भारत में लघु खनिजों के प्रबंधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- देश में प्रचलित कानून के अनुसार रेत एक 'लघु खनिज' है।
- राज्य सरकारों को लघु खनिजों के खनन पट्टे देने की शक्ति है, लेकिन लघु खनिजों के अनुदान से संबंधित नियम बनाने की शक्तियाँ केंद्र सरकार के पास हैं।
- राज्य सरकारों को लघु खनिजों के अवैध खनन को रोकने के लिए नियम बनाने की शक्ति है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 3
यह प्रश्न भारत में लघु खनिजों को नियंत्रित करने वाली संवैधानिक और कानूनी संरचना, विशेष रूप से MMDR अधिनियम, 1957 के तहत केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन की समझ का परीक्षण करता है।
✅ कथन 1 – सही: खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 3(e) के तहत रेत को 'लघु खनिज' के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें बजरी, मिट्टी, संगमरमर और चूना पत्थर जैसे अन्य खनिज भी शामिल हैं।
❌ कथन 2 – गलत: लघु खनिजों के अनुदान से संबंधित नियम बनाने की शक्ति केंद्र सरकार के पास नहीं बल्कि राज्य सरकारों के पास है। MMDR अधिनियम की धारा 15 राज्य सरकारों को लघु खनिजों के संबंध में उत्खनन पट्टे, खनन पट्टे और अन्य खनिज रियायतों के अनुदान को विनियमित करने के लिए नियम बनाने का अधिकार देती है।
✅ कथन 3 – सही: राज्य सरकारों को MMDR अधिनियम की धारा 15 के तहत लघु खनिजों के अवैध खनन को रोकने के लिए नियम बनाने की शक्ति है, जिसमें विनियमन, प्रवर्तन और अनधिकृत उत्खनन की रोकथाम के उपाय शामिल हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में लघु खनिज प्रबंधन
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| कानूनी ढांचा | खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR अधिनियम) |
| वर्गीकरण | खनिजों को प्रमुख खनिज (अनुसूची 1) और लघु खनिज (अनुसूची 2) में वर्गीकृत किया गया है |
| लघु खनिजों के उदाहरण | रेत, बजरी, मिट्टी, संगमरमर, चूना पत्थर, लेटराइट, कंकड़, मुरुम |
| केंद्र सरकार की शक्तियाँ | प्रमुख खनिजों का विनियमन; अनुसूचियों में संशोधन की शक्ति; समग्र नीति ढांचा |
| राज्य सरकार की शक्तियाँ | लघु खनिजों के लिए खनन पट्टे प्रदान करना; उत्खनन, पट्टे और परिवहन के लिए नियम बनाना; अवैध खनन को रोकना; रॉयल्टी और कर लगाना |
| संवैधानिक आधार | प्रविष्टि 23 (सूची II - राज्य सूची) सूची I के प्रावधानों के अधीन खानों और खनिज विकास के विनियमन और विकास को शामिल करती है |
| 2015 संशोधन | MMDR संशोधन अधिनियम, 2015 ने राज्यों को लघु खनिज प्रशासन में अधिक स्वायत्तता प्रदान की |
Question 3 of 5 विधायी संबंध
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