भारतीय संविधान के अंतर्गत, धन का संकेन्द्रण किसका उल्लंघन करता है:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — राज्य की नीति के निदेशक तत्व
धन का संकेन्द्रण राज्य की नीति के निदेशक तत्वों का उल्लंघन करता है, विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 39(ख) और 39(ग) का। अनुच्छेद 39(ख) राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि समुदाय के भौतिक संसाधनों के स्वामित्व और नियंत्रण का वितरण इस प्रकार हो कि वह सामान्य हित को सर्वोत्तम रूप से पूरा करे, जबकि अनुच्छेद 39(ग) यह अनिवार्य करता है कि आर्थिक व्यवस्था का संचालन इस प्रकार न हो कि धन और उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण हो। ये प्रावधान आर्थिक असमानता को रोकने और वितरणात्मक न्याय सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक आधार बनाते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राज्य की नीति के निदेशक तत्व (DPSP) - आर्थिक न्याय
- अनुच्छेद 39(ख): राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि भौतिक संसाधनों के स्वामित्व और नियंत्रण का वितरण सामान्य हित को पूरा करे और कुछ हाथों में संकेन्द्रण को रोके।
- अनुच्छेद 39(ग): सुनिश्चित करता है कि आर्थिक व्यवस्था से धन और उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के अहित में संकेन्द्रण न हो।
- अनुच्छेद 38: राज्य सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय से ओतप्रोत सामाजिक व्यवस्था को सुरक्षित करके लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने और असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा।
- अनुच्छेद 39क: समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण न्याय के अवसर न छिनें।
- प्रकृति: DPSP न्यायोचित नहीं हैं (न्यायालयों द्वारा लागू नहीं किये जा सकते) लेकिन अनुच्छेद 37 के अनुसार शासन में मौलिक हैं।
- उद्देश्य: आर्थिक लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना।
Question 1 of 4 समाजवादी सिद्धांत
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भारतीय संविधान का कौन सा भाग कल्याणकारी राज्य के आदर्श की घोषणा करता है?