मध्यकालीन भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा आकार के आरोही क्रम में सही अनुक्रम है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — परगना- सरकार- सूबा
मध्यकालीन भारत में, विशेष रूप से मुगल काल के दौरान, प्रशासनिक विभाजन पदानुक्रमित रूप से संगठित थे, जिसमें परगना सबसे छोटी इकाई थी जिसमें गांवों का एक समूह शामिल था, सरकार एक मध्य-स्तरीय विभाजन (जिला) था जो कई परगनों को मिलाकर बना था, और सूबा सबसे बड़ा प्रांतीय विभाजन था जो कई सरकारों को शामिल करता था। परगना → सरकार → सूबा का यह आरोही क्रम जमीनी स्तर के गांव समूह स्तर से प्रांतीय स्तर तक की प्रशासनिक संरचना को दर्शाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मुगल प्रशासनिक विभाजन
| प्रशासनिक इकाई | विवरण | समकक्ष आधुनिक शब्द |
|---|---|---|
| परगना | गांवों के एक समूह से मिलकर बनी सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई (आमतौर पर 100-150 गांव) | उप-जिला/तहसील |
| सरकार | कई परगनों को मिलाकर बना मध्य-स्तरीय विभाजन | जिला |
| सूबा | सुबेदार (गवर्नर) के नेतृत्व में सबसे बड़ा प्रांतीय विभाजन, जो कई सरकारों को शामिल करता है | प्रांत/राज्य |
| साम्राज्य स्तर | अकबर ने अपने साम्राज्य को 15 सूबों में विभाजित किया (बाद में औरंगजेब के अधीन 21 तक विस्तारित) | केंद्रीय प्रशासन |
- राजस्व प्रशासन: परगना स्तर पर, प्रमुख अधिकारी शिकदार (कानून और व्यवस्था), अमीन (भूमि राजस्व मूल्यांकन), और मुंसिफ (अभिलेख और लेखा) थे।
- प्रांतीय शासन: प्रत्येक सूबा का नेतृत्व एक सुबेदार/सिपहसालार (गवर्नर) करता था जो सैन्य और नागरिक प्रशासन के लिए जिम्मेदार था।
- वित्तीय नियंत्रण: सूबा स्तर पर दीवान (वित्त मंत्री) राजस्व संग्रह और वित्तीय मामलों का प्रबंधन सुबेदार से स्वतंत्र रूप से करता था ताकि नियंत्रण और संतुलन सुनिश्चित हो सके।
Question 1 of 1 केंद्रीय प्रशासन
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