समाज में समानता के निहितार्थों में से एक है -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — विशेषाधिकार
समाज में समानता का तात्पर्य है कि सभी व्यक्तियों को बिना किसी वरीयता के समान अधिकार, अवसर और स्थिति प्राप्त हो। विशेषाधिकारों की उपस्थिति—कुछ समूहों या व्यक्तियों द्वारा प्राप्त अनर्जित लाभ या विशेष अधिकार—समानता के सिद्धांत का सीधे खंडन करती है, क्योंकि यह पदानुक्रम और विभेदक व्यवहार उत्पन्न करती है। इसलिए, विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति वास्तव में समान समाज का एक मूलभूत निहितार्थ है।
विकल्पों का विश्लेषण:
✅ विशेषाधिकार – सही: विशेषाधिकार चुनिंदा समूहों को दिए गए विशेष लाभों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो समानता के सिद्धांत के साथ असंगत हैं जो सभी के लिए समान अधिकारों और अवसरों की मांग करता है।
❌ प्रतिबंध – गलत: उचित प्रतिबंध (जैसे कानून और नियम) समानता सुनिश्चित करने और भेदभाव को रोकने के लिए आवश्यक हैं, इस प्रकार वे समानता के साथ सह-अस्तित्व में रह सकते हैं।
❌ प्रतिस्पर्धा – गलत: योग्यता के आधार पर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा समानता के अनुकूल है, बशर्ते कि सभी व्यक्तियों को प्रतिस्पर्धा करने के समान अवसर मिलें।
❌ विचारधारा – गलत: विभिन्न विचारधाराएं समानता का समर्थन या विरोध कर सकती हैं; विचारधारा स्वयं समान समाज में अनुपस्थित नहीं होती।
Question 5 of 5 समानता का अधिकार
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