निम्नलिखित में से कौन सा वाक्यांश 'हुंडी' की प्रकृति को परिभाषित करता है, जिसका सामान्यतः हर्ष-पश्चात काल के स्रोतों में उल्लेख किया गया है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — विनिमय पत्र (बिल ऑफ एक्सचेंज)
हर्ष-पश्चात काल में हुंडी एक परक्राम्य वित्तीय साधन था जिसका व्यापक रूप से व्यापारियों द्वारा व्यापार और ऋण लेनदेन के लिए उपयोग किया जाता था। यह एक विनिमय पत्र के रूप में कार्य करता था, जिसमें एक पक्ष दूसरे पक्ष को एक निर्धारित राशि तीसरे पक्ष को तुरंत या भविष्य की तारीख में भुगतान करने के लिए लिखित आदेश जारी करता था। इस प्रणाली ने बड़ी मात्रा में मुद्रा को भौतिक रूप से परिवहन की आवश्यकता के बिना लंबी दूरी के व्यापार को सुविधाजनक बनाया, जिससे यह अधिक सुरक्षित और कुशल हो गया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मध्यकालीन भारत में हुंडी प्रणाली
- परिभाषा: हुंडी मध्यकालीन भारत में व्यापार और धन हस्तांतरण के लिए एक वित्तीय साधन के रूप में उपयोग किया जाने वाला एक स्वदेशी विनिमय पत्र था।
- कार्य: यह एक व्यापारी (आहर्ता) से दूसरे (आदेशिती) को एक निर्धारित राशि तीसरे पक्ष (आदाता) को भुगतान करने का लिखित आदेश था, जो नकद रहित लेनदेन को सुविधाजनक बनाता था।
- प्रकार: विभिन्न प्रकार थे जिनमें दर्शनी (दृष्टि पर देय), मुद्दती (निर्दिष्ट अवधि के बाद देय), और शाहजोग (सम्मानित/विश्वसनीय व्यक्ति को देय) शामिल थे।
- उपयोग: व्यापारी समुदायों (जैसे मारवाड़ी, गुजराती) द्वारा प्रेषण, व्यापार वित्तपोषण और लंबी दूरी पर ऋण लेनदेन के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता था।
- लाभ: भौतिक नकदी ले जाने के जोखिम को समाप्त किया, लेनदेन लागत को कम किया, और व्यापारियों को ऋण सुविधाएं प्रदान कीं।
- ऐतिहासिक निरंतरता: हुंडी प्रणाली प्राचीन काल से विकसित हुई और औपनिवेशिक काल तक जारी रही, जो भारतीय वाणिज्यिक प्रथाओं की परिष्कृतता को प्रदर्शित करती है।
Question 1 of 1 व्यापार एवं वाणिज्य
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