निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- "क्रिटिकल वन्यजीव पर्यावास" की परिभाषा वन अधिकार अधिनियम, 2006 में शामिल है।
- भारत में पहली बार बैगाओं को पर्यावास अधिकार दिए गए हैं।
- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय आधिकारिक रूप से भारत के किसी भी हिस्से में आदिम और असुरक्षित जनजातीय समूहों के लिए पर्यावास अधिकार निर्णय लेता है और घोषित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
यह प्रश्न वन अधिकार अधिनियम, 2006 के ज्ञान का परीक्षण करता है, विशेष रूप से क्रिटिकल वन्यजीव पर्यावास और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए पर्यावास अधिकार के संबंध में। कथन 3 गलत है क्योंकि पर्यावास अधिकार घोषित करने का अधिकार केंद्रीय मंत्रालय को नहीं, बल्कि राज्य सरकारों को है।
✅ कथन 1 – सही: वन अधिकार अधिनियम, 2006 स्पष्ट रूप से "क्रिटिकल वन्यजीव पर्यावास" को राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के भीतर उन क्षेत्रों के रूप में परिभाषित करता है जिन्हें वन्यजीव संरक्षण के लिए अक्षुण्ण संरक्षण की आवश्यकता है, और इसे केवल वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर पुनर्वास की उचित प्रक्रिया के बाद ही घोषित किया जा सकता है।
✅ कथन 2 – सही: 2015 में, मध्य प्रदेश में बैगा जनजाति समुदाय को FRA, 2006 के तहत पर्यावास अधिकार प्रदान किए जाने वाला भारत का पहला समुदाय बना, जिससे उन्हें कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में वन संसाधनों तक पहुंच के साथ रहने की अनुमति मिली।
❌ कथन 3 – गलत: वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत, आदिम जनजातीय समूहों के लिए पर्यावास अधिकार घोषित और निहित करने का अधिकार राज्य सरकारों (केंद्रीय मंत्रालय नहीं) को है, जो संबंधित समुदायों से सहमति प्राप्त करने और पुनर्वास उपाय स्थापित करने के बाद दिया जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वन अधिकार अधिनियम, 2006 — मुख्य प्रावधान
- आधिकारिक शीर्षक: अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006
- क्रिटिकल वन्यजीव पर्यावास (CWH): धारा 2(b) के तहत परिभाषित राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के भीतर उन क्षेत्रों के रूप में जिन्हें वन्यजीव संरक्षण के लिए अक्षुण्ण संरक्षण की आवश्यकता है; वैज्ञानिक साक्ष्य और पुनर्वास प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही अधिसूचित किया जा सकता है
- पर्यावास अधिकार: धारा 3(1)(e) के तहत, आदिम जनजातीय समूहों (अब विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह - PVTGs कहा जाता है) और पूर्व-कृषि समुदायों को निवास और आजीविका के लिए पर्यावास अधिकार प्राप्त हैं
- प्राधिकरण: राज्य सरकारों को ग्राम सभाओं और प्रभावित समुदायों से सहमति प्राप्त करने के बाद पर्यावास अधिकार घोषित करने की शक्ति है
- पहला अनुदान: मध्य प्रदेश में बैगा जनजाति (2015) कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में पर्यावास अधिकार प्राप्त करने वाला पहला PVTG था
- भारत में PVTGs: 18 राज्यों में 75 जनजातीय समूहों को पूर्व-कृषि स्तर की तकनीक, निम्न साक्षरता और घटती जनसंख्या जैसे मानदंडों के आधार पर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के रूप में वर्गीकृत किया गया है
Question 3 of 3 वन संसाधन
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