Financial Markets and Institutions
भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, "मुद्रास्फीति-सूचकांकित बांड (IIBs)" के क्या लाभ हैं?
- सरकार IIBs के माध्यम से अपने उधार पर कूपन दरों को कम कर सकती है।
- IIBs निवेशकों को मुद्रास्फीति के संबंध में अनिश्चितता से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- IIBs पर प्राप्त ब्याज के साथ-साथ पूंजीगत लाभ कर योग्य नहीं हैं।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
मुद्रास्फीति-सूचकांकित बांड (IIBs) सरकारी प्रतिभूतियां हैं जो मुद्रास्फीति सूचकांकों के आधार पर मूलधन और ब्याज भुगतान दोनों को समायोजित करके निवेशकों को मुद्रास्फीति से बचाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। सरकार को कम नाममात्र कूपन दरों से लाभ होता है क्योंकि मुद्रास्फीति समायोजन बांड संरचना में निर्मित होता है, जबकि निवेशकों को क्रय शक्ति के क्षरण से सुरक्षा मिलती है।
✅ कथन 1 – सही: IIBs सरकार को कम कूपन दरें प्रदान करने की अनुमति देते हैं क्योंकि वास्तविक रिटर्न मुद्रास्फीति समायोजन के माध्यम से सुनिश्चित होता है, जो उच्च निश्चित दरों वाले पारंपरिक बांड की तुलना में उधार लागत को कम करता है।
✅ कथन 2 – सही: IIBs निवेशकों को मुद्रास्फीति की अनिश्चितता से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करते हैं क्योंकि मूलधन और ब्याज भुगतान दोनों मुद्रास्फीति (आमतौर पर WPI या CPI) के लिए सूचकांकित होते हैं, जो वास्तविक क्रय शक्ति को संरक्षित करते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: आयकर अधिनियम के अनुसार भारत में IIBs पर ब्याज आय और पूंजीगत लाभ दोनों कर योग्य हैं; कुछ अन्य निर्दिष्ट प्रतिभूतियों के विपरीत IIBs के लिए कोई विशेष कर छूट नहीं है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मुद्रास्फीति-सूचकांकित बांड (IIBs)
- परिचय: IIBs पहली बार 1997 में भारत में पेश किए गए और 2013 में RBI द्वारा निवेशकों को मुद्रास्फीति सुरक्षा प्रदान करने के लिए पुनः पेश किए गए।
- सूचकांकन: मूलधन और ब्याज (कूपन) भुगतान दोनों को मुद्रास्फीति सूचकांक (WPI या CPI-संयुक्त) के आधार पर समायोजित किया जाता है।
- वास्तविक रिटर्न: निवेशकों को एक निश्चित वास्तविक रिटर्न दर और मुद्रास्फीति समायोजन प्राप्त होता है, जो क्रय शक्ति सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
- सरकार को लाभ: कम नाममात्र कूपन दरें सरकार की उधार लागत को कम करती हैं क्योंकि मुद्रास्फीति जोखिम बांड संरचना में स्थानांतरित हो जाता है।
- कराधान: ब्याज आय लागू आयकर स्लैब के अनुसार कर योग्य है; पूंजीगत लाभ धारण अवधि (LTCG/STCG नियम लागू) के आधार पर कर योग्य हैं।
- बाजार स्थिति: जटिलता, कराधान मुद्दों और अन्य साधनों की तुलना में कम निवेशक जागरूकता के कारण भारत में IIBs को सीमित सफलता मिली है।
Question 6 of 10 बॉण्ड एवं प्रतिभूतियाँ
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