भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सौत्रान्तिक और सम्मितीय जैन धर्म के सम्प्रदाय थे।
- सर्वास्तिवादिन का मत था कि परिघटनाओं के घटक पूर्णतः क्षणिक नहीं थे, बल्कि गुप्त रूप में सदैव विद्यमान थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
यह प्रश्न बौद्ध दार्शनिक सम्प्रदायों के ज्ञान का परीक्षण करता है, न कि जैन धर्म या रंगमंच का। कथन 1 गलत तरीके से सौत्रान्तिक और सम्मितीय को जैन सम्प्रदाय बताता है जबकि वे वास्तव में बौद्ध सम्प्रदाय थे। कथन 2 सर्वास्तिवाद के सिद्धांत का सही वर्णन करता है जो धर्मों के भूत, वर्तमान और भविष्य में स्थायी अस्तित्व की बात करता है।
❌ कथन 1 – गलत: सौत्रान्तिक और सम्मितीय बौद्ध दार्शनिक सम्प्रदाय थे, जैन सम्प्रदाय नहीं; सौत्रान्तिक अभिधर्म की तुलना में सूत्रों पर जोर देते थे, जबकि सम्मितीय आत्मा (पुद्गल) के अस्तित्व को मानते थे।
✅ कथन 2 – सही: सर्वास्तिवादिन "सर्वम् अस्ति" (सब कुछ अस्तित्व में है) के सिद्धांत को मानते थे, यह विश्वास करते हुए कि धर्म (परिघटनाओं के घटक) पूर्णतः क्षणिक होने के बजाय तीनों कालों में गुप्त रूप में स्थायी रूप से विद्यमान थे।
Question 2 of 6 बौद्ध धर्म
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