प्राचीन भारत में निम्नलिखित शासकों में से किसने 'मत्तविलास', 'विचित्राचित्त' और 'गुणभारा' की उपाधियाँ धारण की थीं?
Detailed Explanation:
✅ महेंद्रवर्मन प्रथम पल्लव वंश के प्रसिद्ध शासक थे, जो कला, साहित्य और स्थापत्य के संरक्षक माने जाते हैं।
उन्होंने ‘मत्तविलास’, ‘विचित्रचित्त’ और ‘गुणभारा’ जैसी उपाधियाँ धारण की थीं। उन्होंने ‘मत्तविलास प्रहसन’ नामक संस्कृत नाटक की भी रचना की थी।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| सिंहविष्णु | पल्लव शासक थे, लेकिन इन उपाधियों से नहीं जाने जाते थे। |
| नरसिंहवर्मन प्रथम | पुलकेशिन द्वितीय को हराने के लिए प्रसिद्ध थे, पर इन उपाधियों से नहीं जुड़े हैं। |
| सिंहवर्मन | प्रारम्भिक पल्लव शासक थे, इन उपाधियों से प्रसिद्ध नहीं थे। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: महेंद्रवर्मन प्रथम
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| वंश | पल्लव |
| काल | 7वीं शताब्दी ईस्वी |
| राजधानी | कांचीपुरम |
| प्रमुख उपाधियाँ | मत्तविलास, विचित्रचित्त, गुणभारा |
| रचना | मत्तविलास प्रहसन |
| योगदान | शैलकृत (Rock-cut) मंदिर वास्तुकला को बढ़ावा दिया |
त्वरित तथ्य:
दक्षिण भारत में शैलकृत मंदिर स्थापत्य की शुरुआत महेंद्रवर्मन प्रथम के समय से मानी जाती है।
Question 1 of 1 पल्लव
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