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समानता का अधिकार Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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X' भारत के संविधान के भाग III, अनुच्छेद 13 के तहत दिए गए 'कानून' शब्द के अर्थ पर एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। 'एक्स' ने बताया कि भारत के संविधान में 'कानून' शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है। इसमें अध्यादेश, आदेश और यहां तक कि नियम और कानून भी शामिल थे। 'वाई' ने बताया कि अनुच्छेद 13 में 'कानून' शब्द में भारत के क्षेत्र में कानून की शक्ति वाले रिवाज या प्रथा भी शामिल है, जिससे 'एक्स' आश्वस्त नहीं था।
उपरोक्त के आधार पर, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही निष्कर्ष चुनें:
Detailed Explanation:
मुख्य प्रावधान — अनुच्छेद 13(3)(a): अनुच्छेद 13 के अंतर्गत "विधि" की परिभाषा अत्यंत व्यापक है और स्पष्ट रूप से शामिल है:
- अध्यादेश
- आदेश, उपविधियाँ, नियम, विनियम, अधिसूचनाएँ
- भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाली रूढ़ि या प्रथा
विश्लेषण:
| व्यक्ति | मत | सटीकता |
|---|---|---|
| X | विधि में अध्यादेश, आदेश, नियम और विनियम शामिल हैं — लेकिन रूढ़ि को शामिल करने पर संदेह | ❌ आंशिक रूप से गलत |
| Y | विधि में विधि का बल रखने वाली रूढ़ि या प्रथा भी शामिल है | ✅ पूर्णतः सही |
यह क्यों महत्वपूर्ण है: विधि का बल रखने वाली अलिखित पारंपरिक प्रथाएँ औपचारिक विधायी क़ानूनों के समान संवैधानिक जाँच के अधीन हैं। यह राज्य को पारंपरिक या कार्यकारी माध्यमों से मौलिक अधिकारों को दरकिनार करने से रोकता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ निर्णयों में यह माना है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत बनाई गई आरक्षण नीतियाँ प्रशासन की दक्षता के रख-रखाव के लिए अनुच्छेद 335 द्वारा सीमित होंगी।
कथन-II: भारत के संविधान का अनुच्छेद 335 'प्रशासन की दक्षता' शब्द को परिभाषित करता है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कथन-I सही है लेकिन कथन-II गलत है
यह प्रश्न अनुच्छेद 335 और सेवाओं में आरक्षण के संबंध में अनुच्छेद 16(4) के साथ इसके संबंध की समझ का परीक्षण करता है। कथन-I विभिन्न निर्णयों में सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या को सही ढंग से दर्शाता है, जबकि कथन-II गलत तरीके से दावा करता है कि अनुच्छेद 335 'प्रशासन की दक्षता' को परिभाषित करता है।
✅ कथन-I – सही: सर्वोच्च न्यायालय ने कई निर्णयों में (एम. नागराज बनाम भारत संघ, 2006 सहित) माना है कि अनुच्छेद 16(4) के तहत आरक्षण नीतियों को अनुच्छेद 335 में उल्लिखित प्रशासन की दक्षता के रख-रखाव के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। न्यायालय ने जोर दिया है कि आरक्षण एक पूर्ण अधिकार नहीं है और प्रशासनिक दक्षता के अनुरूप होना चाहिए।
❌ कथन-II – गलत: अनुच्छेद 335 'प्रशासन की दक्षता' शब्द को परिभाषित नहीं करता है। यह केवल उल्लेख करता है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के दावों पर प्रशासन की दक्षता के रख-रखाव के अनुरूप विचार किया जाएगा। यह शब्द संविधान में अपरिभाषित रहता है, इसकी व्याख्या न्यायिक विवेक और प्रशासनिक संदर्भ पर छोड़ देता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अनुच्छेद 335 और 16(4) - आरक्षण बनाम दक्षता
| अनुच्छेद | प्रावधान | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| अनुच्छेद 16(4) | पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण | राज्य को राज्य सेवाओं में पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व न रखने वाले किसी भी पिछड़े वर्ग के लिए नियुक्तियों/पदों में आरक्षण के प्रावधान करने में सक्षम बनाता है। अनुच्छेद 16(1) का अपवाद नहीं बल्कि समानता का ही एक पहलू है (इंद्रा साहनी मामला)। |
| अनुच्छेद 335 | सेवाओं और पदों पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के दावे | कहता है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के दावों पर प्रशासन की दक्षता के रख-रखाव के अनुरूप विचार किया जाएगा। 'प्रशासन की दक्षता' को परिभाषित नहीं करता है। संतुलन प्रावधान के रूप में कार्य करता है। |
| सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या: | ||
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एक ऐसा कानून जो कार्यपालिका या प्रशासनिक प्राधिकरण को कानून के अनुप्रयोग के मामले में अनियंत्रित और असीमित विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है, भारत के संविधान के निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद का उल्लंघन करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — अनुच्छेद 14
एक ऐसा कानून जो कार्यपालिका को अनियंत्रित और असीमित विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है, संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है, जो विधि के समक्ष समता और विधियों के समान संरक्षण की गारंटी देता है। ऐसी मनमानी शक्ति निष्पक्षता और युक्तियुक्तता के सिद्धांत का उल्लंघन करती है, क्योंकि यह बिना किसी मार्गदर्शक सिद्धांतों के कानून के भेदभावपूर्ण अनुप्रयोग की अनुमति देती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
• अनुच्छेद 28 शैक्षिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थिति की स्वतंत्रता से संबंधित है।
• अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्रदान करता है और नागरिकों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है।
• अनुच्छेद 44 राज्य की नीति का एक निदेशक सिद्धांत है जो राज्य को नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का निर्देश देता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अनुच्छेद 14 और मनमानेपन का सिद्धांत
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| अनुच्छेद 14 | भारत के राज्यक्षेत्र में सभी व्यक्तियों को विधि के समक्ष समता और विधियों के समान संरक्षण की गारंटी देता है |
| विधि के समक्ष समता | नकारात्मक अवधारणा - विशेष विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति; ब्रिटिश मूल (डायसी द्वारा विधि का शासन) |
| विधियों का समान संरक्षण | सकारात्मक अवधारणा - समान परिस्थितियों में समान व्यवहार; अमेरिकी मूल (14वां संशोधन) |
| मनमानेपन का सिद्धांत | मनमानी शक्ति अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है क्योंकि यह समता को नकारती है। अनियंत्रित विवेक = कानूनी निरंकुशता |
| युक्तियुक्त वर्गीकरण | अनुमत यदि बोधगम्य विभेदक पर आधारित हो जिसका अभीष्ट उद्देश्य से तर्कसंगत संबंध हो |
| प्रमुख मामले | ई.पी. रोयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य (1974) - मनमानापन समता का विलोम है; मेनका गांधी मामला (1978) |
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निम्नलिखित में से कौन सी मौलिक अधिकार श्रेणी में अस्पृश्यता के विरुद्ध संरक्षण को भेदभाव के एक रूप के रूप में शामिल किया गया है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — समता का अधिकार
समता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18) में अनुच्छेद 17 शामिल है, जो विशेष रूप से अस्पृश्यता को समाप्त करता है और इसके अभ्यास को किसी भी रूप में प्रतिबंधित करता है। अस्पृश्यता मूल रूप से सामाजिक भेदभाव का एक रूप है जो संविधान के तहत सभी नागरिकों को गारंटीकृत समानता के मूल सिद्धांत का उल्लंघन करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: समता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| अनुच्छेद 14 | विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण |
| अनुच्छेद 15 | धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का प्रतिषेध |
| अनुच्छेद 16 | लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता |
| अनुच्छेद 17 | अस्पृश्यता का उन्मूलन और इसके अभ्यास का किसी भी रूप में प्रतिषेध |
| अनुच्छेद 18 | उपाधियों का उन्मूलन (सैन्य और शैक्षणिक उपाधियों को छोड़कर) |
समाज में समानता के निहितार्थों में से एक है -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — विशेषाधिकार
समाज में समानता का तात्पर्य है कि सभी व्यक्तियों को बिना किसी वरीयता के समान अधिकार, अवसर और स्थिति प्राप्त हो। विशेषाधिकारों की उपस्थिति—कुछ समूहों या व्यक्तियों द्वारा प्राप्त अनर्जित लाभ या विशेष अधिकार—समानता के सिद्धांत का सीधे खंडन करती है, क्योंकि यह पदानुक्रम और विभेदक व्यवहार उत्पन्न करती है। इसलिए, विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति वास्तव में समान समाज का एक मूलभूत निहितार्थ है।
विकल्पों का विश्लेषण:
✅ विशेषाधिकार – सही: विशेषाधिकार चुनिंदा समूहों को दिए गए विशेष लाभों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो समानता के सिद्धांत के साथ असंगत हैं जो सभी के लिए समान अधिकारों और अवसरों की मांग करता है।
❌ प्रतिबंध – गलत: उचित प्रतिबंध (जैसे कानून और नियम) समानता सुनिश्चित करने और भेदभाव को रोकने के लिए आवश्यक हैं, इस प्रकार वे समानता के साथ सह-अस्तित्व में रह सकते हैं।
❌ प्रतिस्पर्धा – गलत: योग्यता के आधार पर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा समानता के अनुकूल है, बशर्ते कि सभी व्यक्तियों को प्रतिस्पर्धा करने के समान अवसर मिलें।
❌ विचारधारा – गलत: विभिन्न विचारधाराएं समानता का समर्थन या विरोध कर सकती हैं; विचारधारा स्वयं समान समाज में अनुपस्थित नहीं होती।
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