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प्राचीन भारतीय अर्थव्यवस्था Previous Year Questions (PYQs)
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'अरघट्टा' नामक सिंचाई उपकरण था
Detailed Explanation:
अरघट्ट = एक प्राचीन जल उठाने वाला पहिया उपकरण। इसमें एक बड़ा पहिया होता है जिसकी तीलियों पर मिट्टी के बर्तन बंधे होते हैं। जब पहिया घूमता है (जानवरों या मानव शक्ति से), बर्तन पानी में डूबते हैं, भरते हैं, ऊपर आते हैं और पानी डालते हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों:
| विकल्प | वर्णन | अरघट्ट क्यों नहीं |
|---|---|---|
| 1 | चमड़े का थैला + पुली | अलग उपकरण (साधारण उठाने की प्रणाली) |
| 3 | बड़ा बर्तन + बैल | केवल एक कंटेनर, पहिया तंत्र नहीं |
| 4 | हाथ से खींची बाल्टी | मैनुअल, पहिया तंत्र नहीं |
प्राचीन सिंचाई उपकरण
| उपकरण | विवरण |
|---|---|
| अरघट्ट | तीलियों पर मिट्टी के बर्तन वाला बड़ा पहिया; यांत्रिक रूप से पानी उठाता है |
| पिकोट्टा/शैडूफ | लीवर आधारित उपकरण |
| चरस/मोट | बैलों द्वारा पुली से खींचा चमड़े का थैला |
संदर्भ:
- प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय ग्रंथों में उल्लेखित
- बाद में मध्यकाल में "फारसी चक्र" भी कहा गया
- भारत में यांत्रिक सिंचाई तकनीक का प्रारंभिक रूप
प्राचीन भारत की गिल्डों (श्रेणी) के संदर्भ में, जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- प्रत्येक गिल्ड राज्य के केंद्रीय प्राधिकरण के साथ पंजीकृत थी और राजा उन पर मुख्य प्रशासनिक प्राधिकारी था।
- मजदूरी, कार्य के नियम, मानक और मूल्य गिल्ड द्वारा निर्धारित किए जाते थे।
- गिल्ड के पास अपने सदस्यों पर न्यायिक शक्तियाँ थीं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: गिल्डें (श्रेणियाँ) स्वायत्त निकाय थीं जिनका नेतृत्व प्रमुख (जेट्ठक/प्रमुख) करते थे, केंद्रीय प्राधिकरण के साथ पंजीकृत नहीं थीं और न ही राजा द्वारा सीधे प्रशासित थीं।
✅ कथन 2 – सही: गिल्डें मजदूरी, कार्य नियम, गुणवत्ता मानक और मूल्य निर्धारित करती थीं ताकि अपने संबंधित व्यापारों को नियंत्रित कर सकें और बाजार स्थिरता बनाए रख सकें।
✅ कथन 3 – सही: गिल्डों के पास सदस्यों पर न्यायिक शक्तियाँ थीं, वे श्रेणी-धर्म (प्रथागत गिल्ड कानून) के अनुसार विवादों का निपटारा करती थीं जिन्हें राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त थी।
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