भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा 'पारमिता' शब्द का सही विवरण है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — पूर्णताएं जिनकी प्राप्ति बोधिसत्व पथ की ओर ले जाती है
बौद्ध दर्शन में 'पारमिता' शब्द उन अतिक्रामक गुणों या पूर्णताओं को संदर्भित करता है जिन्हें बोधिसत्वों को अपने ज्ञानोदय के मार्ग पर विकसित करना आवश्यक है। महायान बौद्ध धर्म में, ये पूर्णताएं आम तौर पर छह गुणों को शामिल करती हैं: दान (उदारता), शील (नैतिक आचरण), क्षांति (धैर्य), वीर्य (परिश्रम), ध्यान (चित्त एकाग्रता), और प्रज्ञा (ज्ञान)। इन गुणों का अभ्यास और पूर्णता बोधिसत्वों को बुद्धत्व की ओर बढ़ने में सक्षम बनाती है जबकि दूसरों को दुख से मुक्ति प्राप्त करने में मदद करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बौद्ध धर्म में पारमिता
- पारमिता (पूर्णताएं): महायान बौद्ध धर्म में अतिक्रामक गुण जो ज्ञानोदय और बोधिसत्व स्थिति प्राप्त करने के लिए अभ्यास किए जाते हैं।
- छह पारंपरिक पारमिताएं: (1) दान (उदारता), (2) शील (नैतिक आचरण/नीतिशास्त्र), (3) क्षांति (धैर्य/सहनशीलता), (4) वीर्य (ऊर्जा/परिश्रम), (5) ध्यान (चित्त एकाग्रता), (6) प्रज्ञा (ज्ञान/अंतर्दृष्टि)।
- विस्तारित सूची: कुछ ग्रंथों में दस पारमिताओं का उल्लेख है, जिसमें उपाय (कुशल साधन), प्रणिधान (संकल्प), बल (आध्यात्मिक शक्ति), और ज्ञान (विवेक) शामिल हैं।
- बोधिसत्व मार्ग: बोधिसत्व वह है जो केवल अपने लिए नहीं बल्कि सभी संवेदनशील प्राणियों की सहायता के लिए ज्ञानोदय की खोज करता है; पारमिताएं इस मार्ग पर आवश्यक अभ्यास हैं।
- महायान परंपरा: पारमिता की अवधारणा महायान बौद्ध धर्म के केंद्र में है और बोधिसत्व आदर्श पर जोर देने में इसे थेरवाद परंपरा से अलग करती है।
Question 2 of 6 बौद्ध धर्म
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