भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- न्यायिक हिरासत का अर्थ है कि आरोपी संबंधित मजिस्ट्रेट की हिरासत में है और ऐसे आरोपी को जेल में नहीं, बल्कि पुलिस स्टेशन में बंद रखा जाता है।
- न्यायिक हिरासत के दौरान, मामले के प्रभारी पुलिस अधिकारी को न्यायालय की स्वीकृति के बिना संदिग्ध से पूछताछ करने की अनुमति नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
यह प्रश्न भारतीय दंड प्रक्रिया के तहत न्यायिक हिरासत और पुलिस हिरासत के बीच अंतर की समझ का परीक्षण करता है। कथन 1 न्यायिक हिरासत का गलत वर्णन करता है, जबकि कथन 2 न्यायिक हिरासत के दौरान पूछताछ प्रतिबंधों की सही व्याख्या करता है।
❌ कथन 1 – गलत: न्यायिक हिरासत का अर्थ है कि आरोपी संबंधित मजिस्ट्रेट की हिरासत में है और उसे पुलिस स्टेशन में नहीं, बल्कि जेल में बंद रखा जाता है। पुलिस हिरासत में आरोपी को पुलिस स्टेशन लॉकअप में रखा जाता है।
✅ कथन 2 – सही: न्यायिक हिरासत के दौरान, प्रभारी पुलिस अधिकारी न्यायालय की स्वीकृति के बिना संदिग्ध से पूछताछ नहीं कर सकता। न्यायालय आवश्यक समझे जाने पर पूछताछ की अनुमति दे सकता है, लेकिन ऐसी अनुमति अनिवार्य है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पुलिस हिरासत बनाम न्यायिक हिरासत
| पहलू | पुलिस हिरासत | न्यायिक हिरासत |
|---|---|---|
| हिरासत प्राधिकरण | आरोपी पुलिस की भौतिक हिरासत में | आरोपी संबंधित मजिस्ट्रेट की हिरासत में |
| स्थान | पुलिस स्टेशन लॉकअप | जेल |
| पूछताछ अधिकार | पुलिस स्वतंत्र रूप से पूछताछ कर सकती है | पुलिस न्यायालय की अनुमति के बिना पूछताछ नहीं कर सकती |
| अधिकतम अवधि | जांच के दौरान 15 दिन (कुल) | मुकदमा पूर्ण होने या जमानत तक विस्तारित हो सकता है |
| कानूनी प्रावधान | धारा 167, सीआरपीसी | धारा 167, सीआरपीसी |
Question 3 of 4 नए आपराधिक कानून — BNS, BNSS और BSA
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