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सामाजिक मुद्दे Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: सामाजिक मुद्दे
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली मुख्य रूप से उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित है तथा सीमित निवारक, प्रोत्साहक और पुनर्वास देखभाल प्रदान करती है।
कथन-II: स्वास्थ्य देखभाल वितरण के लिए भारत के विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण के तहत, राज्य स्वास्थ्य सेवाओं के आयोजन के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है
दोनों कथन व्यक्तिगत रूप से सही हैं लेकिन कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता है। भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का उपचारात्मक फोकस ऐतिहासिक नीतिगत प्राथमिकताओं और संसाधन आवंटन पैटर्न से उत्पन्न होता है, न कि स्वास्थ्य सेवाओं के संवैधानिक विकेंद्रीकरण से।
✅ कथन-I – सही: भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली ने ऐतिहासिक रूप से अस्पतालों और औषधालयों के माध्यम से उपचारात्मक देखभाल पर जोर दिया है, जबकि निवारक, प्रोत्साहक और पुनर्वास सेवाओं को सीमित बजटीय और बुनियादी ढांचागत समर्थन मिलता है।
✅ कथन-II – सही: संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत, 'सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता; अस्पताल और औषधालय' राज्य सूची (प्रविष्टि 6) के अंतर्गत आते हैं, जो राज्यों को स्वास्थ्य सेवाओं के आयोजन और वितरण के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी बनाता है।
संबंध: विकेंद्रीकृत प्रशासनिक संरचना (कथन-II) स्वास्थ्य प्रशासन के लिए संवैधानिक ढांचे का वर्णन करती है लेकिन उपचारात्मक-भारी दृष्टिकोण (कथन-I) का कारण या व्याख्या नहीं करती है। उत्तरार्द्ध नीतिगत विकल्पों, वित्त पोषण मॉडल और बुनियादी ढांचा विकास प्राथमिकताओं का परिणाम है न कि संघवाद का।
भारत में नियोजित आकस्मिक श्रमिकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सभी आकस्मिक श्रमिक कर्मचारी भविष्य निधि कवरेज के हकदार हैं।
- सभी आकस्मिक श्रमिक नियमित कार्य घंटे और ओवरटाइम भुगतान के हकदार हैं।
- सरकार एक अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है कि कोई प्रतिष्ठान या उद्योग केवल अपने बैंक खाते के माध्यम से ही मजदूरी का भुगतान करेगा।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 2 और 3
यह प्रश्न भारत में आकस्मिक श्रमिकों पर लागू श्रम कानूनों और अधिकारों के ज्ञान का परीक्षण करता है। कथन 1 गलत है क्योंकि ईपीएफ कवरेज सभी आकस्मिक श्रमिकों के लिए स्वचालित नहीं है, जबकि कथन 2 और 3 सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों और मजदूरी भुगतान विनियमों के आधार पर सही हैं।
❌ कथन 1 – गलत: सभी आकस्मिक श्रमिक स्वचालित रूप से कर्मचारी भविष्य निधि कवरेज के हकदार नहीं हैं। ईपीएफ कवरेज 20 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होता है, और आकस्मिक श्रमिकों को नियमितीकरण और ईपीएफ लाभों के लिए अर्हता प्राप्त करने हेतु निरंतर सेवा (एक वर्ष में कम से कम 240 दिन या 5-दिवसीय सप्ताह कार्यालयों के लिए 206 दिन) प्रदान करनी होगी।
✅ कथन 2 – सही: सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि आकस्मिक श्रमिक नियमित कार्य घंटे और ओवरटाइम भुगतान के हकदार हैं क्योंकि वे ईपीएफ अधिनियम सहित विभिन्न श्रम कानूनों के तहत 'कर्मचारी' की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं, जो कर्मचारियों को व्यापक रूप से प्रतिष्ठान के कार्य में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगे लोगों को शामिल करने के लिए परिभाषित करता है।
✅ कथन 3 – सही: मजदूरी भुगतान अधिनियम और संबंधित विनियमों के तहत, सरकार अधिसूचनाएं जारी कर सकती है जिनमें यह अनिवार्य किया जा सकता है कि विशिष्ट प्रतिष्ठानों या उद्योगों को पारदर्शिता सुनिश्चित करने और शोषण को रोकने के लिए केवल बैंक खातों के माध्यम से ही मजदूरी का भुगतान करना होगा।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में आकस्मिक श्रमिकों के अधिकार
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| ईपीएफ कवरेज | 20+ कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू; आकस्मिक श्रमिकों को नियमितीकरण और ईपीएफ लाभों के लिए 240 दिन (5-दिवसीय सप्ताह के लिए 206) की निरंतर सेवा की आवश्यकता है |
| कार्य घंटे और ओवरटाइम | आकस्मिक श्रमिक श्रम कानूनों के अनुसार सामान्य कार्य घंटे और ओवरटाइम भुगतान के हकदार हैं; सर्वोच्च न्यायालय ने 'कर्मचारी' के रूप में उनकी स्थिति की पुष्टि की है |
| मजदूरी भुगतान | सरकार पारदर्शिता के लिए मजदूरी भुगतान अधिनियम के तहत बैंक खातों के माध्यम से भुगतान को अनिवार्य कर सकती है |
| नियमितीकरण योजना | आकस्मिक श्रमिक (अस्थायी दर्जा प्रदान करना और नियमितीकरण) योजना, 1993 अस्थायी दर्जा और अंततः नियमितीकरण का प्रावधान करती है |
| कर्मचारी की परिभाषा | ईपीएफ अधिनियम की धारा 2(f) 'कर्मचारी' को व्यापक रूप से परिभाषित करती है जिसमें प्रतिष्ठान के कार्य में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगे लोग शामिल हैं |
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत किए गए प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- केवल 'गरीबी रेखा से नीचे (BPL)' की श्रेणी में आने वाले परिवार ही सब्सिडी वाले अनाज प्राप्त करने के पात्र हैं।
- राशन कार्ड जारी करने के उद्देश्य से परिवार की सबसे बड़ी महिला, जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो, परिवार की मुखिया होगी।
- गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद छह महीने तक प्रतिदिन 1600 कैलोरी का 'घर ले जाने वाला राशन' प्राप्त करने की हकदार हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 का उद्देश्य भारत की लगभग 67% आबादी को सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्रदान करना है, न कि केवल BPL परिवारों को। अधिनियम में यह अनिवार्य है कि परिवार की सबसे बड़ी महिला जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो, राशन कार्ड जारी करने के लिए परिवार की मुखिया मानी जाएगी। हालांकि, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताएं 600 कैलोरी (1600 नहीं) प्रतिदिन के घर ले जाने वाले राशन के साथ कम से कम 6,000 रुपये के मातृत्व लाभ की हकदार हैं।
❌ कथन 1 – गलत: NFSA लगभग 67% आबादी (75% ग्रामीण और 50% शहरी) को कवर करता है, जिसकी पहचान SECC पद्धति से की जाती है, न कि केवल BPL परिवारों को। लाभार्थियों में प्राथमिकता परिवार और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार दोनों शामिल हैं।
✅ कथन 2 – सही: NFSA की धारा 3(5) में यह अनिवार्य है कि परिवार की सबसे बड़ी महिला जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो, राशन कार्ड जारी करने के लिए परिवार की मुखिया होगी, जो खाद्य सुरक्षा में महिला सशक्तिकरण सुनिश्चित करता है।
❌ कथन 3 – गलत: NFSA की धारा 4 के तहत, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद छह महीने तक प्रतिदिन 600 कैलोरी (1600 नहीं) का घर ले जाने वाला राशन और कम से कम 6,000 रुपये के मातृत्व लाभ की हकदार हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| कवरेज | ग्रामीण आबादी का 75% तक और शहरी आबादी का 50% (कुल मिलाकर लगभग 67%) |
| खाद्यान्न आवंटन | प्राथमिकता परिवार: 5 किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह; AAY: 35 किलो प्रति परिवार प्रति माह |
| मूल्य | चावल: 3 रुपये/किलो, गेहूं: 2 रुपये/किलो, मोटे अनाज: 1 रुपये/किलो |
| मातृत्व अधिकार | 600 कैलोरी घर ले जाने वाला राशन + 6 महीने के लिए 6,000 रुपये मातृत्व लाभ |
| परिवार मुखिया | सबसे बड़ी महिला जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो |
| शिकायत निवारण | जिला और राज्य स्तरीय तंत्र; राज्य खाद्य आयोग |
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वैश्विक भुखमरी सूचकांक रिपोर्ट की गणना करने के लिए IFPRI द्वारा निम्नलिखित में से कौन सा/से संकेतक उपयोग किया/किए जाता/जाते है/हैं?
- अल्पपोषण
- बाल स्टंटिंग
- बाल मृत्यु दर
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI) की गणना चार संकेतकों का उपयोग करके की जाती है जो बहुआयामी भुखमरी को मापते हैं: अल्पपोषण (अपर्याप्त कैलोरी सेवन वाली जनसंख्या का हिस्सा), बाल स्टंटिंग (5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे जिनकी ऊंचाई उम्र के अनुसार कम है, दीर्घकालिक अल्पपोषण को दर्शाता है), बाल वेस्टिंग (5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे जिनका वजन ऊंचाई के अनुसार कम है, तीव्र अल्पपोषण को दर्शाता है), और बाल मृत्यु दर (पांचवें जन्मदिन से पहले मृत्यु)।
प्रश्न तीन संकेतकों के बारे में पूछता है — अल्ププोषण, बाल स्टंटिंग, और बाल मृत्यु दर — ये सभी IFPRI द्वारा (अब Concern Worldwide और Welthungerhilfe द्वारा प्रकाशित) GHI गणना में उपयोग किए जाते हैं, इसलिए तीनों कथन सही हैं।