भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- डीमैट खाते के माध्यम से खुदरा निवेशक प्राथमिक बाजार में 'ट्रेजरी बिल' और 'भारत सरकार के ऋण बांडों' में निवेश कर सकते हैं।
- भारतीय रिजर्व बैंक का 'नेगोशिएटेड डीलिंग सिस्टम-ऑर्डर मैचिंग' सरकारी प्रतिभूति व्यापार मंच है।
- 'सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड' को भारतीय रिजर्व बैंक और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज द्वारा संयुक्त रूप से प्रवर्तित किया गया है।
नीचे दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — 1 और 2
कथन 1 और 2 सही हैं क्योंकि वे खुदरा निवेशकों के लिए आरबीआई रिटेल डायरेक्ट योजना और सरकारी प्रतिभूति व्यापार के लिए एनडीएस-ओएम प्लेटफॉर्म का सटीक वर्णन करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि सीडीएसएल को बीएसई द्वारा वाणिज्यिक बैंकों के साथ प्रवर्तित किया गया था, आरबीआई द्वारा नहीं।
✅ कथन 1 – सही: नवंबर 2021 में शुरू की गई आरबीआई रिटेल डायरेक्ट योजना के तहत, खुदरा निवेशक अपने डीमैट खाते के माध्यम से या रिटेल डायरेक्ट गिल्ट (आरडीजी) खाता खोलकर प्राथमिक बाजार में ट्रेजरी बिल और भारत सरकार के ऋण बांडों में निवेश कर सकते हैं।
✅ कथन 2 – सही: नेगोशिएटेड डीलिंग सिस्टम-ऑर्डर मैचिंग (एनडीएस-ओएम) सरकारी प्रतिभूतियों के लिए एक अनाम, इलेक्ट्रॉनिक, स्क्रीन-आधारित व्यापार मंच है जो भारतीय रिजर्व बैंक के स्वामित्व में है और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल) द्वारा संचालित है।
❌ कथन 3 – गलत: सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) द्वारा भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक जैसे प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों के साथ मिलकर प्रवर्तित किया गया था, आरबीआई द्वारा नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सरकारी प्रतिभूति बाजार अवसंरचना
- आरबीआई रिटेल डायरेक्ट योजना: नवंबर 2021 में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सरकारी प्रतिभूति बाजारों में प्रत्यक्ष खुदरा भागीदारी सक्षम करने के लिए शुरू की गई।
- एनडीएस-ओएम प्लेटफॉर्म: 2005 से संचालित जी-सेक के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म; प्राथमिक डीलरों, बैंकों और अन्य पात्र प्रतिभागियों के लिए अनाम ऑर्डर मिलान प्रदान करता है।
- भारत में केंद्रीय डिपॉजिटरी: दो डिपॉजिटरी - एनएसडीएल (एनएसई, आईडीबीआई बैंक और यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा प्रवर्तित) और सीडीएसएल (बीएसई द्वारा वाणिज्यिक बैंकों के साथ प्रवर्तित)।
- ट्रेजरी बिल: 91 दिन, 182 दिन और 364 दिनों की परिपक्वता वाली अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियां; छूट पर जारी की जाती हैं और अंकित मूल्य पर भुनाई जाती हैं।
- भारत सरकार के बांड: केंद्र सरकार द्वारा जारी दीर्घकालिक ऋण साधन जिनकी परिपक्वता 5 से 40 वर्ष तक होती है।
Question 8 of 10 बॉण्ड एवं प्रतिभूतियाँ
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