राज्यसभा को लोकसभा के साथ समान शक्तियाँ प्राप्त हैं:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — संविधान में संशोधन करने में
राज्यसभा और लोकसभा को अनुच्छेद 368 के तहत संवैधानिक संशोधनों के मामले में समान शक्तियाँ प्राप्त हैं। किसी भी संवैधानिक संशोधन के वैध होने के लिए, इसे संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (कुल सदस्यता के बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई) से पारित होना आवश्यक है। इसके विपरीत, राज्यसभा की अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन (केवल अनुशंसात्मक भूमिका), सरकार को हटाने (केवल लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर सकती है), और कटौती प्रस्ताव पारित करने (विशेष रूप से धन मामलों पर लोकसभा का विशेषाधिकार) के मामलों में सीमित या कोई शक्तियाँ नहीं हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राज्यसभा बनाम लोकसभा की शक्तियाँ
| मामला | राज्यसभा की शक्तियाँ | लोकसभा की शक्तियाँ |
|---|---|---|
| संवैधानिक संशोधन (अनुच्छेद 368) | समान शक्तियाँ - विशेष बहुमत से पारित होना आवश्यक | समान शक्तियाँ - विशेष बहुमत से पारित होना आवश्यक |
| धन विधेयक (अनुच्छेद 109) | केवल संशोधन की अनुशंसा कर सकती है (14 दिन); लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है | प्रस्तुत करने की विशेष शक्ति; अंतिम अधिकार |
| सरकार को हटाना (अविश्वास प्रस्ताव) | अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं कर सकती | अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत और पारित कर सकती है |
| कटौती प्रस्ताव (बजट) | कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं कर सकती | कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत करने का विशेष अधिकार |
| अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन (अनुच्छेद 312) | सृजन के समर्थन में 2/3 बहुमत से संकल्प पारित करना आवश्यक | तत्पश्चात संसद कानून द्वारा सेवा का सृजन करती है |
| राष्ट्रपति का महाभियोग | समान शक्तियाँ - विशेष बहुमत से पारित होना आवश्यक | समान शक्तियाँ - कोई भी सदन शुरुआत कर सकता है |
| साधारण विधेयक | समान शक्तियाँ (धन विधेयक को छोड़कर) | समान शक्तियाँ (धन विधेयक को छोड़कर) |
Question 1 of 3 राज्यसभा
Practice PYQ questions from this topic across all years
First question in this topic
भारत के संविधान द्वारा राज्यसभा को निम्नलिखित में से कौन-सी विशेष शक्तियाँ प्रदान की...