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खनिज संसाधन Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for खनिज संसाधन with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- मोनाजाइट दुर्लभ मृदा तत्वों का एक स्रोत है।
- मोनाजाइट में थोरियम होता है।
- मोनाजाइट भारत में संपूर्ण भारतीय तटीय बालू में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।
- भारत में, केवल सरकारी निकाय ही मोनाजाइट का प्रसंस्करण या निर्यात कर सकते हैं।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1, 2 और 4
मोनाजाइट एक रेडियोधर्मी खनिज है जो दुर्लभ मृदा तत्वों और थोरियम के प्रमुख स्रोत के रूप में कार्य करता है। भारत में, इसके प्रसंस्करण और निर्यात को इसके रणनीतिक महत्व और रेडियोधर्मी प्रकृति के कारण सरकारी निकायों द्वारा सख्ती से विनियमित किया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि मोनाजाइट संपूर्ण भारतीय तटीय क्षेत्र में नहीं पाया जाता बल्कि विशिष्ट क्षेत्रों में केंद्रित है।
✅ कथन 1 – सही: मोनाजाइट सीरियम, लैंथेनम, नियोडिमियम और प्रेसियोडिमियम जैसे दुर्लभ मृदा तत्वों का प्राथमिक स्रोत है।
✅ कथन 2 – सही: मोनाजाइट में थोरियम की महत्वपूर्ण मात्रा होती है, जो इसे परमाणु ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज बनाती है।
❌ कथन 3 – गलत: मोनाजाइट भंडार संपूर्ण भारतीय तट पर नहीं पाए जाते; प्रमुख भंडार केरल, तमिलनाडु और ओडिशा में केंद्रित हैं।
✅ कथन 4 – सही: इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (IREL), परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन भारत सरकार का सार्वजनिक उपक्रम, परमाणु ऊर्जा अधिनियम के तहत मोनाजाइट के प्रसंस्करण और निर्यात के लिए एकमात्र अधिकृत इकाई है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में मोनाजाइट
- संरचना: भूरे रंग का क्रिस्टलीय खनिज जिसमें सीरियम, लैंथेनम, थोरियम और अन्य दुर्लभ मृदा तत्व होते हैं
- उपस्थिति: तटीय बालू में प्लेसर निक्षेपों में पाया जाता है; मुख्य भंडार केरल (चावरा, मानावलकुरिची), तमिलनाडु और ओडिशा में
- आर्थिक महत्व: पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रिक वाहन और रोबोटिक्स के लिए उच्च-प्रदर्शन चुंबकों में उपयोग किए जाने वाले दुर्लभ मृदा तत्वों का स्रोत
- रणनीतिक महत्व: थोरियम (8-10%) युक्त, भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण
- नियामक ढांचा: परमाणु ऊर्जा अधिनियम और परमाणु ऊर्जा (विकिरण संरक्षण) नियम 2004 द्वारा शासित; निर्यात के लिए AERB लाइसेंस आवश्यक
- प्रसंस्करण इकाई: इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (IREL) मोनाजाइट निष्कर्षण, प्रसंस्करण और निर्यात के लिए एकमात्र सरकारी अधिकृत निकाय है
दो गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों 'कोल बेड मीथेन' और 'शेल गैस' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कोल बेड मीथेन कोयला सीमों से निकाली गई शुद्ध मीथेन गैस है, जबकि शेल गैस केवल प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है जिसे बारीक दाने वाली अवसादी चट्टानों से निकाला जा सकता है।
- भारत में प्रचुर मात्रा में कोल बेड मीथेन स्रोत मौजूद हैं, लेकिन अब तक कोई शेल गैस स्रोत नहीं मिले हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: कोल बेड मीथेन वास्तव में कोयला सीमों से निकाली गई शुद्ध मीथेन गैस है, लेकिन शेल गैस मुख्य रूप से मीथेन (केवल प्रोपेन और ब्यूटेन नहीं) है जो बारीक दाने वाली अवसादी शेल चट्टानों से निकाली जाती है।
❌ कथन 2 – गलत: भारत में झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्रों में प्रचुर कोल बेड मीथेन स्रोत हैं और कैम्बे, कृष्णा-गोदावरी और कावेरी बेसिनों में शेल गैस स्रोत भी पहचाने गए हैं, हालांकि उनका दोहन प्रारंभिक अवस्था में है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- गोंडवाना शैल समूहों में प्राकृतिक गैस पाई जाती है।
- कोडरमा में अभ्रक प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
- धारवाड़ क्षेत्र पेट्रोलियम के लिए प्रसिद्ध हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – गलत: गोंडवाना शैल समूह मुख्यतः कोयला-युक्त संरचनाएं हैं जो कार्बोनिफेरस से जुरासिक काल में बनीं; भारत में प्राकृतिक गैस तृतीयक अवसादी चट्टानों में असम, गुजरात और अपतटीय मुंबई हाई में पाई जाती है, गोंडवाना शैलों में नहीं।
✅ कथन 2 – सही: झारखंड का कोडरमा जिला "भारत की अभ्रक राजधानी" के रूप में जाना जाता है और यहां उच्च गुणवत्ता वाले रूबी अभ्रक (मस्कोवाइट) के प्रचुर भंडार हैं।
✅ कथन 3 – गलत: धारवाड़ शैल कर्नाटक में स्थित प्राचीन प्रीकैम्ब्रियन कायांतरित संरचनाएं हैं जो स्वर्ण, लौह अयस्क और मैंगनीज से समृद्ध हैं; पेट्रोलियम नवीन अवसादी बेसिनों में पाया जाता है, कायांतरित धारवाड़ संरचनाओं में नहीं।
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निम्नलिखित में से कौन सी भारतीय कोयले की विशेषता/विशेषताएं है/हैं?
- उच्च राख सामग्री
- निम्न सल्फर सामग्री
- निम्न राख संलयन तापमान
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: भारतीय कोयले में उच्च राख सामग्री (35-45%) होती है, जो वैश्विक औसत ~15% से काफी अधिक है, जो इसकी प्रमुख विशेषता है।
✅ कथन 2 – सही: भारतीय कोयले में निम्न सल्फर सामग्री (~0.5%) होती है, जो कई अंतर्राष्ट्रीय कोयलों की तुलना में पर्यावरणीय दृष्टि से लाभदायक है।
❌ कथन 3 – गलत: भारतीय कोयले का राख संलयन तापमान उच्च (~1,500°C) होता है, निम्न नहीं, जिससे यह IGCC संयंत्रों में प्रवेश गैसीकारकों के लिए अनुपयुक्त है।
हाल ही में, 'दुर्लभ मृदा धातुओं' (rare earth metals) नामक तत्वों के समूह की कम आपूर्ति को लेकर चिंता रही है। क्यों?
- चीन, जो इन तत्वों का सबसे बड़ा उत्पादक है, ने इनके निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं
- चीन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और चिली के अलावा, ये तत्व किसी भी देश में नहीं पाए जाते हैं
- दुर्लभ मृदा धातुएं विभिन्न प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्माण के लिए आवश्यक हैं और इन तत्वों की बढ़ती मांग है
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: चीन सबसे बड़ा उत्पादक है (वैश्विक उत्पादन का ~70% नियंत्रित करता है) और उसने दुर्लभ मृदा धातुओं पर निर्यात प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में चिंता है।
❌ कथन 2 – गलत: दुर्लभ मृदा धातुएं कई देशों में पाई जाती हैं जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, ब्राजील, वियतनाम, रूस, और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, न कि केवल चीन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, और चिली में।
✅ कथन 3 – सही: दुर्लभ मृदा धातुएं स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन टरबाइन, LED स्क्रीन, रक्षा उपकरण, और अन्य उच्च-तकनीक इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण के लिए आवश्यक हैं, जिनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
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