कार्यकर्ताओं और प्रखंड-स्तरीय प्रशासन के माध्यम से ग्रामीण विकास के लिए संस्थागत ढांचा प्रदान करना था।
निम्नलिखित में से कौन संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची का भाग नहीं है?
Detailed Explanation:
ग्यारहवीं अनुसूची (अनुच्छेद 243G) में 29 विषय सूचीबद्ध हैं जो 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायतों को ग्रामीण स्थानीय स्वशासन के लिए सौंपे गए हैं।
पुस्तकालय, ईंधन और चारा, तथा तकनीकी प्रशिक्षण क्रमशः ग्यारहवीं अनुसूची में प्रविष्टि 18, 14 और 17 हैं। ग्रामीण खेल इस अनुसूची में कहीं भी उल्लिखित नहीं है।
अतः, ग्रामीण खेल ग्यारहवीं अनुसूची का भाग नहीं है, जिससे विकल्प 3 सही उत्तर है।
किस राज्य में पंचायत व्यवस्था नहीं है?
Detailed Explanation:
73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने सभी राज्यों के लिए पंचायती राज अनिवार्य किया, लेकिन मिज़ोरम, नागालैंड और मेघालय को अनुच्छेद 243M के तहत छठी अनुसूची में आदिवासी शासन के कारण छूट दी गई है।
पश्चिम बंगाल, केरल और बिहार में निर्वाचित त्रि-स्तरीय स्थानीय शासन संरचनाओं के साथ सक्रिय पंचायती राज व्यवस्थाएं हैं।
अतः, मिज़ोरम में पंचायत व्यवस्था नहीं है, जो विकल्प 1 को सही उत्तर बनाता है।
पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए, राज्य सरकार प्रत्येक पाँच वर्ष में गठित करती है
Detailed Explanation:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-I के तहत प्रत्येक राज्य को कम से कम हर पाँच वर्ष में एक राज्य वित्त आयोग का गठन करना अनिवार्य है, जो पंचायतों और नगर पालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।
यह आयोग राज्य कर राजस्व के वितरण, स्थानीय निकायों द्वारा एकत्रित किए जाने वाले करों/शुल्कों, और राज्य की संचित निधि से अनुदान-सहायता की सिफारिश करता है।
अतः, राज्य वित्त आयोग हर पाँच वर्ष में पंचायतों की वित्तीय समीक्षा करता है, जिससे विकल्प 4 सही उत्तर है।
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